हनोई - दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा है। कहा है कि संबद्ध पांच देश चाहें तो वह विवाद के समाधान के लिए बिचौलिये का काम कर सकते हैं। दक्षिण चीन सागर का क्षेत्र दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गो में से एक है। पड़ोसी देशों के दावे को खारिज करते हुए चीन पूरे क्षेत्र पर अपना दावा जता रहा है।
दावे को पुख्ता स्वरूप देने के लिए चीन ने वहां पर कृत्रिम द्वीप बना लिए हैं और उन पर सैन्य तैनाती भी कर दी है। अभी तक अमेरिका खुलकर सागर क्षेत्र पर चीन के कब्जे का विरोध कर रहा था लेकिन अब वह स्वर नरम करके मध्यस्थता की बात कह रहा है।
ट्रंप ने यह बात वियतनाम में कही है जो दक्षिण चीन सागर पर चीन के कब्जे का सबसे मुखर विरोधी है। ट्रंप आसियान देशों की बैठक में भाग लेने के लिए यहां से फिलीपींस जाएंगे, जो दक्षिण चीन सागर पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चीन से मुकदमा जीत चुका है, लेकिन चीन न्यायालय के फैसले को मान नहीं रहा। ट्रंप ने यह बात तब कही है, जब चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी हनोई में हैं।
जवाब में वियतनाम के राष्ट्रपति त्रान दाई क्वांग ने कहा कि वह चाहते हैं कि दक्षिण चीन सागर विवाद सुलझे। लेकिन यह समाधान शांतिपूर्ण तरीकों और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक हो। वियतनाम और फिलीपींस के अतिरिक्त ब्रूनेई, मलेशिया और ताइवान भी दक्षिण चीन सागर दावा जताते हैं। चीन ने हाल ही में समुद्री क्षेत्र में फिलीपींस का काम रुकवा दिया है जबकि जुलाई में उसने समुद्र से वियतनाम के तेल निकासी संयंत्र को बंद करा दिया था।
चुनाव में हस्तक्षेप न करने का पुतिन का दावा सही
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनसे कहा है कि 2016 में अमेरिका में हुए चुनाव में उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया। पुतिन के इस कथन पर उन्हें भरोसा है। इस मामले पर अमेरिकी एजेंसियां जांच में लगी हैं। ट्रंप ने सीरिया मसले पर जल्द ही अमेरिका और रूस की ओर से संयुक्त बयान आने की बात कही। कहा, इससे सीरिया में सात साल से जारी हिंसा खत्म होगी। ट्रंप और पुतिन ने सीरिया में समस्या के शांतिपूर्ण समाधान पर सहमति जताई है।

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