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जम्मू-कश्मीर में जारी राजनीतिक उथलपुथल के बीच राज्य के बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र रैना को आतंकवादी संगठनों की ओर से जान से मारने की धमकी मिलने से माहौल और गरमा गया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के साथ पिछले तीन साल से चल रही गठबंधन सरकार से बीजेपी ने मंगलवार को हटने की घोषणा की। इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक माहौल उफान पर है। राज्य में बुधवार से राज्यपाल शासन लागू हो गया है। रैना ने मीडिया से बातचीत करते हुए गुरुवार को बताया कि उन्हें आतंकवादी संगठनों की तरफ से जान से मारने की धमकी मिली है। उन्होंने कहा, 'जान से मारने की धमकी के संबंध में मैंने संबंधित अधिकारियों और राज्यपाल को सूचना दे दी है। मुझे पिछले कुछ समय से ही ऐसी धमकियां मिल रही हैं।' बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, 'मुझे गुरुवार को ही जान से मारने की धमकी देने की एक कॉल कराची से भी आई है।रैना उग्र छवि के नेता हैं और पाकिस्तान के खिलाफ मुखर बयान देने से घबराते नहीं हैं। उन्हें इसी वर्ष 13 मई को राज्य के बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी है। ईद से एक दिन पहले जम्मू-कश्मीर में राइजिंग कश्मीर के मुख्य संपादक शुजात बुखारी और त्योहार मनाने के लिए अवकाश पर आये राष्ट्रीय राइफल के जवान औरंगजेब की हत्या कर दी गई। केंद्र सरकार ने रमजान माह के लिए निलंबित संघर्ष विराम की अवधि आगे नहीं बढ़ाते हुए आपरेशन आल आऊट फिर शुरु करने की घोषणा की। मंगलवार को राज्य में कानून- व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए महबूबा मुफ्ती सरकार से गठबंधन तोड़ दिया।

टेरर फंडिंग में पुणे से पकड़ा गया रमेश शाह रातोंरात फर्श से अर्श तक पहुंचा है। उसके पिता और भाई गोरखपुर के मोहद्दीपुर में सब्जी बेचते हैं लेकिन जाने कहां से रमेश के पास इतनी दौलत आई कि वह मेडिकल कालेज रोड पर दो मंजिला मार्ट का मालिक बन बैठा।एक साल पहले ही उसने यह मार्ट खोला था। टेरर फंडिंग में नाम आने के बाद से मार्ट बंद है। रमेश के परिवार का टिनशेड का एक मकान गोरखपुर के बिछिया में है। वह मूल रूप से बिहार के गोपालगंज का रहने वाला है। रमेश घर का बड़ा बेटा है। छोटा बेटा पिता के साथ मोहद्दीपुर में ओवरब्रिज के नीचे सब्जी की दुकान लगाता है।पिता का कहना है कि उसे नहीं मालूम कि रमेश किस किस्म के अपराध में शामिल है। रमेश के मार्ट में आठ-दस कर्मचारी काम करते थे। उसकी मां ने बताया कि बेटा मार्ट खोलने से पहले प्रापर्टी डीलिंग का काम करता था। उसका दावा है कि मार्ट के लिए उसने अपने गहने बेचकर रुपए दिए थे।

कश्मीर घाटी में गुरुवार को अलगाववादियों के बंद से जनजीवन प्रभावित हुआ है। जेकेएलएफ के प्रमुख यासीन मलिक को आज हिरासत में ले लिया गया जबकि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरम धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंद कर दिया गया ताकि अलगाववादी विरोध प्रदर्शन की अगुवाई नहीं कर सकें।पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मलिक को आज सुबह उनके मैसूमा स्थित आवास से हिरासत में लिया गया। उन्हें कोठीबाग स्थित पुलिस थाने में रखा गया है।हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी नजरबंद हैं। आम नागरिकों की कथित तौर पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मौत और वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के विरोध में, अलगाववादियों ने जॉइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) के बैनर तले आज हड़ताल करने की मंगलवार को घोषणा की थी।गौरतलब है कि 14 जून को श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में शुजात की हत्या कर दी गई थी। उनके साथ उनके दो सुरक्षाकर्मी भी मारे गए थे। अधिकतर स्थानों पर दुकानें, सार्वजनिक परिवहन, शैक्षणिक संस्थान और अन्य प्रतिष्ठानों को बंद रखा गया है, जबकि सार्वजनिक परिवहन का साधन नहीं होने की वजह से बैंकों, डाकघरों और सरकारी कायार्लयों में भी कम ही लोग पहुंचे।हालांकि, श्रीनगर के शहरी क्षेत्रों में निजी परिवहन और कुछ तीपहिया वाहन चल रहे हैं। घाटी के अन्य शहरों और कस्बों से आ रही रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बंद से जनजीवन प्रभावित हुआ है। एहतियात के तौर पर रेल सेवाएं भी बंद हैं।

लखनऊ पासपोर्ट विवाद अब सुलझ गया है। क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस ने तन्वी और अनस को उनका पासपोर्ट रिन्यू कर वापस कर दिया है। आज दोनों को मामले के समाधान के लिए पासपोर्ट ऑफिस बुलाया गया था, जहां उन्हें पासपोर्ट सौंप दिया गया। वहीं दोनों से बदसलूकी करने वाले पासपोर्ट अधिकारी का ट्रांसफर कर दिया गया है।मामले की जानकारी देते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी पीयूष वर्मा ने बताया कि आज उनकी समस्या का समाधान कर दिया गया है और दोनों को पासपोर्ट दे दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि निकाहनामा में नाम अलग था, जबकि अन्य दस्तावेज़ों में नाम तन्वी था। इसलिए उनसे एक प्रार्थना पत्र मांगा गया था। लेकिन उन्होंने पत्र नहीं दिया और पासपोर्ट अधिकारी से बहस करने लगे।
अफसर का ट्रांसफर:-मामले में दंपति से बदसलूकी करने वाले पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्रा का गोरखपुर ट्रांसफर कर दिया गया है। पासपोर्ट अधिकारी ने घटना पर खेद व्यक्त किया है और 1 घंटे के भीतर अनस और तनवी को पासपोर्ट जारी कर दिया। पासपोर्ट अधिकारी पीयूष वर्मा ने आरोपी विकास मिश्रा को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है उसके बाद मामले की रिपोर्ट विदेश मंत्रालय भेजी जाएगी।
ये है पूरा मामला:-दरअसल 2007 में लखनऊ में तन्वी सेठ से विवाह करने वाले मोहम्मद अनास सिद्दीकी ने 19 जून को पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था और 20 जून को लखनऊ में पासपोर्ट कार्यालय में उनको अपॉइंटमेंट मिला था। तय शुदा तारीख पर जब दोनों ऑफिस पहुंचे तो काउंटर ए और बी में साक्षात्कार के पहले दो चरणों को मंजूरी दे दी लेकिन काउंटर सी पर समस्या शुरू हुई। जहां पर किसी को आधिकारिक से बातचीत करनी पड़ती है।
रोने लगी थी तन्वी :-अनस के मुताबिक, 'मेरी पत्नी की बारी मुझ से पहले आई और वह काउंटर सी 5 पहुंची, विकास मिश्रा नामक एक अधिकारी ने उनके दस्तावेजों को देखना शुरू कर दिया। जब उसने पति के नाम मोहम्मद अनास सिद्दीकी के रूप में पढ़ा, तो उसने मेरी पत्नी पर चिल्लाना शुरू कर दिया और कहा कि उसे मुझसे शादी नहीं करनी चाहिए थी। यह सुनकर तन्वी रोने लगी।इसके बाद विकास मिश्रा ने कहा कि उन्हें एक बदले गए नाम से सभी दस्तावेजों को सही किया जाना चाहिए। इस पर तन्वी ने कहा कि हम नाम बदलना नहीं चाहते हैं और हमारे परिवार को हमारे नामों में कोई समस्या नहीं है। तब पासपोर्ट अधिकारी ने उसे एपीओ कार्यालय में जाने के लिए कहा और वह एपीओ को अपनी फाइल भेज दिया।अनस के मुताबिक उसके बाद मिश्रा ने उन्हें बुलाया और मुझे अपमानित करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे हिंदू धर्म में परिवर्तित करना होगा और मेरी शादी स्वीकार नहीं की जाएगी। आपको फेरे लेकर हमारे धर्म में परिवर्तित होना होगा। घटना के बाद दोनों ने मुद्दे पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया और अपने हस्तक्षेप के लिए कहा। सुषमा स्वराज को उनके ट्वीट में, तन्वी ने लिखा, "हैलो मैम, मैं इस ट्वीट को न्याय में और आप में और विडंबना से अपने दिल में बहुत क्रोध/चोट और पीड़ा के साथ टाइप करती हूं, जिस तरह से मेरा साथ व्यवहार किया गया। 'पासपोर्ट कार्यलय में पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्रा से मैं बहुत आहित हूं, मेरे साथ इस तरह का व्यवहार इसलिए हुआ क्योंकि मैंने एक मुसलमान से शादी की और मेरा नाम कभी नहीं बदला। मैंने पहले कभी इतनी परेशान महसूस नहीं की है।'

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी नेशनल हेल्थ प्रोफाइल: 2018 के आंकड़ों के मुताबिक देश में एक बार अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च 26,455 रुपये है। यह राशि प्रति व्यक्ति आय के लिहाज से एक भारतीय व्यक्ति के तीन महीने की आमदनी के बराबर है।आंकड़ों पर गौर करें तो तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्यों की तुलना में असम और उत्तराखंड जैसे राज्यों में इलाज कराना ज्यादा महंगा है।अस्पताल में भर्ती होने पर होने वाले मेडिकल एवं गैर-मेडिकल खर्च के ब्योरे के मुताबिक, देश में सबसे बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था वाले राज्यों में शुमार दिल्ली में आम धारणा के विपरीत अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च देश में सबसे कम 7,737 रुपये है। वहीं, असम में एक बार अस्पताल जाने का मतलब 52,368 रुपये का चूना लगना है।
यूपी सबसे सस्ता हिंदीभाषी राज्य:-हिंदी भाषी राज्यों की बात करें तो अस्पतालों में सबसे सस्ता इलाज उत्तर प्रदेश में होता है। यहां अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च 13,931 रुपये आता है। इसके बाद झारखंड (16,174 रुपये), मध्य प्रदेश (17,117 रुपये), छत्तीसगढ़ (24,891 रुपये), बिहार (28,058 रुपये), राजस्थान (31,978 रुपये) और हिमाचल प्रदेश (35,217 रुपये) का स्थान आता है।
इलाज में बचत हो जाती स्वाहा;-खास बात ये है कि अस्पताल में भर्ती होने का खर्च 75 फीसदी लोग अपनी घरेलू बचत से, 18 फीसदी लोग कर्ज लेकर चुकाते हैं। वहीं करीब 0.4 फीसदी लोगों को इलाज के खर्च के लिए अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ती है।
दिल्ली में खर्च इसलिए कम:-दिल्ली में अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च सबसे कम होने के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एम्स, राम मनोहर लोहिया, सफदरजंग और जीबी पंत जैसे केंद्र और राज्य सरकार के बड़े अस्पतालों की मौजूदगी के चलते दिल्ली में बड़ी संख्या में मरीजों को नाममात्र की दर पर इलाज मिलता है। ऐसे में निजी अस्पतालाओं द्वारा की जा रही अधिक वसूली के बावजूद औसत खर्च में यहां हॉस्पिटलाइजेशन सस्ता पड़ता है।
अस्पताल में भर्ती होने पर कितना खर्च
राज्य          औसत खर्च
असम          52,368
उत्तर प्रदेश    13,931
उत्तराखंड      33,402
बिहार         28,058
झारखंड      16,174
दिल्ली          77,37

रक्षा मंत्रालय ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादों को तरजीह देने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अभी तक इसके तहत शुरू हुई योजनाओं के नतीजे सामने नहीं आए हैं। इसलिए सेना की रक्षा सामान खरीदने के मामले में विदेशों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। पिछले चार सालों में इसमें करीब पांच गुना बढ़ोतरी हुई है।रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में सेना के लिए पिछले चार सालों के दौरान हुई खरीद का ब्योरा जारी किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार सेना को आवंटित पूंजीगत राशि के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल विदेशों से रक्षा साजो सामान की खरीदने पर किया गया। जिसमें गोला, बारूद, बंदूकें, टैंक आदि शामिल हैं।मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2012-13 में विदेशी सामानों की खरीद पर पूंजीगत व्यय की राशि 988 करोड़ रुपये थी। लेकिन 2013-14 में यह राशि बढ़कर 1,592 करोड़, 2014-15 में 3,589 करोड़, 2015-16 में 3,006 करोड़ तथा 2016-17 में 5,284 करोड़ पहुंच गई। यानी चार साल में 500 फीसदी से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
बजट की कमी से लटकी 25 परियोजनाएं:-रिपोर्ट में सेना की तरफ से कहा गया है कि उसने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अब तक 25 परियोजनाओं की पहचान की है। लेकिन इसके लिए बजट नहीं है। जिस कारण इन परियोजनाओं पर अभी तक आगे नहीं बढ़ा जा सकता है। हो सकता है कि इन्हें बंद ही करना पड़े।
रणनीतिक साझेदारी में उत्पादन की पहल:-सेना ने यह भी कहा कि सरकार ने रणनीतिक साझीदारी में रक्षा उपकरण देश में बनाने की एक नई पहल की है। इसमें विदेशी कंपनियों को कहा जा रहा है कि वह भारतीय साझेदारी में देश में अपना कारखाना लगाएं। इनमें बनने वाले उपकरणों की खरीद सरकार करेगी। सेना ने इस योजना के तहत भी कुछ परियोजनाओं की पहचान की है। लेकिन अभी तक कोई विदेशी साझीदार सामने नहीं आया है। सेना ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में देश में उपकरण बन सकेंगे या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में चर्चाओं से भरे कार्यकाल के बाद सर्वाधिक वरिष्ठ जज जस्टिस जे चेलमेश्वर शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। पर इससे पहले ही उन्होंने अपना 4, तुगलक रोड का सरकारी आवास लगभग खाली कर दिया है और अपने गृहनगर हैदराबाद जाने की तैयारी कर ली है।नियमों के अनुसार सेवानिवृत्त होने के बाद एक माह तक जज अपने आवास में बने रह सकते हैं। जस्टि चेलमेश्वर ने पहले ही कह दिया था कि सेवानिवृत्त होने के बाद वह सरकार से कोई नियुक्ति नहीं लेंगे। जस्टिस चेलमेश्वर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रेस वार्ता करके सुर्खियों में आए। लेकिन उन्हें सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में पारदर्शिता लाने के जाना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में ही नहीं बल्कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए बने कोलेजियम के फैसलों तथा चर्चाओं को सार्वजनिक करने में भी उनका अहम योगदान है। जस्टिस चेलमेश्वर ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर और जेएस खेहर के कार्यकाल के दौरान कोलेजियम की बैठकों का बहिष्कार कर दिया था। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि जब तक कोलेजियम (सीजेआई समेत पांच वरिष्ठतम जजों का चयन मंडल) की बैठकों का एजेंडा सदस्य जजों को नहीं बताया जाएगा वह कोलेजियम में नहीं आएंगे। उनके विरोध को देखते हुए मौजूदा मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कोलेजियम के फैसलों को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया। यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में एक बड़ी घटना थी, क्योंकि 1993 में कोलेजियम व्यवस्था के अस्तित्व में आने के बाद यह पहला बार था जब उसके फैसले सार्वजनिक किए गए। मामला तब और आगे बढ़ा जब जस्टिस चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट तीन और वरिष्ठ जजों जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ 12 जनवरी को अभूतपूर्व प्रेस कान्फ्रेंस की। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश पर बेंचों के गठन और मुकदमे बेंचों (रोस्टर) को आवंटित करने के तरीकों पर सवाल उठाए। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने रोस्टर का निर्धारण कर दिया और सुप्रीम कोर्ट में दायर होने वाले 42 प्रकार के केसों के लिए बेंचें तय कर दी। सुप्रीम कोर्ट में पारदर्शिता का यह दूसरा मामला था।जस्टिस चेलमेश्वर का जज के रूप में प्रभावशाली रिकॉर्ड रहा। उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज के रूप में काम किया और उसके बाद 2007 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। उन्होंने केरल हाईकोर्ट में भी मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम किया और उसके बाद अक्तूबर 2011 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में प्रोन्नत किया गया।
प्रमुख फैसले:-एनजेएसी फैसले से 12 जनवरी की प्रेस वार्ता तक जस्टिस चेलमेश्वर का सुप्रीम कोर्ट सात वर्ष का कार्यकाल भारतीय न्यायपालिका के इतिहास के सर्वाधिक बहस के क्षणों का रहा। एनजेएसी फैसले में उन्होंने कहा था कि कोलेजियम की कार्यवाही पूर्ण रूप से अपारदर्शी और जनता तथा इतिहास के लिए बंद हैं।उन्होंने आईटी एक्ट की धारा 66 ए को असंवैधानिक घोषित कर उन्होंने सोशल मीडिया को असीम आजादी दे दी। इस प्रावधान में सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट करने पर गिरफ्तारी हो जाती थी।जस्टिस चेल्मेश्वर उस बेंच के सदस्य भी रहे जिसने व्यवस्था दी थी कि आधार के अभाव में उन्हें सरकारी सब्सिडी से वंचित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में अंतिम दिन:-पैंसठ वर्षीय जस्टिस चेल्मेश्वर ने अपने आखिरी कार्य दिवस 18 मई को मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के साथ बेंच साझा की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अवकाश हो गया था। इससे पूर्व उन्होंने अपने बार एसोसिएशन के औपचारिक विदाई समारोह में आने से मना कर दिया था। उनके इस इनकार से यह अटकलें लगीं कि वह अंतिम दिन मुख्य न्यायाधीश के साथ बेंच में नहीं आएंगे। लेकिन वह आए और उन्होंने हाथ जोड़कर सबसे विदा ली

गोरखपुर टेरर फंडिंग प्रकरण में वांछित चल रहे मास्टर माइंड रमेश शाह को पुणे (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार कर लिया गया है। यूपी एटीएस की कानपुर यूनिट ने महाराष्ट्र एटीएस की मदद से बुधवार को उसे गिरफ्तार किया। शाह को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जा रहा है।यूपी एटीएस रमेश शाह को लखनऊ की संबंधित कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस कस्टडी रिमांड हासिल करने के लिए अर्जी देगी। कस्टडी रिमांड मिलने के बाद उससे पूछताछ की जाएगी। शाह मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित हजियापुर कैथोलिया का रहने वाला है लेकिन अब वह गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित सर्वोदय नगर में बस गया है। गोरखपुर में असुरन चुंगी के पास उसका सत्यम शॉपिंग मार्ट है, जहां से वह अपना व्यवसाय करता है।
पाकिस्तानी हैंडलर से मिलता था निर्देश:-एटीएस ने टेरर फंडिंग मामले में 24 मार्च 2018 को गोरखपुर से छह अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था। ये सभी अभियुक्त पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर आपराधिक षड्यंत्र व कूटरचना करते हुए विभिन्न बैंक खातों में भारत के विभिन्न स्थान से भारी धनराशि मंगवाकर अलग-अलग जगहों पर लोगों में बांटते थे। इस संबंध में एटीएस के लखनऊ थाने में धारा 420, 467, 468, 471, 120बी व 121 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। रमेश शाह इस पूरे नेटवर्क का सरगना था।गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ व अन्य स्रोतों से जानकारी मिलने के बाद इस बात की पुष्टि हुई कि मुख्य रूप से मास्टर माइंड रमेश शाह के द्वारा ही पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर भारत के विभिन्न प्रान्तों से अलग-अलग तिथियों में भारी धनराशि जमा कराई गई। रमेश शाह को ही यह जानकारी होती थी कि विभिन्न बैंक खातों से धन किससे निकलवाकर पाकिस्तानी हैंडलर के पास कैसे भेजना है?
इंटरनेट कॉल से मिलती थी सूचना:-रमेश शाह को ही इंटरनेट काल के माध्यम से पता चलता था कि धन आ गया है। इसके बाद रमेश के कहने पर मुकेश नाम का अभियुक्त खाताधारकों को फ़ोन करके पैसा आने की पुष्टि करता था व खाता धारकों को उनका हिस्सा देकर बाकी पैसा निकलवा लेता था जो रमेश के ही बताए हुए लोगों को वितरित किया जाता था। रमेश के ही निर्देशों पर ही मध्य पूर्व के देशों से जम्मू-कश्मीर, केरल व पूर्वोत्तर के कई राज्यों से एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा का धन प्राप्त किया गया और निकाल कर भिन्न-भिन्न स्थानों पर वितरित किया गया।
पुणे में छिपकर रह रहा था रमेश:-एटीएस के मुकदमे में वांछित रमेश शाह की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा था। इस संबंध में अन्य सुरक्षा एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा रहा था। इन्ही प्रयासों से एटीएस की कानपुर यूनिट भी महाराष्ट्र के पुणे में खुफिया सूचनाएं जुटा रही थी, जहां से अंतत: सरगना रमेश शाह की गिरफ्तारी हुई। वह इसी मुकदमे में पूर्व में गिरफ्तार अभियुक्त मुकेश कुमार के साथ किराए पर रामजी पाठक के मकान में रह रहा था।शाह कम्प्यूटर का अच्छा जानकार है और फर्जी प्रपत्रों को तैयार करने का माहिर है। हवाला व्यापारी और विदेशी हैंडलर को कब पैसे जाने होते हैं, यह सिर्फ रमेश ही जानता था। उसे गिरफ्तार करने वाली टीम में एटीएस के डीएसपी मनीष सोनकर के अलावा एसआई ख़ादिम सज्जाद, कांस्टेबल रामजस व संजय सिंह शामिल रहे। एटीएस के आईजी असीम अरुण ने इस टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

 

 

कोलकाता से बागडोगरा तक जानेवाली फ्लाइट में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पायलट ने जबरदस्ती उसे खाली कराने के लिए एसी के ब्लोअर को काफी तेज़ कर दिया। दरअसल, ये झगड़ा यात्रियों और कर्मचारियों के बीच विमान में हुई देरी को लेकर हुआ। एक पैसेंजर ने बताया कि एयर एशिया की फ्लाइट के अपने तय समय से करीब चार घंटे देरी करने के बाद कुछ पैंसेजर्स ने कर्मचारियों के साथ अपना कड़ा विरोध दर्ज किया।
विमान में यात्रियों से बदसलूकी:-इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के एग्जक्यूटिव डायरेक्टर (वेस्ट बंगाल) दीपांकर राय, जो उस समय इसी फ्लाइट में यात्रा कर रहे थे उन्होंने एयरलाइंस के कर्मचारियों पर गैर-पेशेवर और दुर्व्यवहार की शिकायत की। राय ने बताया- “विमान के उड़ान भरने का निर्धारित समय सुबह 9 बजे का था जो शुरुआत में करीब आधा घंटा देर हुआ। विमान में चढ़ने के बाद हमें उसके एक कोने में करीब डेढ़ घंटे तक बिना खाना-पानी के रखा गया।उन्होंने आगे बताया कि उसके बाद फ्लाइट कैप्टन ने सभी यात्रियों को बिना कुछ बताए विमान से उतरने को कहा।राय ने कहा- “जब यात्रियों ने तेज़ बारिश होने के चलते विमान से बाहर जाने से इनकार कर दिया, उसके बाद कैप्टन ने एयर-कंडिशनिंग के ब्लोअर को तेज़ी से चला दिया ताकि पैसेंजर को बाहर उतारा जा सके। उसके बाद अंदर काफी डरावना दृश्य पैदा हो गया और विमान के अंदर धुंध बन गया। जिसके चलते लोगों का दम घुटने लगा।उन्होंने आगे बताया कि महिला पैसेंजर्स उल्टियां करनी शुरू कर दी जबकि बच्चे जोर-जोर से चिल्लाने लगे।

पुणे में लौकी का जूस पीने से 41 साल की स्वस्थ महिला की मौत होने की सनसनीखेज खबर सामने आई। महिला कोई बीमारी नहीं और न किसी बीमारी पहले से इलाज चल रहा था। लौकी का जूस पीने से महिला की मौत के बाद लोग सकते में हैं।
12 जून को खराब हुई थी तबीयत-मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 12 जून को सुबह महिला ने जब एक गिलास लौकी का जूस पिया तो इसके आधे घंटे बाद ही उसे उल्टी दस्त शुरू हो गए। इस उसे पास के अस्पताल में ले जा गया लेकिन अगले दो-दिन में उसकी हालत और खराब होती गई। और अंत में 16 जून की आधी रात को उसकी मौत हो गई।
लोग इसलिए पीते हैं लौकी का जूस-आयुर्वेदिक दवाओं की सलाह देने वालों के अनुसार, खाली पेट लौकी का जूस पीने से डायबिटीज, हृदयरोग, पेशाब से संबंधित समस्याओं में लाभ होता है। इसलिए लोग किसी की सलाह पर लौकी का जूस पीने लगते हैं। लेकिन जब लौकी का जूस कड़ुवा हो तो इसे पीने परहेज करना चाहिए नहीं तो घातक साबित हो सकता है।
नुकसान देह है लौकी का कड़वा जूस-यदि कसैली लौकी का रस या लौकी का कड़वा जूस पीता है पेट में यह जहरीले रसायन बढ़ाता है। इसके परिणाम स्वरूप बेचैनी, पेट में दर्द, उल्टी या खून की उल्टी और तनाव बढ़ जाता है। अगर स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो मरीज के लिए घातक भी साबित हो सकता है। इसलिए किसी भी चीज का विशेष प्रकार से सेवन करने से पहले उससे जुड़े विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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