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नई दिल्‍ली। इंडियन कॉमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन (आइसीपीए) ने एयर इंडिया को सतर्क करते हुए वर्तमान हालात पर चिंता जताई है। एयर इंडिया के सीएमडी को पत्र लिख आइसीपीए ने कहा है कि करीब 23 फीसद एयरक्राफ्ट इसी वजह से काम नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके स्पेयर पार्ट्स नहीं हैं।कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए उन्होंने लिखा कि स्पेयर पार्ट्स के अलावा भी प्लानिंग, कॉर्डिनेशन और फाइनेंस के चलते कई एयरक्राफ्टों की उड़ान पर असर पड़ रहा है। पत्र में इस बात की भी चर्चा की गई है कि एयरबस A-321 के 20 एयरक्राफ्ट एयर इंडिया के पास हैं, लेकिन उसमें से 12 एयरक्राफ्ट ही कार्यरत हैं और 40 फीसद एयरक्राफ्ट जमीन पर ही हैं।उन्होंने लिखा है कि ये सभी वो एयरक्राफ्ट हैं जिनका इस्तेमाल डॉमेस्टिक रूट पर किया जाता है और इनमें सीटें भी काफी हैं। अगर इतनी संख्या में एयरक्राफ्ट यूं ही व्यर्थ रहे तो हमारा रेवेन्यू और अधिक प्रभावित होगा।कर्ज के बोझ से दबी एयर इंडिया ने अपने 19 एयरक्राफ्ट खड़े कर दिए हैं। इसमें एयरबस A-321 श्रेणी के 8 विमान भी शामिल हैं। इससे उड़ानें रद होने के अलावा कमाई भी प्रभावित हो रही है।

कटड़ा। लगातार खराब मौसम व बारिश के कारण श्राइन बोर्ड प्रशासन ने रविवार सुबह बैटरी कार मार्ग बंद कर दिया। वर्तमान में श्रद्धालु पारंपरिक मार्ग से वैष्णो देवी भवन की ओर आ-जा रहे हैं। खराब मौसम के चलते शनिवार को श्राइन बोर्ड ने केवल बैटरी कार सेवा स्थगित की थी।इस मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी थी, मगर रविवार को मूसलधार बारिश के चलते बैटरी कार मार्ग पर जगह-जगह गिर रहे मलबे और पत्थरों के कारण इस मार्ग को बंद कर दिया गया। वहीं, तीसरे दिन भी हेलीकॉप्टर सेवा बंद रही, जिससे श्रद्धालु पैदल या फिर घोड़ा, पिट्ठू और पालकी से वैष्णो देवी यात्रा जारी रखने को विवश हुए।एसडीएम भवन जगदीश सिंह ने बताया कि खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश के कारण बैटरी कार मार्ग पर पहाड़ से पत्थर गिर रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैटरी कार मार्ग बंद कर दिया गया है। मौसम ठीक होते ही इसे फिर से खोला जाएगा।

 

 

कांकेर। छत्तीसगढ़ में बाढ़ के कारण हालात काफी खराब होते जा रहे हैं। राज्य के कांकेर में जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर पुसावाड़ा में रविवार दोपहर टूरी नदी में आई बाढ़ में आठ बच्चे फंस गए। हालांकि, करीब साढ़े तीन घंटे तक चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बचाव दल ने सभी बच्चों को सकुशल बाहर निकाल लिया। इस दौरान जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर मौजूद थे। बतादें कि पुसवाड़ा के आठ स्कूली छात्र रविवार दोपहर क्रिकेट खेलने के लिए नदी के बीच बने टापूनुमा मैदान में गए थे। इसी बीच अचानक नदी का जलस्तर बढ़ गया और बच्चे नदी के बीच फंस गए। नदी किनारे मौजूद लोगों की सूचना पाकर जिला प्रशासन मौके पर पहुंच गया। जिसके बाद घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन में सभी बच्चों को बचा लिया गया। शाम साढ़े छह बजे दीपांशु साहू, तेजांशु साहू, टितेश यादव, मनीष नाग, विष्णु मरकाम, कौशल नेताम, शैलेन्द्र मंडावी, रविन्द्र कोर्राम को सकुशल बाहर निकाल लिया गया।
उफनती नदी में बहा युवक, तलाश जारी:-उधर, भारी बारिश के चलते दूध नदी में रविवार दोपहर शहर के एमजी वार्ड निवासी सैय्यद अहमद बह गया। अचानक हुए इस हादसे को आसपास मौजूद लोग देखते ही रह गए। खोजबीन के बाद भी युवक का पता नहीं चला।

जबलपुर। दोस्ती... गजब का रिश्ता है यह। बाकी सभी रिश्ते हमें विरासत में मिलते हैं, लेकिन एक दोस्ती का ही रिश्ता ऐसा है, जिसे हम खुद बनाते हैं। हर दोस्त की यही तमन्ना होती है कि वह जरूरत के वक्त दोस्त के काम आए। दोस्ती का जज्बा ही ऐसा होता है कि लोग दोस्त के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते हैं। ऐसे में कई बार मामला गलत दिशा में भी चला जाता है, लेकिन इसके पीछे जो भावना होती है उसे आप कभी गलत नहीं ठहरा सकते। ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के जबलपुर से सामने आया है। जिसमें 10वीं के एक छात्र ने अपने पिता के 46 लाख रुपये अपने दोस्तों में बांट दिए।जिसने भी इस छात्र की कहनी सुनी वह हैरान रह गया। दरअसल, जबलपुर जिले में फ्रेंडशिप डे के दिन एक छात्र ने अपने पिता के 46 लाख रुपये चुराकर स्कूल के दोस्तों में बांट दिए। छात्र ने दिहाड़ी मजदूरी करने वाले दोस्त को सबसे ज्यादा 15 लाख रुपये दिए। वहीं होमवर्क करने वाले एक क्लासमेट को भी उसने तीन लाख रुपये दिए। यही नहीं छात्र ने स्कूल और कोचिंग में अपने साथ पढ़ने वाले 35 साथियों को स्मार्टफोन्स दिलवा दिए तो, कईयों को चांदी की चेन गिफ्ट में दे दी। कहा जा रहा है कि छात्र के एक दोस्त ने हाल ही में एक नई कार खरीदी है।इस छात्र के पिता पेशे से बिल्डर हैं। बिल्डर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि उनकी अलमारी से 60 लाख रुपये गायब हो गए हैं। उसने हाल ही में हुए एक सौदे से मिले 60 लाख रुपये अलमारी में रखे थे। पैसे गायब होने का पता चलते ही वह पुलिस के पास पहुंचा। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच के लिए पहुंची पुलिस को चोरी जैसा कुछ भी मामला नहीं लगा।इसके बाद जांच में पता चला कि बिल्डर के बेटे ने कैश निकालकर अपने दोस्तों और जरूरतमंद लोगों में बांट दिए। इसके बाद छात्र के पिता ने पुलिस को एक लिस्ट सौंपी, जिसके आधार पर पुलिस सभी छात्रों से संपर्क करने की कोशिश में लगी है।

नई दिल्ली। पतंग उड़ाना हम भारतीयों का बहुत पुराना शौक रहा है। आज भी किसी पर्व या तीज-त्योहार पर हम सब लोग पतंग और चरखी लेकर अपनी-अपनी छतों या मैदानों में पहुंच जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस ऐसे ही पर्वों में से एक है जब हिंदुस्तान का नीला आसमान तिरंगे वाली पतंगों से पट जाता है। आजादी के पर्व को मनाने के अतिउत्साह में हम कई बार चूक कर बैठते हैं और खुद को जोखिम में डाल देते हैं। लिहाजा पतंगबाजी करते समय कुछ ऐसा न करें कि आजादी के रंग में भंग पड़ जाए।
जरूरी कदम
सही साइज : सबसे पहले पतंग का चयन बहुत जरूरी है। वैसे तो हवा की रफ्तार के मुताबिक भिन्न भिन्न आकार की पतंगें ठीक रहती हैं लेकिन आदर्श आकार की पतंग शुरुआत करने वालों के लिए बेहतर होती हैं।
सही समय : अगर निश्चित रफ्तार वाली बयार बह रही हो तो यह पतंगबाजी करने का मुफीद समय होगा
सही जगह : पार्क, खुले मैदान, समुद्री बीच इस कला के लिए सही जगह होते हैं। जितनी खुली जगह उतना ही आनंद।
प्राचीन काल से हो रही पतंगबाजी:-देश में पतंगबाजी का उल्लेख प्राचीन काल से मिलता है। माना जाता है कि पहले इस कला का इस्तेमाल संदेशों के आदान-प्रदान के लिए किया जाता था। धीरे-धीरे यह मनोरंजन के साधन में तब्दील होता गया। राजे-रजवाड़ों और नवाबों के यहां पतंगबाजी के माहिर लोग होते थे। जिनके बीच इस हुनर की प्रतिस्पर्धा होती थी। जीत-हार प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रहता था।
1200 करोड़ रुपये का है कारोबार:-एसोचैम के एक अध्ययन के अनुसार देश में पतंग का कारोबार करीब 1200 करोड़ रुपये का है। इसमें 500 करोड़ की हिस्सेदारी अकेले गुजरात की है। सिर्फ यहीं साल भर में 100 करोड़ पतंगें बनाई जाती हैं। देश भर में करीब 70 हजार कारीगर और मौसमी कामगार इस उद्योग से जुड़े हैं।हालांकि इस उद्योग के सामने परेशानियों का अंबार लगा है। एक तो कागज, धागे और पाउडर जैसे कच्चे माल की कीमतें 25-30 फीसद बढ़ चुकी हैं दूसरे उद्योग के लिए श्रमिकों का जबरदस्त अकाल है। तीसरे चीन निर्मित सस्ते सामानों ने उस उद्योग को भी खस्ताहाल करने में कोई कसर नहीं रखी है। इससे कारोबार में 50 फीसद की गिरावट देखी जा रही है।
पतंग उड़ाते समय बरतें सावधानी:-प्रतिबंधित चीनी मांझे का इस्तेमाल न करें। इंसानों सहित जीवों- पक्षियों के लिए यह घातक हो सकता है।छत पर पतंग उड़ाते समय एकदम किनारे या छज्जे पर बिल्कुल न जाएं।सड़क किनारे, बिजली के खंभों के पास या हवाईअड्डों के किनारे पतंगबाजी से परहेज करना चाहिए

नई दिल्ली। पूरा देश जलप्रलय जैसे हालात से जूझ रहा है। मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोगों के घर पानी में बहे जा रहे हैं, तो सड़कें धरती में समा गईं हैं। देशभर में बारिश के कहर ने अबतक 774 लोगों की जिंदगी छीन ली है। बाढ़ से बेहाल केरल के बाद अब उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भी हालात बेकाबू हो गए हैं। गृहमंत्री की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मानसून के मौसम में बारिश व बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में देश के सात राज्यों में अबतक 774 लोगों की जानें जा चुकी हैं।
16 राज्यों में बारिश का अलर्ट:-हालात को देखते हुए मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश समेत देश के 16 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस बीच बारिश के कारण अमरनाथ यात्रा भी रोक दी गई है।
मौत का आंकड़ा:-गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय आपातकालीन संचालन केंद्र (एनइआरसी) के मुताबिक बाढ़ और बारिश के कारण केरल में 187, उत्तर प्रदेश में 171, पश्चिम बंगाल में 170 और महाराष्ट्र में 139 लोगों की जान जा चुकी है। जबकि गुजरात में 52, असम में 45 और नगालैंड में आठ लोगों की मौत हुई है।
लापता लोगों का आंकड़ा:-एनइआरसी के आंकड़ों के मुताबिक, भारी बारिश और बाढ़ के कारण केरल में 22 और पश्चिम बंगाल में पांच लोग लापता हैं। जबकि बारिश से जुड़ी घटनाओं में 245 लोग घायल हो गए हैं।
असम में बारिश से तबाही:-जानकारी के मुताबिक, असम में 11.45 लाख लोग बारिश और बाढ़ के शिकार हुए हैं। जबकि 27,552 हेक्टेयर फसल भूमि को बारिश के कारण नुकसान झेलना पड़ा है।
NDRF की टीमें तैनात:-हालात से निपटने के लिए असम में एनडीआरएफ की 15, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में आठ-आठ, गुजरात में सात, केरल में चार, महाराष्ट्र में चार और नगालैंड में एक टीम को तैनात किया गया है।
केरल में 8,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान:-केरल में मूसलाधार बारिश के बाद आई बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा अब 39 हो गया है। हालांकि रविवार को दोबारा शुरू हुई बारिश के कारण राहत-बचाव कार्य में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ की वजह से राज्य में 8 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद 100 करोड़ का राहत पैकेज देने का ऐलान किया है।
हिमाचल में जगह-जगह भूस्खलन, स्कूल बंद:-हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। जिसकी वजह से शिमला, मंडी, सोलन और ऊना में स्कूल बंद कर दिए गये हैं। भारी बरसात के चलते सोलन के सभी स्कूलों व आंगनवाड़ी केंद्रों में छुट्टी कर दी गई है। हिमाचल प्रदेश में बरसात के दौरान अभी तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। बादल फटने और भूस्खलन व मकान ढहने के कारण ही अधिक लोगों की जान गई है। इस दौरान 558 मकान क्षतिग्रस्त हो गए जिसमें से 80 मकानों का नामोनिशान मिट गया। बरसात ने ऐसा कहर बरपाया है कि नुकसान का आंकड़ा 580 करोड़ तक पहुंच गया है।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा मार्ग बाधित:-समूचे उत्तराखंड में जोरदार बारिश से लोगों की मूसीबत बढ़ गई है। भूस्खलन की वजह से बदरीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री, हेमकुंड यात्रा मार्ग कई जगह बाधित है। देहरादून- मसूरी मार्ग भी बोल्डर आने से बंद हो गया। हरिद्वार व ऋषिकेश में गंगा खतरे के निशान के करीब बह रही है। तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। देहरादून में डीएम ने स्कूलों में एक दिन का अवकाश घोषित किया। पर्वतीय इलाकों में संपर्क मार्ग बंद होने से कई गांवों का मुख्यालयों से संपर्क कटा हुआ है। वहीं, पौड़ी के यमकेश्वर, देहरादून के जीवनगढ़, हरिद्वार के मंगलूपुर में मकान तीन मकान ध्वस्त हो गए।

 

 

त्रिची। तमिलनाडु में एक अजीब मामला सामने आया है। दरअसल, नौ बच्‍चों की 52 वर्षीय मां आरई को जब दसवीं बार गर्भवती होने का पता चला तो वह इलाज के लिए हेल्‍थ सेंटर पहुंची। वहां हीमोग्‍लोबिन कम होने के कारण उसका इलाज किया जा रहा था। उसके शरीर में खून की कमी को देखते हुए डॉक्टरों ने सलाह दी कि आप तुरंत अस्पताल में भर्ती हो जाएं और डिलिवरी के बाद बर्थ कंट्रोल कराएं। इस पर महिला और उसके परिवारजन अस्पताल से गायब हो गए।आरई अपने पांच बच्चों और पति के साथ करीब पांच साल से यहां साठ वर्ग फीट के घर में रह रही हैं। यह परिवार एक जगह अधिक समय तक नहीं टिकता। कुछ दिनों में ही अपने रहने की जगह बदलता रहता है। आरई के चार बच्चों की शादी हो चुकी है और वे अपने परिवार के साथ रहते हैं।आरई का कहना है कि उसे पता नहीं चला कि वह फिर से कब गर्भवती हो गई। उसे लगा था कि मेनोपॉज होने के बाद वह गर्भधारण नहीं करेगी। स्‍थानीय निवासियों के अनुसार, आरई ने अपने सभी नौ बच्‍चों को घर पर ही जन्‍म दिया था और इस बार भी वह अस्‍पताल नहीं जाना चाहती थी।

रायपुर। पिछले दिनों सुकमा में हुई मुठभेड़ में जिला रिजर्व गार्ड की टीम ने 15 नक्सली मार गिराए थे और दो को जिंदा गिरफ्तार किया था। डीआरजी की इस साहसिक कार्रवाई को लेकर उनकी चर्चा हुई, लेकिन साथ ही बहुत से लोगों ने इस पर सवाल भी उठाए। इस तरह की मुठभेड़ों के बाद अक्सर पुलिस और सुरक्षा बलों पर सवाल उठते रहे हैं। राज्य सरकार ने साल 2020 तक राज्य को नक्सलमुक्त करने का अभियान छेड़ा है और नक्सल मोर्चे पर जवान पूरे जज्बे के साथ अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं।वीडियो में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि किस तरह जंगल में नक्सलियों की गोली का जवाब पूरी वीरता और साहस के साथ हमारे जवान दे रहे हैं। यह वीडियो साल 2017 में बीजापुर जिले में हुई मुठभेड़ का है। नक्सलियों की ओर से चल रही भारी फायरिंग के बीच ऑपरेशन के इंचार्ज अपनी टीम को निर्देश देते सुनाई पड़ रहे हैं। जिला पुलिस बल, एसटीएफ और एडवांस पार्टी के इस ज्वाइंट ऑपरेशन में पुलिस की सटीक रणनीति दिखाई पड़ रही है। इस वीडियो में साफ दिखाई पड़ रहा है कि नक्सलियों की गोली की परवाह किए बिना हमारे जवान किस दिलेरी के साथ उनका पीछा कर रहे हैं और गोलियों का जवाब गोलियों से दे रहे हैं।
दो साल में मारे गए 237 नक्सल कमाण्डर:-खुद नक्सलियों ने माना है कि पिछले दो सालों में विभिन्न मुठभेड़ों में उनके 237 कमांडर मारे गए हैं, जबकि पुलिस रिकार्ड में मारे गए नक्सलियों की संख्या 247 है। इसमें हाल ही में सुकमा जिले के नुलकातोंग में मारे गए 15 नक्सली शामिल नहीं हैं। बस्तर में नक्सल मोर्चे पर इतनी सफलता इससे पहले कभी नहीं मिली थी। सुकमा जिले के कंचाल के जंगल में पिछले दिनों फोर्स 15 नक्सलियों को मारने में कामयाब हुई थी। इन इलाकों में इससे पहले फोर्स के कदम कभी नहीं पड़े थे। छत्तीसगढ़ से सटे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में फोर्स ने 39 नक्सलियों को मार गिराया। ओडिशा के चित्रकोंडा इलाके में दो साल पहले 24 नक्सली मारे गए थे।
तेजी से सिमट रहा नक्सलवाद का दायरा:-एक समय छत्तीसगढ़ के दक्षिणी और उत्तरी दोनों क्षेत्रों के लगभग सभी जिलों में नक्सली सक्रीय थे। सरगुजा, कोरिया, बलरामपुर और जशपुर जिलों में एक दशक पहले पुलिस की जोरदार कार्रवाई के बाद यहां नक्सलियों के पैर उखड़ गए और वे बस्तर के साथ ही महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों राजनांदगांव और कवर्धा तक सिमट कर रह गए। अब बस्तर में उनके पैर उखाड़ने का दमदार अभियान चल रहा है। अभी के हालात में सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों तक ही नक्सली सिमट कर रह गए हैं। दूसरी तरफ इनके डिप्लॉयमेंट की खबरें खुफिया विभाग द्वारा आ रही है। ठिकाना बदल रहे नक्सलियों की मांद में अब पहले से पुलिस ने सुरक्षा की कील गाड़ दी है। जल्द ही राज्य से इनका समूल सफाया होने के संकेत दिख रहे हैं।

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी क्षेत्र से बहने वाली सीतानदी में बहे युवक को सुरक्षित निकाल लिया गया। युवक 7 किलोमीटर आगे तक बह गया था, लेकिन उसे सकुशल निकाल लिया गया। घटना रविवार शाम की है। युवक की पहचान बोराई निवासी सुनील मरकाम के रूप में हुई है।
उफान पर हैं नदी-नाले:-बीते कुछ दिनों से अंचल में झमाझम बारिश हो रही है। तेज बारिश के चलते नदी नालों में उफान की स्थिति है। सिहावा इलाके का सीतानदी भी तेज उफान पर है। रविवार को बोराई निवासी सुनील मरकाम इलाज कराने के लिए नगरी पहुंचा था। जहां से वापस अपने गांव लौट रहा था। इस दौरान की शाम अपने गांव बोराई जाने के लिए सीतानदी पर बने पुल को पार कर रहा था, इस दौरान उसका पैर फिसला और पानी की तेज बहाव में बह गया।
मौत को दिया मात:-मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने इस पूरी घटना का वीडियो फुटेज भी बना लिया था। पानी के तेज बहाव में मौत को मात देते हुए सुनील ने जिंदगी की जंग जीत ली। तेज बहाव के कारण सुनील करीबन 7 किलोमीटर दूर निकल गया था। हिम्‍मत न हारते हुए वह पानी के तेज बहाव के साथ तैरते हुए किसी तरह नदी किनारे पहुंचा। वहां से जंगल का रास्ते तय करते हुए सुनील बुडरा गांव की सीमा तक पहुंचा और ग्रामीणों को इस पूरे हादसे के बारे में बताया। गांववालों ने बोराई पुलिस को इसकी सूचना दी। सुनील को काफी चोटें आ गई थीं, लिहाजा उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इस तरह बचाई बाढ़ में फंसे आठ बच्चों की जान:-छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर पुसावाड़ा में रविवार दोपहर टूरी नदी में आई बाढ़ में आठ बच्चे फंस गए। करीब साढ़े तीन घंटे तक चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बचाव दल ने सभी बच्चों को सकुशल बाहर निकाल लिया। इस दौरान जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर मौजूद थे।पुसवाड़ा के आठ स्कूली छात्र रविवार दोपहर क्रिकेट खेलने के लिए नदी के बीच बने टापूनुमा मैदान में गए थे। इसी बीच अचानक नदी का जलस्तर बढ़ गया और बच्चे नदी के बीच फंस गए। इसी दौरान नदी किनारे मौजूद लोगों ने बच्चों को नदी में फंसा देख जनप्रतिनिधियों को सूचना दी। इसके बाद जिला प्रशासन तक पहुंचते ही एसडीएम भारती चंद्राकर व तहसीलदार टीपी साहू बचाव दल के साथ मौके पर पहुंचे। दोपहर तीन बजे बचाव कार्य शुरू किया गया। नदी में पानी अधिक होने के चलते बचाव कार्य में करीब साढ़े तीन घंटे का समय लग गया। शाम साढ़े छह बजे दीपांशु साहू, तेजांशु साहू, टितेश यादव, मनीष नाग, विष्णु मरकाम, कौशल नेताम, शैलेन्द्र मंडावी, रविन्द्र कोर्राम को सकुशल बाहर निकाल लिया गया।
उफनती नदी में बहा युवक, तलाश जारी:-भारी बारिश के चलते दूध नदी में रविवार दोपहर शहर के एमजी वार्ड निवासी सैय्यद अहमद बह गया। अचानक हुए इस हादसे को आसपास मौजूद लोग देखते ही रह गए। खोजबीन के बाद भी युवक का पता नहीं चला।

नोएडा। अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ होने पर राह में आने वाली हर बाधाएं घुटने टेक देती हैं। किसी तरह का अभाव भी आड़े नहीं आता। इसका एक नायाब उदाहरण हैं आइपीएस अफसर विजय गुर्जर। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रहने वाले विजय मूलत: एक किसान परिवार से हैं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे गरीब और अभावग्रस्त छात्रों के लिए एक ट्रस्ट भी बनाया है। ट्रस्ट के माध्यम से वह छात्रों को न सिर्फ प्रोत्साहित करते हैं बल्कि आर्थिक सहायता भी देते हैं।दसवीं में वह महज 55 फीसद अंक से पास हुए। बारहवीं में उनके 67 फीसद अंक आए। वह किसी नौकरी की तलाश में थे। इसमें सफलता न मिलने पर वह टाइल्स का कारोबार कर रहे दोस्त के साथ व्यवसाय करने की सोच रहे थे। उनके पास व्यवसाय के लिए पैसा नहीं था।इस कारण पिता लक्ष्मण सिंह ने नौकरी की तलाश करने को कहा। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। जून 2010 में उनका चयन दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हो गया। दिल्ली आकर उन्हें पता चला कि एक आइपीएस अफसर के पास समाज सेवा के तमाम अवसर होते हैं। उन्होंने उसी दिन ठान लिया कि अब आइपीएस ही बनना है। हालांकि, इसकी तैयारी में खर्च होने वाले पैसे का इंतजाम उनके पास नहीं था। इस कारण उन्होंने पहले दारोगा की तैयारी की। कड़ी मेहनत से दिसंबर 2010 में उनका चयन दिल्ली पुलिस में दारोगा के पद पर हो गया।इसपद पर रहते हुए उन्हें तैयारी का समय नहीं मिल रहा था। फिर भी उन्होंने एसएससी की तैयारी प्रारंभ कर दी।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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