वाशिंगटन - अमेरिका ने उम्मीद जताई है कि उत्तर कोरिया अपने वादे पर कायम रहा तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बातचीत होगी। हालांकि उत्तर कोरिया ने शिखर वार्ता को लेकर अब तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।
उत्तर कोरिया की चुप्पी के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने कहा कि हमें शिखर वार्ता होने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'हमसे बातचीत की पेशकश की गई और हमने उसे स्वीकार लिया। उत्तर कोरिया ने कई वादे किए हैं। हमें उम्मीद है कि वह अपने वादे पर कायम रहेगा। अगर ऐसा हुआ तो योजना के अनुसार ट्रंप-किम वार्ता होगी।' इससे पहले दक्षिण कोरिया ने कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया से शिखर वार्ता को लेकर उत्तर की चुप्पी का कारण संभवत: बातचीत की तैयारी को लेकर सतर्कता बरतना है। जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि हम इस बारे में सीधे उत्तर कोरिया से सुनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि स्थान और बातचीत के स्वरूप को लेकर कई जरूरी कदम उठाने होंगे।
फॉक्स न्यूज से बातचीत में अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि मिसाइल और परमाणु परीक्षण न करने की उत्तर कोरिया की पेशकश ट्रंप के सख्त रुख का परिणाम है। जबकि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एचआर मैकास्टर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उत्तर कोरिया संबंधी घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्रंप-किम वार्ता को लेकर हम आशावादी हैं। लेकिन हमें उत्तर कोरिया पर तब तक दबाव बनाए रखना चाहिए जब तक वह अपने वादे को पूरा करे और परमाणु निस्त्रीकरण की दिशा में वास्तविक प्रगति हो।
चीन की संयम की अपील
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ दक्षिण कोरिया और अमेरिका की बातचीत अहम अवसर है। उन्होंने ये बातचीत निर्विघ्न होने की उम्मीद जताई और कहा कि सभी पक्षों को संयम और सतर्कता बरतनी चाहिए। शी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख चुंग यूई-योंग से साथ मुलाकात में यह बात कही। जबकि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबी ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम खत्म करने के अलावा पूर्व में जापानी नागरिकों के अपहरण पर भी बातचीत होनी चाहिए। उत्तर कोरिया के साथ शिखर वार्ता को लेकर दक्षिण के खुफिया प्रमुख सूह हून ने एबी से मुलाकात की।

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