नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने कहा कि क्रिकेट में 'आम समझ जैसा कुछ नहीं होता' और बताया कि कप्तान के रूप में वह किस तरह से टीम के खिलाडि़यों के साथ घुलते-मिलते थे। अपने 37वें जन्मदिन पर धौनी ने भारतीय टीम के कप्तान के रूप में अपने अनुभव, उनसे मिले सबक आदि के बारे में बात की।भारत के सबसे सफल कप्तान के लिए कप्तानी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती थी कि वह किस तरह खिलाडि़यों के अहम को चोट पहुंचाए बिना उनमें आम समझ भरें। धौनी ने अपने जन्मदिन (सात जुलाई) पर एक इंटरव्यू में कहा, 'कप्तान के रूप में मैंने सबसे बड़ी बात यह सीखी कि कई बार मैं सोचता था कि यह आम समझ है। लेकिन नहीं, आम समझ जैसी कोई चीज नहीं होती। आपको लगता है कि यह बताने की चीज नहीं है, लेकिन टीम के माहौल में आपको बात कहने की जरूरत है।' उन्होंने बताया कि मैच की स्थितियों में किस तरह अलग-अलग खिलाड़ी अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देते थे और कब कप्तान को पहल करने की जरूरत होती है।धौनी ने कहा, 'कुछ लोग ऐसे होंगे जो बुद्धिमान होंगे और वे कहेंगे 'अरे यह क्या बोल रहा है, इसकी जरूरत नहीं है, लेकिन यह उनके लिए नहीं होता। वे चीजें समझ सकते हैं। यह सब उस इंसान के लिए होता है जो समझता नहीं है। लेकिन, साथ ही एक इंसान को संबोधित करना बहुत गलत होता है, क्योंकि उसे पता होगा कि अच्छा यह तो मुझे ही बोल रहा है।'पूर्व कप्तान ने कहा, 'हम एक ऐसे माहौल में समय बिताने की कोशिश करते हैं जहां आपको काफी सहजता का अनुभव हो। आपको पहल करने की जरूरत होती है, जब तक वह मुझे प्रतिक्रिया नहीं देगा, मुझसे बात नहीं करेगा, मुझे पता नहीं चलेगा कि उसके मन में क्या चल रहा है। उस इंसान को समझने के लिए मुझे उसके साथ समय बिताना चाहिए।जब तक आप उसे जानेंगे नहीं, उसे यह सलाह देना काफी मुश्किल होगा कि उसे क्या करना चाहिए। साथ ही आपको उसके मन में घुसना होगा क्योंकि हर इंसान अलग होता है। मुझे व्यक्तिगत रूप से महसूस हुआ कि टीम माहौल में सबसे बड़ी समस्या इस तरह के सवालों के जवाब देना है कि मैं किस कारण से मैच नहीं खेल रहा हूं। वे फिर पूछेंगे कि मैं आपसे सवाल पूछ रहा हूं और मुझे जवाब नहीं चाहिए।'

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