नई दिल्ली - दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हवाला कारोबारियों और माफियाओं के साथ सांठगांठ का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि जब तक वह मुख्यमंत्री को जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा देते चुप नहीं बैठूंगा। खबर है कि कपिल के प्रेस कॉन्फ्रेंस से लोकायुक्त नाराज हो गए और उन्हें तुरंत पीसी छोड़नी पड़ी।
कपिल मिश्रा को शुक्रवार को ही सुबह 11.30 बजे लोकायुक्त में पेश होना था, लेकिन उन्होंने अपने प्रतिनिधि को भेज दिया। जिससे लोकायुक्त कोर्ट नाराज है। लोकायुक्त कोर्ट में कपिल मिश्रा की तरफ से आये प्रतिनिधि ने कहा कि वो अगली तारीख पर आ जाएंगे, लेकिन लोकयुक्त नहीं मानी और कहा कि उन्हें आज ही और अभी प्रेस कांफ्रेंस ख़त्म होते ही यहां हाजिर होना होगा।
लोकायुक्त में 9 मई को वकील नीरज कुमार की तरफ़ से शिकायत दर्ज कराई गई थी कि कपिल मिश्रा के गंभीर आरोपों को देखते हुए अरविंद केजरीवाल और सतेंद्र जैन के ख़िलाफ़ लोकायुक्त जांच करवाये, जिस पर लोकायुक्त ने कपिल मिश्रा को शुक्रवार को तलब किया था।
मेरी जान को खतरा
इससे पहले आम आदमी पार्टी (आप) से निष्कासित करावल नगर से विधायक मिश्रा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल पर नए आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कालेधन को सफेद करने के लिए नोटबंदी का विरोध किया। उनके हवाला कारोबारियों और माफियाओं से संबंध है। इन आरोपों के बाद केजरीवाल से इस्तीफे की मांग करते हुए मिश्रा ने कहा कि नये खुलासों के बाद उन्हें अपनी जान का भी खतरा है।
इस मौके पर कथित सबूत एकत्रित करने में मिश्रा की मदद करने वाले नील भी मौजूद थे। उन्होंने कहा,' केजरीवाल का कॉलर मेरे हाथ में है और मैं अब उन्हें जेल पहुंचाकर ही दम लूंगा।'
मिश्रा ने कहा कि दो करोड़ रुपये के चंदे की प्राप्ति के लिये जिस मुकेश कुमार नाम के व्यक्ति का वीडियो सामने लाया गया, वह झूठा वीडियो है। पूर्व मंत्री कहा कि नोटबंदी के दौरान गिरफ्तार किये गये रोहित टंडन की कंपनी के निर्देशक हेमप्रकाश शर्मा नाम के व्यक्ति को बचाने के लिये मुकेश कुमार को आगे किया गया।
कंपनियों के जिस लेटर पैड पर कल आप पार्टी ने चंदा देने की बात कही थी, मिश्रा ने कहा कि यह फर्जी है और घर में बैठकर बनाए गये है। उनका यह भी दावा था कि एक कंपनी के लेटर पैड पर लिखे खत में जो हस्ताक्षर है वह मुकेश कुमार के है ही नहीं। पहले केजरीवाल ने कहा था कि उन्हें यह मालूम नहीं है कि पार्टी को चंदा कहां से मिला मुख्यमंत्री भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी है और कानून जानते है । इसलिये उन्हें अब यह बताना होगा कि दो करोड़ रुपये का चंदा कहां से आया । चंदे की तारीख को लेकर भी मिश्रा ने सवाल उठाये और कहा कि मुकेश कुमार ने जब चंदा दिया उस समय वह कंपनी में निदेर्शक थे ही नहीं।

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