भारत के इकलौते ऐसे क्रिकेटर जिनकी सेंचुरी का मतलब होता था कि टीम हारेगी नहीं। कलाई से शॉट खेलने में माहिर गुडप्पा विश्वनाथ अपना 69वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 12 फरवरी 1949 को मैसूर में हुआ था। उन्होंने भारत के लिए 91 टेस्ट मैचों में 41.93 की औसत से 6080 रन बनाए। इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वो नेशनल सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन भी रहे। विश्वनाथ ने ही सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ को 1996 में इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में चुना था और इन दोनों ने खूब नाम कमाया।हमारे साथी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में विश्वनाथ ने कहा, 'एक सफल टेस्ट बल्लेबाज बनने के लिए दो क्वालिटी होना बहुत जरूरी हैं। एक कि उस क्रिकेटर के पास टेकनीक होनी चाहिए और दूसरा उसमें टेंपरामेंट होना चाहिए। मुश्किल हालातों में कैसे शांत रहा जाए ये उस व्यक्ति को आना चाहिए।'जब उनसे सुनील गावस्कर के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'उनकी टेकनीक शानदार थी और साथ ही टेंपरामेंट का भी कोई तोड़ नहीं था। उनकी बेस्ट बात ये थी कि वो किस भी लेवल पर क्रिकेट खेल रहे हों, लेकिन कभी अपना विकेट बस यूं गंवा नहीं देते थे।'

 

 

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