Editor

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-प्रभुनाथ शुक्ल (स्वतंत्र पत्रकार हैं)

हमारे समाज की नैतिकता गिर गई है । सामाजिक मापदंडों का पतन हो चला है । तकनीकी और शैक्षिक रुप से जितने हम मजबूत और सभ्य हो रहे हैं , समाजिक नैतिकता उतनी नीचे गिर रही है । बदलते दौर में समाजिक सम्बन्ध की कोई परिभाषा नहीँ बची है जो लांछित न हुईं हो। 21 वीं सदी में इसरो जैसा संगठन दुनिया का सबसे बड़ा अंतरिक्ष केंद्र बन गया है। लेकिन हमारी बेटियों की आबरू सरेआम सड़क पर लूट रही है। जबकि हम आधुनिक सोच का डंका पीट प्रगतिवादी होने का खोखला दम्भ भर रहे हैं । समाजिक मनोवृति में ऋणात्मक गिरावट दर्ज़ की जा रही है । समाज में असुरक्षा की भावना घर कर गई है । बेटियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है । महिलाएँ और बेटियाँ घर से लेकर कार्यस्थल और सड़क पर असुरक्षित हैं । हर मां - बाप की सबसे बड़ी चिंता उसकी बेटी है । बेटी बचाओ , बेटी बढ़ाओ का नारा शर्मिंदा हो रहा है । जिस राज्य से इसकी शुरुवात की गई थी वहीं हरियाणा सबसे असुरक्षित हो चला है । वह यौन हिंसा का हब बन गया है । शहर से लेकर गाँव तक असुरक्षा का महौल बन गया है। बलात्कार , कन्या भ्रूण हत्या और एसिड अटैक भारत की समाजिक त्रासदी बन गया है । हालात यहाँ तक पहुँच गए हैं की राज्यों को फांसी जैसे कानूनों पर विचार करना पड़ रहा है। हरियाणा इस तरह की घटनाओं को लेकर सुर्ख़ियों में है । बलात्कार रोकने के लिए अब तक के सारे कानून बौने साबित हो रहे हैं । हरियाणा सरकार रेप के लिए खिलाफ फांसी की सजा पर विचार कर रही है। मध्यप्रदेश बलात्कार के लिए फांसी का कायदा पहले से बना रखा है । रेप के मेरिट वाले राज्यों में यूपी भी सुमार है । बलात्कार का मनोविज्ञान समझने में मनोचिकित्सक, सरकार और समाज सभी फेल हो चुके हैं । देश में कानून के बाद भी इस त्रासदी का हल होता नहीँ दिख रहा। आधुनिक भारतीय समाज की सबसे बड़ी विकृति 16 दिसम्बर 2012 की घटना थी , जो निर्भया से जुड़ी थी । इस हादसे ने देश की छवि पूरी दुनिया में धूमिल किया। जिस पर संयुक्तराष्ट्र संघ ने भी चिंता जताई । उस समय की यूपीए सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक हज़ार करोड़ रुपयों का निर्भया फंड भी शुरू किया। फंड के सही इस्तेमाल की ज़िम्मेदारी अलग-अलग मंत्रालय को सौंपी गई। जिसका इस्तेमाल राज्यों की सरकारें बेटियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कर सकती हैं । लेकिन सच्चाई यह है कि निर्भया फंड में दो हज़ार करोड़ रूपये की वृद्धि होने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा पर कोई ठोस नीति नहीँ बन पाई। 2014 में एक अध्ययन में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए जिसमें पता चला कि देश भर में 52 फीसदी लड़कियों के साथ घर से स्कूल जाते या वापस आते हुए छेड़छाड़ होती है। जबकि स्कूल या कॉलेज जाते हुए 32 फीसदी लड़कियों का पीछा किया जाता है।


हरियाणा बलात्कार को लेकर सुर्खियों में हैं । बेटियों के लिए वह सबसे असुरक्षित राज्य साबित हो रहा है ।हरियाणा पुलिस ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में 30 नवंबर तक बलात्कार के कुल 1238 मामले दर्ज किए गए। यानी हर दिन 3.69 बलात्कार के मामले दर्ज हुए। इस दौरान प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के कुल 9523 मामले दर्ज हुए थे। जबकि 44 फीसदी नाबालिग लड़कियां शिकार हुईं। हरियाणा के पड़ोसी राज्य पंजाब और हिमाचल प्रदेश के अलावा राजस्थान में बच्चियों के साथ दरिंदगी के मामले कम हुए । नाबालिग बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामले में मध्यप्रदेश देश में अव्वल स्थान पर है। मध्यप्रदेश में इस तरह के 2479 मामले दर्ज किए गए। जबकि इस मामले में महाराष्ट्र 2310 और उत्तर प्रदेश 2115 के आंकड़े के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है। पूरे भारत में 16,863 नाबालिग बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं। 2016 में बलात्कार के कुल मामले 39,068 हुए । जिसमें 18 साल से कम आयु की लड़कियों की संख्या 16,863 थी । जबकि 6 साल से कम आयु की लड़कियों के साथ बलात्कार 520 मामले हुए। 6 से 12 साल के बीच की 1596 मासूम ऐसी घटना की शिकार हुईं । 12 से 16 साल की उम्र में यह आंकड़ा चार अंको यानी 6091 पहुँच गया । 16 से 18 साल की लड़कियों से जुड़ी 8656 घटनाएं हुईं।

भारत में चार साल पूर्व की तेज़ाबी हमले की ज़रा तस्वीर देखिए । आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 में जहां 85 महिलाएं एसिड अटैक का शिकार हुईं थीं। वर्ष 2013 में आंकड़ा बढ़कर 128 और 2014 में 137 तक पहुंच गया। कम से कम 10 साल जेल की सज़ा का प्रावधान है, जिसे उम्र क़ैद में भी तब्दील किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऑर्डर में एसिड की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने की बात भी कही थी , लेकिन कड़वी सच्चाई ये है कि आज भी पूरे देश में बिना किसी रोक-टोक के एसिड की बिक्री हो रही है। अदालत ने यह भी कहा था कि एसिड अटैक की पीड़ित को ना केवल मुफ्त इलाज मिले बल्कि उसे कम से कम 3 लाख रुपए का मुआवज़ा भी दिया जाए।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रगति हुई है, लेकिन बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ और प्रयासों की और अधिक
ज़रूरत है। लिंगानुपात के मोर्चे पर देश ज्यादा प्रगति नहीं कर पाया है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत का लिंग अनुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 943 महिलाओं का है। प्रति 1000 पुरुषों पर 879 महिलाओं के आंकड़ों के साथ, 28 राज्यों में हरियाणा का प्रदर्शन सबसे खराब है। इस संबंध में इसके बाद जम्मू-कश्मीर 889, सिक्किम 890, पंजाब 895 और उत्तर प्रदेश 898 का स्थान रहा है। भारतीय लिंग अनुपात प्रति 1000 पुरुषों पर कम से कम 950 महिलाओं होना चाहिए । अप्रैल, 2016 को संसद में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 2010-12 में, भारत में जन्म के समय लिंगानुपात 908 था जो 2011-13 में सुधर कर 909 हुआ है। भारत में 2011
से 13 में 21 बड़े राज्यों में, प्रति 1,000 पुरुषों पर 864 महिलाओं के आंकड़ों के साथ, हरियाणा की स्थिति बेहद खराब है । पंजाब 867, उत्तर प्रदेश 878, दिल्ली 887, राजस्थान 893 और महाराष्ट्र 902, अन्य राज्यों में से हैं जिनका प्रदर्शन भी खराब है। लेकिन प्रति 1,000 पुरुषों पर 970 महिलाओं के आंकड़ों के साथ छत्तीसगढ़ का जन्म के समय भारत में सबसे अनुकूल लिंग अनुपात है। इसके बाद केरल 966 और कर्नाटक 958 का स्थान है। 2015-16 के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में, बाल लिंग अनुपात में जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और हरियाणा में सबसे निम्नतर गिरावट हुई है। देश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने वाले कानून भी बेअसर साबित दिखते हैं । बलात्कार और एसिड अटैक की बात ही छोड़िए। यह प्रमाणित हो गया है कि कानून के भय से किसी समस्या का समाधान नहीँ हो सकता है । समाज में जब तक हर व्यक्ति का नैतिक विकास नहीँ होगा , इस तरह की घटानाओं को रोकना सम्भव नहीँ दिखता। सरकारों को स्कूलों में नैतिक शिक्षा और समाजिक सम्बंधी विषयों पर अधिक जोर देना चाहिए । तभी हम देश की युवा पीढ़ी को सहेज पाएंगे। अगर वक्त रहते हम नहीँ चेते तो यह समस्या नासूर बन जाएगी। बेटियों को हरहाल में बचाना होगा , उन्हें सुरक्षित महौल देना होगा। तभी समाज सुरक्षित रह पाएगा। इस पर समाज , संसद और परिवार को सोचना होगा।

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- देवेंद्रराज सुथार

बसंत मतलब कवियों और साहित्यकारों के लिए थोक में रचनाएं लिखने का सीजन। बसंत मतलब तितलियों का फूलों पर मंडराने, भौंरे के गुनगुनाने, कामदेव का प्रेमबाण चलाने, खेत में सरसों के चमकने और आम के साथ आम आदमी के बौरा जाने का दिन। बसंत मतलब कवियों व शायरों के लिए सरस्वती पूजन के नाम पर कवि सम्मेलन व मुशायरों के आयोजन का ख़ास बहाना। बसंत मतलब 'बागों में बहार है, कलियों पे निखार है, हाँ है तो, तो तुमको मुझसे प्यार है' हर दिल फेंक आशिक़ का ये कहना। बसंत मतलब पत्नियों के भाव में अचनाक वृद्धि होना और पतियों को मयाके जाने की 'खुल्लम खुल्ला' धमकी देना। बसंत मतलब 'कुछ कुछ होता है' की जगह अब 'बहुत कुछ' होना। और फिर इस 'बहुत कुछ' को पाने के लिए प्रेमी का घर के बर्तन और कपड़े तक धोना। जिस तरह सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखता है उसी तरह बसंत के अंधे को पीला ही पीला नज़र आता है। बसंत मतलब फेसबुक पर फेसबुकियों के द्वारा कृत्रिम प्रेम दिखाने के लिए रंगीन स्टेटस चिपकाने और खुद को अपने प्रिये की स्मृति में घनानंद घोषित करने का अवसर। बसंत मतलब बजरंग दल और पिंक स्क्वाड जैसे संस्कृति रक्षक दलों के मुखियाओं के लिए अपनी छवि में चार चाँद लगाने का सुनहरा मौका। बसंत मतलब पतझड़ के भूने हुए के लिए शीतल समीर का झोंका। बसंत मतलब जीवन का श्रेष्ठतम अहसास। इसलिए बसंत न केवल युवाओं के लिए अपितु बुजुर्गों के लिए भी हैं ख़ास। क्योंकि सयाने लोग कहे गये हैं कि आदमी उम्र से नहीं, मन से बूढ़ा होता है। बसंत में महुआ, केवड़ा और टेसू के फूलों की गंध से अभिभूत होकर मन हिलोरे मारने लगता है। सोये हुए अरमान जागने लगते हैं। इस प्यार करने के मौसम में दिल के भीतर से फीलिंग ऑसम वाली आने लगती है। सचमुच ये बासंती बहार तो खुशियों का त्योहार हैं। बसंत में चलने वाली इन हवाओं में लगता है किसी ने भांग मिला दी हैं। जो सबको मदहोश किये जा रही हैं। इसके ऊपर से कोयल की कुहू कुहू और पपिये की पिहू पिहू सुनकर किसका मन बहका नहीं जायेगा आधी रात को ? इस बसंत ने महंगाई की तरह किसी को शेष नहीं छोड़ा हैं। सबको इसने अपनी गिरफ्त में ले रखा हैं। कालिदास, भारवि, विद्यापति, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, रामधारी सिंह दिनकर, विद्यानिवास मिश्र सहित कई बड़े-बड़े साहित्य के सूरमा और धुरंधरों को इसने अपने जादू से वश में कर रखा हैं। बिलकुल इसी तरह जिस तरह वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने सभी को ’भाईयों और बहनों’ कहकर अपने जाल में जकड़ रखा है। इन साहित्यजीवियों और रचना धर्मियों ने बसंत की प्रसन्नता में सारे कीर्तिमान भंग कर दिए हैं। इनके मुंह से बसंत की इतने तारीफें सुनकर बाकि की ऋतुओं को बसंत से ’हिस्टीरिया’ होने लग गया हैं। बसंत तो चार दिन की चाँदनी और फिर अंधेरी रात है। क्षण भर का मज़ा है और फिर ज़िंदगी भर सजा है। आदमी को बसंत के आवेश में अपनी औकात नहीं भूलनी चाहिए। बसंत के चक्कर में यह नही भूलना चाहिए कि इसके बाद गर्मी के गर्म होते तेवरों में तवे पर सेंकी जाने वाली रोटी की तरह तपना ही है। अब भले ही भंवरों की गुनगुन सुनकर खुश हो लो, प्यारे ! फिर बाद में तो मच्छरों की टें-टें सुननी ही है। और अपना रक्त मच्छरों को दान करना ही है। बसंत को लेकर सभी के अलग-अलग मयाने हैं। नेताओं के लिए चुनाव बसंत है। इस बसंत में कई नेता पुष्प (कांटे) की भांति प्रस्फुटित होते हैं और चुनाव के बाद परिणाम जानकर कई नेता बौरा जाते है। इस चुनावी रण में बहुतों की हवा निकल जाती है और बहुतों में हवा भर भी जाती है। चुनावी समय में ये नेता कुर्सी के इर्द-गिर्द भौंरे और तितलियों की तरह मंडराते हैं। फूलों के रस का आस्वादन लेने के बाद ये भौंरे विरह की आग में जनता को अकेले छोड़ जाते हैं। और तो और कुछ तो बसंत में अपने वर्चस्व को चमकाने के आस में उल्टा चारा और कोयला खाकर जेल की सलाखों में पतझड़ भोगते है। इसी तरह यदि बेरोजगारों के हाथों में नौकरी आये तो उनका बसंत हो। बिना नौकरी के छोकरी तक जाने के सारे रास्ते बंदहो जाते है। यूं कहिए कि नौकरी के बिना जीवन में पतझड़ ही पतझड़ ही है। कुछ लोगों का इस नौकरी से भी मन नहीं भरता। उनके लिए नौकरी से मिलने वाली तनख्वाह पूर्णिमा का चाँद है। जो महीने के पहले दिन बढ़ी हुई नज़र आती है और फिर धीरे-धीरे छूमंतर होती जाती है। ऐसे असंतुष्ट लोगों के लिए ऊपरी कमाई ही बसंत है। सच तो यह है कि यदि जेब में विटामिन एम हो तो हर दिन बसंत ही बसंत है। इस विटामिन एम के आगे तो पतझड़ भी मारा जाता है। इसलिए बसंत ! तू भी पूंजीपतियों का पर्व कहलाता है।

गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान
E-Mail : devendrasuthar196@gmail.com
Mob. : 8107177196


नई दिल्ली - आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने दिल्ली उच्च न्यायालय से अपनी वह अर्जी वापस ले ली है जिसमें उन्होंने खुद को अयोग्य ठहराने की चुनाव आयोग की सिफारिश पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। आप के विधायकों के वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि उनकी याचिका अर्थहीन हो गई है, क्योंकि राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की सिफारिश स्वीकार कर ली है। साथ ही उन्हें अयोग्य करार देने की अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
आप विधायकों के वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि वह लाभ के पद मामले में 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने वाले राष्ट्रपति के आदेश का परीक्षण करने के बाद अपील दायर करेंगे।
आप ने पार्टी के 20 विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द किये जाने का ठीकरा केन्द्र सरकार पर फोड़ते हुये दिल्ली की 20 सीटों पर उपचुनाव को ही अब एकमात्र विकल्प बताया है। आप नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आज जनता के नाम 'खुला पत्र लिखकर इस प्रकरण पर पार्टी का रुख स्पष्ट किया। सिसोदिया ने अब जनता की अदालत में जाने का संकेत देते हुये कहा, ''आज इस खुले पत्र के माध्यम से मैं आपसे सीधे बात करना चाहता हूँ। मन दुःखी है। पर निराश नहीं हूं, क्योंकि मुझे आप पर भरोसा है।


नई दिल्‍ली - रात के अंधेरे में खामोशी के साथ कदम-दर-कदम जवान आगे बढ़ रहे थे। पहाड़ों और जंगल के बीच उनकी आहट भी कोई भांप नहीं सकता था। हर किसी जवान की निगाहें सीधे अपने टार्गेट पर लगी थीं। मकसद था देखो और मारो। हुआ भी यही। जवान जब अपनी टार्गेट वाली जगह पर पहुंचे तो वहां पर उन्‍हें जो आतंकी दिखाई दिया उसको उन्‍होंने ढेर कर दिया। घुप्प अंधियारे के बीच चलती गोलियों और रॉकेट लॉन्‍चर की आवाजों ने इस खामोशी को चीर कर रख दिया था। इन आवाजों के बीच जो आवाज आ रही थी वह आतंकियों के मारे जाने की थी। कुछ देर के बाद आतंकियों के खेमे में हा-हा-कार मच जाता है। इस पूरे ऑपरेशन में कई आतंकी मारे जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ सभी भारतीय जवान तेजी के सा‍थ हैलीकॉप्‍टर पर सवार होकर वापस अपनी सीमा में सुरक्षित लौट जाते हैं।
ये कहानी फिल्‍मी नहीं
इस कहानी को सुनकर शायद आपको कुछ याद आ रहा हो। या मुमकिन है कि यह कहानी आपको फिल्‍मी लग रही हो। लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, ये कहानी फिल्‍मी नहीं बल्कि हकीकत है और ये हकीकत है भारतीय जवानों द्वारा पाकिस्‍तान में की गई सर्जिकल स्‍ट्राइक की। भारत के सैन्‍य इतिहास में ऐसा गिनीचुनी बार हुआ है जब भारतीय सेना के जवानों ने सीमापार जाकर अपने दुश्‍मनों का खात्‍मा किया। उरी में सेना के कैंप पर हुए हमले के बाद जो नजारा बदला और भारतीय सेना ने इसका जिस तर्ज पर बदला लिया वह वास्‍तव में काबिले तारीफ था। पाकिस्‍तान और वहां बैठे आ‍तंकियों ने ऐसा कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि भारतीय जवानों का एक छोटा सा दस्‍ता उनके लिए मौत बन सकता है। आपको याद दिला दें कि उरी हमले के वक्‍त सेना प्रमुख ने साफ कहा था कि जवानों की मौत का बदला जरूर लिया जाएगा, लेकिन इसके लिए समय और जगह भारत ही तय करेगा। सर्जिकल स्‍ट्राइक में यह सभी कुछ दिखाई दिया।
सर्जिकल स्‍ट्राइक के लिए चुने गए बेहतरीन जवान
इस सर्जिकल स्‍ट्राइक से पहले भारत ने इसको अंजाम देने के लिए अपने बेहतरीन जवानों को चुना। सीमापार जाकर दुश्‍मन को ढेर करने की बाकायदा प्रैक्टिस की गई। इसके बाद इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन में जाने वाला हर जवान स्‍पेशलाइज्‍ड कमांडो फोर्स से ताल्‍लुक रखता था। ऑपरेशन के दौरान सभी जवानों के पास काफी मात्रा में असलाह था। सभी के सिर पर एक स्‍पेशल हैलमेट था जो उनकी हिफाजत के साथ-साथ वहां मौजूद चीजों को रिकॉर्ड भी कर रहा था। सभी जवान एक दूसरे से जुड़े होने के अलावा बेस कमांड से जुड़े हुए थे। कहा तो यहां तक गया था कि इस ऑपरेशन की सीधी निगरानी दिल्‍ली में हो रही थी। हर कोई चाहता था कि इस ऑपरेशन से जुड़ा हर जवान सकुशल वापस आ जाए। इस ऑपरेशन की जानकारी कुछ ही लोगों के पास थी। इस पूरी टीम के कमांडिंग ऑफिसर के मुताबिक इस ऑपरेशन में गए सभी जवानों का मकसद बेहद साफ था कि दुश्‍मन के इलाके में आतंकियों को ज्‍यादा से ज्‍यादा नुकसान पहुंचाया जाए और उन्‍हें खत्‍म कर दिया जाए।
मिशन के लिए ली गई सैटेलाइट की मदद
कमांडिंग ऑफिसर के अलावा इस टीम में शामिल दूसरे जवान का कहना था कि ऑपरेशन पर जाने वाले टीम के हर सदस्‍य को इस बात की जानकारी थी कि वह किस खतरनाक मिशन पर जा रहा है। हर कोई जानता था कि वह शायद वापस न आ सके। उनके खुद के लिए यह पल न भूलने वाला पल था। सभी जवानों के पास हाईली सॉफेस्टिकेटेड वैपसं थे। मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सैटेलाइट की मदद ली गई थी। आतंकियों की पॉजीशन जानने के लिए सैटेलाइट को ही माध्‍यम बनाया गया था। यह एक ऐसा ऑपरेशन था जिसने रातों-रात पाकिस्‍तान सरकार समेत वहां की आर्मी और वहां मौजूद आतंकी और उनके आकाओं की नींद उड़ाने का काम किया था। पाकिस्‍तान के लिए इस सर्जिकल स्‍ट्राइक को मानना और नकारना दोनों ही भारी पड़ रहा था। हालांकि पाकिस्‍तान ने इस तरह के ऑपरेशन को कभी नहीं माना लेकिन यह हकीकत है कि पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर में इस तरह की कार्रवाई हुई थी। इसकी पुष्टि खुद वहां के आम लोगों ने भी की थी, जो बाद में मीडिया में भी आई। इस सर्जिकल स्‍ट्राइक के बाद पाकिस्‍तान ने जहां सेना के साथ मिलकर आतंकी कैंपों की जगह बदल दी थी वहीं भारतीय जवानों के खौफ से आतंकी कांपने भी लगे थे।
उरी हमला
आपको बता दें कि 18 सितंबर 2016 की सुबह करीब पांच बजे जम्मू और कश्मीर के उरी सेक्टर में एलओसी के पास स्थित भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। हालांकि सैन्य बलों की कार्रवाई में हमला करने वाले सभी चार आतंकी मारे गए थे। यह भारतीय सेना पर किया गया, लगभग 20 सालों में सबसे बड़ा हमला था। फिदायीन हमले के बाद आतं‍कियों ने सोते हुए जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। इसके बाद ही सर्जिकल स्‍ट्राइक करने का मन बनाया गया था जिसे उरी हमले के 11 दिन बाद 29 सितंबर 2016 को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया था।
आतंकियों के शिविर ध्वस्त
इस सफल ऑपरेशन में जवानों ने आतंकियों के 7 शिविरों को ध्वस्त कर दिया था। साथ ही 38 आतंकियों को भी मार गिराया था। ऑपरेशन के बाद मीडिया के सामने आए डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने प्रेस कॉंफ्रेस में इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने कहा है कि सीमा पार मौजूद ये सभी आतंकी भारत पर बड़े हमले का प्लान बना चुके थे। भारत ने पहले आतंकियों के ठिकानों की जानकारी इकट्ठा की और फिर इसको अंजाम दिया। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आतंकियों का डीएनए पाकिस्तान को भी सौंपा जाएगा। इस संवाददाता सम्मेलन में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप भी मौजूद थे।
ऑपरेशन में शामिल जवानों को दिए गए पदक
आपको यहां पर ये भी बता दें कि सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल सेना के स्पेशल फोर्सेस यूनिट के 4 पैरा और 9 पैरा के कमांडिंग अधिकारियों को युद्ध सेवा पदक नवाजा गया था। इसके अलावा इस यूनिट में शामिल जवानों को कीर्ति चक्र, युद्ध सेवा मेडल भी दिया गया था। यह ऑपरेशन साढ़े 12 बजे रात में शुरु हुआ और सुबह साढे चार बजे तक चला था। इस दौरान अभियान में शामिल जवान नियंत्रण रेखा के उस पार करीब दो किलोमीटर तक रेंगेते हुए आतंकी ठिकानों तक पहुंचे थे और ये पूरा ऑपरेशन 2-3 किलोमीटर के इलाके में चलाया गया था। भारतीय जवानों द्वारा पाकिस्‍तान में की गई इस सर्जिकल स्‍ट्राइक को अब हिस्‍ट्री चैनल एक डॉक्‍यूमेंटरी बनाकर सभी के सामने पेश कर रहा है। यह डॉक्‍यूमेंटरी सोमवार 22 दिसंबर 2018 को रात 9 बजे प्रसारित की जाएगी। चैनल ने इसका नाम स्पेशल ऑपरेशन इंडिया: सर्जिकल स्ट्राइक दिया है।

 


नई दिल्ली - भारत के खिलाफ देशद्रोही संगठन प्रत्यक्ष और परोछ तरीके से लड़ाई लड़ रहे हैं। सुरक्षा बल जहां पाकिस्तान से सटे एलओसी पर आतंकी और उनके संगठनों को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं,वहीं देश के अंदर नापाक मंसूबों को अंजाम देने की फिराक में बैठे संगठनों पर नकेल लगाने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में दिल्ली में स्पेशल सेल को अहम कामयाबी मिली जब उसने भारत के लादेन नाम से कुख्यात आतंकी और इंडियन मुजाहिद्दीन के संस्थापकों में से एक अब्दुल सुभान कुरैशी को गिरफ्तार किया। कुरैशी के सिर पर चार लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसकी तलाश पुलिस पिछले कई वर्षों से कर रही थी।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक कुरैशी ने 2007-8 के दौरान सिमी के चार ट्रेनिंग कैंप बनाए थे। और वो आतंक के जाल को और पुख्ता करने के लिए सऊदी अरब भी गया था जहां उसने दो साल गुजारे। पुलिस का कहना है कि बोधगया हमले में कुरैशी की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही वो दिल्ली और एनसीआर इलाके में इंडियन मुजाहिद्दीन और सिमी को दोबारा खड़ा करने की योजना बना रहा था। ये बात सच है कि भारत का लादेन यानि कुरैशी इस समय पुलिस की गिरफ्त में है। लेकिन अभी भी कुछ चेहरे देश के अंदर और बाहर है जिनकी वजह से खतरा बरकरार है
दाऊद इब्राहिम कास्कर
आतंक का ये चेहरा पिछले 24 साल से गायब है। भारत की धरती पर जन्म लेने वाला दाऊद 1993 में मुंबई सीरियल ब्लास्ट का गुनहगार और अब मुंबई पर हमलों का मददगार है। दाऊद को पकड़ पाना एक ऐसा सपना है जो 24 सालों से भारत की खुफिया एजेंसियां देख रही हैं।
दाऊद का छोटा भाई अनीस इब्रहिम
अनीस इब्राहिम दाऊद इब्राहिम का दाहिना हाथ है। दाऊद के साथ मिलकर 1993 मुंबई धमाकों का खाका तैयार किया था। मुंबई धमाकों में 257 मासूम मारे गये, 500 से ज्यादा लोग जख्मी हुए।
टाइगर मेमन
दाऊद के करीबियों में टाइगर मेमन है। इसका भी 1993 मुंबई धमाकों में अहम भूमिका थी। भारत सरकार को इसकी तलाश है। मेमन भाईयों ने भी दाऊद के साथ मिलकर देश को दहलाया। 1993 के मुंबई धमाकों की साजिश दाऊद ने टाइगर मेमन के साथ रची। हत्या और अपहरण के अलावा आतंकवाद और हथियारों की तस्करी के मामले उस पर दर्ज हैं। छोटा भाई अयूब मेमन भी हर अपराध में टाइगर के साथ कदमताल कर रहा है। दोनों भाइयों की पनाह कराची ही है। हालांकि टाइगर मेमन कई बार दुबई में भी देखा गया है।
छोटा शकील -
छोटा शकील कराची में रहता है। ये हत्या, अपहरण, जबरन वसूली और ब्लैकमेल के कई मामलों में अभियुक्त है।
अयूब मेमन
इसने 1993 के मुंबई धमाकों में दाऊद के साथ मिलकर पूरी साजिश का खाका तैयार किया था। साथ ही हत्या और अपहरण के अलावा आतंकवाद और हथियारों की तस्करी के मामले उस पर दर्ज हैं।
अब्दुल रज्जाक
ये भी दाऊद के गुर्गों के साथ कराची में ही बैठा है। ये सभी आतंकवादी आज भी भारत में आतंकवादी हमले करने की फिराक में जुटे हैं। भारत को इसका सरगर्मी से तलाश है।
अब्दुल करीम 'टुंडा'
कश्मीर में आतंकवाद फैलाने का आरोपी है। 1996-97 में दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में 30 से ज्यादा ब्लास्ट में वांछित है। टूंडा सजा भुगत रहा है।
इशाक अता हुसैन
ये दाऊद इब्राहिम का खास है। इशाक पर भारत के एक बड़े नेता के कत्ल की साजिश का आरोप है। इस वक्त ये कराची में छुपा बैठा है।
सागिर सबीर अली शेख
ये दाउद का बहुत करीबी है। इस पर भी भारत के एक बड़े नेता के कत्ल की साजिश का आरोप है। इसने भी कराची में पनाह ले रखी है।
हाफिज मोहम्मद सईद
अंतरराष्ट्रीय आतंकी सईद की गुनाहों की लिस्ट काफी लंबी है। हाफिज मोहम्मद सईद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हमालवर दस्ते के सबसे खूंखार आतंकवादी है। भारत सरकार की तरफ से पाकिस्तान को सौंपी गई 20 मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की लिस्ट में इसका भी नाम है। हफीज ने पाक अधीकृत मुरीदके में बैठकर मुंबई धमाकों की साजिश रची थी। इस साजिश में उसे दाऊद इब्राहिम का भी भरपूर साथ मिला था।
मौलाना मसूद अजहर
भारत को मसूद अजहर की काफी दिनों से तलाश है। ये वो आतंकी है जिसे भारत सरकार ने आईसी 814 विमान के बंधकों के एवज में छोड़ दिया था। खुद तत्कालीम विदेश मंत्री जसवंत सिंह इन्हें छोड़ने कंधार पहुंचे थे। और साथ ही 2001 में संसद पर हुए हमले में इसका हाथ था। भारत की जेल से छूटते ही अजहर के इरादे और खौफनाक हो चुके थे। अजहर ने दिसंबर 1999 में जैश-ए-मोहम्मद नाम के संगठन की स्थापना की। अजहर के खौफनाक इरादों का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि आज ये संगठन जम्मू और कश्मीर का सबसे खतरनाक संगठन बन चुका है।
सैय्यद सलाउद्दीन
गुनाह की लिस्ट में सैय्यद सलाउदीन को नौवें नंबर पर रखा गया है। ये हिजबुल मुजाहिदीन का मुखिया है। जिसने जम्मू कश्मीर में एक मस्जिद का मुतवल्ली होने के बावजूद यहां की जड़ें खोखली कर डालीं। जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए भारत सरकार को सैयद सलाउदीन की तलाश है। ये पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में बैठकर अपने आतंकी मंसूबों को अंजाम देता है। सलाउदीन ने भारत का नागरिक होने के बावजूद इस देश की जड़ें खोदनी शुरू कर दीं। सैयद सलाउद्दीन 1980 में श्रीनगर के पास बड़गाम में एक मस्जिद में इमाम था। 1987 में उसने विधानसभा चुनाव में किस्मत भी आजमाई। लेकिन वो चुनाव हार गया था।
वाधवां सिंह बब्बर
ये बब्बर खालसा इंटरनेश्नल का आतंकवादी है। 80 के दशक में पंजाब में आतंकवाद की बेल सींचने का आरोपी है। पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या समेत एक दर्जन से ज्यादा मामलों में इसकी तलाश है। फिलहाल लाहौर को अपना ठिकाना बनाया हुआ है।
रंजीत सिंह नीता
खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का ये मुखिया है। कत्ल, बम ब्लास्ट और हथियारों की तस्करी में इसकी तलाश है। बताया जाता है कि वो लाहौर से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है।
परमजीत सिंह पंजवार
ये खालिस्तान कमांडो फोर्स का नेता है। पंजाब में आतंकवाद को फिर से हवा देने की कोशिश में ये वांछित है। हत्या और हथियारों की तस्करी के दर्जन भर मामलों में भारत सरकार को इसकी तलाश है। परमजीत लाहौर में रहता है।
लखबीर सिंह रोड
ये इंरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन का नेता है। पंजाब में धार्मिक भावनाएं भड़काने, नेताओं पर हमले और हथियारों की तस्करी का आरोपी है। बताया जाता है कि ये लाहौर से अपने संगठन को चला रहा है।

 


नई दिल्ली - भारत जल्‍द ही अपनी सीमाओं के साथ अपने आकाश को भी सुरक्षा कवच से सुरक्षित कर देगा। भारत के ये सुरक्षाकचव उन घातक मिसाइलों के रूप में हैं जो या तो देश की सेनाओं में शामिल हो चुके हैं या फिर आने वाले समय में शामिल हो जाएंगे। इन्‍हीं में से एक रूस की एस-400 ट्रंफ, जिसके लिए भारत रूस से बात करने वाला है। यदि इस सौदे को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत बन जाती है तो यह हालिया समय की सबसे बड़ी डील होगी। आपको यहां पर यह भी बता दें कि इससे पहले भारत ने रूस से सुखाई 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों की डील करीब 12 बिलियन डॉलर में की थी। इसके अलावा आईएनएस विक्रमादित्‍य एयरक्राफ्ट करियर की डील करीब 23 बिलियन में हुई थी। वही दो बिलियन डॉलर की डील मिग 29 के की हुई थी जो इस विमानवाहक युद्धपोत से उड़ान भर सकेंगे।
गेम चेंजर है ट्रंफ
एस-400 ट्रंफ न सिर्फ काफी घातक मिसाइल सिस्‍टम है बल्कि तकनीक के हिसाब से देखा जाए तो इसके मुकाबले में कई देश कहीं नहीं ठहरते हैं। इसका वार अचूक है। इस मिसाइल सिस्‍टम को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के बीच वर्ष 2016 में बातचीत हुई थी। यह बातचीत गोवा में ब्रिक्‍स सम्‍मेलन के दौरान हुई थी। इसको लेकर सबसे पहले वर्ष 2015 में उस वक्‍त बात सामने आई थी जब डिफेंस एक्‍वेजिशन काउंसिल डीएसी ने इस मिसाइल सिस्‍टम को बड़ा गेम चेंजर सिस्‍टम करार दिया था। इसके अलावा उस वक्‍त यह भी कहा गया था कि यह मिसाइल सिस्‍टम भारत के एयर डिफेंस सिस्‍टम को भी काफी पुख्‍ता करेगा। दिसंबर 2015 में इसको डीएसी ने क्लियर कर दिया था। जिसके बाद दोनों राष्‍ट्राध्‍यक्षों के बीच बातचीत हुई थी।
काफी अहम है ट्रंफ मिसाइल सिस्‍टम
2016 के दौरान हुई इस बातचीज में पांच ट्रंफ के अलावा चार ग्रीगोरिच क्‍लास फ्राइगेट और 200 कामोव-226टी लाइट हैलीकॉप्‍टर के साथ एक न्‍यूक्लियर सबमरीन को करीब साढ़े दस बिलियन डॉलर की लागत से लीज पर लेने पर सहमति हुई थी। एस-400 ट्रंफ की ही यदि बात करें तो यह युद्ध के समय में और दुश्‍मन की मिसाइल को बीच में ही नष्‍ट करने में सक्षम है। यह मिसाइल सिस्‍टम लॉन्‍ग रेंज राडार सिस्‍टम से भी लैस है जो 100-300 किमी तक की रेंज में दुश्‍मन की मिसाइल को पहचान कर इसको नष्‍ट कर सकता है। यह एक सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइल है जिसका प्रमुख काम दुश्‍मन की मिसाइल को इंटरसेप्‍ट कर उसको नष्‍ट करना है। भारत और रूस के बीच इस मिसाइल को लेकर ऐसे समय में बातचीत शुरू होने वाली है जब इस मिसाइल सिस्‍टम की बैटरी की सप्‍लाई चीन की तरफ की जा रही है। यह सौदा नाटो और चीन के बीच वर्ष 2014 में हुआ था, जो करीब 3 बिलियन डॉलर का था।
54 माह में रूस सौंपेगा पूरा सिस्‍टम
एस-400 ट्रंफ मिसाइल का सौदा करीब 39 हजार डॉलर का है। इस मिसाइल सिस्‍टम की एक खासियत यह भी है यह तीस किमी की ऊंचाई पर चार सौ किमी के दायरे में दुश्‍मन की मिसाइल को नष्‍ट कर सकती है। दोनों देशों के बीच इस डील के फाइनल होने के बाद रूस इसको करीब दो वर्षों के भीतर डिलीवर कर देगा। एस-400 ट्रंफ मीडियम रेंज बैलेस्टिक मिसाइल से लैस होगा। क्रूज मिसाइल के अलावा इन मिसाइलों की डिलीवरी रूस की तरफ से 54 माह में होगी। इसमें कोई शक नहीं है कि इस मिसाइल के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद देश की हवाइ्र सीमाएं और सुरक्षित हो जाएंगी। साधारण शब्‍दों में यह कहा जाएगा कि इस मिसाइल सिस्‍टम की पहली यूनिट को रूस दो वर्षों में और पूरी डील की डिलीवरी को वह 54 माह में करेगा। यह इसलिए भी बेहद खास है क्‍योंकि हाल ही में भारत ने बराक मिसाइल की खरीद को भी हरी झंडी दे दी है।
ये हैं दूसरी घातक मिसाइल
भारत की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने में कुछ दूसरी मिसाइल भी अहम भूमिका निभाएंगी। इनमें आकाश-1, स्‍पाइडर शामिल हैं। आकाश-1 की यदि बात की जाए तो इसको भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। इसके अलावा इसको थल सेना में इस वर्ष शामिल कर लिया जाएगा। इसके अलावा स्‍पाइडर इजरायल द्वारा तैयार किया गया क्विक रिएक्‍शन मिसाइल सिस्‍टम है। डीआडीओ इसके विकास में जुटा हुआ है। बराक मिसाइल भी इजरायल का ही प्रोडेक्‍ट है। बराक-1 सिस्‍टम को पहले ही नौसेना के युद्धपोतों पर तैनात कर दिया गया है। इनकी रेंज 9 किमी की है। इसके अलावा इसको फ्रंटलाइन वारशिप और वायुसेना में भी शामिल किया जाएगा। इस मिसाइल की रेंज 70 किमी है।


हैदराबाद - 'पद्मावत' विवाद की आग अब तेलंगाना तक जा पहुंची है। राजपूत संगठन करणी सेना के प्रदर्शनकारियों का हंगामा और विरोध अब उग्र होता जा रहा है। करणी सेना ने तेलंगाना के एक मूवी हॉल में पहले तोड़फोड़ की और फिर उसे आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पद्मावत का पोस्टर भी फाड़ा और जमकर नारेबाजी की।
टिवोली थियेटर के मैनेजर ने बताया कि उन्होंने बेगमपेट पुलिस को इसके बारे में जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने पहुंचकर मामले को शांत कराया। मैनेजर ने बताया, 'कुछ लोग टिवोली थिएटर पहुंचे और 25 जनवरी को रिलीज होने जा रही फिल्म पद्मावत के पोस्टर फाड़ने लगे। हमने तुरंत बेगमपेट पुलिस को इसकी जानकारी दी। पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात की, जिसके बाद वे वापस चले गए।'
इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश में भी पद्मावत की रिलीज को लेकर जमकर उत्पात मचाया। करणी सेना के प्रदर्शनकारियों ने लखनऊ में फिल्म का पोस्टर जलाते हुए कहा कि हम हर थिएटर के बाहर पद्मावत का विरोध करेंगे और फिल्म को न दिखाने की मांग करेंगे।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चार राज्यों- मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात द्वारा फिल्म पद्मावत पर लगाए बैन को हटाने का आदेश सुनाया था। जिसके बाद फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी करणी सेना किसी भी सूरत में फिल्म रिलीज न होने की मांग पर उड़ी है। अब इनकी मांग और प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म को पास करने के बाद सभी राज्य कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य है और फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकना भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि बैन लगाने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों सरकारों ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से अपने पिछले आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है।
गौरतलब है कि करणी सेना समेत कई राजपूत संगठनों ने पद्मावत के निर्देशक संजय लीला भंसाली पर इतिहास के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। तमाम विरोध और प्रदर्शन के बाद दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह स्टारर फिल्म पद्मावत 25 जनवरी को रिलीज होने जा रही है। हालांकि करणी सेना लगातार यह धमकी दे रही है कि अगर फिल्म रिलीज हुई तो उसका अंजाम भुगतना होगा।


नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज स्विट्जरलैंड के दावोस के लिए रवाना हो गए और शाम 6:30 बजे दावोस पहुंच जाएंगे। पीएम मोदी यहां पर मंगलवार से शुरू हो रहे विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। उनकी कोशिश दुनिया के आर्थिक जगत के इस महाकुंभ में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत वैश्विक कंपनियों को देश में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की होगी। इस काम में उनके कैबिनेट के करीब आधे दर्जन मंत्री सहयोग करेंगे।
120 सदस्यों वाला प्रतिनिधिमंडल
प्रधानमंत्री मोदी का दावोस में व्यस्त कार्यक्रम है। वह छह मंत्रियों और दो मुख्यमंत्रियों सहित करीब 120 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सोमवार को दावोस पहुंचेंगे। उनकी पूरी कोशिश भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए विदेशी निवेश को आकर्षित करने की होगी। यही कारण है सोमवार को पहुंचते ही वह एयर बस, हिताची सहित 60 बड़ी कंपनियों के सीईओ के साथ राउंड टेबल डिनर करेंगे। इस दौरान 20 भारतीय कंपनियों के सीईओ भी मौजूद रहेंगे। पीएम मोदी मंगलवार को दावोस में भारत में कारोबार सुगमता के लिए किए गए बदलावों की जानकारी देंगे।
इसके बाद वह डब्ल्यूईएफ के 120 सदस्यीय निवेश समुदाय से चर्चा करने का कार्यक्रम है। मोदी के एजेंडे में आर्थिक मुद्दों के अलावा रणनीतिक मुद्दे भी शीर्ष पर होंगे। इसी कड़ी में वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, स्विस राष्ट्रपति अलेन बर्सेट से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ-साथ वित्तमंत्री अरुण जेटली, वाणिज्यमंत्री सुरेश प्रभु, रेलमंत्री पीयूष गोयल, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह भी दावोस में कुल 25 सत्रों को संबोधित करेंगे।
21 वर्ष बाद हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय पीएम मोदी
पीएम मोदी 1997 के बाद इस प्रतिष्ठित वैश्विक व्यापारिक सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले 1997 में अपने छोटे कार्यकाल के दौरान देवेगौड़ा इस सम्मेलन में शामिल हो चुके हैं। नरसिम्हा राव 1994 में इस सम्मेलन में शामिल होने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। वाजपेयी और मनमोहन सिंह अपने कार्यकाल के दौरान विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन में शामिल नहीं हुए थे। इसी तरह से ट्रंप से पहले 2000 में क्लिंटन इस सम्मेलन में शामिल हो चुके हैं। इसके बाद बुश और ओबामा इसमें शामिल नहीं हुए थे। पिछले साल चीन की तरफ से पहली बार चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन में शामिल हुए थे। पिछले दो वर्षों में पीएम मोदी और ट्रंप की दो बार मुलाकात हो चुकी है। दोनों नेता जून 2017 में पहली बार वॉशिंगटन डीसी में मिले थे। इसके बाद इनकी दूसरी मुलाकात आसियान बैठक के दौरान हुई थी। दावोस एक बार फिर दोनों नेताओं की मुलाकात का एक मंच हो सकता है।


नई दिल्ली - गुजरात सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि आसाराम बापू से जुड़े दुष्कर्म मामले में 29 जनवरी से पीड़िता के बयानों की जांच होगी। इस पर शीर्ष कोर्ट ने आसाराम की जमानत याचिका पर नौ सप्ताह तक सुनवाई स्थगित कर दी और कहा कि पीड़िता की जांच के बाद मामले में सुनवाई की जाएगी।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 जनवरी को आसाराम से जुड़े दुष्‍कर्म मामले में जानकारी मांगी थी और गुजरात सरकार से इस बारे में एक रिपोर्ट सौंपने को कहा था। आसाराम के वकील ने कोर्ट से कहा था कि गुजरात के मामले में 92 गवाहों में से 22 की जांच की गई है। उनमें से 14 को हटा दिया गया है और अन्‍य की जांच की आवश्यकता है।
28 अगस्त को शीर्ष कोर्ट ने दुष्‍कर्म के मामले में देरी को लेकर नाराजगी जाहिर की थी और राज्य सरकार को रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा था। पिछले साल 12 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात की अदालत से आसाराम के खिलाफ सूरत स्थित दो बहनों द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में अभियोजन पक्ष के गवाहों की रिकॉर्डिंग की जांच को तेज करने के लिए कहा था।
आसाराम पर दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले
इससे पहले शीर्ष अदालत ने आसाराम को राजस्थान और गुजरात में दर्ज दो यौन उत्पीड़न मामलों के विभिन्न आधारों पर जमानत देने से इनकार कर दिया था। दो सूरत में रहने वाली बहनों ने आसाराम और उनके पुत्र नारायण साई के खिलाफ बलात्कार सहित अलग-अलग मामले में शिकायत दर्ज करवाई थी।


नई दिल्ली - संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत की रिलीज को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। सुप्रीम कोर्ट के पूरे देश में रिलीज के आदेश के बाद भी करणी सेना और राजपूत समाज के लोगों का विरोध जारी है। नोएडा में जहां आगजनी और तोड़फोड़ करने वाले 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उधर मध्य प्रदेश के उज्जैन में करणी सेना ने कई रास्तों को जाम कर दिया।
नोएडा में गिरफ्तारी
उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में पद्मावत फिल्म के विरोध में कल शाम हत्या का प्रयास, आगजनी व बलवा और तोड़फोड़ करने के आरोप में पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया। अदालत ने सभी आरोपियों को आज 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
नगर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि कल शाम सैकड़ों की संख्या में राजपूत समाज के लोगों ने नोएडा के डीएनडी पुल पर जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की। भीड़ ने तलवार, ईट पत्थर आदि से डीएनडी टोल प्लाजा पर नियुक्त कर्मचारियों और जनता पर जानलेवा हमला किया।
उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने कल रात करवाई करते हुए नामजद आरोपी शिवराणा, शिवम, हिमांशु, अनुज, रजनीश, तुषार, मोहित, ललित, संदीप, प्रशांत मानवेन्दर, अनुज और श्रवण को कल रात को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि आज राहुल, रोहित व संजय को थाना सेक्टर 20 पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
अधिकारी ने बताया कि फिल्म पद्मावती के विरोध में कल जनपद के अन्य जगहों पर भी विरोध हुआ था अन्य मामलों में थाना कासना में दरोगा सतवीर सिंह ने 500 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि इन लोगों ने ग्रेटर नोएडा स्थित ग्रैंड वेनिस मॉल में तोड़फोड़ और पथराव किया।
वहीं थाना दादरी में दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया है कि रमेश रावल, संजीव मोहन आदि ने गांव घोड़ी बछेड़ा में आयोजित पंचायत में सैकड़ों लोगों को संबोधित करते हुए फिल्म पद्मावती के विरोध में भड़काऊ भाषण दिया तथा भीड़ को उत्तेजित किया।
प्रदर्शनकारियों ने चीनी लूटा
एक अन्य घटना में जिले के दादरी थाना क्षेत्र के नवीन मंडी के पास से अज्ञात बदमाशों ने एक ट्रक चालक को बेहोश करके 200 बोरी चीनी लूट लिया। थाना दादरी के प्रभारी निरीक्षक राम सेन सिंह ने बताया कि मेरठ के दौराला से 19 जनवरी को सोनू नामक ट्रक चालक 200 बोरी चीनी भरकर गाजियाबाद जा रहा था। 21 जनवरी को उसका ट्रक दादरी के नवीन मंडी के पास मिला, जिसमें सोनू बेहोश पड़ा हुआ था। ट्रक मालिक की शिकायत पर पुलिस घटना की रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
मध्य प्रदेश में करणी सेना ने रास्ते किये जाम
निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत के रिलीज पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर करणी सेना के सदस्यों ने आज यहां कुछ मार्गों को जाम किया, जिन्हे बाद में पुलिस ने खुलवा दिया।
राजपूत समाज के संगठन करणी सेना के सदस्यों ने फिल्म पद्मावत की रिलीज पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर उज्जैन-नागदा, उज्जैन-देवास और उज्जैन-कोटा मार्ग पर टायर जला दिये। इससे इन मार्गों पर यातायात जाम हो गया।
पद्मावती विवाद: फिल्म पर करणी सेना के तेवर अभी भी तीखे
लिस अधीक्षक सचिन अतुलकर ने बताया, ''चक्का जाम को खुलवा दिया गया है। प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया गया है तथा उन्हें कानून हाथ में नहीं लेने की समझा बुझाकर छोड़ दिया गया है। पुलिस अधीक्षक ने हिंसा की किसी भी घटना से इंकार किया है।
उन्होंने कहा कि सड़कों पर अवरोधों को हटाकर जाम खोल दिया गया है। जहां भी कानून एवं व्यवस्था को तोड़ने की जो भी कोशिश करेगा उसे कानूनन कार्रवाई कर रोका जायेगा।
मालूम हो सुप्रीम कोर्ट ने पद्मावत की देश में 25 जनवरी को होने वाली रिलीज का रास्ता साफ कर दिया है। इस बीच, राजस्थान और मध्यप्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अर्जी दायर कर आज उससे अनुरोध किया है कि विवादित फिल्म पद्मावत की रिलीज से जुड़े अपने 18 जनवरी के फैसले को वह वापस ले ले। सुप्रीम कोर्ट के 18 जनवरी के फैसले के आधार पर 25 जनवरी को पूरे देश में फिल्म प्रदर्शित करने की अनुमति मिल गयी है।

 

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