धूम्रपान की गिरफ्त में गोते लगाती युवा पीढ़ी

30 November 2017
Author 


-बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार)
भारत के साथ ही सम्पूर्ण विश्व में पिछले कुछ सालों में धूम्रपान और उससे पीडि़त लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इस गंभीर लत ने हजारों लोगों को विभिन्न बीमारियों के साथ अकाल मौत के मुँह में धकेल दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तंबाकू और धूम्रपान के दुष्परिणामों को देखते हुए धूम्रपान के सेवन से होने वाली हानियों और खतरों से विश्व जनमत को अवगत कराके इसके उत्पाद एवं सेवन को कम करने की दिशा में आधारभूत कार्यवाही करने का प्रयास किया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया के करीब 125 देशों में तंबाकू पैदा होती है और हर साल करीब 5.5 खरब सिगरेट का उत्पादन होता है। एक अरब से ज्यादा लोग इसका सेवन करते है। धूम्रपान का घातक प्रभाव खाँसी, गले में जलन, सांस लेने में परेशानी और कपड़ों की दुर्गंध के साथ आरंभ होता है। इसकी वजह से त्वचा पर धब्बे और दांतों का रंग खराब (दांतों का पीलापन) हो जाता है। धूम्रपान एवं तंबाकू के कारण दुनिया में प्रतिवर्ष लगभग 40 लाख से अधिक लोग मौत का शिकार हो जाते हैं। भारत में भी यह संख्या लगभग 8 लाख से अधिक है। अनुमानत 90 प्रतिशत फेफड़े के कैंसर, 30 प्रतिशत अन्य प्रकार के कैंसर, 80 प्रतिशत ब्रोंकाइटिस, इन्फिसिमा एवं 20 से 25 प्रतिशत घातक हृदय रोगों का कारण धूम्रपान है। एक रिपोर्ट के अनुसार बीसवीं सदी के अंत तक सिगरेट पीने के कारण 6 करोड़ 20 लाख लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। विकसित देशों में हर छठी मौत सिगरेट के कारण होती है। महिलाओं में सिगरेट पीने के बढ़ते चलन के कारण यह आँकड़ा और बढ़ सकता है। पुरुषों की हर पांच मौतों में से एक और महिलाओं की हर 20 मौतों में से एक मौत धूम्रपान और तंबाकू के अन्य पदार्थों के कारण होती है। तम्बाकू के आगमन से पहले, मध्य पूर्व में भांग का धूम्रपान आम था तथा यह एक सामान्य सामाजिक गतिविधि थी जो एक पानी के पाइप के इर्द गिर्द केन्द्रित थी, जिसे हुक्का कहते थे। तंबाकू की शुरुआत के बाद विशेष रूप से, धूम्रपान, मुस्लिम समाज और संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण अंग बन गया और यह कई महत्त्वपूर्ण रस्मों जैसी शादियों, जनाजे के साथ जुड़ गया। धूम्रपान से होने वाले नुकसान पर सबसे पहले 1930 में संगठित रूप से चर्चा हुई से । मगर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इस विषय पर निरंतर चर्चाएं होती रहती हैं किन्तु फिर भी सम्पूर्ण विश्व के आंकड़ों को अगर देखा जाए तो धूम्रपान से मरने वालों की संख्या में निरंतर वृद्धि पाई जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर साल पचास अरब रुपये धूम्रपान पर खर्च किए जाते हैं। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि अगर यही स्थिति जारी रही तो 2020 तक धूम्रपान के कारण मरने वालों की संख्या एक करोड़ सालाना हो जाएगी। धूम्रपान एक ऐसी बुराई है, जो व्यक्ति को समय से पहले ही मृत्यु के द्वार तक ले जाती है। ध्रूमपान के जरिए लोग तम्बाकू जैसे जहरीले पदार्थ का सेवन करते हैं। तम्बाकू सेवन केवल शरीर के लिए ही हानिकारक नहीं है, बलिक यह व्यक्ति की सामाजिक-आर्थिक सिथति को भी कमजोर बनाती है। कई बार इसकी वजह से लोगों का घर-परिवार ही तबाह हो जाता है। तम्बाकू के सेवन से मुख कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होती है। इससे फेफड़े और गुर्दे की भी गंभीर बीमारियां होती है। इसके अलावा तम्बाकू सेवन से अस्थमा, श्वास की नली में अवरोध, तपेदिक और निमोनिया भी होता है। धूम्रपान, इसका सेवन करने वालों में से आधे व्यक्तियों की मृत्यु का कारण बन रहा है और औसतन इससे उनकी 15 वर्ष आयु कम हो रही है। हर प्रकार का धूम्रपान 90 प्रतिशत से अधिक फेफड़े के कैंसर, ब्रैन हैम्ब्रेज और पक्षाघात का महत्वपूर्ण कारण है। लम्बे समय तक सिगरेट सेवन के दूसरे दुष्परिणाम मुंह, गर्भाशय, गुर्दे और पाचक ग्रंथि के कैंसर हैं।
विभिन्न शोधों से जो परिणाम सामने आये हैं वे इस बात की पुष्टि करते हैं कि धूम्रपान, रक्त संचार की व्यवस्था पर हानिकारक प्रभाव डालता है। धूम्रपान का सेवन और न चाहते हुए भी उसके धूएं का सामना, हृदय और मस्तिष्क की बीमारियों का महत्वपूर्ण कारण है। इन अध्ययनों में पेश किये गये आंकड़े इस बात के सूचक हैं कि कम से कम सिगरेट का प्रयोग भी जैसे एक दिन में पांच सिगरेट या कभी कभी सिगरेट का सेवन अथवा धूम्रपान के धूएं से सीधे रूप से सामना न होना भी हृदय की बीमारियों से ग्रस्त होने के लिए पर्याप्त है। धूम्रपान के धूएं में मौजूद पदार्थ जैसे आक्सीडेशन करने वाले, निकोटीन, कार्बन मोनो आक्साइड जैसे पदार्थ हृदय, ग्रंथियों और धमनियों से संबंधित रोगों के कारण हैं। धूम्रपान का सेवन इस बात का कारण बनता है कि शरीर पर इन्सोलीन का प्रभाव नहीं होता है और इस चीज से ग्रंथियों एवं गुर्दे को क्षति पहुंच सकती है। धूम्रपान के सेवन के हानिकारक प्रभावों से केवल लोगों के स्वास्थ्य को खतरा नहीं है बल्कि इससे आर्थिक क्षति भी पहुंचती है विशेषकर यह निर्धन लोगों की निर्धनता में वृद्धि का कारण है। 20 सिगरेट अथवा 15 बीड़ी पीने वाला एवं करीब 5 ग्राम सुरती, खैनी आदि के रूप में तंबाकू प्रयोग करने वाला व्यक्ति अपनी आयु को 10 वर्ष कम कर लेता है। इससे न केवल उम्र कम होती है, बल्कि शेष जीवन अनेक प्रकार के रोगों एवं व्याधियों से ग्रसित हो जाता है। सिगरेट, बीड़ी पीने से मृत्यु संख्या, न पीने वालों की अपेक्षा 50 से 60 वर्ष की आयु वाले व्यक्तियों में 65 प्रतिषत अधिक होती है। यही संख्या 60 से 70 वर्ष की आयु में बढ़कर 102 प्रतिशत हो जाती है। सिगरेट, बीड़ी पीने वाले या तो शीघ्रता से मौत की गोद में समा जाते हैं या फिर नरक के समान जीवन जीने को मजबूर होते हैं।
भारत में किए गए अनुसन्धानों से पता चला है कि गालों में होने वाले कैंसर का प्रधान कारण खैनी अथवा जीभ के नीचे रखनी जाने वाली, चबाने वाली तंबाकू है। इसी प्रकार ऊपरी भाग में, जीभ में और पीठ में होने वाला कैंसर बीड़ी पीने के कारण होता है। सिगरेट गले के निचले भाग में कैंसर करती है और अंतडिय़ों के कैंसर की भी संभावना पैदा कर देती है।यदि हमें एक स्वस्थ एवं खुशहाल जिन्दगी हासिल करनी है तो हमें धूम्रपान और तम्बाकू का प्रयोग हर हालत में छोडऩा ही होगा। ऐसा करना कोई मुश्किल काम नहीं है। तंबाकू का प्रयोग दृढ़ निश्चय करके ही छोड़ा जा सकता है। धूम्रपान के खतरे को देखते हुए सरकार को भी इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिए ताकि न बजेगा बांस और न बजेगी बांसुरी।

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