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टीवी के जाने माने कपल करण टेकर, उनकी गर्लफ्रेंड और मशहूर अभिनेत्री क्रिसटल डिसूजा इन दिनों जमकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। इनदोनों का रिलेशन जगजाहिर हैं, लेकिन अब इससे जुडी एक बड़ी खबर सामने आई हैं। खबर के मुताबिक, क्रिसटल डिसूजा और करण टेकर ने एक दुसरे को इंस्टाग्राम पर एक दुसरे को अनफॉलो कर दिया हैं। इसके बाद यह भी साफ़ हो गया हैं कि इनदोनों हॉट कपल के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा हैं। टीवी का यह हॉट कपल आए दिन किसी ना किसी वजह से सुर्खियों में रहता था। उनके फैंस भी उनको एक साथ देखकर काफी खुश भी होते थे। लेकिन अब इन दोनों कपल के चाहने वालों के लिए बुरी खबर हैं। इंस्टाग्राम पर एक दुसरे को अनफॉलो करने के बाद यह संकेत जरुर मिल रहे हैं कि इन दोनों ने एक दुसरे से अलग होने का पक्का फैसला कर लिया हैं।पिछले दिनों बॉम्बे टाइम्स को दिए इंटरव्यू में क्रिस्टल ने कहा था- ‘मुझे नहीं लगता कि हर रिश्ते को परिभाषित करने की जरूरत है। मैं करण की तरफ देखता हूं, वह मुझे प्रेरित करता है और मैं उस पर भरोसा कर सकता हूं, यह आपसी है। हम स्पष्ट हैं कि हम किस समीकरण को साझा करते हैं और हम एक-दूसरे के लिए क्या महसूस करते हैं। यह पर्याप्त होना चाहिए।’टीवी की मोस्ट लविंग कपल मोहित रैना और मौनी रॉय ने भी कुछ दिनों पहले एक दुसरे से अगल होने का फैसला लेते हुए ब्रेकअप कर लिया हैं। ब्रेकअप करते हुए दोनों ने एक-दूसरे को इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया है। इतना ही नहीं, मौनी ने तो मोहित के साथ खीची सभी तस्वीरों को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से डिलीट कर दिया है। मुंबई मिरर को दिए इंटरव्यू में मौनी ने अपने ब्रेकअप की खबरों को कुबूल कर लिया है। मौनी ने कहा है- ‘मैं अकेली हूं और लंबे समय से अकेली रह रही हूं। मोहित और मैं अब दोस्त नहीं हैं’। बता दें, इनदोनों की पहली मुलाकात टीवी शो ‘देवों के देव महादेव’ के सेट पर हुई थी। इस शो में मौनी सती और मोहित महादेव के रोल में नजर आए थे। इन दोनों की केमिस्ट्री को दर्शकों ने खून पसंद आई थी। एक साथ काम करते-करते दोनों को प्यार हुआ और एक दुसरे के साथ स्पॉट होते दिखें।

रिएलिटी शो खतरों के खिलाड़ी सीजन 9 जल्द ही टीवी पर दस्तक देने जा रही है। पिछले कुछ दिनों से शो के कंटेस्टेंट शूटिंग के लिए विदेश रवाना हो चुके हैं। सीजन 9 की शूटिंग इस वक्त अर्जेंटीना में चल रही हैं। जहां पर सभी कंटेस्टेंट इस समय खतरों से खेल रहे हैं। लेकिन इसी बीच एक और खबर सामने आई है। खिलाड़ी सीजन 9 का नया लोगो रिविल हुआ हैं। यह लोगो भले ही पहले की तरह लग रहा हो लेकिन इस बार इसमें एक स्लोगन जोड़ दिया हैं। यह स्लोगन खतरों के खिलाड़ी सीजन 9 के लोगो में नजर आ रहा हैं। यह स्लोगन हैं ‘जिगर पे ट्रिगर’। इससे यह साफ़ हो गया हैं कि इस बार जिगर पर ट्रिगर यानी बंदूक हैं।खतरों के खिलाड़ी सीजन 9 में न सिर्फ शानदार सेट के साथ शुरू होगा, बल्कि स्टंट भी पहले से कई ज्यादा मुश्किल हैं। बता दें, पिछले दिनों बिग बॉस फेम विकास गुप्ता अर्जेंटीना से मुंबई लौट आ गए हैं। दरअसल, स्टंट के दौरान उनके कंधे पर चोट लगी थी। जिसके चलते उन्हें शो मेकर्स ने आराम करने की सलाह दी। दर्द के बावजूद विकास कुछ दिनों से पेनकिलर इंजेक्शन लेकर खतरों से खेल रहे थे। लेकिन बिगड़ती तबीयत के कारण उन्हें मेकर्स ने मुंबई रवाना कर दिया। अब वो शो से बाहर कर दिए गए है। विकास के जाते ही खबर के मुताबिक कॉमेडियन भारती सिंह के पति हर्ष लिम्बाचिया का पत्ता कट गया है।बात दें, भारती सिंह अभी भी खतरों के खिलाड़ी सीजन 9 में बनी हुई हैं। भारती जिस तरह अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। उससे तो लग रहा है कि, वहीँ विजेता का दावेदार हैं। खबर के मुताबिक, शो में दो कंटेस्टेंट की वाइल्ड कार्ड एंट्री होने वाली है। इन दो कंटेस्टेंट के रूप में एली और आदित्य नारायण का नाम सामने आया था।

बॉलीवुड के स्टार एक्टर वरुण धवन पिछले कुछ समय से अपनी जल्द रिलीज होने वाली फिल्म ‘सुई धागा- मेड इन इंडिया’ को लेकर सुर्खियों में बने हैं। हाल ही इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ। इन सभी ख़बरों के बीच वरुण मुंबई के खार जिम से बाहर निकलते हुए स्पॉट किए गए। इस दौरान उन्होंने वाइट कलर की टी शर्ट और ब्लैक कलर की पैंट पहन रखी थी। वरुण जैसे ही जिम से बाहर निकले उनके फैंस उनका इंतजार करते दिखाई दिए। वरुण ने एक स्टार बॉलीवुड सेलिब्रिटीज का फर्ज निभाते हुए ना सिर्फ फैन्स के साथ सेल्फी ली, बल्कि चहेतों को दिए ऑटोग्राफ देकर खुश किया। इस पुरे दौरान वरुण काफी उत्साहित नजर आ रहे थे। फैंस के अलावा उन्होंने मीडिया कैमरा के सामने पोज भी दी।बात दें, फिल्म ‘सुई धागा- मेड इन इंडिया’ वरुण और अनुष्का की जोड़ी पहली बार दर्शकों के सामने होगी। इस फिल्म में वरुण धवन मौजी और अनुष्का शर्मा ममता के रोल में हैं। वरुण धवन एक दर्जी की भूमिका निभा रहे हैं। यह फिल्म यशराज बैनल तले बनी हैं। वरुण की इस फिल्म को मनीष शर्मा ने लिखी है, इस फिल्म के प्रोड्यूसर भी वही हैं। ‘सुई धागा- मेड इन इंडिया’ की कहानी महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर बेस्ट है। और तो और फिल्म का विषय स्वरोजगार के लिए एक युवा के संघर्ष की कहानी है। ‘सुई धागा’ की रिलीज डेट 28 सितंबर 2018 की तय हुई है।‘सुई धागा- मेड इन इंडिया’ के अलावा वरुण धवन बहुत जल्द फिल्म ‘कलंक‘ में भी नजर आने वाले हैं। इस फिल्म में वो आलिया भट्ट, माधुरी दीक्षित, संजय दत्त, सोनाक्षी सिन्हा और आदित्य रॉय कपूर के साथ दिखाई देंगे। यह एक पीरियड ड्रामा फिल्म हैं। इस फिल्म का निर्देशन अभिषेक वर्मन कर रहे है। लेकिन आपको बता दें, फिल्म की घोषणा के साथ-साथ इसके नाम को बदल दिया गया। इस फिल्म की कहानी को साल 1940 के दशक के इर्द गिर्द बुनी गई है। कुछ दिनों पहले आदित्य रॉय कपूर ने फिल्म की शूटिंग शुरु की है।

बिलासपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने और बेगुनाहों को न्याय दिलाने के लिए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल गायकवाड़ ने नौकरी छोड़ दी। जज्बा और जुनून ऐसा कि बीते चार वर्षों से वह वनवासी अंचल के अलावा गांवों में जाकर ग्रामीणों को मुफ्त में कानूनी सलाह भी दे रहे हैं और केस भी लड़ रहे हैं। उन्होंने भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस कांड के दौरान गैस त्रासदी पीड़ित लोगों को राहत दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। दो साल के भीतर 500 गैस पीड़ितों को उन्होंने मुआवजा भी दिलाया।बिलासपुर निवासी जज गायकवाड़ का जीवन संघर्षों से भरा हुआ है। पिता नारायण राव गायकवाड़ डाकघर में तार बाबू के पद पर काम कर रहे थे। मामूली नौकरी करते हुए उन्होंने बेटे को बीएससी व एलएलबी तक की पढ़ाई कराई। उन्होंने शिक्षक पद के लिए डीइओ कार्यालय में आवेदन दे दिया। उनकी नियुक्ति उच्च श्रेणी शिक्षक के पद पर हुई। वर्ष 1979 में सरगुजा के वाड्रफनगर हायर सेकेंडरी स्कूल में पहली पोस्टिंग हुई। एक साल के भीतर उनका तबादला सीतापुर स्कूल में हो गया। वार्षिक परीक्षा के दौरान विधायक के बेटे को गणित के पर्चे में नकल करते पकड़ लिया और मामला बना दिया। इससे नाराज विधायक ने पहुंच विहीन गांव ओड़गीखोर के हायर सेकेंडरी स्कूल में तबादला करा दिया।शिक्षक के पद पर नौकरी करते-करते उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को करीब से देखा। उनके लिए कुछ करने की ठानी। इसके लिए उस जगह पर पहुंचना था, जहां से नियम-कानून का डंडा लहराया जा सके। एलएलबी की डिग्री तो उनके पास थी ही। उन्होंने सिविल जज बनने की ठानी। तीसरे प्रयास में वे सफल हो गए। वर्ष 1988 में सिविल जज बने। कुर्सी संभालते ही उन्होंने मन ही मन लिए संकल्प को पूरा करने की दिशा में काम करना शुरू किया। वर्ष 2012 में बिलासपुर में स्थाई लोक अदालत के चेयरमैन के पद पर उनकी नियुक्ति की गई। यहीं से उनका मन बदला और अनिवार्य सेवानिवृति के लिए विधि विधायी विभाग में अर्जी लगा दी। विभाग ने 31 जुलाई, 2013 को उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए वीआरएस दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपने संकल्प को मिशन के रूप में तब्दील कर दिया।

बिलासपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने और बेगुनाहों को न्याय दिलाने के लिए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल गायकवाड़ ने नौकरी छोड़ दी। जज्बा और जुनून ऐसा कि बीते चार वर्षों से वह वनवासी अंचल के अलावा गांवों में जाकर ग्रामीणों को मुफ्त में कानूनी सलाह भी दे रहे हैं और केस भी लड़ रहे हैं। उन्होंने भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस कांड के दौरान गैस त्रासदी पीड़ित लोगों को राहत दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। दो साल के भीतर 500 गैस पीड़ितों को उन्होंने मुआवजा भी दिलाया।बिलासपुर निवासी जज गायकवाड़ का जीवन संघर्षों से भरा हुआ है। पिता नारायण राव गायकवाड़ डाकघर में तार बाबू के पद पर काम कर रहे थे। मामूली नौकरी करते हुए उन्होंने बेटे को बीएससी व एलएलबी तक की पढ़ाई कराई। उन्होंने शिक्षक पद के लिए डीइओ कार्यालय में आवेदन दे दिया। उनकी नियुक्ति उच्च श्रेणी शिक्षक के पद पर हुई। वर्ष 1979 में सरगुजा के वाड्रफनगर हायर सेकेंडरी स्कूल में पहली पोस्टिंग हुई। एक साल के भीतर उनका तबादला सीतापुर स्कूल में हो गया। वार्षिक परीक्षा के दौरान विधायक के बेटे को गणित के पर्चे में नकल करते पकड़ लिया और मामला बना दिया। इससे नाराज विधायक ने पहुंच विहीन गांव ओड़गीखोर के हायर सेकेंडरी स्कूल में तबादला करा दिया।शिक्षक के पद पर नौकरी करते-करते उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को करीब से देखा। उनके लिए कुछ करने की ठानी। इसके लिए उस जगह पर पहुंचना था, जहां से नियम-कानून का डंडा लहराया जा सके। एलएलबी की डिग्री तो उनके पास थी ही। उन्होंने सिविल जज बनने की ठानी। तीसरे प्रयास में वे सफल हो गए। वर्ष 1988 में सिविल जज बने। कुर्सी संभालते ही उन्होंने मन ही मन लिए संकल्प को पूरा करने की दिशा में काम करना शुरू किया। वर्ष 2012 में बिलासपुर में स्थाई लोक अदालत के चेयरमैन के पद पर उनकी नियुक्ति की गई। यहीं से उनका मन बदला और अनिवार्य सेवानिवृति के लिए विधि विधायी विभाग में अर्जी लगा दी। विभाग ने 31 जुलाई, 2013 को उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए वीआरएस दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपने संकल्प को मिशन के रूप में तब्दील कर दिया।

भोपाल। मध्यप्रदेश के भोपाल निवासी एक 14 वर्षीय छात्र द्वारा उठाए गए कदम ने समाज को नई राह दिखलाई है। 10 वीं कक्षा में पढ़ रहे आयुष कुमार की अनोखी पहल से 14 कैदी स्वंतत्रता दिवस को रिहा होने वाले हैं। यह कैदी वो हैं जो जुर्माने की राशि जमा नहीं कर पाने के कारण अतिरिक्त सजा काट रहे हैं। आयुष ने अपनी छात्रवृति से इनके 21 हजार 350 रुपए जुर्माने की राशि भरी है।आयुष बतातें है कि जब दो साल पहले भोपाल की सेंट्रल जेल से भागे सिम्मी आंतकियों ने एक पुलिस कर्मी की हत्या कर दी थी। तब उन्होंने शहीद पुलिस कर्मी के परिवार की मदद करने के लिए अपने माता-पिता से कहा था। वहीं सरकार ने तत्काल मदद का एलान कर दिया था। इस घटना के बाद उनका ध्यान कैदियों की ओर गया। बातचीत के दौरान उन्हें यह पता चला कि कुछ ऐसे भी कैदी है जिनका कोई नहीं है या जरा सी जुर्माने की राशि नहीं चुकाने के कारण वे रिहा नहीं हो पा रहे हैं। तब उन्होंने ऐसे कैदियों कैदियों की मदद का फैसला लिया।
चकित हो गई थी मां:-आयुष कुमार ने जुर्माना नहीं चुका पाने के कारण अतिरिक्त सजा काट रहे कैदियों की मदद करने की इच्छा जाहिर अपनी मां से की। एक बच्चे की बात सुनकर मां भी चौंक गई। उन्होंने जब पूछा कि रिहा के लिए रकम कहां से लाओगे तो आयुष ने जबाव दिया की अपनी स्कॉलरशीप से कैदियों की रिहाई कराऊंगा। वहीं माता-पिता ने आयुष के भावों को समझते हुए तत्काल इस पहल में अपनी सहमति दी।
करीब 1 लाख रुपए जमा है छात्रवृति:-आयुष की मां विनीता मालवीय वरिष्ट पुलिस अधिकारी हैं। वे पुलिस मुख्यालय योजना शाखा में एआईजी पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण आयुष को छात्रवृति मिलती है। इस छात्रवृति को वे आयुष के बैंक खाते में जमा करती है।अब तक पढ़ाई और क्रिकेट से आयुष को करीब 1 लाख रुपए की छात्रवृति मिल चुकी है। इतना ही नहीं बल्कि आयुष को अलोहा इंटरनेशनल मैंटल अर्थमेटिक कंप्टीशन 2013 मलेशिया में चैम्पियन ट्रॉफी मिली थी। इसके अलावा आयुष का नाम इंडिया बुक रिकार्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में भी दर्ज है। इनकी उपलब्धियों को देखते हुए दिल्ली में राष्ट्रपति भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
26 जनवरी 2018 को पहली बार रिहा कराए थे 4 कैदी:-आयुष की पहल पर पहली बार 4 कैदी 26 जनवरी 2018 को रिहा हुए थे। उन्होंने इसके लिए अपनी छात्रवृति से 14 हजार रुपए जमा कर जुर्माने जमा राशि अभाव में सजा काट रहे अर्जुन सिंह, हाकम सिंह, जगदीश सोलंकी, नवीन डगोरिया को रिहा कराया था। साथ ही रिहा कैदियों से यह वचन भी लिया था कि अब वे कोई अपराध नहीं करेंगे। आयुष के पिता जीसी धवानियां भी एक आईईएस अधिकारी हैं जो महाराष्ट्र में पदस्थ हैं।
सिर्फ अच्छा इंसान बनाना चाहती हूं:-आयुष कुमार ने भले ही अपने भविष्य का निर्धारण नहीं किया हो लेकिन मां विनीता मालवीय एक अलग ही सोच रखती हैं। नवदुनिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वे आयुष को डॉक्टर, इंजीनियर या अधिकारी बनाने से पहले एक अच्छा इंसान बनाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि आयुष ने हमेशा से समाज सेवा के प्रति रूझान रहा है। वे कहती है कि आयुष खुद ही अपनी दिशा तय करेगा।
कोई और जुर्माना भर सकता है:-नियमोंमें ये प्रावधान है कि यदि कोई कैदी जुर्माना नहीं भर पा रहा है तो उसके बदले कोई और जुर्माना भर दे तो कैदी को रिहा किया जा सकता है। जेल अधिकारियों की यही कोशिश होती है कि जुर्माना भरने वाला कभी कोई आपराधिक गतिविधियों में लिप्त न रहा हो। गरीब कैदियों का जुर्माना भर कर छुड़ाने की यह पहल सराहनीय है।

नई दिल्ली। आज पूरी दुनिया में विश्व अंगदान दिवस मनाया जा रहा है। हर साल 13 अगस्त को कई उद्देश्य को लेकर ये मनाया जाता है। आज भी जागरूकता की कमी के कारण, लोगों के मन में अंगदान के बारे में भय और मिथक हैं। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य सामान्य मनुष्य को मृत्यु के बाद अंगदान करने के लिए प्रोत्साहित करना है। अंगदान में अंगदाता के अंगों जैसे कि हृदय, लीवर, गुर्दे, आंत, फेफड़े, और अग्न्याशय का दान उसकी मृत्यु के पश्चात जरूरतमंद व्यक्ति में प्रत्यारोपित करने के लिए किया जाता है। जिससे एक व्यक्ति को नई जिंदगी मिल सकती है।केवल भारत में ही हर साल लाखों लोगों की शरीर के अंग खराब होने के कारण मृत्यु हो जाती है। शरीर के ऐसे कई सारे अंग हैं, जिन्हें मृत्यु के बाद दान किया जा सकता है। दान किए गए अंग दुनिया भर में हजारों लोगों के जीवन बदल सकते हैं। विश्व अंग दान दिवस 2018 देश भर में अंग दान की आवश्यकता को बढ़ावा देता है।अंग दान-दाता कोई भी हो सकता है जिसका अंग किसी अत्यधिक जरुरतमंद मरीज को दिया जा सकता है। मरीज में प्रत्यारोपित करने के लिये आम इंसान द्वारा दिया गया अंग ठीक ढंग से सुरक्षित रखा जाता है जिससे समय पर उसका इस्तेमाल हो सके।
अंगदान से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
-कोई भी व्यक्ति चाहे, वह किसी भी उम्र, जाति, धर्म और समुदाय का हों, वह अंगदान कर सकता है।
-अंगदान करने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती है।
-अंगदान करने का निर्णय उम्र के आधार पर नहीं किया जाता है, बल्कि यह निर्णय विशुद्ध चिकित्सा मनदंडों के आधार पर किया जाता है।
-प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में कॉर्निया, हृदय वाल्व, त्वचा, और हड्डी जैसे ऊतकों का दान किया जा सकता हैं, लेकिन ‘मस्तिष्क की मृत्यु' होने की स्थिति में केवल लीवर (यकृत), गुर्दे, आंत, फेफड़े, और अग्न्याशय का दान ही किया जा सकता है।
-हृदय, अग्न्याशय, लीवर (यकृत), गुर्दें और फेफड़ें जैसे अंगों का प्रत्यारोपण उन अंग प्राप्तकर्ताओं में किया जाता हैं, जिनके अंग असफल हो चुकें हैं, ताकि यह प्राप्तकर्ता सामान्य जीवनयापन कर सकें।
-अठारह वर्ष से कम आयु के अंगदानकर्ताओं के लिए अंगदान करने से पहले अपने माता-पिता या अभिभावकों की सहमति प्राप्त करना आवश्यक होता हैं।
-कैंसर, एचआईवी, मधुमेह, गुर्दे की बीमारी या हृदय की बीमारी जैसी गंभीर स्थितियों के होने पर अंगदान करने से बचना चाहिए।

नई दिल्‍ली। देश की राजधानी दिल्‍ली के लोगों का ईज ऑफ लीविंग इंडेक्‍स यानि जीवन सगुमता सूचकांच रायपुर से भी कहीं नीचे है। आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी जीवन सुगमता सूचकांक (ईज ऑफ लीविंग इन्डेक्स) में पुणे पहले स्थान पर, नवी मुंबई दूसरे स्थान पर और नई दिल्ली 65 वें स्थान पर है।आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी द्वारा जारी रिपोर्ट में ग्रेटर मुंबई तीसरे स्‍थान पर है। इसके बाद तिरुपति, चंडीगढ़, ठाणे, रायपुर, इंदौर, विजयवाड़ा और भोपाल हैं। मंत्रालय द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में 111 शहरों को शामिल किया गया था। हरदीप पुरी ने बताया कि सर्वेक्षण चार मापदंडों पर आधारित था, जिसमें प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं, आर्थिक स्‍तर और भौतिक बुनियादी ढांचे को शामिल किया गया।सर्वेक्षण में शामिल शहरों में कानून व्‍यवस्‍था, सामाजिक संस्‍थाओं तक लोगों की पहुंच, शहर में रहने वाले लोगों का आर्थिक स्‍तर और शहर में मौजूद भौतिक बुनियादी ढांचे को शामिल किया गया। इन सभी मापदंडों पर पुणे नंबर एक पर रहा। लेकिन दिल्‍ली का 65वें नंबर पर होना चौंकाता है।

नई दिल्ली। चांद पर उतरने के भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण अगले साल 3 जनवरी को किया जा सकता है। चंद्रयान-2 को 2019 में प्रक्षेपित किया जाएगा क्योंकि इसके डिजाइन में ऐसे परिवर्तन किए जाने हैं जिससे यह आसानी से चंद्रमा पर उतर सके। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि 'हमने चंद्रयान-2 मिशन को तीन जनवरी को प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है। हम इस तारीख पर इसे प्रक्षेपित करने का लक्ष्य रख रहे हैं लेकिन यह एक संभावित तिथि है। इसके प्रक्षेपण की तारीख मार्च तक जा सकती है। हम लक्ष्य (तीन जनवरी) के करीब आ रहे हैं। लेकिन हो सकता है कि इस तारीख को चंद्रयान-2 को प्रक्षेपित नहीं कर सकें।इसरो के प्रमुख के. सिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 के भार में 600 किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है क्योंकि इसरो ने प्रयोगों के दौरान पाया कि उपग्रह से जब चंद्रमा पर उतरने वाला हिस्सा बाहर निकलेगा तो उपग्रह हिलने लगेगा। इसलिए इसके डिजाइन में सुधार और वजन बढ़ाने की जरूरत थी। उन्होंने बताया कि उपग्रह को अधिक चक्कर लगाने की जरूरत है, जिसमें अधिक ईंधन की जरूरत होगी। इसरो के भविष्य के मिशन के बारे में पूछे जाने पर सिवन ने बताया कि अगले तीन वर्षों में इसरो की योजना 50 से ज्यादा उपग्रह प्रक्षेपित करने की है। इसरो 2019 में 22 उपग्रह प्रक्षेपित करेगा। यह एक साल में प्रक्षेपित किए गए यह अधिकतम उपग्रह की संख्या है।बता दें कि चंद्रयान-1 और मंगलयान मिशन के बाद चंद्रयान-2 इसरो के लिए एक बहुत बड़ा मिशन है। इसरो कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहते है। ऐसे में अब चंद्रयान-2 मिशन को जनवरी में रवाना किया जाएगा। अप्रैल में उन्होंने सरकार को अक्टूबर-नवंबर में होने वाले प्रक्षेपण को टालने की सूचना दी थी। चंद्रयान-2 की समीक्षा करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की समिति ने इस मिशन से पहले कुछ अतिरिक्त परीक्षण की सिफारिश की थी। चंद्रयान-2 को सबसे पहले अप्रैल में ही पृथ्वी से रवाना किया जाना था।
इसरो के लिए था बड़ा धक्का:-इससे पहले इसरो एक साल के भीतर दो बड़ी असफलताओं को झेल चुका है। इस साल की शुरुआत में इसरो ने सैन्य उपग्रह जीएसएटी-6ए प्रक्षेपित किया था, लेकिन इस उपग्रह के साथ इसरो का संपर्क टूट गया था। इसके बाद इसरो ने फ्रेंच गुयाना से प्रक्षेपित होने वाले जीएसएटी-11 के प्रक्षेपण को यह कहते हुए टाल दिया था कि इसकी कुछ अतिरिक्त तकनीकी जांच की जाएगी।पिछले साल सितंबर में आइआरएनएसएस-1एच नौवहन उपग्रह को लेकर जा रहे पीएसएलवी-सी-39 मिशन अभियान भी असफल रहा था, क्योंकि इसका हीट शील्ड नहीं खुलने की वजह से उपग्रह नहीं छोड़ा जा सका।

नई दिल्ली। आज के समय में बच्चों से लेकर बुर्जुगों तक के पास स्मार्टफोन है। यह हर वर्ग के लिए एक जरूरत बन गया है। अगर एक दिन के लिए भी आपको मोबाइल से दूर कर दिया जाए, तो शायद आपका पूरा दिन उसी के बारे में सोचने में निकल जाएगा। हम हर 5 मिनट में एक बार जरूर अपना मोबाइल चेक करते हैं। हम सबका ज्यादा से ज्यादा समय मोबाइल फोन के साथ गुजरता है, लेकिन हद से ज्यादा किसी भी चीज इस्तेमाल हमेशा नुकसानदायक होता है। ये बात यहां भी लागू होती है। जी हां जरूरत से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल आपकी आंखों के लिए हानिकारक है। फोन का अधिक इस्तेमाल अंधेपन का कारण भी बन सकता है।दरअसल मोबाइल की स्क्रीन में हाइ एनर्जी विजिबल लाइट (high energy visible light) होती है जिसे सामान्य भाषा में ब्लू लाइट (blue light) कहा जाता है। हाई एनर्जी विजिबल लाइट कम दूरी की तरंगों के रूप में आंखों के टिश्यूज (tissues) को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अंधेरे में माबोइल चलाने से इसका सबसे बुरा असर रेटीना पर पड़ता है। इस तरह से रेटीना का मैक्यूलर एरिया तीखी रोशनी की वजह से प्रभावित होता है। पीड़ित व्यक्ति अगर सुबह उठने की कोशिश करता है तो उसको दिखना बंद हो जाता है।
हानिकारक प्रभाव
-रिसर्च के मुताबिक, अगर घुप्प अंधेरे में कोई घंटों तक मोबाइल चलाता है तो उसको दिखना भी बंद हो सकता है। इस तरह के मामले अब सामने भी आने लगे हैं। इसे टैंपरेरी ब्लाइंडनेस कहा जाता है।
-मोबाइल को लगातार देखते रहने के दौरान हम पलक झपकाना बिल्कुल ही बंद कर देते हैं और इसका नतीजा यह होता है कि हमारी आंखे सूख जाती है और इनमें खुजली होने लगती है। इसी से हमारी आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
-स्मार्टफोन से चिपके रहने से आपकी आंखों में दर्द पैदा हो सकता है और आंखे खराब भी हो सकती है।
-स्मार्टफोन की स्क्रीन को देखने के बाद रात को जब आप सोने जाते है तो नींद नहीं आती। इसका कारण यह है कि स्मार्टफोन हानिकारक नीली रोशनी छोड़ता है जो आपके दिमाग को संकेत पहुँचाती है और यह मेलाटोनिन बनाना बंद कर देता है। मेलाटोनिन एक केमिकल होता है जो हमारे शरीर में बनता है और हमें सोने में मदद करता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
-आपको स्मार्टफोन चलाते वक्त पलके झपकाना बिल्कुल भी नहीं भूलना चाहिए जब आप स्मार्टफोन चला रहे हो एक मिनट के अन्दर 15 से 20 बार पलकों को जरुर झपकाना चाहिए।
-स्मार्टफोन चलाते वक्त आपको हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट की दूरी तक देखना चाहिए इससे आंखों को काफी राहत मिलती है।
-सामान्यतया आदमी अपने स्मार्टफोन को 8 इंच की दूरी पर चलाता है तो यहां आपको जितना संभव हो सके तो मोबाइल को ज्यादा से ज्यादा दूरी पर लेकर चलाना चाहिए।
-अगर आपका स्मार्टफोन पर हर वक्त काम रहता है तो आपको चश्मा बनवा लेना चाहिए। ऐसा करने से आपको भविष्य में आँखों की समस्या नहीं आएगी

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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