नई दिल्ली - बीसीसीआइ में पदाधिकारियों और प्रशासकों की समिति (सीओए) के बीच चल रही रस्साकशी ने शुक्रवार को नया मोड़ ले लिया, जब विनोद राय की अगुआई वाली समिति ने मान्यता प्राप्त इकाइयों की 22 जून को होने वाली विशेष आम बैठक (एसजीएम) को रोकने का निर्देश जारी किया। बीसीसीआइ के पुराने अधिकारी और मौजूदा अधिकारी हालांकि अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और उनका मानना है कि बैठक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी।
सीओए ने हालांकि कर्मचारियों से कहा है कि वे एसजीएम से जुड़े राज्य इकाइयों के किसी भी बिल का भुगतान नहीं करें। सीओए बैठक को गैरकानूनी मानता है क्योंकि 15 मार्च के दिशानिर्देशों के अनुसार इसके लिए कोई स्वीकृति नहीं मांगी गई। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, एसजीएम के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति की पूर्व स्वीकृति की जरूरत होती है। दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ समय से खींचतान चल रही है, लेकिन पदाधिकारी जिस चीज से नाराज हैं वह पत्र की सामग्री है, जिसमें बैठक के लिए मौजूद रहने वाले अधिकारियों के यात्रा और महंगाई भत्ते एवं विमान किराये का भुगतान रोकने की रणनीति अपनाई गई है।
सीओए ने कर्मचारियों को लिखे ईमेल में कहा, ‘22 जून को होने वाली एसजीएम के संदर्भ में ना तो सीओए से स्वीकृति मांगी गई और ना ही दी गई है। सीओए से आगे के निर्देश मिलने तक यह निर्देश दिए जाते हैं कि कोई भी कर्मचारी या सलाहकार या रिटेनर या सेवा प्रदाता इस एसजीएम से जुड़े ना तो कोई कागजात तैयार करे और ना ही इसे बांटे या किसी तरह से आगे की कार्रवाई करे या नोटिस में मदद करे।’
यह बैठक उस समय बुलाई गई जब 15 से अधिक राज्य इकाइयों ने कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना को एसजीएम बुलाने के लिए पत्र लिखा। इसके जवाब में खन्ना ने कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी को तीन हफ्ते के समय में एसजीएम बुलाने का नोटिस जारी करने को कहा। बीसीसीआइ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि सीओए के पास एसजीएम को रोकने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह सदस्यों का अधिकार है। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, ‘अगर संवाद जारी करने वाले को संवाद जारी करने का अधिकार नहीं है तो इस संवाद को किसी अधिकारी के साथ लागू नहीं किया जा सकता।

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