चेन्‍नई - मद्रास हाईकोर्ट में सोमवार को सीबीआई ने सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें तीन माह पहले गैर-कानूनी टेलीफोन एक्चेंज मामले में कलानिधि मारन, दयानिधि मार और सात अन्य लोगों को रिहा कर दिया था।
सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुई मद्रास हाईकोर्ट के जस्‍टिस जी जयचंद्रन ने मारन भाईयों और अन्य सात लोगों को नोटिस भेजने और 20 जून जवाब देने के लिए कहा है। 14 मार्च को स्‍पेशल जज नटराजन ने कहा था कि मामले के सातों आरोपियों को रिहा कर रहे हैं क्‍योंकि इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
सीबीआई के अनुसार, केंद्रीय संचार और सूचना तकनीक मंत्री पद पर रहते हुए दयानिधि मारन जून 2004 से दिसंबर 2006 के दौरान अपने पद का दुरुपयोग किया और चेन्नई स्थित अपने घर पर निजी टेलिफोन एक्सचेंज स्थापित किया। इस टेलिफोन एक्सचेंज का उपयोग उन्होंने सन नेटवर्क से जुड़े व्यापार के लिए किया।
सीबीआई ने मारन बंधुओं के खिलाफ दायर आरोप पत्र में लिखा कि दयानिधि मारन ने मंत्रालय के राजकोष को 1.78 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। 700 से ज्यादा टेलीकॉम लाइन्स बोट क्लब और गोपालपुरम स्थित अपने आवास पर बिछाई। सीबीआई ने इस मामले में पूर्व बीएसएनएल के महाप्रबंधक के ब्रह्मनाथन, पूर्व उप महाप्रबंधक एम पी वेलुसामी और दयानिधि मारन के निजी सचिव गौथमान को आरोपी बनाया।

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