नई दिल्‍ली - 14 अप्रैल का दिन समुद्र की सबसे बड़ी आपदा के लिए याद किया जाता है। वर्ष 1912 में इसी दिन टाइटैनिक जहाज बर्फ की चट्टान से टकराकर हादसे का शिकार हुआ था। इस हादसे में 1522 लोगों की मौत हो गई थी। टाइटैनिक उस दौर में विलासिता का दूसरा नाम था। इस पर सफर करना एक सपने को उड़ान देने जैसा था। 10 अप्रैल 1912 को यह अपने पहले सफर के लिए साउथप्‍टन से न्‍यूयार्क के लिए निकला था। उस वक्‍त इस पर करीब 2223 लोग सवार थे। इस पर यात्रियों की सुख-सुविधा का पूरा इंतजाम था। यही वजह थी कि इंग्‍लैंड और अमेरिका के जाने-माने बिजनेसमेन इस जहाज से सफर कर रहे थे। खुद जहाज के मालिक इसके पहले सफर के गवाह के रूप में इस पर सवार थे। तीन दिन इसके यात्रियों ने इसकी सुख सुविधाओं का पूरा लुत्फ उठाया। लेकिन 14 अप्रैल उनके लिए मनहूसित भरा था। अटलांटिक में अपने सफर को जारी रखते हुए यह जहाज लगातार आगे बढ़ रहा था। लेकिन इसी दौरान एक बड़ा हिमखंड इस जहाज से टकरा गया जिससे विमान में गहरी दरार बन गई थी।
दो हिस्‍सों में बंटा जहाज
इस पानी के दबाव से यह दरार और बढ़ गईं और देखते ही देखते जहाज में पानी भरना शुरू हो गया और यह दो हिस्सों में बंट गया। इस जहाज पर इतनी लाइफ बोट नहीं थी कि सभी यात्रियों को उनसे सुरक्षित बचाया जा सके। डूबते जहाज ने बचाव के लिए कई सिग्‍नल भी दिए लेकिन तत्‍काल कोई राहत नहीं मिल सकी थी। एक दिन बाद वहां से गुजर रहे कारपेथिया ने कुछ लोगों को जरूर बचा लिया था। इस हादसे में जो लोग बचे उनके लिए यह दूसरा जीवन मिलने जैसा ही था। टाइटैनिक के डूबने का मुख्य कारण इसका अत्यधिक गति से चलना था। जहाज के मालिक जे ब्रुस इसमे ने जहाज के कप्तान एडवर्ड स्मिथ को जहाज आदेश दिया था कि इसे पूरी रफ्तार से चलाया जाए।
आखिर कैसे डूबा था टाइटैनिक
14 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक को 6 बर्फ की चट्टानों की चेतावनिया मिली थी। कप्तान को लगा की बर्फ की चट्टान आने पर जहाज मुड जाएगा। लेकिन उनकी सोच यहां पर गलत साबित हुई। इसकी वजह थी कि जहाज काफी बड़ा था। इसको मोड़ने के लिए भी काफी दूरी चाहिए थी। जब तक चट्टान की जानकारी हुई और इसको मोड़ने का आदेश हुआ उस वक्‍त तक यह जहाज उस हिमखंड से टकरा चुका था। उस वक्‍त रात के 11:40 बज रहे थे जब जहाज ने डूबना शुरू किया था। रात के करीब 2:20 पर यह पूरी तरह से दो भागों में बंटकर समुद्र में समां गया। उस वक्‍त अटलांटिक के पानी का तापमान -2℃ था। ऐसे बर्फीले पानी में इंसान ज्‍यादा से ज्‍यादा 20 मिनट तक जिंदा रह सकता था। टाइटैनिक उस समय के सबसे अनुभवी इंजीनियरों के द्वारा डिजाइन किया गया था और इसके निर्माण में उस समय में उपलब्ध सबसे उन्नत तकनीकी का इस्तेमाल किया गया था। इसका अचानक से डूबना पूरी दुनिया के लिए किसी सदमे से कम नहीं था। 1985 में टाइटैनिक का शोर एक बार फिर तब सुनने को मिला जब गहरे समुद्र में इसकी खोज की गई। उस वक्‍त यह जहाज 3800 मीटर की गहराई में मिला था।
क्‍या है नया दावा
टाइटैनिक के डूबने की वजह पहले जो भी बताई जाती रही हो लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके डूबने के पीछे सबसे बड़ा कारण चांद का था। खगोलविदों के मुताबिक इस हादसे का सबसे बड़ा कारण धरती का चंद्रमा के करीब आना था जो 1400 वर्षों में एक बार होता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी वजह से 12 जनवरी 1912 को समुद्री में ऊंची लहर उठी थी, जिसके कारण बर्फ की एक घातक चट्टान कमजोर पड़कर लेब्राडोर और न्यूफाउलैंड के तटों के उथले पानी से अलग हो गई थी। बाद में उसकी चपेट में आने से 14 अप्रैल 1912 को टाइटेनिक के साथ हादसा हुआ और 1522 लोगों की मौत की वजह बना। वैज्ञानिकों का मत है कि धरती के चंद्रमा के करीब आने की वजह से समुद्र में लहरें पैदा करने की चांद की ताकत अत्यधिक हो गई थी।
टाइटैनिक के कैप्‍टन को लेकर चर्चा
टाइटैनिक के डूबने को लेकर वर्ष 2012 में एक और बात निकलकर सामने आई थी। टाइटैनिक पर सवार एक चश्मदीद गवाह ऐमिली रिच‌र्ड्स ने इस विनाशकारी हादसे के लिए कप्तान स्मिथ को दोषी ठहराया था। उनका कहना था कि हादसा होने से कई घंटे पहले से ही जहाज के कप्‍तान शराब पीने में व्‍यस्‍त थे। उन्‍हें जहाज की कोई चिंता ही नहीं थी। टाइटैनिक के डूबने के दो दिन बाद कारपैथिया जहाज पर सवार ऐमिली ने अपने घर लिखे पत्र में यह बात कही थी। घटना के समय 24 साल की रही ऐमिली और उनके दो बेटों को लाइफबोटों के सहारे बचाया गया था लेकिन उनका भाई जार्ज हादसे में मारे गए लोगों में शामिल था। अपनी सास को लिखे पत्र में ऐमिली ने कहा था कि रविवार की रात 11 बजे जहाज हिमखंड से टकराया। कप्तान नीचे सैलून में शराब पी रहा था और उसने किसी और को जहाज को संभालने की जिम्मेदारी सौंप दी। उन्होंने लिखा कि यह कप्तान की गलती थी। मेरा बेचारा भाई जार्ज डूब गया।
टाइटैनिक की 3डी मूवी
टाइटैनिक को लेकर अब तक कई फिल्‍में बनाई जा चुकी हैं। लेकिन 1997 में रिलीज हुई टाइटैनिक को कोई नहीं भूला है। इस फिल्‍म ने पूरी दुनिया में जबरदस्‍त कमाई की थी। इसको उस वर्ष कई अवार्ड से भी नवाजा गया था। यह फिल्‍म विभिन्‍न भाषाओं में रिलीज की गई थी। इसके बाद इस फिल्‍म का 3डी संस्करण भी रिलीज किया गया था, जिसने कुछ ही दिनों में करोड़ों बटोर लिए थे।
कीचड़ में अवशेष
समुद्र की गहराई में दफन हुए टाइटैनिक के जुड़े अवशेषों के बारे में अमेरिकी विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तरी अटलांटिक सागर की तलहटी में मौजूद कीचड़ में कुछ इंसानों के अवशेष बचे हो सकते हैं। राष्ट्रीय सामुद्रिक एवं पर्यावरण प्रशासन के निदेशक जेम्स डेलगादो ने कहा कि फारेंसिक जांच में पाया गया है कि समुद्र की कीचड़ में कुछ मानव अवशेष हो सकते हैं। जेम्स डेलगादो की मानें तो 2004 में एक फोटोग्राफर ने जहाज की कीचड़ में किसी इंसान के कोट और जूते की तस्वीरें खींची थीं। इसके अलावा आपको यह भी बता दें कि अब टाइटैनिक को यूनेस्‍को की संरक्षण लिस्‍ट में शामिल कर लिया गया है।
छत्‍तीसगढ़ की एनी भी टाइटैनिक पर सवार
टाइटैनिक पर छत्तीसगढ़ से भी एक महिला बतौर यात्री सवार हुई थी। राज्य के जांजगीर-चंपा शहर की यात्री एनी क्लेमेर फंक उन 1500 यात्रियों में शामिल थीं जो 15 अप्रैल, 1912 को टाइटेनिक के हिमखंड से टकराने की त्रासदी में मारे गए थे। वह अपनी बीमार मां को देखने अमेरिका जा रही थीं। एनी वर्ष 1906 में मिशनरी के रूप में अमेरिका से भारत आई थीं। शहर में मौजूद एक शिलाखंड इस दावे की पुष्टि करता है। एनी जांजगीर-चंपा से मुंबई आई थीं। वहां वह इंग्लैंड जाने के लिए एक जहाज पर सवार हुई। उन्हें साउथैंपटन से अमेरिका जाने के लिए एसएस हैवरफोर्ड नामक जहाज पकड़ना था। कोयला मजदूरों की हड़ताल के कारण यह जहाज नहीं जा सका। उनसे 13 पौंड [करीब 1064 रुपये] में अपना टिकट टाइटैनिक के लिए बदलने का अनुरोध किया गया। एनी ने सेकेंड क्लास का टिकट खरीद लिया जिसका नंबर 237671 था। ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया गमेओ के मुताबिक एनी ने टाइटेनिक पर अपने साथी यात्रियों के साथ अपना 38वां जन्मदिन भी मनाया था।

 

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