Editor

Editor


नई दिल्ली - निजी क्षेत्र के अग्रणी कर्जदाता एचडीएफसी बैंक ने मार्च में खत्म हुए पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 4,799.3 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 20.3 फीसद ज्यादा है। बैंक ने कहा कि टैक्स के मद में 2,495.3 करोड़ रुपये का प्रावधान करने के बाद चौथी तिमाही में उसका शुद्ध मुनाफा 4,799.3 करोड़ रुपये रहा।
एक बयान में बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन अवधि में उसकी स्टैंडअलोन आय बढ़कर 25,549.7 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो उससे पिछले वित्त वर्ष (2016-17) की समान अवधि में 21,560.7 करोड़ रुपये थी। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को दी जानकारी में बैंक ने बताया कि उसके निदेशक बोर्ड अगले एक वर्ष में डेट इंस्ट्रूमेंट्स के प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिये 50,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी प्रदान कर दी है।
जहां तक पूरे वित्त वर्ष का सवाल है, तो पिछले वित्त वर्ष (2017-18) के दौरान बैंक का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 21.4 फीसद बढ़कर 18,510 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। समीक्षाधीन अवधि में बैंक का कंसोलिडेटेड एडवांस 19.6 फीसद बढ़कर 7,00,034 करोड़ रुपये पर जा पहुंचा। उससे पिछले वित्त वर्ष के दौरान यह आंकड़ा 5,85,481 करोड़ रुपये था।
बैंक ने बीएसई को बताया कि वित्त वर्ष के आखिर में उसका सकल फंसा कर्ज (एनपीए) उसके ग्रॉस एडवांस का 1.30 फीसद रहा, जो उससे पिछले वित्त वर्ष की समाप्ति पर 1.29 फीसद था। वहीं, नेट एनपीए पिछले वित्त वर्ष की समाप्ति पर नेट एडवांस का 0.4 फीसद रहा।
वित्तीय नतीजों के अनुमोदन के अलावा बैंक के बोर्ड ने दो रुपये मूल्य वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर के बदले 13 रुपये का लाभांश देने की घोषणा की है। वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान बैंक ने समान इक्विटी शेयर के लिए 11 रुपये लाभांश दिया था।


नई दिल्ली - नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई में भी कुछ बड़े बदलाव लागू हो चुके हैं। ये बदलाव आम आदमी से सरोकार रखने वाले हैं और इससे सीधे तौर पर 25 करोड़ बैंक खाताधारक प्रभावित होंगे। अगर आपको इन बदलावों के बारे में जानकारी नहीं है तो हमारी यह खबर आपके काम ही है। हम अपनी इस खबर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में हुए तीन बदलावों के बारे में जानकारी देने रहे हैं।
एसबीआई के मिनिमम बैलेंस वाले नियम में हुआ बदलाव:
हाल ही में एसबीआई ने खाते में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले चार्जेज में 75 फीसद की कटौती की थी। इस नियम को 1 अप्रैल से लागू होना था। जैसा कि 1 अप्रैल को बैंक की क्लोजिंग थी लिहाजा ये नियम आम जनता के लिए 2 अप्रैल से प्रभावी हो चुके हैं। फैसले के बाद अब मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में खाते में मंथली एवरेज बैलेंस (एएमबी) न रखने पर 50 के बजाए 15 रुपए प्रतिमाह का चार्ज देना होगा। उसी तरह अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में यह चार्ज 40 से घटाकर 12 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। वहीं 10 रुपए का जीएसटी भी एक निश्चित स्थिति में लागू होगा। आपको बता दें कि खाते में एवरेज बैलेंस (एएमबी) न रखने पर शुल्क लगाए जाने के एसबीआई के फैसले का तीखा विरोध हुआ था।
अमान्य हो गए एसबीआई की सहयोगी शाखाओं के चेकबुक:
जैसा कि आपको मालूम है कि एसबीआई में उसके तमाम सहयोगी बैंकों का विलय हो चुका है, लिहाजा इन पुराने बैंको की चेक बुक को एसबीआई की शाखा में 31 मार्च तक बदला जाना था। यानी से सभी चेक बुक जो कि बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद , स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और भारतीय महिला बैंक की थीं अब अमान्य हो चुकी हैं। अब आप इनका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
एसबीआई में शुरू होगी इलेक्टोरल बॉण्ड की बिक्री:
चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2017-18 के आम बजट में चुनावी बॉण्ड की स्कीम लाने की घोषणा की थी। इसके मुताबिक केवल वही पंजीकृत राजनीतिक दल इन बॉण्डों के जरिए चंदा ले पाएंगे जिन्हें पिछले लोकसभा अथवा विधानसभा चुनाव में एक फीसद से अधिक मत प्राप्त होंगे। राजनीतिक पार्टियां इन बॉण्डों को केवल अधिकृत बैंक खातों के जरिए ही भुना पाएंगी। लोग राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए इन्हें व्यक्तिगत अथवा समूह के तौर पर भी खरीद सकेंगे। एसबीआई ने इनकी बिक्री 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी है।

 

उत्तर प्रदेशः शादी के घर में तमाम खुशियां होती हैं। हर तरफ भाग दौड़ देखने को मिलती है, जब दूल्हे की बारात जानी होती है तो माहौल बेहद खुशनुमा होता है। लेकिन एक बारात एेसी भी निकली कि जाते समय तो खुशियां थी, लेकिन आते समय मातम छा गया।दरअसल, गाजियाबाद के अकबरपुर बेहरामपुर के रहने वाले 21 साल के रवि रस्तोगी की बारात बड़ी धूमधाम से निकली, लेकिन रास्ते में ड्राइवर की लापरवाही के कारण कार नाले में जा गिरी और दूल्हे के परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घर से नेशनल हाईवे पर ये कार चढ़ने ही वाली थी कि जाम की वजह से ड्राइवर ने कार बैक कर ली। और फ़ोन पर बात करने लगा और इस तरह से धीरे-धीरे सरकती हुई कार 20 फ़ीट गहरे नाले में जा गिरी।सूमो के पीछे आ रहे बाराती जतिन रस्तोगी भी नाले में कूद पड़े और शीशा तोड़कर एक महिला को खींचने की कोशीश की, लेकिन ज्यादा वजन की वजह से उसे निकाल नहीं सके। फिर कुछ लोगों को निकाला जा सका। मृतकों में दूल्हे रवि रस्तोगी के पिता दुर्गा प्रसाद रस्तोगी, दूल्हे के बड़े पापा इंद्र प्रकाश रस्तोगी, और उनके बड़े बेटे का पूरा परिवार ही खत्म हो गया। दूल्हे के 2 भांजे भी मौत के गाल में समा गए।चश्मदीदों का आरोप है कि पुलिस को फोन मिलाने पर पुलिस काफी देरी से आई और 100 नंबर पर कॉल भी नहीं लग पाया। जिसकी वजह से यह मौतें हुई हैं। बचे हुए घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद शादी में जा रहा परिवार मातम के दौर से गुजर रहा है। नेशनल हाईवे 24 के किनारे किसी तरह का चेतावनी चिन्ह नहीं था।

मैड्रिडः स्वीडन के मशहूर डीजे और इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक प्रॉडय़ूसर एविसी का निधन हो गया। वह ओमान के मस्कट में अपने घर में मृत पाए गए। वह 28 साल के थे। एफे ने एविसी के एजेंट डियाना बैरन के हवाले से बताया, ‘‘हमें बड़े दुख के साथ यह बताना पड़ रहा है कि टिम बर्गलिंग, जिन्हें हम डीजे एविसी के नाम से जानते हैं, अब वह नहीं रहे।’’बैरन ने कहा, ‘‘परिवार पूरी तरह शोक में डूबा हुआ है और हम सभी से इस मुश्किल घड़ी में उनकी निजता का सम्मानत करने का आह्वान करते हैं।’’ बर्गलिंग स्वास्थ्य कारणों से जूझ रहे थे। ज्यादा शराब पीने से वजह से कई समस्याएं थीं। उन्हें 2012 में 11 दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एविसी को 2011 में अपने हिट ‘लेवल्स’ की रिलीज से दुनियाभर में शोहरत मिली। इसके बाद ‘वेक मी अप’, ‘हे ब्रदर’ ने उन्हें अपार लोकप्रियता दिलाई।

नई दिल्ली: यशवंत सिन्हा ने अाज मीडिया के सामने बीजेपी छोड़ने का एेलान कर दिया है। यशवंत काफी समय से बीजेपी से नाराज चल रहे थे और वह लगातार सरकार की अालोचना के कारण सुर्खियों में रहते थे। यशवंत ने कहा कि वह अाज से बीजेपी से सारे संबंध तोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि वह अाज से ही राजनीति से भी सन्यास ले रहे हैं। यशवंत बोले यह न सोचे की सिन्हा कोई और पार्टी ज्वाइन कर लेंगे। अाज से उनका किसी भी पार्टी से कोई संबंध नहीं होगा।बता दें कि सिन्हा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं। वहीं यशवंत के बेटे जयंत सिन्हा भाजपा में मंत्री हैं। जहां पिता सरकार की अालोचना करता है तो वहीं बेटी हमेशा सरकार का पक्ष लेता है। इसलिए कहा जाता है कि बाप और बेटे में अक्सर अनसुनी होती रहती है। जीएसटी और नोटबंदी पर भी यशवंत ने सरकार को घेरने की कई बार कोशिश की, लेकिन सरकार के बचाव में और अपने पिता के खिलाफ जयंत ने उनके हर आलोचनात्मक बयान का जवाब दिया। यहां तक कि यशवंत ने एक बार अपने बेटे को ही कह डाला कि अगर जयंत इतने ही सक्षम थे तो उन्हें वित्त मंत्रालय से निकालकर दूसरा मत्रालय क्यूं सौंपा गया। इस बात से पता लगाया जा सकता है कि पिता-पुत्र के रिश्ते में कितनी दूरियां हैं।

रायबरेलीः आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की रायबरेली जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, वहां पर रैली का आयोजन किया गया। लेकिन रैली में शॉर्ट सर्किट होने के कारण रैली में भगदड़ मच गई और बताया जा रहा है कि उस समय सीएम योगी और अमित शाह दोनों मंच पर मौजूद थे। पंडाल में लगी आग के कारण वहां पर मौजूद लोगों में अफरी तफरी मच गई और लोग इधर उधऱ भागने लगे। सारा पंडाल धुंए के गुबार से भर गया। कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में शनिवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अमित शाह रैली को संबोधित करने पहुंचे। रैली में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। जिससे भगदड़ मच गई। भाजपाइयों ने प्रशासन की व्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा काटा।पूरे पंडाल में धुआं ही धुआं हो गया। बताते चलें कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शनिवार दोपहर 1:30 बजे कांग्रेस के गढ़ और नेहरू परिवार के घर बन चुके रायबरेली में भगवा शंखनाद करने के लिए पहुंचे हैं। उनके साथ यूपी के सीएम योगी आदित्यानाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडेय भी पहुंचे।आपको बता दें कि रायबरेली को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। यहां पर कांग्रेस ने अपनी पैंठ बनाई हुई है। रायबरेली में रैली करकगे बीजेपी कांग्रेस की कार्यप्रणाली में सेंध लगाने की कोशिश में है। अमित शाह की राय़बरेली रैली को लोकसभा चुनावों की तैयारी के रुप में देखा जा रहा है।

 

बीजेपी से नाराज चल रहे पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने अाज बीजेपी छोड़ने का एेलान किया है। उनके इस एेलान के बाद भाजपा में हड़कंप मच गया। यशंत ने भाजपा छोड़कर पार्टी को बड़ा झटका दिया है। यशवंत काफी लंबे समय से अपनी ही पार्टी की अालोचना करते रहते थे। यशवंत ने नोटबंदी और जीएसटी लागू करने के फैसले को लेकर भी मोदी सरकार पर कड़े सवाल किए। सरकार की नीतियों को उन्होंने बहुत बार गलत ठहराया। अाज यशवंत ने कहा कि 'मैं बीजेपी के साथ अपने सभी संबंधों को समाप्त करने का ऐलान करता हूं।'सिन्हा ने इसी साल 30 जनवरी को राष्ट्र मंच के नाम से एक नए संगठन की स्थापना की थी। तब उन्होंने कहा था कि यह संगठन गैर-राजनीतिक होगा और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगा। बता दें कि शनिवार को कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मीटिंग के बाद यशवंत सिन्हा ने यह फैसला लिया है। सिन्हा ने कहा कि यह नहीं है कि वह भाजपा छोड़कर किसी और पार्टी में शामिल हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैंने चार साल पहले चुनाव लड़ने से संन्यास लिया था आज दलगत राजनीति से संन्यास ले रहा हूं। आज के बाद किसी भी पार्टी से मेरा कोई रिश्ता नहीं होगा। मैं बीजेपी छोड़ रहा हूं, लेकिन आगे किसी पार्टी को ज्वाइन नहीं करूंगा।

 

रायबरेलीः कुछ दिन पहले कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने गढ़ रायबरेली पहुंची थी। यहां पर सोनिया गांधी के साथ-साथ राहुल गांधी भी आए थे। लेकिन अब बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह भी रायबरेली पहुंच रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में सेंध लगाने की कोशिश में है। आने वाले लोकशभा चुनावों के लिए बीजेपी के दो दिग्गज नेता अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ का रायबरेली दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज दोनों नेता रायबरेली में सियासी हुंकार भरेंगे। दोनों की कोशिश रहेगी कि लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी रायबरेली में अपनी हकुमत बनाना चाह रही है।
लाखों कार्यकर्ता करेंगे कार्यक्रम में शिरकत:-दोनों नेताओं के इस दौरे के बारे में जानकारी देते हुए बीजेपी के रायबरेली प्रभारी हीरो बाजपेयी ने बताया कि शाह कांग्रेस के गढ रायबरेली में एक जनसभा करेंगे। बाजपेयी ने कहा कि यह ऐतिहासिक रैली होगी। उन्होनें बताया कि पार्टी के लाखों कार्यकर्ता इस रैली में शामिल होंगे। इस जनसभा में योगी आदित्यनाथ, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय और दोनों उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य भी शिरकतl करने वाले हैं।
रायबरेली और अमेठी में पहुंच बनाना चाहती है बाजेपी:-रायबरेली में एक बड़ी रैली को संबोधित करने जा रहे शाह पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें भी करेंगे ताकि 2019 के आम चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों की समीक्षा की जा सके। बीजेपी ने 2014 के आम चुनावों में उत्तर प्रदेश में जोरदार प्रदर्शन किया था लेकिन वह रायबरेली एवं अमेठी सीट नहीं जीत सकी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह अमेठी में जीत दर्ज कर राहुल गांधी को झटका देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव में हारने के बाद नियमित तौर पर अमेठी का दौरा कर रहीं ईरानी ने वहां विकास की कई पहल करने का दावा किया है। अगले आम चुनाव में भाजपा उन्हें अपना उम्मीदवार बना सकती है।
कांग्रेस में पड़ चुकी है दरार!:-पिछले दिनों कांग्रेस में जो कुछ भी हुआ उसके बाद इस बात की सुर्खियां भी तेज हैं कि पार्टी में दरार आ चुकी है। पार्टी से नाराज होकर MLC दिनेश सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। रायबरेली जिले के हरचंदपुर से विधायक राकेश सिंह, रायबरेली के जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया। बता दें अवधेश सिंह पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के इकलौते जिया पंचायत अध्यक्ष थे। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस ने नाराज होकर पार्टी छोड़ने के बाद यह नेता अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं।

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस महाभियोग लाने की तैयारी कर चुकी है। इसके लिए लोकसभा में कांग्रेस ने सभापति वैंकेया नायडू को नोटिस भी दे दिया है। लेकिन आपको इस मामले में सबसे दिलचस्प बात बता दें कि महाभियोग का समर्थन करने वाली कांग्रेस ने 25 साल पहले सत्ता में रहते हुए महाभियोग के प्रस्ताव का विरोध किया था एक रिपोर्ट के मुताबिक 25 साल पहले जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब मई 1993 में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी पर महाभियोग चलाया गया तो अब महाभियोग को लीड करने वाले कपिल सिब्बल ने ही लोकसभा में ही बनाई गई विशेष बार से उनका बचाव किया था, लेकिन आज जब चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर महाभियोग चलाया गया तो उसको विपक्ष की तरफ से कपिल सिब्बल लीड कर रहे हैं।
गिर गया था प्रस्ताव:-कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा मतदान से अनुपस्थित रहने की वजह से यह प्रस्ताव गिर गया था।उस वक्त केंद्र में पी.वी नरसिंहराव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। न्यायमूर्ति रामास्वामी के अलावा साल 2011 में जब कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया तब भी कांग्रेस की ही सरकार थी। सिक्किम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति पी.डी दिनाकरण के खिलाफ भी इसी तरह की कार्यवाही में पहली नजर में पर्याप्त सामग्री मिली थी, लेकिन उन्हें पद से हटाने के लिए संसद में कार्यवाही शुरू होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
7 दलों ने दिया नोटिस:-फिलहाल, कांग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर 'कदाचार' और 'पद के दुरुपयोग' का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को (20 अप्रैल) उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया।राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को महाभियोग का नोटिस देने के बाद इन दलों ने कहा कि 'संविधान और न्यायपालिका की रक्षा' के लिए उनको 'भारी मन से' यह कदम उठाना पड़ा है।
महाभियोग शुरु भी हुआ तब भी विपक्ष की हार तय :-सबसे पहले तो राज्यसभा के सभापति यानि उप राष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू इस प्रस्‍ताव को खारिज कर सकते हैं। दरअसल, इस प्रस्‍ताव के लिए लोकसभा के 100 या उच्‍च सदन यानि राज्‍यपाल के 50 सदस्‍यों के हस्‍ताक्षर जरूरी हैं, लेकिन राज्‍यसभा के सभापति को प्रस्‍ताव को मंजूर करने या उसे खारिज करने का अधिकार है। -अगर रिपोर्ट खिलाफ है तो न्‍यायाधीश की राज्यसभा में पेशी होगी। उसके बाद वोटिंग की जाएगी। प्रस्‍ताव की जीत के लिए 123 वोट जरूरी है, लेकिन अभी जिन 7 दलों ने महाभियोग का प्रस्ताव रखा है, उनके उच्‍च सदन में सिर्फ 78 सांसद हैं। यानी प्रस्ताव गिरना लगभग तय है।-अगर यह प्रस्ताव मंजूर हुआ तो तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा, जोकि आरोपों की जांच करेगी। इस 3 सदस्यीय समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा जज, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक कानून विशेषज्ञ होंगे। समिति आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।-अगर इस मुद्दे पर विपक्ष एक हुआ तो वह राज्‍यसभा में जीत जाएगा, जिसके बाद लोकसभा में पेशी होगी, लेकिन संख्‍याबल के मुताबिक वहां विपक्ष की हार तय है। बड़ी बात यह भी है कि इस प्रक्रिया में 6 महीने से अधिक समय लगेंगे और तब तक चीफ जस्टिस (2 अक्टूबर को) रिटायर हो चुके होंगे।

जी आपने ठीक पढ़ा, करीना कपूर के दिल का टुकड़ा तैमूर अली खान का चेहरा पूरे 10 दिन बाद हमारे सामने आया है। तैमूर अली खान इतने ज्यादा फेमस हो गए हैं और उनकी फोटो की आदत हमें इतनी ज्यादा हो गई है कि अगर एक दिन तैमूर का क्यूट चेहरा नहीं दिखता तो कुछ मिसिंग फील होने लगता है। तैमूर को हमने पिछली बार 10 अप्रैल को देखा था और इसके बाद अब आज उनकी फोटो सामने आई है। तैमूर इस बीच न तो स्कूल के बाहर देखा गया और न ही पार्क या स्विमिंग पूल के पास देखा गया। इतना ही नहीं, गुरुवार शाम को वो अपनी नानी बबीता के बर्थडे सेलिब्रेशन के मौके पर भी ममा करीना और पा सैफ अली खान के साथ भी दिखाई नहीं दिए। इस बात पर हैरानी तो होनी ही थी।आखिरकार, हमने तैमूर को देख ही लिया। तैमूर शाम को करीना के साथ करीश्मा के ऑफिस के बाहर दिखे। वो यहां ऑरेंज शर्ट और ऑरेंज क्लॉग में दिखाई दिए। तैमूर फोटो में हंसमुख और मस्ती भरे मूड में दिखाई दिए। मुंबई की चिलचिलाती गर्मी में पहली बार तैमूर को बाहर देखा गया। शायद, यही वजह है कि तैमूर को बीते दिनों बाहर नहीं देखा गया।तैमूर की इन फोटो को देख किसे प्यार नहीं आ जाएगा। इतने दिन बाद तैमूर की फोटो देख बेहद मजा आया। हां एक बात और तैमूर को इस बार नई नैनी (हेल्पर) भी मिल गई है।

Page 5 of 2546

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें