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नई दिल्ली - बैंकों से लोन लेकर विदेश भागने वाले नीरव मोदी व विजय माल्या जैसे मामलों में कर्ज की वसूली सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 'द फ्यूजीटिव इकनॉमिक ऑफेंडर आर्डीनेंस-2018' को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को इसके मसौदे पर मुहर लगायी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और गजट में अधिसूचना जारी होने के बाद यह अध्यादेश लागू हो जाएगा। इसके तहत भगोड़े अपराधियों की देश-विदेश स्थित संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान है।
मोदी सरकार ने संसद के बजट सत्र में 12 मार्च को लोक सभा में 'द फ्यूजीटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर बिल-2018' पेश किया था लेकिन विपक्षी दलों के लगातार विरोध-प्रदर्शन के चलते संसद में बने गतिरोध की वजह से यह पारित नहीं हुआ। यही वजह है कि सरकार को अब यह अध्यादेश लाना पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे विदेश यात्रा से लौटे और आते ही उन्होंने कैबिनेट की बैठक बुलाकर यह अध्यादेश जारी करने के लिए वित्त मंत्रालय के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी।
अगर कोई अपराधी कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए देश से बाहर भाग जाता है तो उसे भगोड़ा घोषित किया जाएगा और विदेशों में स्थित उसकी संपत्ति को जब्त करने के लिए संबंधित देशों से सहयोग किया जाएगा। बैंकों का 100 करोड़ रुपये बकाया कर्ज लेकर भागने वाले अपराधियों के साथ-साथ एक निश्चित श्रेणी के अपराध भी इसके दायरे में आएंगे। खास बात यह है कि ऐसे अपराधियों की संपत्ति उनके दोषी सिद्ध करार दिए जाने से पहले ही जब्त की जा सकेगी। ऐसे अपराधियों पर मनी लॉंड्रिंग कानून के तहत कार्रवाई होगी।
इस अध्यादेश के तहत उस व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी माना जाएगा जिसके खिलाफ एक अधिसूचित अपराध जैसे जाली सरकारी स्टांप या करेंसी, खाते में अपर्याप्त राशि होने के चलते चैक बाउंस होने, मनी लांड्रिंग और लोन का फ्रॉड करने जैसे मामलों में अदालत ने वारंट जारी किए हैं और उसने आपराधिक अभियोग से बचने के लिए देश छोड़ दिया है। अधिसूचित अपराधों का मतलब इस अध्यादेश की सूची में दिए गए आर्थिक अपराधों से है।
अध्यादेश के प्रावधानों के अनुसार पीएमएलए के तहत नियुक्त एक निदेशक या उपनिदेशक विशेष अदालत में संबंधित आरोपी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए अर्जी देगा। इसमें भगोड़ा घोषित किए जाने वाले व्यक्ति के पते-ठिकाने के साथ-साथ उन संपत्तियों की सूची भी होगी जिन्हें जब्त किया जाना है। इसमें बेनामी संपत्ति के साथ-साथ विदेशों में स्थित संपत्ति का ब्यौरा भी होगा। आवेदन मिलने के बाद विशेष अदालत उस व्यक्ति को छह सप्ताह के भीतर पेश होने को नोटिस जारी करेगी। अगर वह व्यक्ति पेश नहीं होता है तो उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया जाएगा।
मोदी सरकार ने आम बजट 2017-18 में भी इस तरह का विधेयक लाने की घोषणा की थी। इसके बाद ही इस साल मार्च के शुरु में कैबिनेट ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी।
ये हैं अध्यादेश की मुख्य बातें:
1. विशेष अदालत आर्थिक अपराधी को भगोड़ा घोषित करेगी।
2. भगोड़ा आर्थिक अपराधी की संपत्ति अटैच होगी।
3. विशेष अदालत भगोड़ा आर्थिक अपराधी को नोटिस जारी करेगी।
4. भगोड़ा अपराधी की देश-विदेश में स्थित बेनामी सहित हर तरह की संपत्ति जब्त की जाएगी।
5. कोई भी दीवानी दावा नहीं कर पाएगा भगोड़ा आर्थिक अपराधी
6. इस कानून के तहत जब्त संपत्ति के प्रबंधन और निपटान के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया जाएगा।


मुंबई - 1993 मुंबई धमाकों के दोषी अंडरव‌र्ल्ड डॉन अबू सलेम की 5 मई को प्रस्तावित शादी अब नहीं हो पाएगी। नवी मुंबई की तलोजा जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे आजमगढ़ (उप्र) निवासी डॉन की पैरोल की अर्जी कोंकण के डिवीजनल कमिश्नर ने खारिज कर दी है। सलेम ने ठाणे की मुंब्रा निवासी महिला से शादी करने के वास्ते पैरोल पर 40 दिनों के लिए रिहा करने की अपील की थी।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। उक्त अधिकारी के अनुसार, सलेम ने पैरोल पर रिहाई के लिए करीब एक महीने पहले आवेदन किया था। तीन दिन पहले डिवीजनल कमिश्नर ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उसकी अर्जी खारिज कर दी। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, सलेम ने चूंकि अपना पता मुंब्रा का दर्ज कराया है, इसलिए अर्जी खारिज करने से पूर्व कमिश्नर ने ठाणे पुलिस से डॉन की सुरक्षा को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। ठाणे पुलिस ने रिहाई के दौरान मुंब्रा में डॉन की जान पर खतरे की आशंका जताई थी।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि सलेम तीसरी बार शादी करने जा रहा था। 5 मई को उसकी शादी उसी महिला से होनी थी, जिसने 2015 में टाडा कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि वह डॉन से शादी करना चाहती है। इस महिला ने यह भी दावा किया था कि 2014 में उप्र जाने के दौरान उसने सलेम से ट्रेन में ही शादी कर ली थी। ध्यान रहे कि मुंबई धमाकों के बाद अबू सलेम फरार हो गया। 2005 में उसे पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। पिछले वर्ष सितंबर में विशेष टाडा कोर्ट ने सलेम व चार अन्य को 1993 मुंबई धमाकों का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।


पटना - भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और नरेंद्र मोदी सरकार की अक्सर खुलकर आलोचना करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने आज भाजपा से अलग होने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अब ' देश में लोकतंत्र बचाने के लिए काम करेंगे। सिन्हा ने कहा , '' भाजपा के साथ मेरा लंबा संबंध रहा है। आज मैं भाजपा के साथ अपना संबंध खत्म कर रहा हूं।
उन्होंने यहां एक बैठक में भाजपा छोड़ने की घोषणा की। इस बैठक में कांग्रेस , राजद और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेता तथा भाजपा के खिलाफ बागी रुख रखने वाले पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भी मौजूद थे। भाजपा से अलग होने के ऐलान के साथ ही यशवंत सिन्हा ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे।
उन्होंने कहा, ''मैं इस मंच से घोषणा कर रहा हूं कि चार साल पहले मैंने चुनावी राजनीति छोड़ी थी और आज मैं दलगत राजनीति से संन्यास ले रहा हूं। सिन्हा द्वारा गठित ' राष्ट्रीय मंच द्वारा आज विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक का आयोजन किया गया था। इसमें आम आदमी पार्टी , समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
सिन्हा ने कहा , '' मैं अब किसी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं बनूंगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक सिन्हा ने कहा कि वह देश में ' लोकतंत्र बचाने के लिए मजबूत आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के तहत लोकतंत्र खतरे में है। नौकरशाही से राजनीति में कदम रखने वाले सिन्हा का जन्म छह नवंबर 1937 को पटना में हुआ था।
वह 1960 में भारतीय प्रशासनिक सेवा ( आईएएस ) के अधिकारी बने और बिहार सरकार तथा केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन किया। बतौर नौकरशाह अपने 24 साल की अवधि के दौरान वह 1977 में बिहार के मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के प्रधान सचिव रहे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण से प्रभावित सिन्हा ने 1984 में आईएएस की नौकरी छोड़ दी और जनता पार्टी के सदस्य के तौर पर सक्रिय राजनीति में शामिल हो गए। वह 1986 में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने और 1988 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।
वह 1989 में जनता दल का गठन होने पर इसके महासचिव बने। वह चंद्रशेखर की सरकार में नवंबर , 1990 से जून , 1991 तक वित्त मंत्री रहे। जनता दल में बिखराव के बाद सिन्हा भाजपा में शामिल हो गए और जून , 1996 में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाये गए। वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्त और विदेश मंत्री रहे।
सिन्हा ने 2014 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। इस चुनाव में उनके पुत्र जयंत सिन्हा झारखंड की हजारीबाग सीट से भाजपा के टिकट पर लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए। जयंत सिन्हा मौजूदा समय में नरेंद्र मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री हैं। इससे पहले वित्त राज्य मंत्री भी थे।

 


जम्मू - कठुआ की आठ साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या को लेकर जब पूरा देश स्तब्ध है तब रसाना गांव के लोग एसआइटी जांच पर सवाल दर सवाल उठाने में लगे हुए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस का दावा है कि उसकी चार्जशीट पुख्ता है और हत्या से पहले बच्ची को रसाना गांव के ही देवीस्थान में कैद रखा गया था, लेकिन रसाना के शामलाल का कहना है कि उन्होंने खुद 13 जनवरी की सुबह पूरे देवीस्थान को साफ किया था और 14 जनवरी को वहां भंडारा भी हुआ था। ज्ञात हो कि एसआइटी ने अपनी रपट में कहा है कि बच्ची को इसी देवीस्थान में 10 से 17 जनवरी तक कैद रखा गया।
जम्मू में नौकरी करने वाले शामलाल का कहना है कि वे जब भी गांव में होते हैं, हर रविवार देवीस्थान की सफाई करते हैं। यह सिलसिला लगभग 18 सालों से जारी है, लेकिन 13 जनवरी को लोहड़ी के कारण शनिवार को ही मैंने सफाई की थी। इस दौरान एक कमरे वालेे देवीस्थान में झाड़ू लगाई और कुलदेवी के चबूतरे को धोया भी। शाम को गांव के कई परिवारों ने वहां जोत भी जलाई थी। यही नहीं अगले दिन रविवार यानी मकर संक्राति के दिन देवीस्थान पर भंडारा हुआ था, जिसमें लगभग सौ लोगों ने खाना खाया था। उनका सवाल है कि यह कैसे कहा जा रहा है कि देवीस्थान में लड़की को बेहोशी की हालत में कैद कर रखा गया था? अभी तक इस मामले में चुप रहने के बारे में पूछे जाने पर शामलाल ने कहा कि उनसे एसआइटी ने कभी इस बारे में पूछताछ ही नहीं की।
जब शामलाल से जानना चाहा कि दुष्कर्म की जांच पिछले चार महीने से चल रही है, लेकिन उन्होंने कभी यह बात किसी को क्यों नहीं बताई तो उनका कहना था, ''देवीस्थान में दुष्कर्म की बात पहली बार एसआइटी की चार्जशीट में सामने आई। इसके पहले गौशाला में बच्ची को रखे जाने और दुष्कर्म की बात की जा रही थी। इसीलिए मैं चुप था।“
शामलाल देवीस्थान के दरवाजे की चाभी सिर्फ आरोपी सांझी राम के घर पर होने के एसआइटी के दावे को भी खारिज करते हैं। उनका कहना है कि यह देवीस्थान कई गांवों के लोगों का सामूहिक कुलदेवी स्थान है। यही कारण है कि इस में तीन दरवाजे हैं। उनके अनुसार, ''देवीस्थान के तीन दरवाजों की अलग-अलग ताला-चाभी है, जो तीनों गांवों के लोगों के पास होती है। केवल रसाना गांव के दरवाजे की चाभी ही आरोपी सांझी राम के पास थी।“ शामलाल ने कहा कि बच्ची की हत्या करने वाले को फांसी की सजा होनी चाहिए। चाहे आरोपी कोई भी हो, लेकिन यह कहना सरासर गलत है कि बच्ची को देवीस्थान के भीतर रखा गया। शाम लाल का कहना है कि हम सच्चाई सामने लाने के लिए ही सीबीआइ जांच की मांग कर रहे हैं।
रसाना में आठ साल की बच्ची 10 जनवरी को गुम हो गई थी और 17 जनवरी को उसकी लाश मिली थी। एसआइटी ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि इस दौरान बच्ची को नशे की दवा खिलाकर बेहोशी की हालत में देवीस्थान के भीतर छुपाकर रखा गया था और देवीस्थान की बड़ी खिड़कियों से किसी को वह नजर न आए, इसलिए बच्ची के ऊपर दरी डाल दी जाती थी।
एक और आरोपपत्र दायर करेगी अपराध शाखा
पोस्टमॉर्टम रिपार्ट में दुष्कर्म पर संशय की तमाम चर्चाओं के बीच जम्मू पुलिस की अपराध शाखा ने उक्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद एक और पूरक आरोपपत्र (चार्जशीट) दायर करने का इरादा जाहिर किया है। इस मामले में अपराध शाखा पहले भी आठ आरोपितों के खिलाफ चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कठुआ के समक्ष आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
जम्मू कश्मीर पुलिस के अधिकारिक ट्वीटर एकाउंट पर जारी अपराध शाखा की विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि बच्ची के साथ आरोपितों ने दुष्कर्म किया था और उसका हाइमन भी बरकरार नहीं था। अपराध शाखा का कहना है कि चिकित्सकीय राय में भी संदेह व्यक्त किया गया है कि बच्ची को बंधक बनाकर रखा गया और उसकी मौत दम घुटने के कारण हुए हार्ट अटैक से हुई। इस मामले में एक आरोपित के नाबालिग होने का दावा भी किया जा रहा है। कठुआ के रसाना में पेश आए इस मामले की जांच अपराध शाखा ने 23 जनवरी से शुरू की थी। मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया गया था।


नई दिल्ली - महिलाएं हर एक क्षेत्र में अपना लोहा मनवाती हुई नजर आ रही हैं। कोलकाता की तान्या सान्याल ने एक नया इतिहास रच दिया है। तान्या फायर फाइटर्स में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। पहली बार एयरपोर्ट्स ऑथरिटी ऑफ इंडिया ने किसी महिला फायर फाइटर की नियुक्ति की है। इससे पहले इस क्षेत्र में पुरुषों का वर्चस्व कायम था। तान्या ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है और एक महीने में जॉइन कर लेंगी।
बता दें कि विमानों को लैंड कराने के लिए एयरपोर्ट्स पर फायर सर्विस का मौजूद होना बहुत जरुरी होता है। सरकारी अथॉरिटी के पास अभी 3,310 फायर फाइटर्स है और यह सब केवल पुरूष ही थे। एएआइ के चेयरमैन गुरुप्रसाद महापात्रा ने कहा, 'नए एयरपोर्ट्स के आने और विस्तार के कारण हमें फायर फाइटर्स की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हमने नए नियम बनाए और इस क्षेत्र में महिलाओं की नियुक्ति का फैसला लिया, जिसमें फिजिकल स्टैंडर्ड्स एक आवश्यक मानदंड होता है।' महापात्रा ने आगे कहा कि यह पहली बार है जब एक महिला इस क्षेत्र में शामिल होने जा रही है और आगे भी ऐसा होता रहेगा।
तान्या ने बॉटनी में मास्टर्स किया
तान्या सान्याल ने बॉटनी में मास्टर्स किया है। तान्या एएआइ के पूर्वी एयरपोर्ट्स का कार्यभार संभालेंगी। इनमें कोलकता, पटना, भुवनेश्वर, रायपुर, गया और रांची एयपरोर्ट्स शामिल हैं। तान्या एक महीने में अपना कार्यभार संभाल लेंगी। तान्या ने अपने काम को गर्व की बात बताते हूए कहा कि मेरे लिए यह सम्मान और गर्व की बात है। मैं हमेशा से ऐसा कुछ चुनौतीपूर्ण करना चहाती थी। मेरे इस कदम के लिए हर किसी ने मेरा सहयोग किया।
फायर फाइटर बनने के लिए आवश्यक मापदंड
बता दें कि पुरुष फायर फाइटर बनने के लिए कम से कम 50 किग्रा वजन और 1.6 मीटर न्यूनतम ऊंचाई होना आवश्यक है। वहीं महिला फायरफाइटर्स के लिए न्यूनतम भार 40 किग्रा तय किया गया है और ऊंचाई का मानक भी घटाया गया है। लेकिन इन सबके बावजूद महिला फाइटर्स के लिए काम को बराबर रखा गया है।


नई दिल्ली - अमृतसर ने दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान में उस वक्त अचानक हड़कंप मच गया, जब उड़ान के दौरान एयरक्राफ्ट की खिड़की का पैनल अंदर गिर गया। जिसके चलते तीन यात्री घायल हो गए। बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान गंभीर झटका लगने की वजह से खिड़की के पैनल का अंदरूनी हिस्सा बाहर निकल आया। झटका इतना तेज था कि इसमें तीन यात्री घायल हो गए, तो वहीं कुछ सीटों के ऑक्सीजन मास्क भी बाहर आ गए।
10-15 मिनट तक अटकी रहीं सांसें
बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (वीटीएएनआइ) फ्लाइट में सफर के करीब 10-15 मिनट यात्रियों के लिए किसी आफत से कम नहीं रहे। एयरलाइन अथॉरिटीज और एविएशन एजेंसियां भी हैरान रह गए और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह घटना गुरुवार की है।
हादसे में एक व्यक्ति को गंभीर चोट, दो अन्य भी घायल
सूत्रों ने बताया, ' एआइ 462 में अचानक झटका लगने से एक यात्री का सिर ऊपर के पैनल से टकरा गया, जिसके बाद उन्हें और दो अन्य यात्रियों को चोटें आईं। यात्री ने शायद सीट बेल्ट नहीं बांध रखी थी। वहीं, विडों पैनल (18-ए) नीचे आ गया, हालांकि राहत की बात यह रही कि बाहर की विंडो नहीं टूटी। यह देख यात्रियों में डर बैठ गया।' बताया जा रहा है कि विमान में कुछ ऑक्सीजन मास्क भी नीचे गिर गए थे, वहीं सीट 12-यू के ऊपर लगे पैनल कवर पर भी चिटकने के निशान देखे गए। एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'यह बड़ा अजीब हादसा है, एयर इंडिया और डीजीसीए इसकी जांच कर रहे हैं।'
वहीं, विमान के दिल्ली उतरते ही तीनों घायल यात्रियों को अस्पताल ले जाया गया। एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हमारी टीम (इमरजेंसी रिस्पांस और एंजेल्स) ने घायलों का पूरा ध्यान रखा और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। जिस यात्री का सिर पैनल से टकराया था उन्हें टांके लगे हैं और अन्य दो की चोटें गंभीर नहीं थीं। सबकी हालत स्थिर है और प्राथमिक उपचार के बाद उन्होंने कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ लीं।'

 


नई दिल्ली - पश्चिम बंगाल के रायगंज शहर में एक टीचर द्वारा चौथी क्लास की दो बच्चियों से चार दिन तक रेप करने का मामला सामने आया है। ये पूरा मामला तब सामने आया जब बच्ची शुक्रवार को स्कूल जाने से मना करने लगी और माता-पिता के पूछने पर उसने पूरा वाक्या बताया। मामले का पता चलते ही बच्ची के परिवार वालों ने टीचर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी। पुलिस ने बताया कि 35 साल के टीचर के खिलाफ बच्ची के माता-पिता ने शिकायत दर्ज करवाई लेकिन तभी से टीचर फरार है।
दरअसल शुक्रवार को बच्ची अपने मां-बाप से स्कूल ना जाने की जिद करने लगी जब मां-बाप ने उससे पूछा कि वो स्कूल क्यों नहीं जाना चाहती तब बच्ची ने बताया कि स्कूल खत्म होने के बाद टीचर उसके साथ रेप करता है और ऐसा वो लगातार चार दिन से कर रहा है। उसने बताया कि उसके अलावा टीचर एक और लड़की के साथ भी चार दिन से बलात्कार कर रहा है। इसके बाद लड़की के माता-पिता दूसरी बच्ची के घर गए और इस घटना के बारे में उन्हें भीं पूरी जानकारी दी।
पुलिस के मुताबिक बलात्कार करने के बाद टीचर बच्चियों को धमकी देता था कि अगर उन्होंने किसी को कुछ भी बताया तो वो उन्हें जान से मार देगा। बच्चियों का आज डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में मेडिकल टेस्ट किया जाना है। बता दें कि हाल ही में उन्नाव गैंगरेप और कठुआ में आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के बाद उपजे जनाक्रोश के मद्देनजर सरकार ने शनिवार को 12 साल तक की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को मौत की सजा देने को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की हुई बैठक में संबंधित अध्यादेश पर मुहर लगाई गई।

 


सुकमा/नई दिल्ली - छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में एक जवान शहीद हो गया। शुक्रवार को रात करीब 11 बजे सुकमा जिले के किस्टारम क्षेत्र में यह मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ की 212वीं बटालियन के सहायक उप निरीक्षक (ASI) अनिल कुमार मौर्य शहीद हो गए। शहीद जवान उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के ग्राम नरैनी के निवासी थे। इस मामले की सूचना मिलते ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शहीद जवान के परिवार से फोन पर बात की।
सीआरपीएफ की 212वीं बटालियन की टीम गस्त पर निकली थी, तभी नक्सलियों से मुठभेड़ हो गई। इसमें एएसआइ अनिल कुमार मौर्य भी शामिल थे। घात लगाए बैठे नक्सलियों ने सर्चिंग टीम पर हमला कर दिया। इस दौरान दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई। इसी बीच नक्सलियों की गोली एएसआइ मौर्य को लगी और वह शहीद हो गए। इस घटना के बाद शहीद अनिल का शव किस्टारम लाया गया, वहां से वायुसेना के हेलिकॉप्टर से रायपुर भेजा गया।
आठ बजे पत्नी से की थी बात
शहीद मौर्य ने अपनी पत्नी प्रभावती से शुक्रवार शाम आठ बजे फोन कर बात की थी। सब ठीक ठाक होने की बात बताकर रात में ड्यूटी जाने की बात कही थी। शहीद होने के बाद अनिल मौर्य का फोन नक्सली उठा ले गए।
योगी ने जताया दुख, देंगे 25 लाख का मुआवजा
वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनिल कुमार मौर्य की शहादत पर दुख जताया है। उन्होंने शहीद के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का भी ऐलान किया है। साथ ही सीएम योगी ने अपने मंत्री को शहीद के घर जाने और उनके परिजनों से मिलने का निर्देश भी दिया है।
बता दें कि इससे पहले भी नक्सली सुकमा जिले में कई बार सुरक्षा बलों को निशाना बना चुके हैं। जिसमें कई सुरक्षा कर्मियों की जान भी जा चुकी है। वहीं, हाल ही में सुकमा समेत छत्तीसगढ़ के कई इलाकों से काफी संख्या में नक्सलियों को गिरफ्तार करने में भी कामयाबी मिली है। इसके अलावा सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में कई नक्सली मारे भी जा चुकी हैं।


उन्नाव - रेप प्रकरण की जांच कर रही सीबीआई ने शनिवार को एक बार फिर आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर के माखी गांव में तीन घंटे तक पड़ताल की। टीम ने कई बिंदुओं पर जांच के दौरान साक्ष्य तलाशे। विधायक के घर के आसपास रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की।
जांच एजेंसी के सदस्य दोपहर बाद सेंगर के गांव पहुंचे। टीम विधायक के घर के सामने रुकी, कुछ सदस्यों ने सामने के घर में रहने वाले लोगों से पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद उस स्थान पर पहुंची जहां पीड़िता के पिता को बेरहमी से पीटा गया था। करीब साढ़े चार बजे सीबीआई टीम विधायक के आवास में दाखिल हुई। वहां पर मौजूद लोगों से घंटों पूछताछ की गई। शाम सात बजे तक गांव में टीम साक्ष्य जुटाती रही। टीम ने उन स्थानों की फिर से पड़ताल की जिन स्थानों पर पहले जा चुकी थी। सदस्यों ने ग्रामीणों से जांच में सहयोग मांगा। उनका कहना था कि जांच में सहयोग करेंगे तभी सच्चाई सामने आएगी।
पीड़िता के चाचा दिल्ली गए
पीड़िता व उसके परिजनों का शनिवार की सुबह रुटीन चेकअप कराया गया। पीड़िता के चाचा ने बताया उनको जरूरी काम से दिल्ली जाना है तो पुलिस के साथ उनको दिल्ली भेजा गया। परिवार के और लोग सिंचाई निरीक्षण भवन में ठहरे हुए हैं। पुलिस का दावा है कि यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम कराए गए हैं।
सीबीआई ने विधायक के भाई की गाड़ी सीज की
सीबीआई ने शनिवार को भाजपा विधायक के भाई अतुल सिंह की एसयूवी सीज कर दी। जांच के दौरान सीबीआई को पता चला था कि रेप पीड़िता के पिता के अपहरण और मारपीट में अतुल सिंह ने यूपी78 डीए 8959 नंबर की इसी गाड़ी का प्रयोग किया था। शनिवार शाम विधायक के घर पहुंची सीबीआई ने दरवादजे पर खड़ी सफेद रंग की एसयूवी को खिंचवाकर माखी थाने मंगवाया और उसे सीज कर दिया।

 


नई दिल्ली - प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस की पड़ताल से पहले ही उसका विवरण मीडिया को जारी किए जाने से उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू बेहद नाखुश हैं। उन्होंने राज्यसभा सचिवालय को इस बात का कोई पूर्व उदाहरण का पता लगाने के लिए कहा है। सूत्रों ने बताया कि वेंकैया नायडू इस बात से कतई खुश नहीं हैं कि महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस उन्हें सौंपने के बाद विपक्षी पार्टियां सीधे मीडिया के समक्ष चली गईं और उन्होंने उच्च सदन के सभापति के फैसले की प्रतीक्षा भी नहीं की।
मालूम हो कि कांग्रेस के नेतृत्व में सपा, बसपा, माकपा, भाकपा, राकांपा और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसदों ने इस महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।
कांग्रेस ने जेटली पर किया पलटवार
विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को 'बदले की याचिका' बताने संबंधी वित्त मंत्री अरुण जेटली के बयान पर कांग्रेस ने शनिवार को पलटवार किया। पार्टी ने कहा कि राइट साइड ऑफ पावर (सत्ता के साथ) होने की बजाय राइट (सही) होना ज्यादा महत्वपूर्ण है। पार्टी के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर जेटली को याद दिलाया कि कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन के मामले में संप्रग सरकार ने संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया था। साथ ही उन्होंने जेटली का एक वीडियो भी अटैच किया जिसमें जेटली महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं।

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