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मुंबई - बाॅलीवुड एक्टर वरूण धवन आज अपना 31वां जन्मदिन मना रहे हैं। 24 अप्रैल 1987 को मुंबई में जन्में वरुण ने एक्टिंग की शुरुआत करने से पहले करण जौहर की फिल्म 'माय नेम इज खान' में बतौर असिस्टेंट डायरैक्टर काम किया था। वरुण की हाल में फिल्म 'अक्टूबर' रिलीज हुई है। निर्देशक शूजित सरकार की इस फिल्म में वरुण धवन अलग ही रुप में नजर आए। फिल्म में उनके साथ बनीता संधू नजर आईं।
अपने रोल के लिए वरुण धवन ने खूब मेहनत की। इस किरदार में खुद को फिट करने के लिए वरुण ने होटल मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स की तरह ट्रेनिंग ली। वरुण ने इसके लिए होटल में बर्तन भी धोए।
'अक्टूबर' फिल्म की शूटिंग दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में हुई है। उन्होंने फाइव स्टार होटल में कुकिंग से लेकर टॉयलेट की सफाई की। सबसे खास बात यह है कि ट्रेनिंग के दौरान विदेशी टूरिस्ट्स ने उन्हें असली कर्मचारी समझ लिया और खाने के साथ ही रुम सर्विस का आॅर्डर तक दे डाला। वरुण ने भी अपने स्टारडम को बीच में नहीं आने दिया और पूरी शिद्दत से गेस्ट के आॅर्डर पूरे किए।
फिल्म के निर्देशक शूजीत सरकार का कहना है कि उन्होंने वरुण से इतनी मेहनत इसलिए करवाई क्योंकि वरुण जान सकें होटल इंडस्ट्री कितनी अनुशाासित है और यहां किस तरह से काम होता है।


मुंबई - बॉलीवुड की फेमस कोरियोग्राफर सरोज खान इन दिनों विवादों से घिरी हुई हैं। दरअसल, कास्टिंग काउच को लेकर एक सवाल पर उन्होंने कहा था, 'ये सब तो बाबा आदम के जमाने से चला आ रहा है। हर लड़की पर कोई न कोई हाथ साफ करने की कोशिश करता है। हालांकि उन्होंने अपने बयान पर माफी मांग ली है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सरोज ने कहा- मुझे खेद है। मैं माफी मांगती हूं।
बता दें कि दक्षिण भारत की एक स्ट्रगलर एक्ट्रैस श्री रेड्डी के बयान की वजह से भारत की फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच पर काफी बहस हो रही है।
सरोज ने कहा था, ये सब तो बाबा आदम के जमाने से चला आ रहा है। हर लड़की पर कोई न कोई हाथ साफ करने की कोशिश करता है। इंडस्ट्री में लड़की को को रेप करके छोड़ नहीं देते, रोजी-रोटी भी देते हैं। इसलिए सिर्फ फ‍िल्म इंडस्ट्री के पीछे नहीं पड़ना चाहिए। वैसे भी ये सारी चीजें लड़की के ऊपर है कि वो क्‍या करना चाहती है। तुम ऐसे लोगों के हाथ में नहीं आना चाहते तो मत आओ। अगर तुम्‍हारे पास कला है तो अपने आपको इंडस्‍ट्री में बेचने की क्‍या जरूरत है।
सरोज खान ने सरकार पर भी कमेंट किया, उन्होंने कहा - गवर्नमेंट भी ऐसा करती है।गवर्नमेंट के लोग भी करते हैं। लेकिन लोग सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के पीछे क्यों पड़ते हैं। सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री का नाम मत लो वो हमारा माई-बाप है।


मुंबई - बॉलीवुड एक्टर नील न‍ित‍िन मुकेश और उनकी पत्‍नी रुक्‍म‍िणी के घर एक नन्हा मेहमान आने वाला हैं। इसकी जानकारी उन्होंने इंस्टा पर तस्वीरें शेयर कर दी हैं। जाने माने स‍िंगर नितिन मुकेश के बेटे नील नितिन मुकेश पापा बनने वाले हैं। नील ने दो तस्वीर शेयर की हैं, ज‍िसमें एक तस्‍वीर में नील और रुक्‍म‍िणी ने बच्‍चे के जूते हाथ में ले रखे हैं, वहीं दूसरी तस्‍वीर में बच्चे की ड्रॉइंग है और लिखा है- जल्द आने वाला है।
बता दें कि नील नितिन मुकेश ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 2007 बतौर अभिनेता श्री राम राघवन की फिल्म एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'जॉनी गद्दार' से की थी। इस फिल्म में उनके अभिनय को आलोचकों द्वारा काफी सराहा गया था। साथ ही उन्हें इस फिल्म के फिल्मफेयर अवार्ड्स के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित कलाकार के लिए नामंकित भी हुए थे।
वहीं रुक्मिणी सहाय एविएशन इंडस्ट्री से जुड़ी हुई हैं। रुक्मिणी सहाय ने इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट से पढ़ाई की है और अपना करियर एविएशन सेक्टर में बनाया है। रुक्म‍िणी का जन्म 1989 में मुम्बई में ही हुआ। वो 27 साल की हैं और नील उनसे 6 साल बड़े हैं।


नई दिल्ली - बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में कड़कडूमा अदालत ने छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी कंपनी के खिलाफ चेक बाउंस के सात मामलों में आज अदालत ने यह निर्णय दिया। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद राजपाल यादव की अदालत ने जमानत मंजूर कर ली। राजपाल यादव पर सात मामले थे और उन पर प्रति मुकदमा 1.60 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। उनकी पत्नी को प्रति मुकदमा 10 लाख रुपए जुर्माना देना होगा। शुक्रवार को राजपाल को अदालत ने इस मामले में दोषी ठहराया था। अभिनेता ने वर्ष 2010 में निर्देशक के तौर पर पहली बार फिल्म बनाने के लिए पांच करोड़ रुपए का कर्ज लिया था जिसे उन्होंने अदा नहीं किया। वर्ष 2010 में निर्देशक के तौर पर काम शुरू करने वाले राजपाल की फिल्म अता. पता. लापता 2012 में रिलीज हुई और बड़े पर्दे पर यह फ्लाप हो गई। फिल्म में राजपाल के अलावा दारासिंह, असरानी और विक्रम गोखले प्रमुख भूमिका में थे।
यमुनापार की लक्ष्मी नगर स्थित कंपनी मुरली प्रोजेक्ट््स प्राइवेट लिमिटेड ने रामपाल और अन्य के खिलाफ चेक बाउंस से जुड़ी सात अलग-अलग शिकायतें दर्ज करवाई थीं। शिकायतकर्ता का कहना था कि राजपाल ने अप्रैल 2010 में अता पता लापता नामक अपनी फिल्म पूरी करने के लिए इनसे मदद मांगी थी। इसके बाद 30 मई 2010 में दोनों के बीच एक समझौता हुआ और आरोपियों को पांच करोड़ का कर्ज दे दिया। राजपाल यादव को शिकायतकर्ता को आठ करोड़ रुपए वापस करने थे।


नई दिल्ली - अगले साल इंग्लैंड में होने वाले विश्कप-2019 में भारत अपने अभियान की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2 जून की बजाय 4 जून को करेगा। विश्वकप के दौरान यह बदलाव बीसीसीआइ की लोढ़ा समिति की सिफारिश के कारण है। बीसीसीआइ को लोढ़ा समिति की सिफारिश के मुताबिक आइपीएल और अंतरराष्ट्रीय मैच के बीच 15 दिन का अनिवार्य अंतर रखना होगा। क्रिकेट विश्व कप अगले साल 30 मई से 14 जुलाई के बीच इंग्लैंड की धरती पर खेला जाएगा। मंगलवार को इस मसले पर यहां आइसीसी मुख्य कार्यकारियों की बैठक में चर्चा हुई।
बीसीसीआइ के सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि, ‘अगले साल आइपीएल टूर्नामेंट 29 मार्च से 19 मई के बीच खेला जाएगा, लेकिन हमें आइपीएल टूर्नामेंट और विश्वकप के बीच 15 दिन का अंतर रखना होगा। विश्व कप 30 मई से शुरू होगा। इसलिए 15 दिन का अंतर रखने के लिए हम 4 जून को ही पहला मैच खेल सकते हैं। इससे पहले हमें 2 जून को पहला मैच खेलना था, लेकिन हम उस दिन नहीं खेल सकते हैं।’
यहां दिलचस्प बात यह है इससे पहले आईसीसी के शीर्ष टूर्नामेंटों की शुरुआत भारत-पाकिस्तान के मुकाबले से होती थी, क्योंकि इसमें स्टेडियम खचाखच भरा होता है। वर्ल्ड कप-2015 में ऑस्ट्रेलिया (एडिलेड) और चैंपियंस ट्रॉफी-2017 (बर्मिंघम ) में भी ऐसा हुआ था। अधिकारी ने कहा, ‘यह पहला अवसर है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच शुरू में मुकाबला नहीं होगा। यह टूर्नमेंट राउंड रोबिन (विश्व कप 1992 की तरह, जिसमें सभी टीमें एक दूसरे के खिलाफ खेलेंगी) आधार पर होगा।’
इसके अलावा मंगलवार को जो अन्य फैसले भी किए गए, जिनमें साल 2019 से 2023 तक के लिए भविष्य का दौरा कार्यक्रम (एफटीपी) भी शामिल है। अधिकारी ने बताया, ‘हमारे फैसले के मुताबिक, भारत इस दौरान सभी प्रारूपों में अधिकतम 309 दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलेगा। यह पिछले 5 साल के चक्र से 92 दिन कम है।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि घरेलू टेस्ट मैच अब 15 से बढ़ाकर 19 कर दी जाएगी। ये सभी टेस्ट विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा होंगे।’


नई दिल्ली - आइपीएल 2018 में रविवार को हैदराबाद और चेन्नई के बीच खेले गए मैच में एक ऐसा रिकॉर्ड बन गया जो आइपीएल के पिछले 10 वर्ष के इतिहास में नहीं बन पाया था। इस अनोखे रिकॉर्ड को बनाया हैदराबाद के बल्लेबाज केन विलियमसन और शाकिब अल हसन ने।
आइपीएल में पहली बार बल्लेबाजों ने दौड़कर पूरे किए 4 रन
चेन्नई के खिलाफ दूसरी पारी में बल्लेबाजी करते हुए टीम के हैदराबाद के कप्तान केन विलियमसन और शाकिब अल हसन ने दौड़कर चार रन पूरे किए। दरअसल हुआ ये कि दूसरी पारी के 10वें ओवर की दूसरी गेंद पर विलियमसन ने काफी शानदार शॉट खेला। गेंद डीप मिडविकेट की तरफ तेजी से बाउंड्री लाइन के बाहर जा रही थी कि रवींद्र जडेजा ने गेंद को फील्ड किया और चौका जाने से रोक दिया। उनकी फील्डिंग के दौरान ही फिर से गेंद जडेजा के हाथ से लगकर इतनी दूर चली गई कि जब तक फील्डर उसे उठाकर थ्रो करते विलियमसन और शाकिब ने दौड़कर चार रन पूरे कर लिया। आइपीएल के इतिहास में ये पहली बार हुआ कि दो बल्लेबाजों ने दौड़कर चार रन पूरे किए। इससे पहले ये कभी नहीं हुआ था। प्लंकेट बिना खाता खोले सरन की गेंद पर कैच आउट हुए।
केन विलियमसन ने खेली थी शानदार पारी
चेन्नई और हैदराबाद के बीच हुए इस मैच में हैदराबाद के कप्तान केन विलियमसन ने 51 गेंदों पर 5 चौके और 5 छक्कों की मदद से 84 रन की बेहतरीन पारी खेली थी लेकिन टीम को जीत नहीं दिला पाए। इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई ने रैना और अंबाती रायडू की अर्धशतकीय पारी के दम पर 20 ओवर में 3 विकेट पर 182 रन बनाए थे। इसके जबाव में हैदराबाद की टीम 20 ओवर में 6 विकेट पर 178 रन ही बना पाई। बेहद करीबी इस मुकाबले में चेन्नई को 4 रनों से जीत मिली थी। चेन्नई की तरफ से शर्दुल ठाकुर ने इस मैच में कमाल की गेंदबाजी की थी। उन्होंने 4 ओवर में सिर्फ 15 रन देकर 3 अहम विकेट लिए थे। इसमें उन्होंने एक ओवर मेडन भी फेंके और उनका इकानॉमी रेट 3.75 का रहा था।


नई दिल्ली - आज सचिन तेंदुलकर का बर्थ डे है और उनके फैंस क्रिकेट के भगवान को बधाई दे रहे हैं, लेकिन सचिन के जन्मदिन पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कुछ ऐसा कर दिया, जिससे सचिन के फैंस भड़क गए। दरअसल, सचिन की ही तरह आज ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज डेमियन फ्लेमिंग का भी जन्मदिन है।
फ्लेमिंग के जन्मदिन के मौके पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने ट्विटर पर बधाई दी, लेकिन अपने बधाई संदेश में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कुछ ऐसा कर दिया जिससे सचिन के फैंस काफी नाराज हो गए। फ्लेमिंग को सालगिरह की बधाई देते हुए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में फ्लेमिंग गेंदबाजी करते हुए नजर आ रहे हैं और उनके सामने सचिन तेंदुलकर बल्लेबाजी कर रहे हैं। फ्लेमिंग सचिन को बोल्ड कर देते है और मैदान पर खुशी से झूमने लगते हैं। यह वीडियो 30 जनवरी साल 2000 में पर्थ के मैदान खेले गए मैच का वीडियो का है।
क्योंकि फ्लेमिंग के साथ-साथ सचिन का भी आज ही बर्थडे है, लिहाजा फैन्स इसे सचिन का अपमान बता रहे हैं और सोशल मीडिया पर लगातार इस वीडियो की आलोचना कर रहे हैं। सचिन के फैन्स क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की इस हरकत को शर्मनाक बता रहे हैं।
फैन्स के मुताबिक क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया फ्लेमिंग को विश करने के लिए कोई दूसरा विडियो या फोटो का इस्तेमाल कर सकती थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर इस वीडियो का प्रयोग किया है।


साहिबाबाद - उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) के निदेशक और आइपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला ने कहा कि गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में दिल्ली-एनसीआर का अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम 2020 तक पूरा हो जाएगा। यह देश का पहला ऐसा क्रिकेट मैदान होगा, जिसमें बारिश और तूफान के दौरान भी बिना बाधा के मैच जारी रहेगा। बारिश के दौरान स्टेडियम में ऑटोमैटिक एयर कवर की सुविधा भी दी जाएगी। वहीं, दर्शक दीर्घा, पवेलियन और मीडिया बॉक्स भी विदेशों की तर्ज पर सबसे अत्याधुनिक होंगे।
शुक्ला ने कहा कि गाजियाबाद में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनने की सभी अड़चनें दूर हो गई हैं। इस स्टेडियम का निर्माण कार्य इस साल शुरू हो जाएगा। यह स्टेडियम देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का एकमात्र ऐसा स्टेडियम होगा, जिसमें ऑटोमैटिक एयर कवर की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि जिस जगह पर स्टेडियम प्रस्तावित है, वहां पर हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी, जिसे शिफ्ट कर दिया गया है। उन्होंने उन्नाव की जमीन को जल्द ही बेचने और कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम के सुधार कार्य को मंजूरी मिलने की बात भी की।
विदेशी कंपनी करेगी निर्माण : यूपीसीए की बैठक में सामने आया कि स्टेडियम का निर्माण करने के लिए नीदरलैंड्स की कंपनी से बातचीत चल रही है। इंग्लैंड की कंपनी भी संपर्क में है, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि निर्माण कौन सी कंपनी करेगी। राजनगर एक्सटेंशन में 33.54 एकड़ जमीन पर यह स्टेडियम बनाया जाएगा। बीसीसीआइ ने दिसंबर 2015 में स्टेडियम के निर्माण का प्रस्ताव दिया था। उसका लक्ष्य जून 2020 के अंत तक स्टेडियम का निर्माण पूरा करना है। इसके निर्माण पर 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। स्टेडियम में करीब 2500 वाहनों के लिए पार्किंग प्रस्तावित है।
हो सकते हैं आइपीएल मैच : शुक्ला ने बताया कि इस स्टेडियम की क्षमता 45 हजार से अधिक दर्शकों की होगी। संभव है कि यहां आइपीएल के मैचों का भी आयोजन हो। सूत्रों के अनुसार, भविष्य में अगर आइपीएल में उत्तर प्रदेश की फ्रेंचाइजी आती है तो गाजियाबाद के स्टेडियम को ही उसका होम ग्राउंड बनाया जाएगा।
बेहतरीन होगी कनेक्टिविटी : इस स्टेडियम की कनेक्टिविटी बेहद बेहतरीन होगी। दिल्ली से निकलने के बाद यूपी गेट से यहां आने में मात्र 10 मिनट लगेंगे। क्रिकेटर और क्रिकेट प्रेमी एलिवेटेड रोड से होते हुए यूपी गेट से राजनगर एक्सटेंशन तक बिना ब्रेक लगाए पहुंच सकेंगे। दिल्ली-एनसीआर से मैच देखने आने वाले लोगों को आसानी होगी। इस स्टेडियम में क्रिकेट अकादमी भी खुलेगी।


भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) दुनिया का सबसे धनी और व्यावसायिक रूप से संपन्न क्रिकेट बोर्ड है। वह देश के दूसरे खेल संघों से इतर निजी संस्था होने का दावा करता रहा है। इसे किसी भी सूरत में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। ऐसे में दीगर खेल संघों की तरह बीसीसीआइ और उसकी सहायक इकाइयों को भी सरकार और सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाने के विधि आयोग की सिफारिशें स्वागतयोग्य हैं। विधि आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा है कि बीसीसीआइ भी देश के दूसरे खेल संघों की तरह है और वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत सरकारी संस्था होने के तमाम मापदंडों पर पूरी तरह खरा उतरता है। इसलिए उसे भी आरटीआइ के दायरे में लाने के आवश्यकता है। इससे बीसीसीआइ के कामकाज में पारदर्शिता लाने और उसे लोगों के प्रति जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी। यानी राष्ट्रीय या फिर जोनल स्तर के खिलाड़ियों के चयन तक पर लोगों को सवाल खड़े करने का अधिकार होगा।
आयोग की सिफारिशें
इससे केवल योग्य खिलाड़ियों के चयन से हमारे पास उनका और बेहतर पूल तैयार होगा। आयोग की ये सिफारिशें भारतीय क्रिकेट बोर्ड को भ्रष्टाचार मुक्त करने और उसकी कार्यशैली में सुधार लाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। बस शर्त यह है कि सरकार इसे मान ले। दरअसल बोर्ड को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग कोई नहीं है, लेकिन सरकारें इसके प्रति कभी संजीदा नहीं रही हैं। बीसीसीआइ में राजनेताओं और उद्योगपतियों का जमावड़ा होना कोई महज संयोग की बात नहीं है। उनके द्वारा इसका अपने निजी स्वार्थो और व्यावसायिक हित साधने के लिए इस्तेमाल करने के भी मामले गाहे-बगाहे सामने आते रहे हैं। शायद इसी वजह से तमाम सरकारी लाभ, छूट और रियायतें देने के बावजूद बीसीसीआइ ने अपने ऊपर निजी संस्था होने के विशेषाधिकार का चोला ओढ़े रखा है।
बीसीसीआइ एक निजी संस्था
फिलहाल बीसीसीआइ तमिलनाडु सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत एक निजी संस्था है। इसके इस विशेष दर्जे को चुनौती देने वाली एक याचिका पर 2004 में बीसीसीआइ ने अदालत में दलील दी थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली भारतीय टीम अधिकारिक तौर पर बीसीसीआइ की टीम होती है न कि भारतीय। इसके अतिरिक्त न तो उसके जरिये राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग होता है और न ही किसी अन्य राष्ट्रीय प्रतीक का। बोर्ड महज अपने ‘निजी संस्था’ के दर्जे को यथावत रखने के लिए इतना कैसे गिर सकता है कि उसे करोड़ों भारतीयों की उस भावना की भी कद्र न हो जो क्रिकेट जैसे जुनून के माध्यम से उन्हें एक धागे में पिरोकर एक कौम बनाती है। निजी संस्था के पीछे बीसीसीआइ के तर्क और भी हैं।
बंदिशों में नहीं लाया जा सकता
मसलन उसका कहना है कि वह प्रत्यक्ष रूप से सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं लेता इसलिए उसे इन दायरों की कैद और बंदिशों में नहीं लाया जा सकता है। जबकि अपनी बेतहाशा आमदनी पर हजारों करोड़ रुपये के कर्ज की छूट लेने और स्टेडियम व खेलों के अन्य स्थल बनवाने के नाम पर सस्ती सरकारी जमीनें हासिल करने में उसे कोई परहेज नहीं है। एक अनुमान के अनुसार साल 1997 से लेकर 2007 के दौरान बीसीसीआइ को 2100 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स छूट दी गई। हालांकि 2007-2008 में इनकम टैक्स एक्ट के अनुच्छेद 12ए के तहत इसके चैरिटेबल ट्रस्ट होने की मान्यता को रद कर दिया गया, लेकिन दिसंबर 2014 में वित्त मंत्रलय की एक रिपोर्ट के अनुसार बीसीसीआइ और आइपीएल के खिलाफ टैक्स चोरी के 213 मामले सामने आए।
कारण बताओ नोटिस जारी
इसी तरह कर चोरी के लिए 2011 में आयकर विभाग ने बीसीसीआइ को 96 और प्रवर्तन निदेशालय ने 19 कारण बताओ नोटिस जारी किए। इससे बोर्ड के उस दावे में कोई दम नजर नहीं आता कि उसके द्वारा पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाता है और 25 लाख रुपये से अधिक के तमाम खर्चो और खाते की ऑडिट रिपोर्ट को वेबसाइट पर डाला जाता है। अजीब बात यह है कि स्वायत्तता का स्वांग रचने की जुगत में बीसीसीआइ को भारत के दीगर खेल संघों की तरह ‘खेल एवं युवा मंत्रलय’ की वेबसाइट पर अपना नाम तक गंवारा नहीं है, लेकिन खेल के लिए दिए जाने वाले प्रतिष्ठित अजरुन पुरस्कारों के लिए नामों की सिफारिश करने में वह सबसे आगे रहता है। यानी सुविधाओं के नाम पर सभी सरकारी भेंट स्वीकार हैं, लेकिन स्वयं को सरकारी कहलवाना पसंद नहीं है। आखिर क्यों?
इसके पारदर्शी होने से खतरा
जाहिर है कि दुनिया के अमीरतरीन क्रिकेट बोर्ड में सालों से जमे कुछ लोगों को इसके पारदर्शी होने से खतरा है। हालांकि सवाल बेजा नहीं है कि किसी खेल संस्था में ऐसे लोगों का क्या काम जिनकी अगली-पिछली पीढ़ी का भी क्रिकेट से दूर-दूर का कोई वास्ता नहीं रहा है? ऐसे लोगों के ही कड़े प्रतिरोध के चलते 2005 में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने भी अपने एक निर्णय में बीसीसीआइ को संविधान के अनुच्छेद 12 के अंतर्गत सरकारी संस्था मानने से इन्कार कर दिया था, लेकिन उसके बाद घटित हुए विवादों और घटनाक्रमों में भी इसकी मांग जब-तब जोर पकड़ती रही। विशेषकर हालिया वर्षो में इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) में सट्टेबाजी के मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा।
क्रिकेट बोर्ड में सुधार
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड में सुधार के लिए देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई। लोढ़ा समिति को बोर्ड में गंभीर खामियां और भ्रष्टाचार नजर आया। इसी समिति ने अपनी सिफारिश में इसे सार्वजनिक संस्था मानने के साथ आरटीआइ एक्ट के तहत पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विधि आयोग की सिफारिशें मांगी थी। लोढ़ा कमेटी की सिफारिश के बाद विनोद राय की अध्यक्षता में बनी प्रशासक कमेटी ने बीसीसीआइ की साफ-सफाई का काम कुछ हद तक तो कर ही दिया है। सरकार को चाहिए कि लोढ़ा कमेटी की तरह ही विधि आयोग की ताजा सिफारिशों को भी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में लागू करवाए ताकि राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर भी उसकी कार्यशैली में अमूलचूल परिवर्तन आ सके।

 


कोलकाता - भारत-पाक द्विपक्षीय सीरीज पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने गेंद बीसीसीआइ के पाले में डाल दी है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) की बैठक में शामिल होने कोलकाता पहुंचे पीसीबी प्रमुख नजम सेठी ने कहा कि उपमहाद्वीप के लोगों की खातिर दोनों देशों के बीच क्रिकेट होना जरूरी है। इस पर बीसीसीआइ को फैसला लेना होगा। मुझे उम्मीद है कि देर-सवेर बेहतर सोच पैदा होगी और दोनों देश फिर से अच्छी क्रिकेट खेलेंगे।'
भारत के द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलने पर समझौते के उल्लंघन का हवाला देकर बीसीसीआइ पर 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर का दावा ठोकने के मामले पर सेठी ने सिर्फ इतना ही कहा कि फैसला उनके पक्ष में आने पर फ्यूचर टूर प्रोग्राम (पीएफटी) में बदलाव करना ही पड़ेगा।' इस मामले पर आइसीसी का तीन सदस्यीय पैनल अक्टूबर में सुनवाई करेगा।
मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग एवं गेंद से छेडखानी के मामले पर सेठी ने कहा कि इन सबके लिए बेहद सख्त सजा होनी चाहिए। हमने दो-तीन खिलाडियों को कड़ी सजा दी है। मुझे उम्मीद हैं कि दूसरे क्रिकेट बोर्ड भी ऐसा ही रुख अख्तियार करेंगे।
पीसीबी प्रमुख ने रोया वीजा का रोना
पीसीबी प्रमुख ने भारत आने में उन्हें वीजा को लेकर काफी परेशानी होने की शिकायत की है। दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए बड़ा मसला मानने से इन्कार किया है। सेठी ने कहा कि हमें लाहौर से कोलकाता आने में 19 घंटे लग गए। हमें लाहौर से दुबई, दुबई से दिल्ली और वहां से कोलकाता आना पड़ा। अगर हमें सही वीजा दिया गया होता तो हम दो घंटे में लाहौर से यहां पहुंच गए होते।' इसका जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि वीजा देने की जो प्रक्रिया है, उसी का पालन किया गया है। दोनों देशों के लोगों को वीजा देने की एक निश्चित प्रक्रिया है। वे (सेठी) एक निर्दिष्ट कारण से कोलकाता में बैठक में भाग लेने आए हैं, इसलिए उन्हें एक शहर के लिए वीजा दिया गया है। वे कुछ भी कह सकते हैं अथवा शिकायत कर सकते हैं लेकिन इसमें कुछ भी नया नहीं है।' गौरतलब है कि 2015 के बाद पहली बार पीसीबी का कोई प्रतिनिधि मंडल भारत पहुंचा है।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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