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नई दिल्ली। नई दिल्ली से शनिवार को हज यात्रा का पहला जत्था रवाना हुआ। केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने हज यात्रा को हरी झंडी दिखाई। नकवी ने इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर दी। उन्होंने हज यात्रा के लिए जाते हुए कुछ यात्रियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा- देश की सलामती, सुरक्षा और समृद्धि की दुआओं के साथ आज हज 2018 के लिए दिल्ली से जाने वाले हज यात्रियों के पहले जत्थे को इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के हज टर्मिनल से रवाना किया।नकवी ने आगे लिखा कि आज दिल्ली से कुल 3 फ्लाइट में 1230 हज यात्री रवाना हो रहे हैं। दिल्ली से जाने वालों में जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के हज यात्री भी शामिल हैं। दिल्ली के अलावा आज गया से 450, गुवाहाटी से 269, लखनऊ से 900 और श्रीनगर से 1020 हज यात्री रवाना हो रहे हैं।उन्होंने आगे लिखा कि इस बार अल्पसंख्यक मंत्रालय ने सऊदी अरब हज कांसुलेट, हज कमिटी ऑफ इंडिया एवं अन्य सम्बंधित एजेंसियों के साथ मिल कर भारत एवं सऊदी अरब में हज 2018 की तैयारियां समय से बहुत पहले ही पूरी कर ली थी ताकि हज यात्रा को सरल-सुगम बनाया जा सके।केंद्रीय मंत्री ने आगे लिखा कि 'हज सब्सिडी' खत्म होने और सऊदी अरब में विभिन्न नए करों के बावजूद आजादी के बाद पहली बार भारत से रिकॉर्ड 1 लाख 75 हजार 25 मुसलमान इस वर्ष हज पर जा रहे हैं। इनमे रिकॉर्ड 47% से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं।

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान की सेनाएं रूस में संयुक्त सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने जा रही है। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ)की तरफ से यह युद्धाभ्यास का आयोजन रूसी शहर चेल्याबिंस्क में किया जा रहा है। बता दें कि ये पहली बार है जब भारत और पाकिस्तान की सेनाएं 22 से 29 अगस्त के बीच शंघाई सहयोग संगठन ( एससीओ) के झंडा तले आतंकवाद विरोधी साझा सैनिक अभ्यास में भाग लेंगे।पीस मिशन-2018 के नाम से ज्ञात इस अभ्यास में रूस, पाकिस्तान, चीन, भारत, किर्गिजिस्तान, उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान और कजाकस्तान के तीन हजार से अधिक सैनिक भाग लेंगे। इस अभ्यास में भारतीय थलसेना की 5-राजपूत रेजिमेंट के दो सौ सैनिकों को भेजा जाएगा। आजादी के बाद ऐसा पहली बार होगा जब एक-दूसरे को दुश्मन समझने वाले देशों की सेनाएं आतंकवाद विरोधी साझा सैन्य अभ्यास में अपने सैनिक साथ उतारेंगे। आतंकवाद के खिलाफ इस साझा सैन्य अभ्यास की रूपरेखा शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ने तैयार की है। एससीओ चीन के प्रभाव वाली एक सुरक्षा संस्था है।सुत्रों के मुताबिक यह सैन्य युद्धाभ्यास रूस के उरल पहाड़ों पर आयोजित की जाएगी, इस संयुक्त अभ्यास का मकसद शांति की स्थापना करना और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए संगठन के 8 देशों के बीच एक-दूसरे का सहयोग करना है। भारत और पाकिस्तान दोनों देश साल 2005 में इस संगठन के अस्थायी सदस्य बने थे और उन्हें पूर्णकालिक सदस्यता पिछले साल ही मिली है।साझा अभ्यास में भाग लेने वाली भारतीय सैन्य टुकड़ी की अगुवाई ब्रिगेडियर रैंक के अफसर करेंगे। एससीओ का साझा सैन्य अभ्यास साल में दो बार आयोजित होता है। इस संगठन के दो अन्य भागीदार देश भारत और चीन के सैनिक पहले भी साझा अभ्यास करते रहे हैं। इस साल सितम्बर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच द्विपक्षीय अभ्यास सितम्बर में करने की योजना है,जो बीते साल डोकलाम में तनाव की वजह से रद्द कर दिया गया था।

नई दिल्ली। बैंकों को 13 हजार करोड़ रुपये का चूना लगाकर फरार व्यापारी नीरव मोदी की फर्म से ज्वैलरी खरीदने वाले भी आयकर विभाग के राडार पर हैं। विभाग ने करीब 50 ऐसे लोगों की आयकर रिटर्न का फिर से आकलन करने का फैसला लिया है, जिन्होंने नीरव मोदी की कंपनियों से आभूषण खरीदे थे। इस बारे में अब तक कई लोगों को नोटिस भेजकर पूछताछ भी की जा चुकी है। हालांकि ज्यादातर का कहना है कि उन्होंने नीरव मोदी को कोई नकद भुगतान नहीं किया।विभाग के अधिकारी बताते हैं कि उन्हें ऐसे सबूत हाथ लगे हैं जिनसे पता चलता है कि कुछ खरीददारों ने नीरव मोदी से आभूषण खरीदने के लिए अलग-अलग तरीके से नीरव को भुगतान किया जैसे कि आयकर से बचने के लिए कुछ हिस्से का नकद भुगतान किया गया।इसी कड़ी में कुछ दिन पहले योगेंद्र यादव के भाई गौतम यादव की भी तलाश हुई। जो कि रेवाड़ी में अस्पताल चलाते हैं। आयकर विभाग का कहना है कि यादव के पास 15 करोड़ के लेनदेन का कोई हिसाब नहीं है।इसके अलावा कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी की पत्नी अनीता सिंघवी को भी आयकर विभाग ने नोटिस भेजकर नीरव मोदी के स्टोर्स से खरीददारी को लेकर पूछताछ की है। हालांकि, अनीता का कहना है कि उन्होंने चेक से ही भुगतान किया है, नकद नहीं।

नई दिल्ली। ट्रेन में यात्रा करने का अनुभव तो आपके पास खूब होगा। हो भी क्यों ना दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क होने के नाते भारत में परिवहन का सबसे लोकप्रिय साधन भी तो रेलवे ही है। भारतीय रेलवे अपनी विविधताओं के लिए जाना जाता है। हर तरह के यात्री की क्षमता के हिसाब से भारतीय रेलवे डिजाइन की गई है।वीआइपी स्तर के लोग एसी 1st क्लास में सफर का आनंद लेते हैं तो उनके नीचे स्तर वाले 2nd एसी में सफर करते हैं। जबकि देश की आबादी का एक बड़ा भाग 3rd AC इकोनॉमी कोच में सफर करता है।वहीं भारत की आबादी का एक एक बहुत बड़ा तबका ऐसा है जो अपनी हैसियत के हिसाब से सामान्य कोच में सफर करता है। इन श्रेणियों वाले कोचों का अलग-अलग अपना किराया होता है। लेकिन आपको बता दें कि इनमें सिर्फ किराए भर का अंतर नहीं होता बल्कि अगल-अलग श्रेणी में किराए के साथ साथ कुछ बुनियादी सुविधाएं भी दी जाती हैं। आज आपको इसी के बारे में बतायेंगे, इस खबर के जरिए आप भारतीय ट्रेन की विविधताओं के बारे में जान पायेंगे।आमतौर पर लोग यही मानते हैं कि रेलवे के अलग-अलग कोच में सिर्फ किराए भर का ही अंतर होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। अलग-अलग श्रेणियों के कोच में सुविधाएं भी अलग-अलग दी जाती हैं। जानते हैं उन कोचों में किराये के अलावा किन-किन प्रकार की बुनियादी सुविधाओं का अंतर होता है।
फर्स्ट एसी स्लीपर:-यह रेलवे का सबसे महंगा क्लास होता है, जिसमें सफर करना हर भारतीय के लिए संभव नहीं है। इसका किराया भारत में चलने वाली एअरलाइंस के आम किराए से कम नहीं होता। यह पूरा कोच वातानुकूलित होता है। और यह सिर्फ महानगर शहरों के चुनिंदा रुट्स के लिए ही संचालित होता है। ऐसे कोच में 18 से 20 यात्रियों के सफर करने तक की सुविधा होती है। इस श्रेणी के कोच में कार्पेट बिछा हुआ होता है जो यात्रियों को सफर का एक खास अनुभव कराता है। इस कोच में सोने के साथ साथ आपकी निजी लग्जरी की सुविधाएं भी होती हैं। राजधानी की First AC का खाना अन्य श्रेणियों में मिलने वाले खाने से कई गुना बेहतर होता है। फर्स्ट एसी में आठ केबिन होते हैं और आधे एसी प्रथम श्रेणी के कोच में तीन केबिन होते हैं। कोच में यात्रियों की मदद करने के लिए एक सेवक होता है।
सेकंड एसी स्लीपर:-रेलवे का Second AC कोच भी स्लीपिंग बर्थ के साथ-साथ पूरी तरह से वातानुकूलित होता है। इसमें एंपल लेग रुम होता है, पर्दे होते हैं और हर यात्री के लिए अलग-अलग रीडिंग लैंप भी लगा होता है। इस कोच में सीटें छह खंडो के दो स्तरों में बंटी होती हैं। चार सीटें कोच की चौड़ाई में फैली हुईं और दो सीटें साइड में। निजता का ख्याल रखते हुए हर सीट में एक पर्दा लगा हुआ होता है। इसमें 48 से 54 यात्री एक बार में सफर कर सकते हैं।
थर्ड एसी स्लीपर:-यह कोच में स्लीपिंग बर्थ होता है औऱ कोच पूरी तरह से फुली एअरकंडीशन्ड होता है। हालांकि इसकी सीटें 2AC के जैसी ही व्यवस्थित होती हैं, लेकिन इसमें चौड़ाई के सापेक्ष तीन सीटें होती हैं और दो साइड में यानी कुल मिलाकर 8 सीटें एक कोच में होती हैं। इसमें पढ़ने के लिए किसी भी प्रकार का कोई लैंप नहीं लगा होता है,लेकिन हाल ही में Third AC कोच को और बेहतर बनाने के प्रयास किए गए हैं। इसमें उपलब्ध कराई जाने वाली बेडिंग का खर्चा आपके किराए में शामिल होता है। इस प्रकार के कोच में 64-65 यात्री सफर करते हैं।
थर्ड एसी इकोनॉमी स्लीपर:-यह कोच भी स्लीपिंग बर्थ के साथ फुली एअरकंडीशन्ड होता है। फिलहाल गरीब रथ में इस तरह का कोच उपलब्ध है। इस कोच की सीटें भी आमतौर पर 3AC की तरह की अरेंज होती हैं लेकिन इसमें थ्री टियर होते हैं। इसमें भी कोई रीडिंग लैंप नहीं होता है और न ही इसमें पर्दे वगैहरा लगे होते हैं। बेडिंग का खर्चा आपके किराए में से काट लिया जाता है जो कि 25 रुपया प्रति यात्री होता है। इस तरह के कोच में भारत की एक बड़ी मध्यमवर्गीय आबादी सफर करती हुई दिखती है।
एसी चेयर कार:-रेलवे का यह कोच भी फुली एअरकंडीशन्ड होता है लेकिन इसमें सिर्फ बैठने की जगह होती है, जैसा कि नाम से जाहिर है, चेयर कार। इसमें आम तौर पर एक पंक्ति में पांच लोगों के बैठने की जगह होती है। कुल मिलाकर इसमें सफर कर रहे यात्री सो नहीं सकते हैं उन्हें बैठ कर अपनी यात्रा संपन्न करनी होती है। इससे कहा जा सकता है कि यह लंबी दूरी के लिए नहीं होती है।
एग्जीक्यूटिव एसी चेयर कार:-यह भी एयरकंडीशन्ड सीटर कोच होता है, जिसमें एक पंक्ति में सिर्फ चार सीटें ही होती हैं। इस कोच का इस्तेमाल आमतौर पर शहर में घूमने के लिहाज से किया जाता है। इस कोच में भी 2:2 के अनुपात में सीटें लगी हुई होती हैं। इस कोच में मिलने वाला खाना भी शताब्दी और चेयरकार से अलग होता है। यह भी लंबी दूरी की यात्रा के लिए नहीं होता है।
SL - स्लीपर क्लास नॉन एसी:-स्लीपर क्लास भारतीय रेलवे का सबसे आम कोच है, आमतौर पर इस तरह के दस या अधिक कोच एक ट्रेन में जोड़े जाते हैं। इस कोच में चौड़ाई में तीन बर्थ होती हैं और दो लम्बाई में होती हैं, इसमें यात्रियों के लिए 72 सीटें होती हैं। आमतौर पर इस कोच में टिकट आरक्षण के लिए यात्रियों के बीच मारामारी देखते बनती है। चूंकि हर कोई एसी कोच में यात्रा करने में सक्षम नहीं होता है तो इस कोच में काफी भीड़ देखने को मिलती है।
सेकंड सिटींग नॉन एसी:-सेकंड सीटिंग कोच सबसे निचले वर्ग के कोच होते हैं। इसमें यात्रियों के लिए केवल बैठने के लिए सीटें होती हैं। एक बर्थ पर 3 यात्री बैठते हैं। इसमें LHB कोच में बैठने के लिए 108 सीटें होती हैं। आम जनता जिसे जनरल डिब्बा कहती है ये वही है। इसमें त्यौहारों के दिनों में लोगों की भीड़ देखते ही बनती है।

 

 

नई दिल्ली। ओडिशा के पुरी से शनिवार को भगवान जगन्नाथ की 141 वीं रथ यात्रा शुरू हो गई है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। कहा जाता है कि 9 दिन पूरे होने के बाद भगवान जगन्नाथ, जगन्नाथ मंदिर में विराजते हैं। समग्र जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ को पतित पावन भी कहा जाता है। पुरी में भारी बारिश के बावजूद भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए लाखों भक्त छाता लेकर खड़े रहे।मान्यता है कि वे अलग-अलग पंथ, धर्म, संप्रदाय के लोगों को दर्शन देने के लिए साल में एक बार रथयात्रा के मौके पर मंदिर से बाहर निकल कर आते हैं।पतितों का उद्धार करने के लिए रथयात्रा वाकई एक ऐसा अनूठा त्योहार है, जहां भक्तों से मिलने भगवान मंदिर से बाहर निकलते है। वर्षों से चली आ रही इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ के साथ बडे भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा भी अलग-अलग रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक जाते है। यह वही दिन है, जब भगवान श्रीकृष्ण अत्याचारी कंस का वध करने मथुरा की यात्रा पर निकले थे।रथ यात्रा के चारों ओर जयकारे, घंट, घंटा, शंख, मृदंग बजाते, कीर्तन करते, भजन गाते लोगों का उत्साह देखते ही बनता है।अपने रत्न सिंहासन को छोड़कर भगवान रथ में बैठकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। वहां पर एक सप्ताह रहकर फिर वापस श्रीमंदिर आते हैं। यहां से जब जगत के नाथ जगन्नाथ श्रीमंदिर को लौटते हैं तो उस वापसी यात्रा को बाहुड़ा यात्रा कहा जाता है।बता दें कि हर वर्ष यात्रा के लिए नए रथ का निर्माण होता है। जिसका आकार-प्रकार हर वर्ष एक ही जैसा होता है। मूल रूप से रथ के निर्माण के लिए नारियल की लकड़ी का प्रयोग होता है, क्योंकि ये हल्की होती है। भगवान जगन्नाथ के रथ का रंग लाल-पीला होता है और यह अन्य रथों से आकार में भी बड़ा होता है। भगवान जगन्नाथ के रथ में 18 पहिए लगे होते हैं, जबकि बलराम के रथ में 16 और सुभद्रा के रथ में 14 पहिए होते है।

नई दिल्‍ली। बातचीत के दौरान अक्सर आपने बहुत सी महिलाओं को यह कहते सुना होगा कि क्या करूं मेरी नींद पूरी नहीं हो पाती है। इस कारण मेरी सेहत सही नहीं रहती है। अगर आप भी ऐसा ही सोचती हैं तो आपकी सोच गलत है। हाल ही में हुए अध्ययनों से पता चला है कि यदि आप रोजाना कुल मिलाकर दस घंटे से अधिक सोती हैं तो न केवल आपका मेटाबालिज्म प्रभावित होता है, बल्कि हृदय संबंधी समस्याएं होने का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रतिदिन सात घंटे से कम सोने से भी हृदय रोग का खतरा हो सकता है। खासकर रात में रक्तचाप के बढ़ने की परेशानी से ग्रस्त लोगों के लिए यह खतरा और भी ज्यादा होता है।हाल ही में दक्षिणी कोरिया में हुए एक अध्ययन के अनुसार जो लोग रोजाना दस घंटे से अधिक सोते हैं न केवल उनकी कमर का माप बढ़ता है, बल्कि उनके शरीर में ट्राईग्लिसराइड का लेवल भी बढ़ जाता है। गौरतलब है कि ट्राईग्लिसराइड का लेवल बढ़ने से हृदय में खून पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट पैदा हो सकती है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही हृदय संबंधी अन्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अधिक सोने वाले लोगों में हाईपरटेंशन होने का खतरा भी बढ़ जाता है। यही नहीं अधिक सोने से शरीर में ब्लड शुगर का लेवल भी बिगड़ जाता है। इससे डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है।वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अध्ययन से यह भी पता चला है कि जो महिलाएं प्रतिदिन कुल मिलाकर छह घंटे से कम की नींद लेती हैं, उनको भी विभिन्न प्रकार की शारीरिक और मानसिक समस्याएं घेर सकती हैं। इसलिए यदि आप शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रहना चाहती हैं तो प्रतिदिन कम से कम छह-सात घंटे की नींद अवश्य लें। भले ही यह नींद टुकड़ों में हो। दक्षिणी कोरियाई वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अध्ययन के लिए हमने करीब एक लाख से अधिक लोगों का डाटा एकत्र किया, तब हम इस नतीजे पर पहुंचे।
बहुत चुस्त जींस न पहनें:-यह तो आप भी मानती होंगी कि फिगर को आकर्षक लुक देने में जींस का कोई जवाब नहीं। यही कारण है कि आजकल की लड़कियों और युवतियों की वॉर्डरोब का प्रमुख हिस्सा बन गई है जींस। हाल ही में अमेरिका में हुए शोध-अध्ययनों से पता चला है कि लगातार बहुत टाइट जींस पहनना आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। वैसे तो सेहत के लिहाज से किसी भी प्रकार के चुस्त कपडे़ हर किसी के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं, लेकिन अगर आप लगातार चुस्त जींस पहनती हैं तो यह अधिक नुकसानदेह हो सकती है।शोध से पता चला है कि फिगर को आकर्षक लुक देने वाले बहुत चुस्त कपडे़ त्वचा संबंधी और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ाने के साथ ही अन्य कई प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकते हैं। अमेरिकी वैज्ञानिकों का कहना है कि चुस्त जींस से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इससे कमर के आसपास के हिस्सों में संक्रमण भी हो सकता है। साथ ही सूजन और खुजली की समस्या भी हो सकती है।वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार चुस्त जींस पहनने पर ढके हिस्सों पर ऑक्सीजन का सुचारू रूप से आवागमन नहीं हो पाता है। इससे ऐसे हिस्से पर नमी बनी रहती है। इसके कारण कई प्रकार के संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है। चुस्त जींस पेट पर भी अतिरिक्त दबाव डालती है। इससे हमारे इम्यून सिस्टम पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक चुस्त जींस पहनने से कई बार पीठ, कमर और पैरों में भी दर्द की शिकायत होने लगती है। इसलिए बेहतर होगा कि थोड़ा आरामदायक जींस पहनें ताकि आपको विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं का सामना न करना पड़े।

शिलांग। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक (डीजी) केके शर्मा ने शनिवार को कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों में सिर्फ बीएसएफ ही ऐसा है जिसके जवानों को अपने परिवार के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए स्मार्टफोन रखने की इजाजत दी गई है।केके शर्मा ने पत्रकारों से कहा, 'मैं जानता हूं कि सेना, नौसेना और वायुसेना इसकी इजाजत नहीं देते। मैंने सोच समझकर स्मार्टफोन की अनुमति देने का फैसला किया ताकि जवान अपने परिवार और दोस्तों के साथ संपर्क में रह सकें। वे जानकारियां हासिल करने के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।' उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर जवानों की काउंसलिंग की जा रही है क्योंकि यह बेहद खतरनाक माध्यम है। साथ ही जवानों को ड्यूटी के दौरान स्मार्टफोन रखने की इजाजत नहीं है। ड्यूटी पर जाने से पहले उन्हें अपना स्मार्टफोन जमा कराना होता है।

अनुभा की दस वर्षीया बेटी रचिता मोटापे से ग्रस्त है, पर उन्हें समझ नहीं आता कि किस तरह वह अपनी बेटी को वजन पर नियंत्रण के लिए प्रेरित करें। यहां समस्या सिर्फ बेटी का बढ़ा हुआ वजन नहीं हैं। अनुभा को यह महसूस होता है कि मोटापे की वजह से उसके संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। आउटडोर गेम्स में बेटी जरा भी रुचि नहीं दिखाती, क्योंकि उसे थकान जल्दी हो जाती है। स्कूल के बच्चे भी मोटापे को लेकर उसे चिढ़ाते हैं, जिससे रचिता का आत्मविश्वास कमजोर होने लगा है। अनुभा ने जब भी रचिता को वजन पर नियंत्रण के लिए समझाना चाहा तो उसके पापा ने यह कहकर शांत करवा दिया कि अभी तो उसके खेलने और खाने के दिन हैं। उम्र बढ़ने के साथ बेटी स्वयं समझ जाएगी कि वजन पर नियंत्रण करना कितना जरूरी है। हालांकि इससे अनुभा की चिंताएं समाप्त नहींहुईं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह कैसे इस समस्या को हल करें।अनुभा और उनकी बेटी का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। ऐसे अनेक उदाहरण हमें अपने आसपास मिल जाएंगे। संतान के मोटापे को लेकर मांओं की चिंता वाजिब है। दरअसल बच्चों में मोटापे की समस्या आजकल गंभीर रूप अख्तियार करती जा रही है। अभिभावक भी इस समस्या की गंभीरता को समझते हैं, पर इस बारे में बच्चों से बात करने में हिचकते हैं। मन ही मन उन्हें यह डर सताता रहता है कि मोटापे को लेकर बात करने पर बच्चा आहत न हो जाए। उसके आत्मविश्वास को चोट न पहुंचे। बच्चा कहीं अत्यधिक डाइटिंग या अन्य गलत तरीकों से वेट लॉस की कोशिश न करने लगे, जिसका उसकी सेहत पर उल्टा असर हो। ऐसे में क्या ऐसा कोई तरीका हो सकता है, जिससे मां-बाप बालमन को आहत किए बगैर मोटापे पर नियंत्रण और हेल्दी लिविंग के लिए प्रोत्साहित कर सकें। हेल्थ एक्सपट्र्स के मुताबिक यह इतना मुश्किल भी नहीं है, बस यहां बच्चों के मनोविज्ञान को समझना होगा।
काम करेंगे सही तरीके:-अक्सर मां-बाप को लगता है कि खानपान को लेकर सही सलाह देकर वे बच्चे की मदद कर रहे हैं, जैसे उनसे यह कहना कि इतनी मिठाई, चॉकलेट या जंक फूड खाने से मोटापा बढ़ेगा। अगर वजन पर नियंत्रण करना है तो इन सब खाद्य पदार्र्थों से दूर रहो। आउटडोर गेम्स के बजाय लगातार कंप्यूटर पर गेम खेलने या टीवी देखने से भी मोटापा कभी कम नहीं होगा। यकीन मानिए, बच्चों को आपकी इन सलाहों से जरा भी फर्क नहीं पड़ता। वे हमेशा ही उन्हें अनसुना कर देते हैं। इसलिए अच्छा होगा कि उन्हें इस तरह की सलाह देने के बजाय वह करें, जो उनके हित में है। उदाहरण के रूप में घर पर ऐसे खाद्य पदार्थ न लाएं, जो उनकी सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले हों। किचेन और फ्रिज में भी ऐसी वस्तुएं नहीं होनी चाहिए, जिनके सेवन से मोटापा बढ़े। इसके बावजूद कभी-कभी उन्हें मनपंसद भोजन की ट्रीट देने में कोई हर्ज नहीं है। बच्चे हमेशा माता-पिता का अनुसरण करते हैं। अगर आप हेल्दी खाद्य पदार्र्थों का सेवन करेंगे तो वे भी उन्हीं ईटिंग हैबिट्स को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। उन्हें टॉफी या चॉकलेट दिलाने के बजाय सूखे मेवे, ताजे फ्रूट्स और फ्रूट जूस दें, जो स्वादिष्ट होने के साथ ही हेल्दी भी होते हैं। बाजार की रेडीमेड नमकीन के बजाय मखाने भूनकर दे सकती हैं या घर पर ही लईया को भूनकर उसमें मसाले डालकर नमकीन बनाकर दे सकती हैं।
बनना होगा रोल मॉडल:-बच्चों के लिए माता-पिता रोल मॉडल होते हैं। मां-बाप की आदतें बच्चे सीखते हैं। इसलिए बच्चों को केवल एक्सरसाइज की सलाह देने से कुछ नहीं होगा। बात तो तब बनेगी जब उनके सामने आप उदाहरण पेश करेंगी। घर के सभी सदस्यों के लिए रोजाना मॉर्निंग में योगा या अन्य एक्सरसाइज व रात को डिनर के बाद थोड़ी देर वॉक का रूटीन सेट कर सकती हैं। इससे बच्चे को एक्सरसाइज का महत्व समझाना व उसे इसके लिए प्रेरित करना आसान होगा। यह जरूरी नहींकि आप जो एक्सरसाइज करें, बच्चा भी वही करे। वह अपने पसंद की एक्सरसाइज या फिजिकल एक्टिविटी जैसे स्विमिंग, डांसिंग इत्यादि को फॉलो कर सकता है।
आनुवांशिक वजहें भी जिम्मेदार:-कई बार यह भी देखा गया है कि माता -पिता दुबले-पतले और हेल्दी हैं। उनके एक से अधिक बच्चे हैं। सभी कद-काठी के मामले में उन पर गए हैं सिर्फ एक को छोड़कर। यहां जेनेटिक कारणों की भूमिका होती है। हो सकता है कि परिवार में दादा या परदादा में कभी कोई इस समस्या से ग्रसित रहा हो। यहां बच्चे के बढ़े हुए वजन से ज्यादा उसके हेल्दी होने पर जोर देना होगा। जहां मोटापे के लिए जेनेटिक कारण जिम्मेदार होते हैं, वहां ये उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि बच्चे की कद-काठी में एकदम से परिवर्तन आ जाएगा। हां, आप उसे स्वस्थ जीवनशैली के लिए अवश्य प्रेरित कर सकती हैं।
एक्टिव रहना ज्यादा जरूरी:-अक्सर यह कहा जाता है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है, पर यह बात भी उतनी ही सही है कि हमारे वजन से ज्यादा फर्क इस बात से पड़ता है कि हम कितने चुस्त-दुरुस्त हैं। बच्चा अगर एक्टिव है और स्वास्थ्य को लेकर उसे किसी प्रकार की समस्या नहीं है तो वजन को लेकर ज्यादा परेशान न हों। हां, बच्चे को स्वास्थ्य का महत्व समझाना जरूरी है। इस मामले में बातचीत करना अच्छा रहता है। बातों ही बातों में आप उससे पूछ सकती हैं कि कौन सी ऐसी हेल्दी एक्टिविटीज या फूड प्रिफरेंस हो सकते हैं, जो पूरे परिवार के लिए फायदेमंद साबित हो सकें। जाहिर है कि जब बच्चा फैमिली हेल्थ के लिए सुझाव देगा तो खुद भी उसमें रुचि लेगा। इससे आपकी समस्या भी हल हो जाएगी।
भावनात्मक संबल भी जरूरी:-बाल मनोवैज्ञानिक डा. मधुश्री बनर्जी का कहना है कि वजन पर नियंत्रण व शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बच्चों को सचेत करना अच्छा है, पर सिर्फ इन्ही बातों पर अटक कर रह जाना ठीक नहीं। हो सकता है कि बच्चा स्कूल की पढ़ाई में कठिनाई या साथियों के अनुचित बर्ताव जैसी कुछ ऐसी समस्याओं से जूझ रहा हो, जिनका उसे हल न समझ आ रहा हो। जिन पर वह आपसे बातचीत करना चाहता हो, पर आपका रवैया देखकर कुछ कहने की हिम्मत न जुटा पाता हो। ये परिस्थितियां बच्चे के विकास पर असर डाल सकती हैं। इसलिए आपका व्यवहार बच्चे के साथ ऐसा होना चाहिए कि वह अपनी बातें शेयर कर सके। यह तभी होगा जब आप उसके साथ फ्रेंड्ली रहेंगी और हौसला बढ़ाने में मदद करेंगी। बच्चे के मोटापे को लेकर आपकी चिंता जायज है, पर और बातों पर भी आपको बराबर से ध्यान देना चाहिए। जिन चीजों में बच्चा अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, उनके लिए प्रोत्साहित करना भी जरूरी है, जैसे पढ़ाई, एक्स्ट्रा करीक्युलर एक्टिविटी इत्यादि। इससे उसका आत्मविश्वास मजबूत होगा और वह हर चुनौती के लिए स्वयं को तैयार कर सकेगा।

मुंबई। फिल्म संजू 29 जून को रिलीज़ हुई थी और यह कयास लगाए जा रहे थे कि तीसरे शुक्रवार तक संजू 300 करोड़ क्लब में शामिल हो जाएगी। लेकिन रुकावट के लिए खेद है। चूंकि, संजू तीसरे शुक्रवार को बॉक्स अॉफिस पर 300 करोड़ से महज कुछ दूर रह गई। फिल्म अभिनेता संजय दत्त का जीवन कितना रंगीन और बुरी आदतों से भरा था, इसकी झलक उन पर आई फिल्म संजू से दिख चुकी है। बॉक्स ऑफ़िस पर फिल्म ने दो हफ़्ते पूरे कर लिए हैं लेकिन 300 करोड़ क्लब में शामिल होने में थोड़ा समय और लगेगा। राजकुमार हिरानी के निर्देशन में संजय दत्त की ज़िन्दगी पर बनी रणबीर कपूर स्टारर फिल्म संजू ने घरेलू बॉक्स ऑफ़िस पर दो हफ़्ते मतलब 15 दिन पूरे करने के साथ करीब 299.19 करोड़ एक लाख रूपये का कलेक्शन कर लिया है। फिल्म ने तीसरे शुक्रवार को ग्रॉस चार करोड़ की कमाई की। फिल्म ने दूसरे गुरुवार को पांच करोड़ 51 लाख रूपये का कलेक्शन किया। संजू को 34 करोड़ 75 लाख की ओपनिंग लगी थी पहले पहले वीकेंड में फिल्म ने 120 करोड़ छह लाख रूपये की कमाई की पहले हफ़्ते में फिल्म को 202 करोड़ 51 लाख रूपये का कलेक्शन हुआ दूसरे वीकेंड में 62 करोड़ 79 लाख रूपये का दूसरे हफ़्ते में संजू ने 91 करोड़ 50 लाख रूपये का कलेक्शन किया हालांकि जैसा अनुमान लगाया जा रहा था कि फिल्म दूसरा हफ़्ता पूरा होने के साथ 300 करोड़ क्लब में प्रवेश कर जायेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ लेकिन तीसरा वीकेंड शुरू होते ही बचे हुए छह करोड़ मिल जाएंगे, इसकी पूरी आशा है।रणबीर की संजू ने आमिर खान की धूम 3 के 284 करोड़ रूपये के कलेक्शन को तो पीछे छोड़ दिया और अब बारी इन फिल्मों की है, जिसका कलेक्शन इस प्रकार रहा है –
पद्मावत – 301 करोड़ 50 लाख रूपये
सुल्तान – 302 करोड़ 15 लाख रूपये
बजरंगी भाईजान – 321 करोड़ रूपये
फिल्म संजू ने सिर्फ 10 दिनों में 250 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया था। मेकर्स अब 400 करोड़ तक भी निगाहें लगाए हुए हैं और जिस तरह से अभी आने वाले समय में कोई बड़ी फिल्म नहीं है उससे ये उम्मीद की जा सकती है कि ये आंकड़ा छूने में बहुत मुश्किल नहीं है। संजू, एक मसाला फिल्म इसलिए भी बन पाई क्योंकि संजय दत्त की लाइफ़ में ऐसा बहुत कुछ हुआ जो फिल्मी स्क्रीनप्ले जैसा ही था। फिल्म ने रणबीर कपूर को सबसे ज़्यादा फ़ायदा पहुंचाया है। वो पहली बार 200 करोड़ क्लब में आये हैं और 300 में भी पहुंच जाएंगे। वैसे फिल्म में उनका साथ देने में परेश रावल, मनीषा कोइराला, विक्की कौशल, अनुष्का शर्मा, सोनम कपूर, दीया मिर्ज़ा और करिश्मा तन्ना ने भी कोई कमी नहीं रखी।
वर्ल्डवाइड 500 करोड़ पार:-वर्ल्डवाइड बॉक्स अॉफिस कलेक्शन की बात करें तो संजू ने 500 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। वर्ल्डवाइड बॉक्स अॉफिस कलेक्शन अभी तक 500.43 करोड़ हो चुका है।

शंघाई। चीन में लगातार हो रही भारी बारिश और आंधी-तूफान के कारण देश भर में भयावह स्‍थिति उत्‍पन्‍न हो गई है। चीन की सरकारी मीडिया ने शनिवार को इस बात की जानकारी दी। भारी बारिश के कारण देश की बड़ी नदियां ऊफान पर हैं। कई क्षेत्रों में बाढ़ के कारण पुल क्षतिग्रस्‍त हो गए हैं। भारी बारिश के कारण सड़कें अवरुद्ध होने के अलावा रेल यातायात ठप हो गया है।बाढ़ के कारण हजारों लोगों को सुरक्षित स्‍थान पर ले जाया गया है। चीन के मौसम विभाग ने शनिवार को भी देशभर में भारी बारिश होने की आशंका व्‍यक्‍त की है। दक्षिण पश्‍चिमी सिचुआन प्रांत में बाढ़ और भूस्‍खलन संबंधित चेतावनी जारी की है।चीन के कई हिस्‍सों में प्रत्‍येक वर्ष सैंकड़ों लोगों की मौत हो जाती है। लेकिन इस वर्ष मरने वाले लोगों की तादाद काफी कम है। बाढ़ के कारण चीन के एक प्रांत में 12 के मारे जाने की सूचना है जबकि एक अन्‍य प्रांत में तीन की मौत होने की जानकारी है। मौसम विभाग ने शनिवार को चीन के कुछ हिस्‍सों में 80 मिलीमीटर प्रति घंटे बारिश होने का अनुमान जताया है। देश के मीडिया के अनुसार, 241 नदियों में पिछले कुछ दिनों में बाढ़ आ गयी है।

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