Editor

Editor


नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (रविवार) को नमो ऐप पर भाजपा के सांसदों और विधायकों को विकास का मंत्र दिया। इस संवाद के दौरान देश के कोने-कोने से सांसदों और विधायकों ने पीएम मोदी के समक्ष अपनी बात रखी और उनसे मार्गदर्शन मांगा। वहीं, पीएम मोदी ने 2019 में होने वाले आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए सांसदों और विधायकों को ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया। पीएम इस दौरान स्वच्छता अभियान और ग्राम स्वराज अभियान की सार्थकता और नए अध्यादेश को लेकर भी बातचीत की।
अगर ट्विटर पर इतने लोग ले आएं सांसद और विधायक...
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि अगर सांसद के अपने इलाके के 3 लाख लोग ट्विटर पर उन्हें (सांसदों) फॉलो करने लगे तो मैं इसी तकनीक के माध्यम से सीधे उनसे बातचीत करने को तैयार हूं। विधायकों के बारे में उन्होंने कहा कि 1-2 लाख स्थानीय लोग ट्विटर पर उन्हें (विधायकों) फॉलो करने लगे तो उनसे भी बात की जाएगी। उन्होंने कहा कि 'समय देने में देर हो सकती है पर मुझे स्थानीय लोगों से सीधे बात करने में आनंद आएगा'।
किसनों पर ध्यान देने की जरूरत
पीएम ने सांसदों और विधायकों से बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दवाई और युवाओं की कमाई पर ध्यान केंद्रित करने का मंत्र दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, ताकि वो और बेहतर जीवन जी सके। उन्होंने नेताओं से कम से कम एक गांव में बदलाव लाने के लिए खुद प्रयास करने को कहा। पीएम ने बताया कि वह अपने संसदीय क्षेत्र में इस तरह के कार्यों को बड़ी तल्लीनता से देख रहे हैं।
अन्ना हजारे के गांव से सीख लें
पीएम ने सांसदों और विधायकों को गांव का विकास करने के लिए अन्ना हजारे के गांव से सीख लेने की सलाह दी। उन्होंने गांव की शक्ति को जगाने और विकास से उसे जोड़ने की बात कही। उन्होंने साफ-सफाई और टीकाकरण पर सांसदों और विधायकों को विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने नेताओं से कहा कि वह किसानों के लिए हो रहे कामों का प्रचार करें और 8-10 गांवों के बीच एक वेलनेस सेंटर बनाएं।
PM ने कहा कि हमें गांव के हर घर में एलइडी बल्ब, किसान को सोलर पंप लगवाने के लिए प्रयास करना चाहिए, जिससे उनका पैसा बचे। उन्होंने गांव में सीधे यूरिया खाद पहुंचाने की बात कही, जिससे किसानों का आनेजाने का पैसा बचे। पीएम ने कहा कि किसानों को बीमा कराने के लिए भी प्रेरित करें। बता दें कि यह पहली बार नहीं था जब मोदी ने ऐप के जरिए बातचीत की है। पिछले कुछ समय से लगातार पीएम अपने सांसदों से संवाद कर रहे हैं।


नई दिल्ली - राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ दुष्कर्म पर फांसी की सजा को मंजूरी दी। शनिवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मोदी सरकार ने बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पॉक्‍सो एक्‍ट) में संशोधन कर आरोपी को फांसी की सजा पर मुहर लगाई थी। जिसके बाद संशोधित पाक्सो एक्ट को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था।
पॉक्सो एक्ट में फांसी की सजा
कठुआ में पिछले दिनों हुई दुष्‍कर्म की घटना के बाद ऐसे आरोपियों को सख्‍त सजा देने की मांग की गई। कानून में बदलाव के बाद 12 साल तक बच्ची के साथ दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा होगी। पॉक्सो के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, दोषियों के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है और न्‍यूनतम सात साल की जेल है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आता है। इसके तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गयी। यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है।
नए कानून में क्या होगा?
- नए कानून के मुताबिक, नाबालिगों से दुष्कर्म के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की व्यवस्था की जाएगी।
- फॉरेंसिक जांच के जरिए सबूतों को जुटाने की व्यवस्था को और मजबूत करने की व्यवस्था भी की जाएगी।
- दो महीने में ट्रायल पूरा करना होगा, अपील दायर होने पर 6 माह में निपटारा करना होगा
- नाबालिग के साथ दुष्कर्म के केस को कुल 10 महीने में खत्म करना होगा
अध्यादेश की 5 मुख्य बातें
1. दुष्कर्म के मामलों में न्यूनतम सात साल के सश्रम कारावास को बढ़ाकर 10 वर्ष किया, अधिकतम इसे आजीवन भी किया जा सकेगा।
2. 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को न्यूनतम 20 साल की सजा।
3. 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों को मृत्युदंड।
4. दो माह में पूरी करनी होगी दुष्कर्म कांड की जांच, दो माह में पूरा करना होगा ट्रायल।
5. 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म के आरोपी को नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत।
जांच और केस का निपटारा
- दुष्कर्म के सभी मामलों में जांच दो महीने में पूरी करना होगी।
- इन सभी मामलों में ट्रायल भी दो महीने में पूरी होगी।
- छह महीने में अपीलों का निपटारा होगा।
- 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के आरोपितों को अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी।
- इस मामले में जमानत की अर्जियों पर फैसला से पहले कोर्ट सरकारी वकील तथा पीड़िता के प्रतिनिधि को 15 दिन का नोटिस देगा।
- मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए राज्य तथा हाई कोर्ट की सलाह से नए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे।
- सरकारी वकील के नए पद सृजित होंगे तथा दुष्कर्म केसों के लिए सभी थानों व अस्पतालों को विशेष फॉरेंसिक किट दी जाएंगी।
- दुष्कर्म मामलों के लिए सभी राज्यों में एक्सक्लूसिव विशेष फॉरेंसिक लैब बनेंगे।
- ये सभी कदम तीन महीने के भीतर मिशन मोड प्रोजेक्ट के रूप में उठाए जाएंगे।
कानून बनने के लिए मानसून सत्र का करना होगा इंतजार
कठुआ, सूरत और उन्नाव में मासूम बेटियों के साथ दुष्कर्म की वीभत्स घटनाओं से देशभर में फैले आक्रोश के मद्देनजर सरकार ऐसे मामलों में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने और दोषियों को कठोर दंड दिलाने के लिए एक अध्यादेश लेकर आई है। इसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में 'क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2018' को मंजूरी दे दी गई, जिसमें ये प्रावधान किए गए हैं। आज (शनिवार) को इस अध्यादेश को राष्ट्रपति से भी मंजूरी मिल गई है। अब अधिसूचना जारी होने के बाद कानून के तौर पर लागू हो जाएगा। लेकिन अब विधेयक लाकर उसे संसद से पारित कराने के लिए सरकार को जुलाई-अगस्त तक मानसून सत्र के लिए इंतजार करना पड़ता, इसलिए यह अध्यादेश लाया गया है। लेकिन अध्यादेश को संसद के अगले सत्र में विधेयक के रूप में पारित कराना आवश्यक होगा।
अध्यादेश में दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए भी व्यवस्था की गई है। दुष्कर्म के मामलों की जांच दो माह में पूरी करनी होगी, वहीं दो माह के भीतर इसका ट्रायल पूरा करना होगा। ऐसे मामलों में अपील के निपटारे के लिए छह माह की अवधि तय की गई है। इसका मतलब यह है कि अपराधियों को एक साल से भी कम समय में सजा हो जाएगी। विशेष बात यह है कि 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को अग्रिम जमानत भी नहीं मिलेगी। अदालत को ऐसे आरोपियों की जमानत पर फैसला करने से 15 दिन पहले लोक अभियोजक या पीड़िता के प्रतिनिधि को नोटिस देना होगा।
यौन अपराधियों का बनेगा डेटाबेस, भारत होगा नौवां देश
अध्यादेश में यौन अपराधियों को ट्रैक करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर उनका डेटाबेस और प्रोफाइल बनाने का भी प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय अपराध नियंत्रण ब्यूरो (एनसीआरबी) यह डेटाबेस रखेगा। यौन अपराधियों का डेटाबेस बनाने वाला भारत दुनियाभर में नौवां देश होगा। फिलहाल अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिडाड और टोबेगो में यौन अपराधियों का इस तरह का डेटाबेस रखा जाता है। अमेरिका में यह डेटाबेस सार्वजनिक होता है जबकि अन्य देशों में इसका इस्तेमाल सिर्फ कानून प्रवर्तनकारी एजेंसियां ही करती हैं।
निर्भया कांड के बाद हुआ था कानून में संशोधन
दिसंबर, 2012 में हुए निर्भया सामूहिक दुष्कर्म कांड के बाद आपराधिक कानून में संशोधन किया गया था, जिसके तहत दुष्कर्म के मामलों में पीड़िता की मौत या उसका जीवन 'निष्क्रय' हो जाने की स्थिति में दोषियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान वाला अध्यादेश लाया गया था। बाद में यह आपराधिक कानून संशोधन एक्ट बना था।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की एक जनहित याचिका लंबित है जिसमें छोटे बच्चों के साथ दुष्कर्म पर चिंता जताते हुए कानून को कड़ा किये जाने की मांग की गई है। कोर्ट ने इस याचिका पर सरकार से जवाब मांगा था। सरकार की ओर से शुक्रवार को एडीशनल सालिसिटर जनरल के जरिये एक नोट पेश कर बताया गया कि सरकार पोक्‍सो कानून में संशोधन कर 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से दुष्कर्म के दोषी के लिए मृत्युदंड का प्रावधान करने पर विचार कर रही है।


नई दिल्ली - महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया गया। जिसमें पुलिस ने 14 नक्सलियों को ढेर कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस की इस कार्रवाई में नक्सली नेता साईनाथ और सिनू भी मारे गए। गढ़चिरौली जिले के इटापल्ली के बोरीया वन क्षेत्र में महाराष्ट्र पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में ये नक्सली मारे गए। माना जा रहा है कि नक्सलियों के खिलाफ यह इस साल अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन है। इससे पहले मार्च में छत्तीसगढ़ में 10 नक्सली मारे गए थे। इनमें छह महिला कमांडर थीं।
यह मुठभेड़ रविवार को सुबह 11 बजे हुई। मारे गए नक्सलियों में कुछ डीवीसी और कमांडर भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार मारे गए नक्सलियों की संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि मुठभेड़ स्थल का सर्चिंग अभियान फिलहाल जारी है। पुलिस ने क्षेत्र मे सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
बता दें कि गढ़चिरौली में सुरक्षाबलों के जवान के अलावा स्थानीय लोग भी नक्सलियों के निशाने पर रहते हैं। बीते दिनों से महाराष्ट्र पुलिस राज्य के इस नक्सल प्रभावित इलाकों में सक्रिय नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रही थी। इस इलाके में ग्रामीणों और नक्सलियों के बीच अक्सर संघर्ष की खबरें आती हैं इसलिए इलाके से नक्सलियों की सफाई के लिए पुलिस की तरफ से यह अभियान चलाया गया।
नक्सली गतिविधियों में आई कमी
गौरतलब है कि पहले के मुकाबले देश में नक्सली गतिविधियों में कमी देखने को मिली है। नक्सल प्रभावित देश के 126 जिलों में से सरकार ने 44 जिलों को नक्सल मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। हालांकि, 8 नये जिले नक्सल प्रभावित इलाके में शामिल भी किए गए हैं। सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 35 से घटकर 30 पहुंच गई है। बिहार और झारखंड के पांच जिले अति नक्सल प्रभावित टैग से मुक्त हो गए हैं।

 


इंदौर - इंदौर में पांच माह की बच्ची से दरिंदगी करने वाले आरोपित नवीन को फांसी के तख्ते पर पहुंचाने के लिए उसकी पत्नी आगे आई है। उसने जांच कर रही एसआईटी को बयान दिया कि पति नवीन ने हमारी जिंदगी तबाह कर दी थी। मेरी दो बच्चियों पर भी बुरी नजर रखता था। उनकी सुरक्षा के लिए घर छोड़ना पड़ा। मेरा पति घर ही नहीं बल्कि समाज में भी रहने लायक नहीं है। उसे फांसी की सजा होनी चाहिए। एसआईटी ने पत्नी के बयान के अलावा मृतका के माता-पिता व अन्य परिचितों के बयान लिए है। वहीं, इस घटना को लेकर पूरा शहर आंदोलित है। सामाजिक संगठन, सभी राजनीतिक दल और आम जनता घरों से निकलकर सड़क पर प्रदर्शन के लिए उतरी है। रविवार को भी यह सिलसिला जारी रहा।
20 अप्रैल तड़के 4:45 बजे शहर के बीचोबीच हाई सिक्योरिटी जोन कहे जाने वाले राजवाड़ा के पास परिवार के साथ सो रही बच्ची का आरोपित नवीन उर्फ पैरू घड़के निवासी गाडराखेड़ी ने अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया। उसके बाद उसने बच्ची को मौत के घाट उतारकर शिवविलास पैलेस के श्रीनाथ कांप्लेक्स के तलघर में फेंक दिया था। उसी दिन शाम साढ़े 6 बजे नवीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वह फिलहाल दो दिन की पुलिस रिमांड पर है। बच्ची के केस व अन्य अपराधों के बारे में टीम उससे पूछताछ कर रही है। शनिवार को जब आरोपित को कोर्ट में पेश किया गया तो तो वकील सहित अन्य लोगों का आक्रोश उस पर फूट पड़ा। पुलिस सुरक्षा में ही आरोपित की इन लोगों ने कोर्ट कैंपस में जमकर पिटाई कर दी।। अभिभाषक संघ के अध्यक्ष दिनेश पांडे ने बताया कि संघ ने आरोपित की तरफ से पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है। अभिभाषक संघ के अध्यक्ष दिनेश पांडे ने बताया कि संघ ने आरोपित की तरफ से पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है।
एसआईटी को 15 दिन के अंदर केस की पूरी जांच कर कोर्ट में चालान पेश करना है। शनिवार रात चालान डायरी बनाने की तैयारी शुरू हुई। टीआई शिवपाल सिंह कुशवाह सुबह से लेकर रात तक सराफा थाने में डायरी बनाने में लगे रहे। रात को टीम ने बयान के लिए मृतका के माता-पिता, मामा व मौसी को बयान के लिए सराफा थाने बुलाया। वहीं, नवीन की पत्नी के भी बयान लिए गए। उसने नवीन के खिलाफ बयान दिए और अफसरों से कड़ी से कड़ी सजा की मांग की। उसने कहा कि जांच में मैं पुलिस के साथ हूं।
जीजा से करवाई आरोपित साले की पहचान
नवीन की तीन बहने है जिनमें बडी बहन के पति यानी जीजा को पुलिस सराफा थाने ले गई। वहां पुलिस रिकॉर्ड के लिए जीजा से आरोपित नवीन की पहचान करवाई। उसके बाद उन्हें घर रवाना कर दिया।
जिसे पिता माना था वही रखता था बुरी नजर, मां ने बचा लिया
दरिंदे को पिता के रुप में माना था, लेकिन उसने कभी हमें बेटियां नहीं माना। घर में जब वह रहता था तो घूरता था। एक-दो बार उसने हमें गलत तरीके से भी छुआ। जब यह बात हमने मां को बताई तो उन्होंने उससे रिश्ता तोड़ लिया। मां ने हमें बचा लिया, वरना वह हमें भी नहीं छोड़ता। यह खुलासा किया मप्र के इंदौर में पांच माह की बच्ची के साथ हैवानियत करने वाले आरोपित नवीन उर्फ पैरू घड़के निवासी गाडराखड़ी की दूसरी पत्नी की दोनों बेटियों ने। रेखा की पहले पति से 10 व 12 साल की दो बेटियां हैं।
नशे के बाद खुद को करता था लहूलुहान
नवीन ब्राउन शुगर, गांजा, अफीम, चरस, शराब और नाइट्रावेट सहित सभी तरह का नशा करता है। वह नशा करने के बाद अपने शरीर को ब्लेड या चाकू से काटकर लहूलुहान करता था। उसके दोनों हाथ, सीने और पेट पर 60 से ज्यादा निशान हैं।
दुष्कर्म पीड़िता का अंतिम संस्कार करने के लिए मांगे स्र्पए
जब परिजन बच्ची का शव लेकर जूनी इंदौर स्थित बच्चों के श्मशान गए। वहां शव दफनाने के लिए उनसे रुपए मांग लिए गए। मना करने पर अंतिम संस्कार से मना कर दिया। बाद में पुलिस अफसरों ने सिपाही को भेजकर अंतिम संस्कार करवाया। पुलिस ने बताया कि मृतका के माता-पिता भी शराब के आदी हैं। प्रशासन ने बच्ची के अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपयों की घोषणा की थी, लेकिन परिवार का बैंक में खाता नहीं होने से अफसर परिजन को राशि नहीं दे पाए। उन्हें आशंका थी कि नकद रुपए देने पर वे शराब न पी जाएं।

 


नई दिल्ली - दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने नौ दिन बाद रविवार को अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। स्वाति ने छोटी-छोटी बच्चियों के हाथ से जूस पीकर अनशन समाप्त करने की घोषणा की। स्वाति बीते 13 अप्रैल से दिल्ली के समता स्थल पर अामरण अनशन कर रही थीं।
स्वाति मालिवाल ने अपना अनिश्चितकाल अनशन खत्म करने के बाद कहा कि पहले मैं अकेले लड़ रही थी, लेकिन फिर देशभर के लोगों ने मुझे समर्थन दिया था। मुझे लगता है कि यह स्वतंत्र भारत में एक ऐतिहासिक जीत है। मैं इस जीत पर सभी को बधाई देती हूं।
उन्होंने कहा कि हर दिन बच्चियों के साथ जघन्य अपराध हो रहे हैं। इस पर कड़ा कानून बनवाने के लिए मैं हर जगह दौड़ी, सबसे गुहार लगाई और फिर थक-हारकर अनशन पर बैठ गई। स्वाति ने कहा, ''मुझसे नहीं देखा जाता कि 8 माह, 6 माह, 8 साल, 11 साल की बच्चियां कुचल दी जाती हैं।''
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि मुझे नहीं पता था कि इस लड़ाई में जम्मू-कश्मीर से लेकर राजस्थान, ओडिशा सहित पूरा देश मेरे साथ आ जाएगा। आज इसी का नतीजा है कि प्रधानमंत्री को विदेश यात्रा से आते ही कैबिनेट की स्पेशल बैठक बुलानी पड़ी।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामलों में दोषी व्यक्तियों को मृत्युदंड तक की सजा देने संबंधी अध्यादेश को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को उस अध्यादेश को अपनी स्वीकृति दी थी जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार करने के दोषी ठहराए गए व्यक्ति के लिए मौत की सजा सुनाए जाने की अदालत को इजाजत दी गई है।
गजट अधिसूचना में कहा गया है कि संसद का सत्र अभी नहीं चल रहा है और राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि जो परिस्थितियां हैं उनमें यह आवश्यक था कि वह तत्काल कदम उठाएं। इसके अनुसार संविधान के अनुच्छेद 123 के उपखंड (1) में दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति ने इस अध्यादेश को मंजूरी दी है।
ये थी स्वाति मालीवाल की मांग
गौरतलब है कि दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल जम्मू-कश्मीर के कठुआ गैंगरेप और उन्नाव केस के आरोपियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर 13 अप्रैल से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी थी। स्वाति की मांग थी कि रेप के आरोपियों को छह महीने के भीतर फांसी की सजा का प्रावधान किया जाए।
स्वाति फरवरी से रेप रोको अभियान चला रही हैं। इसी के तहत वह केंद्र सरकार से बच्चों के मामले में एक सख्त कानून लाने की मांग कर रही थी, जिससे कि बच्चों के साथ रेप करने वालों की कार्रवाई फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में हो। बच्चों से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद और दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को फांसी दी जाए।


काबुल - अफगानिस्तान एक बार फिर आतंकी हमलों से दहला गया। रविवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आत्मघाती हमला हुआ है। इस धमाके में 31 लोगों की मौत हुई है, जबकि 50 लोगों के घायल होने की खबर है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि रविवार को हुए हमले में मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है। काबुल के कार्यवाहक पुलिस चीफ मोहम्मद दाऊद आमीन ने जानकारी दी कि आइडी डिस्ट्रिब्यूशन ऑफिस के दरवाजे पर एक एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। अभी तक किसी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
बता दें कि पिछले हफ्ते कई वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर्स पर धमाके हुए थे। गुरुवार को अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने घोर प्रांत के वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर पर हमला कर दिया था और दो अधिकारियों को अगवा भी कर लिया था। इस हमले के पीछे तालिबान का हाथ होने की आशंका थी।
गौरतलब है कि अफगानिस्तान में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं, इसलिए 4 अप्रैल को वोटर रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ था। इस बीच अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों ने चुनाव अधिकारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, इस तरह के हालात से निपटने के लिए अफगान पुलिस और सेना के जवानों को पोलिंग बूथ पर आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए स्पेशल ट्रैनिंग भी दी जा रही है।


इंदौर - पांच माह की बच्ची की मौत की गुत्थी सिर्फ 20 मिनट में तब सुलझ गई, जब पुलिस के पास फुटेज आए। रेखा ने फुटेज देख पति (नवीन) के रूप में पहचान की। सीएसपी बीपीएस परिहार ने बताया कि फुटेज से आरोपित की शिनाख्त करवानी थी।
राजवाड़ा पर फुग्गे बेचने वालों को उसे दिखाकर पूछताछ की। तब वहां रेखा नामक महिला ने उसकी शिनाख्त पति नवीन के रूप में की। फुटेज देख बच्ची की मां व रेखा ने एकदूसरे का मुंह देखा। पूछताछ में पहले तो रेखा खामोश रही। फिर मनोवैज्ञानिक तरीका अपनाया तो उसे आंसू आ गए। उसने कहा इस दरिंदे से हम भी परेशान हैं, उसे फांसी देना चाहिए। उसके बाद रेखा टीम के सिपाही जवाहर सिंह और सुरेश कुशवाह को उसके गाडराखेड़ी स्थित घर ले गई।
पुलिस को देख भागने लगा
पुलिस शाम 6.30 बजे गाडराखेड़ी पहुंची तो घर के पास चौराहे पर ही नवीन बैठा दिखा। वह पुलिस को देख भागने लगा। पकड़े जाने पर उसने कहा- 'मुझे छोड़ दो, मैं काली माता के मंदिर दर्शन करने जा रहा हूं। थाने में सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने जुर्म कबूल लिया। उसने कहा कि मैंने जो किया उसका मुझे कोई 'गम नहीं है, बदला लेना था मुझे। आरोपी ने कहा कि दर्द देने में आता है मजा।
ब्लेड और चाकू के 60 से ज्यादा निशान
नवीन ब्राउन शुगर, गांजा, अफीम, चरस, शराब और नाइट्रावेट सहित सभी तरह का नशा करता है। वह नशा करने के बाद अपने शरीर को ब्लेड या चाकू से काटकर लहूलुहान करता था। उसके दोनों हाथ, सीने और पेट पर 60 से ज्यादा निशान हैं। उसके पड़ोसी सुनील भाकसे ने बताया वह 12 साल की उम्र से नशा करता है। उसके पांच महिलाओं से संबंध है। एक को छोड़कर दूसरी के पास चला जाता है। वह बड़वाली चौकी स्थित चाय दुकान पर काम करता था। उसकी गंदी हरकतों को देखकर दुकान मालिक ने उसे दो साल पहले निकाल दिया था।
नाना टीआई थे, मां बेचती थी अवैध शराब
नवीन के पिता का पूर्व में ही देहांत हो चुका है। परिवार में मां शशिकला, बहन रंजीता, मुनमुन, चंचल और भाई नीरज व विक्की है। उसके नाना जनकोजी रॉव घोड़पड़े उज्जैन के नागझिरि में टीआई रह चुके है। मां अवैध शराब बेचती थी। घर से ही उसे शराब पीने की लत लगी। बहन रंजीता ने बताया पैरू से अब कोई संबंध नहीं है। वह घर में था तो नशा करता था और मां-बहनों को ही पीटता था। चोरी करना, लोगों को पीटना उसकी आदत हो गई थी। उसे 15 साल की उम्र से ही घर से भगा दिया। फिर कभी वह बिजासन तो कभी चोइथराम मंडी में डेरों वालों के साथ रहने लगा। कभी-कभी गाडराखेड़ी भी आता था।
25 हजार की घोषणा, पीड़ित परिवार का खाता नहीं
पुलिस ने बताया कि मृतका के माता-पिता भी शराब के आदी हैं। प्रशासन ने बच्ची के अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपयों की घोषणा की थी, लेकिन परिवार का बैंक में खाता नहीं होने से अफसर परिजन को राशि नहीं दे पाए। उन्हें आशंका थी कि नकद रुपए देने पर वे शराब न पी जाएं।
बच्ची के भाई-बहनों के नाम होगी दो लाख की एफडी
डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने छह घंटे में आरोपी को पकड़ने वाली टीम को इनाम देने की घोषणा की है। डीआईजी मध्यप्रदेश प्रतिकर योजना की स्थानीय समिति के सदस्य भी हैं। उन्होंने बताया मध्यप्रदेश पीड़ित प्रतिकर अधिनियम 2015 के अंतर्गत पीड़ित या उसके परिवार को 2 लाख स्र्पए की सहायता राशि दी जाती है।
हम ज्यादा से ज्यादा राशि परिवार को दिलाने की कोशिश करेंगे। जो राशि मिलेगी उससे मृतक बच्ची के भाई-बहनों के नाम एफडी कराई जाएगी, जो उनकी पढ़ाई में काम आ सके। वहीं कलेक्टर पीड़ित परिवार के लिए रेडक्रॉस सोसायटी से 25 हजार रुपए की सहायता राशि देंगे। इसके लिए दंपती का बैंक खाता खुलवाया जा रहा है।
पीड़िता का अंतिम संस्कार करने के लिए मांगे रुपए
बच्ची के साथ हुई दरिंदगी में शहरवासी आंसू बहा रहे हैं। सभी की संवेदनाएं बच्ची से जुड़ गईं। वहीं, शमशान घाट पर अंतिम संस्कार करने वालों ने उस समय इंसानियत को तार-तार कर दिया। जब परिजन बच्ची का शव लेकर जूनी इंदौर स्थित बच्चों के श्मशान गए।
वहां शव दफनाने के लिए उनसे रुपए मांग लिए गए। मना करने पर अंतिम संस्कार से मना कर दिया। बाद में पुलिस अफसरों ने एमजी रोड के सिपाही जवाहर सिंह को मौके पर भेजकर अंतिम संस्कार करवाया। इधर, बच्ची के परिजन की मदद को लेकर आगे आए प्रॉपर्टी ब्रोकर धीरज ठाकुर ने 21 हजार रुपए दिए।
बनाता रहा अलग-अलग कहानियां
आरोपित से एसआईटी टीम ने भी पूछताछ की। शुक्रवार शाम 7 बजे से शनिवार सुबह 5.30 बजे तक उससे एमजी रोड, सदर बाजार और सराफा में पूछताछ चलती रही। टीम प्रभारी और भंवरकुआं थाना टीआई शिवपालसिंह कुशवाह रात में सदर बाजार थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि पहले तो आरोपित अलग-अलग कहानियां गढ़ता रहा। कभी उसने कहा उसने कुछ नहीं किया। फिर कहने लगा कि कुत्ता बच्ची को मुंह में दबाकर ले गया था। वह तो उसे बचा रहा था।
बच्ची का भाई निकला कुपोषित, मां बेटे को लेकर गायब
शनिवार सुबह मध्यप्रदेश बाल संप्रेक्षण आयोग की सदस्य अंजू मिश्रा, चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी (सीडब्ल्यूसी) की अध्यक्ष माया पांडे टीम के साथ राजवाड़ा पहुंचीं। यहां मृतक बच्ची का परिवार उन्हें मिल गया। मृतका की 5 वर्षीय बहन और दोनों भाई मां की गोद में थे। इनमें ढाई साल का बच्चा कुपोषित था।
टीम ने आसपास के लोगों से जानकारी ली तो पता चला मां बच्चों को दिखाकर लोगों से भीख मांगती है। उसके अन्य रिश्तेदार भी यही काम करते हैं। इस पर टीम ने अच्छी परवरिश के लिए बच्चों को सीडब्ल्यूसी को सौंपने के लिए कहा।
दो बच्चे तो उसने सौंप दिए, लेकिन तीसरे बच्चे को देने की बात कहकर वह गायब हो गई। टीम अब उसकी तलाश कर रही है। वहीं, उन्हीं की एक रिश्तेदार महिला ने अपने तीन बच्चे टीम को सौंप दिए। पांचों बच्चों का एमवाय अस्पताल में मेडिकल करवाया गया। उन्हें छावनी स्थित होस्टल में रखा जाएगा।
हत्या के बाद साइकिल पर घूमता रहा आरोपी
पुलिस अफसरों ने वारदात के बाद पैरू की मनोदशा व दिनचर्या के बिंदु पर भी जांच की। उससे पूछताछ के बाद सीएसपी बीपीएस परिहार ने उसकी दिनचर्या बताई।
सुबह 5 बजे : हत्या के बाद पैरू साइकिल लेकर राजवाड़ा से सदर बाजार इलाके में घूमता रहा। इस दौरान उसने शराब पी।
सुबह 8 बजे : गाडराखेड़ी स्थित घर पहुंचा। वहां अधिक लोग थे तो उसने गुपचुप तरीके से कपड़े बदलकर छिपा दिए।
8.30 बजे : बिना नहाए पैरू काली माता मंदिर गया। वहां करीब एक घंटे तक बैठा रहा।
9.30 बजे : मंदिर से दोबारा गाडराखेड़ी लौटा। वह नहाया और खाना खाकर सो गया। इस बीच उसने घरवालों से ज्यादा बातचीत नहीं की।
दोपहर 2 बजे : पैरू ने परिवार वालों के जरिए मृतका के परिजन ने संपर्क किया। उन्होंने कहा कि बच्ची नहीं मिल रही है। बच्ची के बारे में पता चले तो बताना। उन्होंने पैरू के बारे में भी पूछा, लेकिन परिजन ने कहा कि वह सोया है। उसे उठाकर बच्ची को ढूंढने के लिए राजवाड़ा भेजते हैं।
दोपहर 2.30 बजे: पैरू को परिजन ने उठाया। उसे बच्ची के लापता होने की बात कही। इस पर पैरू ने राजवाड़ा जाकर बच्ची को तलाशने की बात कही।
शाम 6.30 बजे : वह तैयार हुआ और बच्ची को ढूंढने के बहाने से घर से निकल गया। तीन घंटे तक वह नशा करके गाडराखेड़ी इलाके के आसपास घूमता रहा। शाम को चौराहे पर आकर बैठ गया। पुलिस आई तो पकड़ा गया।


नई दिल्ली - बैंकों से लोन लेकर विदेश भागने वाले नीरव मोदी व विजय माल्या जैसे मामलों में कर्ज की वसूली सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 'द फ्यूजीटिव इकनॉमिक ऑफेंडर आर्डीनेंस-2018' को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को इसके मसौदे पर मुहर लगायी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और गजट में अधिसूचना जारी होने के बाद यह अध्यादेश लागू हो जाएगा। इसके तहत भगोड़े अपराधियों की देश-विदेश स्थित संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान है।
मोदी सरकार ने संसद के बजट सत्र में 12 मार्च को लोक सभा में 'द फ्यूजीटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर बिल-2018' पेश किया था लेकिन विपक्षी दलों के लगातार विरोध-प्रदर्शन के चलते संसद में बने गतिरोध की वजह से यह पारित नहीं हुआ। यही वजह है कि सरकार को अब यह अध्यादेश लाना पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे विदेश यात्रा से लौटे और आते ही उन्होंने कैबिनेट की बैठक बुलाकर यह अध्यादेश जारी करने के लिए वित्त मंत्रालय के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी।
अगर कोई अपराधी कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए देश से बाहर भाग जाता है तो उसे भगोड़ा घोषित किया जाएगा और विदेशों में स्थित उसकी संपत्ति को जब्त करने के लिए संबंधित देशों से सहयोग किया जाएगा। बैंकों का 100 करोड़ रुपये बकाया कर्ज लेकर भागने वाले अपराधियों के साथ-साथ एक निश्चित श्रेणी के अपराध भी इसके दायरे में आएंगे। खास बात यह है कि ऐसे अपराधियों की संपत्ति उनके दोषी सिद्ध करार दिए जाने से पहले ही जब्त की जा सकेगी। ऐसे अपराधियों पर मनी लॉंड्रिंग कानून के तहत कार्रवाई होगी।
इस अध्यादेश के तहत उस व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी माना जाएगा जिसके खिलाफ एक अधिसूचित अपराध जैसे जाली सरकारी स्टांप या करेंसी, खाते में अपर्याप्त राशि होने के चलते चैक बाउंस होने, मनी लांड्रिंग और लोन का फ्रॉड करने जैसे मामलों में अदालत ने वारंट जारी किए हैं और उसने आपराधिक अभियोग से बचने के लिए देश छोड़ दिया है। अधिसूचित अपराधों का मतलब इस अध्यादेश की सूची में दिए गए आर्थिक अपराधों से है।
अध्यादेश के प्रावधानों के अनुसार पीएमएलए के तहत नियुक्त एक निदेशक या उपनिदेशक विशेष अदालत में संबंधित आरोपी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए अर्जी देगा। इसमें भगोड़ा घोषित किए जाने वाले व्यक्ति के पते-ठिकाने के साथ-साथ उन संपत्तियों की सूची भी होगी जिन्हें जब्त किया जाना है। इसमें बेनामी संपत्ति के साथ-साथ विदेशों में स्थित संपत्ति का ब्यौरा भी होगा। आवेदन मिलने के बाद विशेष अदालत उस व्यक्ति को छह सप्ताह के भीतर पेश होने को नोटिस जारी करेगी। अगर वह व्यक्ति पेश नहीं होता है तो उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया जाएगा।
मोदी सरकार ने आम बजट 2017-18 में भी इस तरह का विधेयक लाने की घोषणा की थी। इसके बाद ही इस साल मार्च के शुरु में कैबिनेट ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी।
ये हैं अध्यादेश की मुख्य बातें:
1. विशेष अदालत आर्थिक अपराधी को भगोड़ा घोषित करेगी।
2. भगोड़ा आर्थिक अपराधी की संपत्ति अटैच होगी।
3. विशेष अदालत भगोड़ा आर्थिक अपराधी को नोटिस जारी करेगी।
4. भगोड़ा अपराधी की देश-विदेश में स्थित बेनामी सहित हर तरह की संपत्ति जब्त की जाएगी।
5. कोई भी दीवानी दावा नहीं कर पाएगा भगोड़ा आर्थिक अपराधी
6. इस कानून के तहत जब्त संपत्ति के प्रबंधन और निपटान के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया जाएगा।


मुंबई - 1993 मुंबई धमाकों के दोषी अंडरव‌र्ल्ड डॉन अबू सलेम की 5 मई को प्रस्तावित शादी अब नहीं हो पाएगी। नवी मुंबई की तलोजा जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे आजमगढ़ (उप्र) निवासी डॉन की पैरोल की अर्जी कोंकण के डिवीजनल कमिश्नर ने खारिज कर दी है। सलेम ने ठाणे की मुंब्रा निवासी महिला से शादी करने के वास्ते पैरोल पर 40 दिनों के लिए रिहा करने की अपील की थी।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। उक्त अधिकारी के अनुसार, सलेम ने पैरोल पर रिहाई के लिए करीब एक महीने पहले आवेदन किया था। तीन दिन पहले डिवीजनल कमिश्नर ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उसकी अर्जी खारिज कर दी। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सलेम ने चूंकि अपना पता मुंब्रा का दर्ज कराया है, इसलिए अर्जी खारिज करने से पूर्व कमिश्नर ने ठाणे पुलिस से डॉन की सुरक्षा को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। ठाणे पुलिस ने रिहाई के दौरान मुंब्रा में डॉन की जान पर खतरे की आशंका जताई थी।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि सलेम तीसरी बार शादी करने जा रहा था। 5 मई को उसकी शादी उसी महिला से होनी थी, जिसने 2015 में टाडा कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि वह डॉन से शादी करना चाहती है। इस महिला ने यह भी दावा किया था कि 2014 में उप्र जाने के दौरान उसने सलेम से ट्रेन में ही शादी कर ली थी। ध्यान रहे कि मुंबई धमाकों के बाद अबू सलेम फरार हो गया। 2005 में उसे पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। पिछले वर्ष सितंबर में विशेष टाडा कोर्ट ने सलेम व चार अन्य को 1993 मुंबई धमाकों का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।


पटना - भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और नरेंद्र मोदी सरकार की अक्सर खुलकर आलोचना करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने आज भाजपा से अलग होने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अब ' देश में लोकतंत्र बचाने के लिए काम करेंगे। सिन्हा ने कहा , '' भाजपा के साथ मेरा लंबा संबंध रहा है। आज मैं भाजपा के साथ अपना संबंध खत्म कर रहा हूं।
उन्होंने यहां एक बैठक में भाजपा छोड़ने की घोषणा की। इस बैठक में कांग्रेस , राजद और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेता तथा भाजपा के खिलाफ बागी रुख रखने वाले पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भी मौजूद थे। भाजपा से अलग होने के ऐलान के साथ ही यशवंत सिन्हा ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे।
उन्होंने कहा, ''मैं इस मंच से घोषणा कर रहा हूं कि चार साल पहले मैंने चुनावी राजनीति छोड़ी थी और आज मैं दलगत राजनीति से संन्यास ले रहा हूं। सिन्हा द्वारा गठित ' राष्ट्रीय मंच द्वारा आज विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक का आयोजन किया गया था। इसमें आम आदमी पार्टी , समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
सिन्हा ने कहा , '' मैं अब किसी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं बनूंगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक सिन्हा ने कहा कि वह देश में ' लोकतंत्र बचाने के लिए मजबूत आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के तहत लोकतंत्र खतरे में है। नौकरशाही से राजनीति में कदम रखने वाले सिन्हा का जन्म छह नवंबर 1937 को पटना में हुआ था।
वह 1960 में भारतीय प्रशासनिक सेवा ( आईएएस ) के अधिकारी बने और बिहार सरकार तथा केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन किया। बतौर नौकरशाह अपने 24 साल की अवधि के दौरान वह 1977 में बिहार के मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के प्रधान सचिव रहे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण से प्रभावित सिन्हा ने 1984 में आईएएस की नौकरी छोड़ दी और जनता पार्टी के सदस्य के तौर पर सक्रिय राजनीति में शामिल हो गए। वह 1986 में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने और 1988 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।
वह 1989 में जनता दल का गठन होने पर इसके महासचिव बने। वह चंद्रशेखर की सरकार में नवंबर , 1990 से जून , 1991 तक वित्त मंत्री रहे। जनता दल में बिखराव के बाद सिन्हा भाजपा में शामिल हो गए और जून , 1996 में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाये गए। वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्त और विदेश मंत्री रहे।
सिन्हा ने 2014 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। इस चुनाव में उनके पुत्र जयंत सिन्हा झारखंड की हजारीबाग सीट से भाजपा के टिकट पर लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए। जयंत सिन्हा मौजूदा समय में नरेंद्र मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री हैं। इससे पहले वित्त राज्य मंत्री भी थे।

 

Page 1 of 2546

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें