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नई दिल्ली - रोहिंग्या मुसलमानों के भारत में रहने को लेकर केंद्र सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। रोहिंग्या मुसलमान को वापस म्यांमार भेजने को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को अपना जवाब सौंप दिया है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में 16 पन्नों का हलफनामा सौंपा है। जिसमें उन्होंने कहा कि रोहिंग्या इस देश में नहीं रह सकते। अब इस मामले में अगली सुनवाई अब 3 अक्टूबर को होगी।
पहली वजह: केंद्र ने सुप्रीट कोर्ट को हलफनामा सौंप कर जवाब दिया है। जिसमें केंद्र ने कहा है कि रोहिंग्या मुसलमानों का देश में रहना गैर कानूनी है। रोहिंग्या मुसलमान गैर कानूनी गतिविधियों में भी शामिल हैं जैसे अपने दूसरे साथियों के लिए फर्जी पेन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड उपलब्ध कराना। कुछ रोहिंग्या मानव तस्करी में भी शामिल हैं।
दूसरी वजह: देश में करीब 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं ये काफी बड़ी संख्या है। इस वजह से सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां भी आ सकती हैं।
तीसरी वजह : देश की सुरक्षा की बात कहते हुए केंद्र ने कहा है कि रोहिंग्या मुसलमान आतंकावाद में शामिल हैं। इनके पाकिस्तान और आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से भी संपर्क है जो की हमारे देश के लिए खतरा है। इसलिए ये यहां नहीं रह सकते।
चौथी वजह: देश में जो बौद्ध लोग रह रहे हैं उनके साथ भी हिंसा होने की संभावना हो सकती है।
पांचवी वजह : केंद्र का कहना है कि भारत के किसी भी हिस्से में रहने और बसने का मौलिक अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिकों को है।
सरकार का यह जवाब दो रोहिंग्या मुसलमानों की याचिका पर नोटिस के जवाब में आया है। इन याचिकाकर्ताओं की ओर से जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने जिरह की थी, जिसके बाद न्यायालय ने केंद्र को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया था।
बता दें कि म्यामांर में हिंसा के कारण पिछले तीन हफ्ते में करीब 380,000 रोहिंग्या लोग भागकर बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं। हिंसा की वजह से म्यामांर के रखाइन प्रांत में करीब 30,000 बौद्ध और हिंदू भी विस्थापित हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि म्यामांर की सेना ने आरसा के हमलों की आड़ लेकर करीब 11 लाख रोहिंग्या मुसलमानों को भगाने का अभियान शुरू किया है। म्यामांर की सरकार ने आरोपों से इनकार किया है।

 


गुरुग्राम - गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के अंदर हुई सात साल के मासूम प्रद्युम्न की हत्या के दस दिन बाद स्कूल को फिर से खोल दिया गया। स्कूल में बच्चे तो पहुंचे लेकिन हर किसी को जिस बात का अनुमान था वही हुआ। दिवंगत प्रद्युम्न की बहन निधी ने स्कूल आने से इंकार कर दिया। दरअसल प्रद्युम्न के पिता को पुलिस की थ्योरी पर भरोसा नहीं है। पुलिस ने स्कूल के अंदर हुई इस हत्या में बस के कंडक्टर अशोक को गिरफ्तार तो कर लिया है लेकिन प्रद्युम्न के पिता मानते हैं कि अशोक तो केवल एक मोहरा है। इस हत्या के असली गुनहगार कुछ और लोग हैं, जिन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है।
प्रद्युम्न के पिता ने कहा है कि वह अपनी बेटी निधी को स्कूल नहीं जाने दे सकते हैं। अभी भी हत्यारे स्कूल में मौजूद हैं और उनकी बेटी की जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी इस स्कूल में अब नहीं पढ़ेगी और हम किसी और स्कूल में उनके एडमिशन की बात कर रहे हैं।
स्कूल खुलने से साक्ष्य नष्ट होने का खतरा : पिता
प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने संदेह जाहिर करते हुए कहा है कि जिस तरह से आधी-अधूरी तैयारी के साथ स्कूल को फिर से खोलने का निर्णय लिया गया है उससे उनके बेटे की हत्या के साक्ष्य नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि जब सीबीआई को इसकी जांच सौंपी गई है तो उससे पहले स्कूल को खोलना कहीं से भी उचित कदम नहीं है। हालांकि वरुण ठाकुर की इसी आशंका के बाद गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह ने फोन पर वरुण ठाकुर को आश्वासन दिया है कि जिस जगह पर प्रद्युम्न की हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था उस जगह को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। उन्होंने कहा की स्कूल में 1200 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं जिनके भविष्य को देखते हुए स्कूल को फिर से खोलने का निर्णय लिया गया।
हत्या की गवाही देने वाले छात्र भी नहीं गए स्कूल
प्रद्युम्न की हत्या के दस दिन स्कूल को फिर से खोल दिया गया लेकिन बच्चों के अंदर का डर अभी भी ताजा है। बताया जाता है कि प्रद्युम्न के दोस्त और उसके घर के आसपास रहने वाले सौ से अधिक बच्चे स्कूल नहीं गए। स्कूल न जाने वाले बच्चों में वो भी शामिल हैं जिन्होंने इस हत्या की गवाही दी है। ऐसे बच्चों के अभिभावकों को डर है कि कहीं उनके बच्चे स्कूल जाएं तो उनके साथ भी किसी प्रकार की अनहोनी न हो जाए।


अहमदाबाद - भाजपा अध्यक्ष अमित शाह साल 2002 में नरौदा गाम में हुए दंगा मामले में गुजरात की पूर्व मंत्री एवं भाजापा नेता माया कोडनानी की ओर से बचाव पक्ष के गवाह के रूप में आज विशेष एसआईटी अदालत में पेश हुए। शाह ने न्यायाधीश पी.बी. देसाई के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि उस दिन माया कोडनानी विधानसभा में मौजूद थीं। देसाई ने पिछले मंगलवार को कोडनानी के एक आवेदन पर शाह को समन किया था।
अमित शाह ने अहमदाबाद अदालत को बताया कि 28 फरवरी, 2002 को नरौदा गाम दंगों के दौरान माया कोडनानी गुजरात विधानसभा में मौजूद थीं। शाह ने अहमदाबाद अदालत को बताया कि वह घटना वाले दिन सुबह सोला सिविल अस्पताल में माया कोडनानी से मिले थे। अदालत को अमित शाह ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि सिविल अस्पताल से पुलिस द्वारा सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद माया कोडनानी कहां गयीं ।
अदालत ने इस वर्ष अप्रैल में कोडनानी के, अपने बचाव में शाह एवं कुछ अन्य गवाहों को बुलाये जाने के आवेदन को मंजूरी दी थी। माया कोडनानी ने कहा है कि अहमदाबाद के निकट नरौदा गाम में हुए दंगों के दौरान वह विधानसभा के सत्र में भाग लेने के बाद सोला सिविल अस्पताल गयी थीं। माया के मुताबिक, वह उस स्थान पर थी ही नहीं, जहां हिंसा हुई थी।
उन्होंने कहा था कि तत्कालीन विधायक अमित शाह भी उस वक्त सोला सिविल अस्पताल में मौजूद थे। साबरमती ट्रेन की बोगी में आग लगाने की घटना में मारे गए कारसेवकों के शव गोधरा से सोला सिविल अस्पताल लाये गये थे। शाह की गवाही उनके बयान की पुष्टि करेगी कि वह अपराध के वक्त कहीं और उपस्थित थीं। वर्ष 2002 में विधायक रहीं कोडनानी को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में 2007 में कनिष्ठ मंत्री बनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह पहले विशेष एसआईटी अदालत से कहा कि वह मामले की सुनवायी चार महीने के भीतर पूरी करे। तत्कालीन प्रधान न्यायमूर्ति जे़ एस़ खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने निचली अदालत से कहा कि वह दो महीने के भीतर गवाहों का बयान दर्ज करने का काम पूरा करे। नरौदा गाम मामला 2002 में हुए नौ बड़े सांप्रदायिक दंगों के मामलों में से एक है जिनकी जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ने की है।

 


नई दिल्ली - देश ने भारतीय वायुसेना के महान योद्धा मार्शल अर्जन सिंह को सोमवार को अश्रुपूरित अंतिम विदाई दी। लड़ाकू विमानों के फ्लाई पास्ट सहित पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ सोमवार सुबह मार्शल अर्जन सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। दिल्ली केंट के बरार चौक में मंत्रोच्चार के बीच उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। उनके अंतिम संस्कार के दौरान कई राजनीतिक हस्तियां, तीनों सेनाओं के प्रमुख तथा शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।
अर्जन सिंह को तोपों की सलामी दी गई। भारतीय वायुसेना के तीन सुखोई लड़ाकू विमानों ने फ्लाई पास्ट कर वायुसेना के एकमात्र पांच-रैंक वाले मार्शल अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि दी। भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने भी मार्च पास्ट कर उन्हें सलामी दी। सुखोई विमानों ने 'मिसिंग मैन फॉरमेशन' बनाया। हवा में बनने वाला यह फॉरमेशन दिवंगत सैन्य अधिकारी के सम्मान में बनाया जाता है।
मार्शल अर्जन सिंह के निधन पर शोक स्वरूप राजधानी दिल्ली में सभी सरकारी इमारतों पर तिरंगा आधा झुका रहा। वहीं पंजाब में प्रदेश सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के नायक और पांच सितारा रैंक तक पदोन्नत किए गए वायुसेना के एकमात्र अधिकारी मार्शल अर्जन सिंह का शनिवार को निधन हो गया था। वह 98 वर्ष के थे। उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है। उनकी पत्नी 2011 में ही गुजर गई थीं। मार्शल अर्जन सिंह के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेट कर एक बख्तरबंद वाहन से बरार चौक शमशान तक लाया गया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मार्शल अर्जन सिंह को उनके अंतिम संस्कार से पहले पुष्पांजलि अर्पित की। तीनों सेनाओं के सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बिरेन्द्र सिंह धनोआ, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लाम्बा और थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भी अंतिम संस्कार से पहले मार्शल अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि दी।
1965 के युद्घ के लिए मिला था फाइव स्टार रैंक
अर्जन सिंह 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय भारतीय वायु सेना के प्रमुख थे। उस युद्घ में भारत की जीत में वायु सेना और अर्जन सिंह का योगदान अतुलनीय था। जिसके लिए इन्हें फाइव स्टार रैंक दिया गया था। 44 साल की उम्र में ही अर्जन सिंह को भारतीय वायु सेना की कमान सौंप दी गई थी। वह स्विजरलैंड में भारत के राजदूत और केन्या में उच्चायुक्त पद पर भी रह चुके हैं। उन्हें 1965 के युद्ध में बेहतरीन नेतृत्व करने के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित भी किया गया है।
उन्हें 44 साल की आयु में ही भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने शानदार तरीके से निभाया. साल 1965 की लड़ाई में जब भारतीय वायु सेना अग्रिम मोर्चे पर थी तब वह उसके प्रमुख थे। अलग-अलग तरह के 60 से भी ज्यादा विमान उड़ाने वाले सिंह ने भारतीय वायु सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु सेनाओं में से एक बनाने और विश्व में चौथी सबसे बड़ी वायु सेना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
1965 में पद्म विभूषण से सम्मानित
बहुत कम बोलने वाले व्यक्ति के तौर पर पहचाने जाने वाले सिंह ना केवल निडर लड़ाकू पायलट थे, बल्कि उनको हवाई शक्ति के बारे में गहन ज्ञान था जिसका वह हवाई अभियानों में व्यापक रूप से इस्तेमाल करते थे। उन्हें 1965 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। वह एक अगस्त 1964 से 15 जुलाई 1969 तक भारतीय वायुसेना के प्रमुख रहे।
स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत भी रहे
वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद अर्जन सिंह को 1971 में स्विट्जरलैंड में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया। इसके साथ ही उन्होंने वैटिकन में भी राजदूत के रूप में सेवा दी। वह 1974 में केन्या में उच्चायुक्त भी रहे। वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य तथा दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे। उन्हें जनवरी 2002 में वायुसेना का मार्शल बनाया गया था।


नई दिल्ली - वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाईसी मोदी प्रमुख आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी (एनआईए) के नए प्रमुख होंगे। मोदी सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2002 के गुजरात दंगों के जांच दल (एसआईटी) का हिस्सा रह चुके हैं। एसआईटी ने नरेंद्र मोदी को दंगों से जुड़े गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड के मामले में क्लीन चिट दी थी जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
वाईसी मोदी की नियुक्ति का निर्णय गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर अपाइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट द्वारा सोमवार को लिया गया। वाईसी मोदी शरद कुमार का स्थान लेंगे, जो 30 अक्टूबर को रिटायर्ड हो रहे हैं। कार्यभार संभालने की प्रक्रिया को सहज बनाने के लिए एनआईए के नवनियुक्त महानिदेशक तत्काल प्रभाव से एक विशेष अधिकारी के रूप में एनआईए से जुड़ेंगे। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के एक आदेश के मुताबिक, मोदी 31 मई, 2०21 तक इस पद पर रहेंगे।
1984 के असम-मेघालय बैच के आईपीएस अधिकारी वाईसी मोदी राष्ट्रीय जांच एजेंसी का प्रभार ऐसे समय में संभालेंगे, जब एजेंसी पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी समूहों द्वारा जम्मू-कश्मीर के अलगाववादियों और पत्थरबाजों के वित्तपोषण के मामले की जांच कर रही है। वह वर्तमान में सीबीआई के विशेष निदेशक हैं। उन्हें 2015 में सीबीआई का अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किया गया था। हरियाणा कैडर के 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी शरद कुमार को 30 जुलाई 2013 को एनआईए प्रमुख नियुक्त किया गया था।

 


चेन्नई - तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष पी धनपाल ने एआईएडीएमके से हटाए गए उप महासचिव टीटीवी दिनाकरण के प्रति निष्ठा रखने वाले अन्नाद्रमुक के 18 विधायकों को आज दल-बदल संबंधी नियम के तहत अयोग्य घोषित कर दिया।
विधानसभा सचिव के भूपति ने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी के खिलाफ पिछले माह विद्रोह करने वाले 18 विधायकों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुरूप बनाए गए दल-बदल विरोधी एवं अयोग्यता कानून 1986 के तहत यह कदम उठाया गया है।
आज अयोग्य घोषित किए गए विधायकों के नाम थंगा तमिल सेलवन, आर मुरगन, मारियुप कन्नेडी, के काथीरकमू, सी जयंती पदमनाभन, पी पलनिअप्पन, वी सेंथिल बालाजी, सी मुथैया, पी वेत्रिवेल, एन जी पाथीर्बन, एम कोठांदपानी, टीए एलुमलै, एम रंगासामी, आर थंगादुराई, आर बालासुब्रमणी, एसजी सुब्रमण्यम, आर सुंदरराज और के उमा महेश्वरी हैं।
उन्होंने कहा कि विधायकों ने अन्य लोगों के साथ 22 अगस्त को तमिलनाडु के राज्यपाल सी विद्यासागर से मुलाकात कर कहा था कि वह पलानीस्वामी में विश्वास खो चुके हैं, जिन्हें दिनाकरण ने चुनौती दी है। असंतुष्ट विधायकों में से एक एसकेटी जकियां ने बाद में पलानीस्वामी का समर्थन करने के लिए खेमा बदल लिया था। विधायक तभी से ही मुख्यमंत्री को हटाने की मांग कर रहे थे।
पलानीस्वामी और तत्कालीन विद्रोही नेता तथा मौजूदा उप मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम के नेतृत्व वाले गुटों के औपचारिक विलय के एक दिन बाद 22 अगस्त को यह बैठक हुई थी। सरकार के मुख्य सचेतक एस राजेंद्रन ने विधानसभा अध्यक्ष से पार्टी विरोधी गतिविधियों और मुख्यमंत्री के खिलाफ विद्रोह करने के लिए विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी।


मुंबई - महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में एक 8 वर्षीय बच्चे पर 12 अवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। इससे बच्चे की मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, पूरी घटना शहर के कमातघर इलाके की है। बच्चे पर तकरीबन दो घंटे तक कुत्तों ने हमला किया। बच्चे की पहचान नीरज यादव के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह भिवंडी के केने गांव का रहने वाला है।
कुत्तों के हमला करने के बाद बच्चे को स्थानीय लोगों ने अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद डॉक्टरों ने उसकी हालत देखकर ठाणे के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि, बच्चे को भर्ती कराने के कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई।

 


नई दिल्ली - डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां ने पंचकुला कोर्ट में फैसले के दिन बड़ी साजिश रची थी। हरियाणा पुलिस ने इसका पर्दाफाश किया है। पुलिस ने राम रहीम को रेप में दोषी करार दिए जाने के बाद हुई हिंसा के मामले में 43 लोगों की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में मोस्ट वांटेड दंगा आरोपियों के नाम हैं। लिस्ट में हनीप्रीत इन्सां का नाम सबसे ऊपर दिया गया है। इस लिस्ट को हरियाणा पुलिस की वेबसाइट पर डाला गया है।
हनीप्रीत टॉप पर
इस लिस्ट में दूसरा नाम आदित्य इन्सां का है। आदित्य इंसा डेरा सच्चा सौदा का प्रवक्ता है। राम रहीम के जेल जाने के बाद हनीप्रीत और आदित्य इंसां फरार हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है।
बता दें कि पंचकुला में 25 अगस्त को हुई इस हिंसा में करीब 40 लोगों की जान गई थी। इसके साथ ही कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। राम रहीम के समर्थकों ने इस दौरान काफी हंगामा और आगजनी की थी। खास मीडिया को निशाना बनाया गया था। कई मीडिया के ओबी वैन में आग लगा दिया है किया था और मीडिया को भी निशाना बनाया था।
ऐसे हुई आरोपियों की पहचान
पुलिस की मानें तो हिंसा के विभिन्न वीडियो और फोटोग्राफ से इन आरोपियों की पहचान की गई है। हरियणा पुलिस ने इन आरोपियों की लिस्ट को उनकी फोटो के साथ डाला गया है। बता दें कि लिस्ट में शामिल हनीप्रीत इंसा और आदित्या इंसा अभी भी पुलिस की गिरफ्त से फरार चल रहे हैं।
हनीप्रीत के नेपाल भागने का शक
मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक हरियाणा पुलिस ने इस सिलसिल में बिहार पुलिस से संपर्क किया है। पुलिस को शक है कि हनीप्रीत बिहार के रास्ते नेपाल भाग गई है या फिर भागने कि फिराक में है। लुक आउट नोटिस जारी होने के बाद उसे पकड़ने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। अब बिहार के सात जिलों में उसके पोस्टर लगाए गए हैं। ये सातों जिले नेपाल से लगने वाले दिले हैं। अलर्ट के बाद इन जिलों में पुलिस ने गाड़ियों की तलाश शुरू भी कर दी है। आशंका है कि हनीप्रीत बिहार के रास्ते नेपाल भाग गई है या भागने की तैयारी में है।
हनीप्रीत का ड्राइवर के गिरफ्तारी की खबर
इससे पहले शुक्रवार को हरियाणा पुलिस के हाथ उस वक्त बड़ी कामयाबी लगी, जब पुलिस ने हनीप्रीत के विश्वास पात्र ड्राइवर प्रदीप को राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ इलाके से गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस के मुताबिक ड्राइवर प्रदीप पिछले कई दिनों से सालासर में छिपा हुआ था। प्रदीप की गिरफ्तारी की पुष्टि हरियाणा के डीजीपी ने भी की थी। पुलिस को उम्मीद है कि प्रदीप से हनीप्रीत का कोई न कोई सुराग उनके हाथ लग सकता है। हनीप्रीत की तलाश में हरियाणा पुलिस कई प्रदेशों की खाक छान रही है। साथ ही नेपाल बॉर्डर से लगे इलाकों पर पुलिस की खास नजर है।


नई दिल्ली - दिल्ली से सटे गुरुग्राम का रेयान इंटरनेशनल स्कूल प्रद्युम्न की हत्या के बाद आज 10 दिन बाद खुल गया। इस दौरान स्कूल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। जिला प्रशासन की मौजूदगी में खोला गया है। सुबह7,30 बजे से बच्चे आने शुरू हो गए। हालांकि स्कूल में सुरक्षा को ले कर अभिभावकों में चिंता बानी हुई थी। कई अभिभावक खुद अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने आये। लेकिन बच्चों को अंदर जाने के बाद भी काफी देर तक बाहर खड़े हो कर अंदर के हालात का अंदाजा लगाते रहे। वहीं बच्चों में भी उस घटना के बाद असमंजस की स्थिति दिखी। उधर सुरक्षा को देखते हुए स्कूल के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
प्रद्युम्म के पिता की अपील
वरुण के वकील सुशील टेकरीवाल ने कहा, रेयान स्कूल खुलने से वहां मौजूद साक्ष्य और न्याय संबंधी सबूत नष्ट हो जाएंगे। इसके खत्म होने से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच सीधे तौर पर प्रभावित होगी। लिहाजा, स्कूल को तत्काल प्रभाव से बंद रखा जाना चाहिए जब तक कि सीबीआई अपनी प्रारंभिक जांच पूरी नहीं कर लेती.' टेकरीवाल ने कहा कि यह आशंका रविवार को प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने व्यक्त की है।
आज से खुला स्कूल
गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह का कहना है कि प्रबंधन की पूरी कोशिश है कि सोमवार से स्कूल दोबारा खुल जाएगा। वहीं, अगले तीन महीने के लिए चार्ज भी संभाल लिया जाएगा। बता दें कि शुक्रवार को सरकार ने रेयान स्कूल का प्रबंधन तीन महीने के लिए अपने हाथ में ले लिया है। सिंह ने यह भी बताया कि सेफ्टी गाइडलाइंस के पालन को लेकर स्कूलों की मीटिंग बुलाई गई है। यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि ऐसी घटनाएं अब दोबारा न हों।
मां का शक सही निकला
प्रद्युम्न की हत्या मामले में आखिरकार मां ज्योति ठाकुर का शक सही निकला। स्‍कूल प्रबंधन और पुलिस के तमाम दावों के बीच प्रद्युम्न की मां लगातार इस बात पर अडिंग रही कि मेरे बाबू को अशोक ने नहीं मारा है। इसके पीछे जरूर कोई बड़ी चाल है। एसआइटी की रिपोर्ट आने के बाद स्‍कूल प्रबंधन के दावों की पोल खुल चुकी है। जांच में यह तो तय हो गया है कि हत्‍या के पीछे एक बड़ा राज छिपा है।
बच्चे के पिता वरुण ठाकुर पहले से ही यह कह रहे हैं कि उनके बच्चे की हत्या योजना बनाकर की गई। बच्चे को बाथरूम में ले जाया गया था। वहां पर हत्यारोपी बस हेल्पर अशोक के अलावा और भी कोई था। एक लड़की ने वरुण को यह बताया भी है कि बाथरूम में अशोक के अलावा भी कोई था।
यह कौन था यह पुलिस पता नहीं लगा पाई है। तीन दिन की पुलिस रिमांड में भी यह बात सामने नहीं आई कि मासूम की हत्या में और कौन था। छात्र की मां ज्योति ठाकुर ने मंगलवार को भी यही कहा कि उसके बेटे की दो आंख उसकी दुश्मन बन गई।
क्‍या कहती है एसआइटी की रिपोर्ट
रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात यह है कि उसमें दावा किया गया है जघन्य हत्या के मामले में किसी एक अन्य शख्स की भी भूमिका संभावित है, जो इस वारदात को अंजाम देने के बाद शौचालय की टूटी खिड़की के रास्ते से भाग गया। रिपोर्ट में साफ है कि स्‍कूल प्रबंधन ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की। ऐसे में शक की सुई स्‍कूल प्रबंधन पर जाना लाजमी है।
8 सितंबर को प्रद्युम्न की हत्या कर दी गई थी
उल्लेखनीय है कि कक्षा दो के छात्र प्रद्युम्न की आठ सितंबर को टॉयलेट में गला काटकर नृशंस हत्या कर दी गई थी. बस के एक कंडक्टर को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है और पुलिस ने बस कंडक्टर अशोक कुमार (42) को इस हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है. पुलिस का कहना है कि अशोक ने बच्चे का यौन शोषण करने की कोशिश की, जिसमें विफल रहने पर उसने बच्चे की चाकू से गला काटकर हत्या कर दी.
प्रद्युम्न के पिता 8 सितंबर की सुबह बेटे को स्कूल पहुंचाकर घर लौटे और एक घंटा बाद ही उसे स्कूल के टॉयलेट में खून से लथपथ, मृत पाया गया था. इस घटना के बाद समूचे देश में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा राष्ट्रीय मुद्दा बन गई है. हरियाणा सहित कई राज्यों में चल रहे रेयान स्कूल के बाहर अभिभावकों और आक्रोशित लोगों ने प्रदर्शन किया था।


चंडीगढ़ - साध्वियों से दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा प्रमुख गुरुमीत राम रहीम अब गुमनामी की जिदगी से थोड़ा बाहर निकलने लगा है। जेल सूत्रों की मानें तो जेल में बंद अन्य कैदी व बंदी जब बैरकों में चले जाते हैं तो नंबरदारों की निगरानी में गुरुमीत राम रहीम को लॉन में घुमाया जाता है। वह लॉन में लगे पौधों की सिंचाई करता है। हालांकि अभी तक जेल प्रशासन की तरफ से उसे कोई काम नहीं सौंपा गया है। गुरमीत की सेल और उसके आसपास सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं। इससे उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा इन सीसीटीवी कैमरों को इंटरनेट से जोड़कर बड़े अधिकारियों को आइपी एड्रेस दे दिए हैं, जिससे वह कहीं से भी गुरमीत की मूवमेंट देख सकते हैं।
हनीप्रीत का पता नहीं
पंचकूला के पुलिस उपायुक्त मनबीर सिंह ने उन मीडिया खबरों के बारे में पूछे जाने पर जिसमें प्रदीप गोयल ने एसआईटी को बताया कि हनीप्रीत पहले ही नेपाल भाग चुकी है, कहा कि इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। ये आधारहीन हैं।
गुरुमीत के तीन और समर्थकों की हुई गिरफ्तारी
हरियाणा पुलिस ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी ठहराए जाने के बाद 25 अगस्त को पंचकूला में भड़की हिंसा के संबंध में तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। डेरा प्रमुख की गोद ली हुई बेटी हनीप्रीत इन्सां और डेरा प्रवक्ता आदित्य इन्सां को पकड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इनके खिलाफ पहले ही लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हरियाणा पुलिस के विशेष जांच दल ने उदयपुर से डेरा पदाधिकारी प्रदीप गोयल इन्सां को रविवार को गिरफ्तार किया।
पंचकूला के पुलिस उपायुक्त मनबीर सिंह ने बताया कि आदित्य इन्सां के साले प्रकाश उर्फ विकी को मोहाली से पकड़ा गया। उन्होंने बताया कि विजय नाम के एक अन्य व्यक्ति को शनिवार को पिंजौर से गिरफ्तार किया गया। सिंह ने कहा, प्रदीप, प्रकाश और विजय की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस ने आगजनी की घटनाओं में अंबाला से एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। हरियाणा पुलिस ने पंचकूला में हिंसा भड़कने के बाद डेरा प्रमुख के शीर्ष सहायक और प्रवक्ता दिलावर इन्सां समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया। दिलावर को 15 सितंबर को सोनीपत से गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले पुलिस ने डेरा की राज्य इकाई के सदस्य गोबिंद इन्सां को भी गिरफ्तार किया था।

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