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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर एक महिला डॉक्टर हादसे का शिकार होने के बाद जिंदगी की जंग जीतने में कामयाब रही।दरअसल, शनिवार दोपहर को 2.15 बजे के करीब छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस यहां से रवाना हुई। इस बीच अचानक एक महिला यात्री चढ़ने की कोशिश करने लगी। पायदान पर पैर रखते ही फिसल गई और वह प्लेटफार्म व ट्रेन के बीच आ गई। सिर को छोड़कर शरीर का पूरा हिस्सा नीचे था। इसी हालत में वह करीब 35 मीटर तक घिसटती रही, लेकिन महिला ने दरवाजे के हैंडल को नहीं छोड़ा। तभी आरपीएफ के जवान ने देखा और गार्ड को सूचना दी। इसके बाद गार्ड ने आपातकालीन ब्रेक लगाकर ट्रेन रुकवाई।महिला की पहचान डॉ. सिद्धी हथिवाल के रूप में की गई। वह सकरी स्थित डेंटल कॉलेज में डेंटिस्ट हैं। हादसे में महिला डॉक्टर के कमर से लेकर पैर तक गंभीर चोटें आई हैं लेकिन चिकित्सकों ने उनको खतरे से बाहर बताया है।

इंदौर/भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल में छात्रावास में मूक-बधिर लड़कियों के शोषण की एक और घटना उजागर हुई है। शनिवार रात 23 साल की एक पीड़ित छात्रा ने छात्रावास संचालक अश्विनी शर्मा पर जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म व अप्राकृतिक कृत्य करने के साथ बनाने की शिकायत की है। छह महीने तक छात्रावास में उसके साथ दरिंदगी होती रही।इंदौर के हीरानगर थाने की पुलिस के मुताबिक, पिपलिया पघारा (धार) निवासी युवती शनिवार शाम थाने पहुंची। उसने पुलिस को बताया कि घटना अक्टूबर 2017 से मार्च 2018 के बीच की है। वह आईटीआई कम्प्यूटर कोर्स करने भोपाल गई थी। छात्रावास में अश्विनी ने तीन छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाए। कुछ दिनों बाद अश्विनी ने पीड़िता को भी अश्लील फोटो दिखाने की कोशिश की। विरोध करने पर उसने अप्राकृतिक कृत्य व दुष्कर्म किया और वीडियो भी बनाया था। धमकी मिलने पर पीड़िता ने घटना के बारे में किसी को नहीं बताया और घर आ गई। दो दिन पहले पता चला कि आरोपित के खिलाफ केस दर्ज हुआ है तो वह थाने पहुंची। टीआई राजीव भदौरिया के मुताबिक आरोपित के खिलाफ शून्य पर केस दर्ज कर जांच भोपाल भेजी गई है।
सभी छात्राओं से पूछताछ करेगी पुलिस:-भोपाल में एसपी (साउथ) राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया कि छात्रावास में तीन साल के दौरान रही सभी 21 छात्राओं से पुलिस पूछताछ करेगी। साथ ही उन मालिकों को नोटिस दिए जाएंगे, जिनके मकान छात्रावास के लिए अश्विनी ने किराए पर लिए थे। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की शनिवार को पहली बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि इस केस में शीघ्र ही पुख्ता साक्ष्यों के साथ चालान प्रस्तुत किया जाए।

नई दिल्‍ली। (11 अगस्त-बलिदान-दिवस) भारतीय स्वतन्त्रता के इतिहास में अनेक कम आयु के वीरों ने भी अपने प्राणों की आहुति दी है। उनमें खुदीराम बोस का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाता है। उन दिनों अनेक अंग्रेज अधिकारी भारतीयों से बहुत दुर्व्यवहार करते थे। ऐसा ही एक मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड उन दिनों मुज्जफरपुर, बिहार में तैनात था। वह छोटी-छोटी बात पर भारतीयों को कड़ी सजा देता था। अतः क्रांतिकारियों ने उससे बदला लेने का निश्चय किया।कोलकाता में प्रमुख क्रांतिकारियों की एक बैठक में किंग्सफोर्ड को मारने की योजना पर गहन विचार हुआ। उस बैठक में खुदीराम बोस भी उपस्थित थे। यद्यपि उनकी अवस्था बहुत कम थी, फिर भी उन्होंने स्वयं को इस खतरनाक कार्य के लिए प्रस्तुत किया। उनके साथ प्रफुल्ल कुमार चाकी को भी इस अभियान को पूरा करने का दायित्व दिया गया।जना का निश्चय हो जाने के बाद दोनों युवकों को एक बम, तीन पिस्तौल तथा 40 कारतूस दिए गए। दोनों ने मुज्जफरपुर पहुँचकर एक धर्मशाला में डेरा जमा लिया। कुछ दिन तक दोनों ने किंग्सफोर्ड की गतिविधियों का अध्ययन किया। इससे उन्हें पता लग गया कि वह किस समय न्यायालय आता-जाता है, पर उस समय उसके साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल रहता था। अतः उस समय उसे मारना कठिन था।अब उन्होंने उसकी शेष दिनचर्या पर ध्यान दिया। किंग्सफोर्ड प्रतिदिन शाम को लाल रंग की बग्घी में क्लब जाता था। दोनों ने इस समय ही उसके वध का निश्चय किया। 30 अप्रैल, 1908 को दोनों क्लब के पास की झाड़ियों में छिप गए।

 

 

 

नई दिल्ली। केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड सहित देश के 16 राज्यों में अगले दो दिनों में अत्यधिक भीषण बारिश की संभावना जताइ गई है। इसको ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने मछुआरों से केंद्रीय अरब सागर में नहीं जाने को कहा है। एक बयान में प्राधिकरण ने बंगाल की खाड़ी सहित एक बड़े भू-भाग में भारी बारिश की बात कही है।भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी बुलेटिन का हवाला देते हुए एनडीएमए ने रविवार और सोमवार को उत्तराखंड के कुछ स्थानों पर भारी बारिश और कुछ इलाकों में अत्यधिक भीषण बारिश की संभावना जताई है। जिन प्रदेशों में अत्यधिक भीषण बारिश की संभावना जताई गई है, उनमें उत्तराखंड, उप हिमालय से सटे पश्चिम बंगाल में, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, तटीय आंध्र प्रदेश और तटीय कर्नाटक सहित तमिलनाडु और केरल शामिल हैं।
अब तक 10 फीसद कम बरसे बदरा:-अगस्त के प्रथम सप्ताह तक देश में 10 फीसद कम बारिश हुई है। यह कहना है मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट का। उसने इस कमी के पीछे पश्चिमी तटीय और उत्तर-पूर्व में हुई कम बारिश को वजह बताया है।

नई दिल्ली। साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता और भारतीय मूल के प्रसिद्ध लेखक वीएस नायपॉल अब हमारे बीच नहीं रहे। रविवार तड़के 85 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। नायपॉल ने लंदन स्थित अपने घर में आखिरी सांस ली। नायपॉल के निधन के बाद उनकी पत्नी नादिरा नायपॉल ने कहा, 'उन्होंने रचनात्मकता और उद्यम से भरी जिंदगी जी। आखिरी वक्त में वे सभी लोग, उनके साथ थे, जिन्हें वे प्यार करते थे।'
1951 में प्रकाशित हुआ पहला उपन्यास:-बता दें कि वीएस नायपॉल का पूरा नाम विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल था। उनका जन्म 17 अगस्त, 1932 में त्रिनिडाड के चगवानस में हुआ था। उनकी पढ़ाई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से हुई थी। उनका पहला उपन्यास 'द मिस्टिक मैसर' साल 1951 में प्रकाशित हुआ था।
कभी की थी आत्महत्या की कोशिश:-साहित्य की दुनिया की इतनी चर्चित शख्सियत ने कभी आत्महत्या करने की भी कोशिश की थी। कहते हैं कि छात्र जीवन में नायपॉल ने अवसाद के कारण आत्महत्या करने की भी कोशिश की थी।
'अ हाउस फॉर बिस्वास'...चर्चित उपन्यास:-लेखन की दुनिया में उन्होंने काफी शोहरत हासिल की। नायपॉल की कई किताबें अंग्रेजी हूकूमत, इसके उपनिवेश के काले दौर पर थीं। उनकी पहली किताब 'द मिस्टिक मैसर' साल 1951 में प्रकाशित हुई थी। उनकी किताब 'अ हाउस फॉर बिस्वास' और 'द बेंड इन द रिवर' काफी चर्चित किताब है। उन्हें अपना चर्चित उपन्यास 'अ हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास' को लिखने में उन्हें तीन साल से ज्यादा का वक्त लगा था।
नायपॉल के नाम पुरस्कार
- 2001 में उनकी जबरदस्त लेखनी के लिए साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था।
- 1971 में बुकर प्राइज से भी सम्मानित किया गया था।

वायानाड। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने राज्य की बाढ़ में चार दिनों में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए चार लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की। इस भीषण बाढ़ में अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि चौथे दिन बारिश धीमी पड़ने से बाढ़ की विकरालता भी कुछ कम हो गई है।कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बाढ़ग्रस्त केरल के लिए राज्य सरकार को पर्याप्त फंड देने की अपील की है। ताकि संकट के इस समय में राज्य के आधारभूत ढांचे को बहाल किया जा सके। उन्होंने पत्र में इसे राज्य की पांच दशकों में आई सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा बताया है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह सीएम विजयन से बात करके उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दे चुके हैं।बाढ़ में अब तक मौतें इड्डुकी, मलापुरम, कोझिकोड, एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम जैसे जिलों में हुई हैं। मुख्यमंत्री विजयन ने समीक्षा बैठक कर बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया। सीएम प्रशासन के अनुसार जिन लोगों के बाढ़ में घर बह गए हैं उन्हें चार लाख रुपये का मुआवजा और जिनके बाढ़ में घर के साथ ही अन्य संपत्तियां भी बह गई हैं उन्हें दस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।जिन लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है उन्हें 3,800 रुपये दिए जाएंगे। करीब 31 हजार लोग इस समय करीब 200 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। विजयन और उनकी टीम ने राहत शिविरों का भी दौरा किया। राज्य के आठ जिलों में विगत शुक्रवार से ही हाई अलर्ट है।पेरियार नदी और उसकी सहायक नदियों में जल उफनाने से एर्नाकुलम जिले में 78 राहत शिविरों में 10,510 लोगों को पहुंचाया गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए शिविरों में भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।इड्डुकी बांध में जल जमाव कम होने से आसपास बसे एर्नाकुलम और थ्रिसूर के हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है। बरसात की रफ्तार कम होने से बांध की स्थिति अधिक खतरनाक नहीं हुई।

नई दिल्ली। 1765 में 12 अगस्त को अंग्रेज अधिकारी रॉबर्ट क्लाइव और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के बीच एक संधि हुई। इलाहाबाद संधि के नाम से मशहूर इस समझौते के बाद ही भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन की शुरुआत मानी जाती है।
कंपनी को मिला अधिकार:-ईस्ट इंडिया कंपनी को दीवानी मामलों के साथ-साथ पूर्वी बंगाल, बिहार, ओडिशा से कर वसूलने का अधिकार मिल गए। इन अधिकारों के बदले ईस्ट इंडिया कंपनी ने शाह आलम द्वितीय के साला खर्चों के लिए 26 लाख रुपये देना तय किया।
बक्सर का युद्ध;-इस संधि से पहले 22, अक्टूबर 1764 को बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय, अवध के नवाब और बंगाल के नवाब को दी शिकस्त। हार के चलते इन लोगों को अंग्रेजों की शर्तों पर संधि करनी पड़ी। युद्ध में क्षतिपूर्ति के लिए अवध के नवाब ने कंपनी को 53 लाख रुपये दिए।

जबलपुर। हाथीताल निवासी महिला की कार चलाने वाले प्रकाश कॉलोनी निवासी आशीष यादव (37) ने शनिवार को महिला के घर के सामने पहले जमकर हंगामा किया फिर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। लपटों से घिरा युवक हाथीताल से भागते हुए गोरखपुर बाजार पहुंचा। इस दौरान उसे जिसने भी देखा रोंगटे खड़े हो गए। गोरखपुर पुलिस भी मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से झुलस चुके युवक को मेडिकल अस्पताल पहुंचाया। 60 फीसदी झुलसने के कारण उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।हाथीताल रोजगार कार्यालय के पास रहने वाली यह महिला रेलवे में पदस्थ है। लगभग 4 साल से आशीष उसकी कार चलाता था और महिला के बच्चों को स्कूल से लाता ले जाता था। लगभग 2 महीने पहले उसने शराब के नशे में कार भि़ड़ा दी थी। उसके बाद महिला ने आशीष को नौकरी से निकाल दिया था। आशीष नौकरी से निकाले जाने के बाद रोज महिला के घर शराब पीकर पहुंचकर गाली-गलौज करते हुए नौकरी पर वापस रखने को कहता था। इससे महिला और उसके बच्चे दहशत में थे। इन हरकतों से तंग आकर महिला ने गोरखपुर थाने में पहले शिकायत की थी, जिस पर आशीष पर धारा 151 की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद से आशीष ने परेशान करना बंद कर दिया था। दो दिन से वह फिर से धमकाने लगा था।शनिवार दोपहर 12.30 बजे आशीष महिला के घर पर दरवाजे में लात मारते हुए अंदर घुसकर गाली-गलौज करने लगा। फिर चाकू से जाली वाले दरवाजे में तीन चार वार किए और मोबाइल जमीन में पटक दिया। दहशत में महिला व बच्चे छत पर चढ़ गए और मदद को पुकारने लगे। इसी बीच आशीष ने पेट्रोल से भरी बोतल उठाई और अपने ऊपर डालकर आग लगा ली। इसके बाद लपटों से घिरा आशीष दौड़ते हुए गोरखपुर बाजार पहुंच गया।

नई दिल्ली। दादा जी ने देश की आन-बान-शान, देश के गुमान तिरंगे को बहुत ही सहेज कर सीया था। आजादी के लिए लड़ी गई 100 बरस की जंग में कुर्बान हुए देश के लिए मर-मिटने वाले हर वीर सपूत के बलिदान को तिरंगे में तुरप दिया था।तिरंगे के तीनों रंग केसरिया, सफेद और हरे को मिलाकर, उसके आकार व बीच में बने अशोक चक्र.. हर चीज को दादा जी ने बड़े करीने के साथ कागज पर बने सबसे पहले तिरंगे से मिलान करते हुए सीकर सजा दिया था। मानों मां भारती स्वयं उनके पास खड़े होकर उनकी भावनाओं को रंग, रूप आकार दे रही हों। मेरे दादा जी का सौभाग्य था कि उन्हें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर फहराया जाने वाला पहला तिरंगा तैयार करने का अवसर मिला। उनकी रग-रग में आजादी व देशभक्ति की भावना हिलोरे लेती थी।शिव चरण शर्मा के पौत्र राजेश शर्मा अपने दादा जी के बारे में बेहद फक्र के साथ बताते हैं कि मेरे दादा जी ने सन् 1930 में कनॉट प्लेस में टेलर की दुकान खोली थी। उन्हें सिलाई का इस कदर शौक था कि इसके लिए लंदन से डिप्लोमा किया था। उनको आजादी का ऐसा जुनून था कि उन्होंने तिरंगा सीने के लिए कोई कीमत नहीं ली थी। 15 अगस्त 1947 को लालकिले पर फहराया जाने वाला तिरंगा भी उनके दादा द्वारा सिले गए तिरंगे की प्रतिकृति था।
अटल जी का सूट देने गया था:-स्व. एससी शर्मा के पौत्र राजेश बताते हैं कि मैं भी आज दादा जी की दिखाई राह पर चल रहा हूं। 1930 से कनॉट प्लेस के 7 डी ब्लॉक में हमारी दुकान हुआ करती थी। मेरे दादा जी का 1981 में देहांत हो गया था। इसके बाद मेरे पिता जी राम लाल शर्मा ने दुकान संभाल ली थी और 1984 से मैंने भी दुकान पर बैठना शुरू कर दिया था। मुङो आज भी याद है हमारे यहां दुकान पर बड़े-बड़े राजनेता, अधिकारी सब कपड़े तैयार कराने आते थे।हम सबके प्रिय अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने थे तो उस समय उनके कई सूट हमारी दुकान से बने थे। मैं सूट पहुंचाने उनके घर जाया करता था। दादा जी की तरह ही बेहतर टेलरिंग सीखने के लिए मैंने और मुझसे पहले मेरे पिता जी ने भी लंदन से इसका डिप्लोमा किया था। हालांकि वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट से केस हार जाने के बाद हमारी दुकान बंद हो गई। लेकिन मैं आज भी दादा जी और पिता जी का साथ छूट जाने के बाद भी उनसे मिले संस्कारों के साथ आगे बढ़ रहा हूं।
कागज पर बना था पहला तिरंगा;-दरअसल 1936 बैच के आइसीएस अधिकारी बदरुद्दीन तैयब उस संविधान सभा के सदस्य सचिव थे, जिसने राष्ट्रध्वज के स्वरूप को अंतिम रूप दिया था। तैयब की सलाह पर ही तिरंगे में अशोक चक्र को स्थान दिया गया था। उन्होंने जब ये सलाह संविधान सभा में शामिल सदस्यों को दी तो उनसे कहा गया कि नमूने के तौर पर एक तिरंगा बनाकर दिखाएं। तैयब ने अपनी चित्रकार पत्नी नरगिस से एक नमूना तैयार करने को कहा। तब नरगिस ने कागज पर तिरंगा बनाया। उन्होंने उसमें बीच में सफेद रंग की पट्टी पर अशोक चक्र को रखा।बाद में इसे कनॉट प्लेस की रीगल बिल्डिंग में स्थित एससी शर्मा टेलर्स के पास कपड़े पर तैयार कराने के लिए ले जाया गया। बदरुद्दीन तैयब ने तैयार तिरंगे को जब संविधान सभा के समक्ष पेश किया तो उस पर तुरंत सभी की सहमति बन गई और देश के नए राष्ट्र ध्वज के रूप में हरी झंडी दिखा दी गई थी। तत्कालीन आइसीएस बदरुद्दीन की बेटी लैला तैयब बताती हैं कि स्वाधीनता दिवस के कार्यक्रम को आयोजित कराने की जिम्मेदारी खुद पंडित जवाहर लाल नेहरू ने मेरे पिताजी को सौंपी थी। मुङो इस बात पर फक्र है कि यह अवसर उन्हें मिला। लैला फिलहाल ‘दस्तकार’ नामक संस्था का संचालन कर देश की हस्तकरघा परंपरा को आज भी जीवित रखने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

 

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एटीएम कार्ड की सुरक्षा को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत ग्राहकों को जल्द ही अपना पुराना मैग्नैटिक स्ट्रिप वाला एटीएम कार्ड बदलवाना पड़ सकता है।एसबीआई ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से यह जानकारी दी है कि वे ग्राहक जिनके पास पुराने मैजिस्ट्रिप (मैग्नेटिक) डेबिट कार्ड हैं, उन्हें जल्द चिप वाले कार्ड से बदलावाना होगा। एसबीआई के मुताबिक, पुराने कार्ड के बदले ग्राहकों को ईएमवी चिप वाला डेबिट कार्ड लेना होगा, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहतर हैं। इसके लिए साल 2018 की समयसीमा तय की गई है।अगर ग्राहक डेडलाइन से पहले ऐसा नहीं करेंगे, तो वे एटीएम से ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेंगे। दरअसल, ये एटीएम मशीनें पुराने कार्ड को स्वीकार नहीं करेंगी।एसबीआई ने यह भी बताया कि एटीएम कार्ड को बदलने की प्रक्रिया में कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। एसबीआई का हाल ही में 6 अन्य बैंकों के साथ विलय हुआ है और बैंक के ग्राहकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में इस कदम का असर करोड़ों बैंक ग्राहकों पर पड़ेगा।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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