Editor

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-रमेश सर्राफ धमोरा (स्वतंत्र पत्रकार)

हाल ही में राजस्थान के समाचार पत्रो में एक खबर पढऩे को मिली कि राजस्थान सरकार ने निर्णय किया है कि आने वाले शिक्षा सत्र में राजस्थान शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त सभी सरकारी व गैर सरकारी प्रारम्भिक व माध्यमिक स्कूलों में हर शनिवार को सामाजिक सरोकार से जुड़ी शिक्षा प्रदान की जायेगी। इसके लिये माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने शिविरा पंचाग जारी किया है। शिक्षा विभाग के स्कूलों में प्रथम शनिवार को किसी महापुरूष के जीवन से सम्बन्धित प्रेरक जानकारी दी जायेगी। दूसरे शनिवार को दादी,नानी से जुड़ी प्रेरक कहानियां सुनायी जायेगी। माह के तीसरे शनिवार को संत,महात्माओं, धर्मगुरूओं के प्रवचन करवाये जायेगें। चौथे शनिवार को महाकाव्यों पर प्रश्रोत्री होगी। पांचवे शनिवार को प्रेरक नाटको का मंचन व राष्ट्रभक्ति गीतो का गायन होगा।
शिक्षा विभाग से उक्त आदेश जारी होते ही कई शिक्षक संगठनो ने सरकार के इस आदेश का यह कह कर विरोध करना शुरू कर दिया कि इससे शिक्षा का भगवाकरण होगा। मेरी नजर में सरकार का यह एक अच्छा कदम है। आज के दौर में विद्यार्थी दर्जनो किताबो व कापियों से भरे भारी भरकम बस्तो का बोझ उठाये मानसिक रूप से इतने दब चुके है कि उन्हे समाजिक गतिविधियों का ज्ञान ही नहीं रहता है। छात्र दिन भर अपनी पढ़ाई की चिंता में डूबा रहता है। आज छात्र बोर्ड की परीक्षा में 500 में 499 अंक प्राप्त करने लगा है। पहले के समय में प्रथम श्रेणी से पास होने वाला श्रेष्ठ छात्र माना जाता था। छात्रों के 70-75 प्रतिशत अंक आना तो बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। ऐसे में आज के समय में छात्रों के मध्य पढ़ाई को लेकर भारी प्रतिस्पर्धा चल रही है।
आज हर बच्चे के अभिभावक भी चाहते हैं कि उनका बच्चा क्लास में सर्वाधिक अंक लाये। बच्चे भी अभिभावकों के दबाव में दिन भर किताबों में डूबे रहने लगे हैं। ऐसे में बच्चो की पूरी दुनिया किताबो के बस्तों व स्कूल तक ही सिमट कर रह गयी है। आज बच्चे को घर में क्या हो रहा है, क्या सामाजिक रिती-रिवाज, मान्यतायें है इससे उन्हे कोई सरोकार नहीं हैं। बच्चो की पूरी दुनिया तो अधिकाधिक अंक प्राप्त करने का प्रयास करने तक ही रह गयी है।
ऐसे में राजस्थान सरकार का निर्णय एक नयी आश जगाता है। इस निर्णय से बच्चों को अपनी संस्कृति को, अपने स्थानीय रीति-रिवाजों को निकट से जानने, समझने का मौका तो मिलेगा ही उनकी जिन्दगी में एक नया नवाचार भी होगा। पहले के समय में छोटे बच्चे गांव की स्कूल में पढ़ते थे तब आज की तरह स्मार्ट फोन का जमाना नहीं था। उस वक्त सभी बच्चे रात में सोने से पहले घर के बड़े बुजुर्गो, दादी, नानी से कहानियां सुनते थे। गर्मी की छुट्टियों में बच्चे जब अपनी ननिहाल जाते थे तो उनको सबसे अणिक उत्सुकता नानी से कहानियां सुनने की होती थी। नानी भी बच्चों को बड़े चाव से कहानियां सुनाती थी। उस जमाने के बुजुर्गो को बहुत सारी कहानियां याद रहती थी जो रोजाना बच्चों को सोने से पहले सुनाया करती थी।
स्कूलों में महापुरूषों के जीवन पर चर्चा करना, प्रेरक कहानियां सुनाना, धर्मगुरूओं के प्रवचन सुनाना, महाकाव्यों पर प्रश्रोत्री, प्ररक नाटको का मंचन करना कतई गलत नहीं हैं। हम जब स्कूल में पढ़ते थे तो गांव के स्कूल में प्रतिवर्ष दो-तीन नाटको का मंचन किया जाता था। स्कूल में खेले जाने वाले नाटको के सभी पात्र स्कूल के अध्यापक व विद्यार्थी निभाते थे। कई दिन पहले से नाटक का रिहर्सल शुरू हो जाता था। नाटक देखने पूरा गांव उमड़ पड़ता था। नाटक के माध्यम से स्कूल में कुछ अतिरिक्त आय हो जाती थी जिससे गरीब बच्चों की फीस, किताब, कापी व ड्रेस की व्यवस्था की जाती थी। उसमें से कुछ पैसा स्कूल के कमरों में सफेदी करने पर भी चार्च किया जाता था। सफेदी बच्चे स्वंय ही करते थे।
आज के तकनीकी युग में बच्चे अपने महापुरूषों, बड़ो-बुजुर्गों को भूलते जा रहे हैं। स्कूलों में महापुरूषो के जीवन पर चर्चा की जायेगी तो बच्चों में उनके बारे में जानने की जिज्ञासा उत्पन्न होगी। हमारे झुंझुनू जिले के खेतड़ी में स्वामी विवेकानन्द जी ने तीन बार यात्रा की थी व कई दिनो तक यहां ठहरे थे। उनको भगवाबाना व स्वामी विवेकानन्द नाम भी शिकागो धर्म सम्मेलन में जाते वक्त खेतड़ी के राजा अजीतसिंह जी द्वारा ही प्रदान किया गया था। मगर आज इस बात का ज्ञान कितने विद्यार्थियों को हैं। स्कूलों में जब महापुरूषों के जीवन पर चर्चा होगी तब स्वामी विवेकानन्द जी का प्रसंग जरूर आयेगा व विद्यार्थियों को उनके बारे में पता लग सकेगा। इसी प्रकार के अन्य पे्ररणादायक बातों से छात्र रूबरू होगें। स्कूलों में धर्मगुरू छात्रों को धर्म से जुड़ी सामाजिक एकता की बाते बतायेंगें तो उनकी सोच का दायरा बढ़ेगा। धर्म कोई भी हो सभी धर्मो में समाज को एकसूत्र में पिरोने की बातें होती है। कोई भी धर्म समाज को तोडऩे की शिक्षा नहीं देता हैं। सभी धर्म शान्ति के मार्ग पर चलने की राह दिखाते हैं।
आज के प्रतियागिता के दौर में मनुष्य एक दूसरे का प्रतिस्पर्धी बन कर रह गया है। वर्तमान समय में स्कूल शिक्षा का केन्द्र ना होकर पढ़ाई के कारखाने बन चुके हैं। हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा उसके पड़ौसी के बच्चे से अधिक अंक प्राप्त करें। ऊंची पढ़ाई पढ़ कर बड़े पद पर काम करें। अभिभावक प्रतिस्पर्धी के चक्कर में यह भी नहीं देखता की उसका बच्चा क्या पढऩा चाहता है। उसकी किस विषय में रूची है। बच्चों को उनकी रूची का विषय नहीं मिलने पर सही ढ़ंग से पढ़ नहीं पाते हैं, उपर से कम अंक लाने पर घर वालों का डर। ऐसे माहौल में बच्चा अवसाद की स्थिति में आ जाता है व कई बार इसी प्रकार के तनाव के चलते वह गलत कदम उठा लेता है।
राजस्थान का कोटा शहर कोचिंग के क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी मंडी बन चुका हैं। यहां प्रतिवर्ष लाखों छात्र पढऩे आते हैं मगर तनाव के चलते प्रतिवर्ष दर्जनो छात्र आत्महत्या भी कर लेते हैं। हालांकि यहां से हर साल कई टापर भी निकलते हैं मगर आत्म हत्या करने वाले उनपर एक बदनुमा दाग बन जाते है। यहां पढऩे वाले छात्र द्वारा आत्म हत्या करने का कारण पढ़ाई का दवाब रहता है। उन छात्रो के घरवाले उनपर लाखों रूपये खर्च कर उन्हे कोटा इस आस में पढऩे भेजते हैं कि वहां जाकर वह प्रतियोगी परीक्षा अवश्य पास कर लेगा ऐसे में परीक्षा में असफल होने पर वे मानसिक दबाव में आकर गलत कदम उठा लेते हैं। जिसका खामियाजा उनके अभिभावको को जिन्दगी भर उठाना पड़ता है।
आज की शिक्षा मात्र किताबी व कम्प्यूटर वाली रह गयी है। शिक्षा में व्यावहारिक पक्ष गायब हो गया है। शिक्षा का पूर्णत: व्यावसायी करण हो चुका है। इस प्रकार की शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों से व्यावहारिकता की उम्मीद करना बेमानी है। सरकारों को शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन कर इसे व्यवहारिक, रोजगारपरक व सामाजिक समरसता वाली बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिये ताकि शिक्षा पूर्ण करने के बाद मात्र सरकारी नौकरी की आश ना रख अपने स्वरोजगार पर भी ध्यान केन्द्रित कर सके। जिससे शिक्षित बेरोजगारों की बढ़ती संख्या पर काबू पाया जा सके।

झुंझुनू,राजस्थान 9414255034
rameshdhamora@gmail.com



-तनवीर जाफ़री
पिछले महीने ज मू-कश्मीर राज्य की पीडीपी-भाजपा संयुक्त सरकार की मु यमंत्री महबूबा मु$ ती द्वारा माह-ए-रमज़ान शुरु होने से पहले राज्य में भारतीय सेना द्वारा एकतर$फा सीज़$फायर करने के अनुरोध किया गया था। भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार तो ज़रूर कर लिया परंतु देश व कश्मीरवासियों को इस सीज़$फायर की भारी $कीमत चुकानी पड़ी है। क्या राज्य की जिस आम जनता की आज़ादी,उनकी धार्मिक स्वतंत्रता उनकी शांति तथा रमज़ान के दौरान दिन-रात की जाने वाली इबादतों के मद्देनज़र भारत सरकार द्वारा सेना को इस पवित्र महीने में आतंकियों के विरुद्ध कोई बड़ी कार्रवाई न करने का जो निर्देश 'सीज़फायर' के रूप में दिया गया था सरकार को इसके सकारात्मक परिणाम मिले भी हैं? या फिर यह एकतर$फा सीज़$फायर की 'कवायद कश्मीरवासियों के लिए तथा भारतीय सेना के लिए एक घाटे का सौदा साबित हुई जबकि आतंकियों द्वारा इस इकतर$फा सीज़$फायर का इकतर$फा $फायदा उठाया गया और यह 'आतंकियों की ईद' ही साबित हुआ?
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में भी इसी प्रकार का एक प्रयोग कश्मीर में किया गया था। परंतु उस समय भी आतंकी अपनी हिंसापूर्ण कार्रवाईयों से बाज़ नहीं आए थे। इस बार भी पवित्र रमज़ान में जहां भारतीय सेना ने तथा राज्य व केंद्र की सरकार ने सामूहिक रूप से आतंकवादियों के प्रति नरमी बरतने का जो सद्भावपूर्ण $फैसला किया आतंकियों ने संभवत: उसे सेना व सरकार की कमज़ोर समझा और अपनी नापाक हरकतों को रमज़ान के लगभग पूरे महीने जारी रखा। कश्मीरी अलगाववादियों व आतंकवादियों की इस कार्रवाई में सीमापार से पाकिस्तान की ओर से भी भरपूर मदद की जा रही थी। नतीजतन पूरे महीने में घुसपैठ की कई घटनाएं घटीं,पाकिस्तान द्वारा सीमा पर कई बार गोलीबारी की गई, सीमावर्ती गांवों के रहने वाले सैकड़ों लोगों को रमज़ान में का$फी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई भारतीय जवान शहीद हुए और कई बेगुनाह नागरिकों की जानें गईं। आ$िखरकार रमज़ान के महीने का समापन कश्मीर घाटी के एक वरिष्ठ, प्रसिद्ध व निष्पक्ष पत्रकार शुजात बु$खारी की हत्या के साथ हुआ। शुजात बु$खारी के साथ आतंकवादियों ने उनके सहयोगी दो पुलिस कर्मियों की भी हत्या कर दी।
सवाल यह है कि एक ओर तो जहां इसी ईद के दौरान दुनिया के सबसे बड़े आतंकी संगठन समझे जाने वाले तालिबानों ने अ$ $गानिस्तान में चल रहे इसी प्रकार के संघर्ष विराम को स मान देते हुए वहां ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि अ$फ$गान राष्ट्रपति अशर$फ गनी से संघर्ष विराम की समय सीमा को और अधिक बढ़ाए जाने की घोषणा कर दी है तथा तालिबानों से भी राष्ट्रपति ने ऐसी ही अपील की है। अ$फ$गानिस्तान सरकार द्वारा कई तालिबानी आतंकियों को वहां की जेलों से भी रिहा कर दिया गया है। और तो और गत् दिवस मनाई गई ईद में अ$फ$गान सैनिक व तालिबानी आतंकी जो कभी एक-दूसरे के $खून के प्यासे दिखाई देते थे वही एक-दूसरे से गले मिलते हुए और ईद की मुबारकबाद का आदान-प्रदान करते हुए देखे गए। वहीं आ$िखर भारतवर्ष की कश्मीर समस्या या कश्मीर में फैला आतंकवाद क्या तालिबानी आतंकी विचारधारा से भी ज़्यादा $खतरनाक रूप धारण कर चुका है? बड़े आश्चर्य की बात है कि अ$फ$गानिस्तान,सीरिया,इरा$क तथा यमन जैसे देशों की हालत देखने के बावजूद मु_ीभर आतंकवादी तथा उनको भड़काने वाले चंद स्वार्थी अलगाववादी नेता यह नहीं समझ पाते कि यदि भारतीय सेना द्वारा भी आतंकियों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई एकतर$फा तरी$के से की गई, ऐसे में वहां के आम आदमियों को कितनी परेशानी का सामना उठाना पड़ सकता है। उन्हें इस बात का भी एहसास नहीं कि दमनात्मक सैनिक कार्रवाई का कश्मीर के सौंदर्य वहां के पर्यट्न तथा आम लेागों के जनजीवन,शिक्षा स्वास्थय,व्यवसाय आदि पर कितना विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। वे यह भी नहीं समझ पाते की उन्हें भड़काने तथा उकसाने वाला उनका कथित शुभचिंतक पाकिस्तान स्वयं अपने ही देश में किस प्रकार से आतंकवाद का शिकार है? कई राजनैतिक विश£ेषक इस बात का संदेह जता चुके हैं कि पाकिस्तान अपने अंतर्विरोधों के चलते तथा वहां के अनेक सत्ता केंद्र होने के नाते लगभग बिखरने की कगार पर खड़ा हुआ है और इन्हीं अलग-अलग सत्ता केंद्रों ने पूरे पाकिस्तान में आतंकवाद को फलने-फूलने का ऐसा मौ$का उपलब्ध कराया है जिससे पाकिस्तान को पूरी दुनिया आतंकवाद के एक बड़े उत्पादक देश के रूप में देख रही है। क्या ऐसा पाकिस्तान इन कश्मीरी अलगाववादियों व आतंकवादियों की किसी प्रकार की दूरगामी सहायता कर पाने की स्थिति में है? सिवाय इसके कि धर्म के नाम पर कश्मीर के बेरोज़गार,$गरीब युवाओं को वर$गलाता रहे।
पत्रकार शुजात बु$खारी निश्चित रूप से ऐसे पत्रकार नहीं थे जो कश्मीर की अवाम का पक्ष न रखते हों। या फिर कश्मीर में होने वाली सैन्य ज़्यादतियों पर आंखें बंद रखते हों। वे वास्तव में एक निष्पक्ष व निडर पत्रकार थे जो अपने पेशे को पूरी ईमानदारी के साथ अंजाम देना ब$खूबी जानते थे और दे रहे थे। एक पत्रकार के रूप में कश्मीर में उनकी कितनी लोकप्रियता थी और उनकी शहादत के बाद कश्मीर की अवाम ने उसे किस रूप में देखा यह बु$खारी की उस शव यात्रा से स्वयं साबित हो जाता है जिसमें हज़ारों की भीड़ उनके जनाज़े में शरीक होकर उनकी मातमपुरसी कर रही थी। कौन कश्मीरी या कौन मुसलमान या कौन सा इंसान शुजात बु$खारी की ईद से एक दिन पूर्व व रमज़ान के आ$िखरी रोज़े के इ$ तार के व$क्त से चंद मिनट पहले होने वाली इस हत्या को जायज़ ठहराएगा? बु$खारी को अगले ही दिन सुबह अपने पैतृक गांव में परिवार के साथ जाकर ईद मनानी थी जहां उनकी शहादत की $खबर सुनने के बाद ईद का दिन मातम में बदल गया। शुजात बु$खारी के परिजनों तथा कश्मीर के शांतिप्रिय लोगों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि कश्मीर में सेना द्वारा रमज़ान में घोषित किए गए संघर्ष विराम का इतना बड़ा $खमियाज़ा कश्मीर के लोगों को भुगतना पड़ेगा।
कहा जा सकता है कि जहां भारत सरकार ने राज्य सरकार के एकतर$फा सीज़$फायर करने के निवेदन को स्वीकार कर अपनी ओर से यह दर्शाने की कोशिश की कि भारत सरकार कश्मीर में शांति बहाली के लिए हर प्रकार के ज़ोखि़म उठाने को तैयार है और निश्चित रूप से सरकार को अपने इस $फैसले का $खमियाज़ा भी भुगतना पड़ा है वहीं यह भी सा$फ हो गया कि आतंक की राह पर चलने वाले लोग न तो रमज़ान की पाकीज़गी को समझने की क्षमता रखते हैं न ही उन्हें अल्लाह, इस्लाम तथा धार्मिक शिक्षाओं की कोई परवाह है। संभवत: सेना द्वारा सीज़$फायर के रूप में उनके प्रति बरती गई नरमी आतंकवादियों के लिए तो ईद साबित हुई जबकि रमज़ान के महीने में शहीद होने वाले भारतीय सैनिकों,राज्य के पुलिस कर्मियों,शुजात बु$खारी के परिजनों तथा रमज़ान में मारे गए बेगुनाह लोगों के परिवार के लोगों के लिए यह महीना मोहर्रम जैसे किसी शोकपूर्ण महीने से कम नहीं रहा। लिहाज़ा सरकार को आतंकवाद का जवाब उसी की भाषा में दो गुणा व चार गुणा ता$कत से देने की ज़रूरत है। कश्मीर में शांति स्थापित करने का पहला जि़ मा वहां सक्रिय आतंकवादियों, अलगाववादी नेताओं तथा पाकिस्तान के बहकावे में आने वाले लोगों का होना चाहिए ।


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आलिया भट्ट इन दिनों अपने करियर के पीक पर हैं। आलिया की पिछली रिलीज फिल्म ‘राजी’ को न केवल बॉक्स आॅफिस पर शानदार सफलता मिली, बल्कि आगे भी उनके पास कई दिलचस्प प्रोजेक्ट्स हैं। हालांकि, ऐसा लग रहा है कि केवल उनका करियर ही उनकी जिंदगी में राइट ट्रैक पर नहीं है, बल्कि उनकी निजी जिंदगी भी राइट ट्रैक पर दौड़ती हुई नजर आ रही है। आलिया को अपने क्रश के तौर पर रणबीर के रूप में पार्टनर मिल गया है और रणबीर से अच्छा पार्टनर आलिया के लिए भला कोई और कौन हो सकता है। अब हमारे हाथ बेहद दिलचस्प जानकरी लगी है। आलिया और रणबीर 2020 की शुरुआत में शादी कर सकते हैं।दोनों के करीबी एक सूत्र ने हमें बताया- ‘आलिया इन दिनों अपनी जिंदगी के शानदार फेज से गुजर रही हैं। वह इन दिनों रणबीर के प्यार में हैं और दोनों एक-दूसरे के लिए बेहद गंभीर हैं। हां, दोनों की शादी की बात हो रही है, लेकिन यह 2020 से पहले नहीं होगी।’ खैर, 2020 ज्यादा दूर नहीं है, इसलिए हम शिकायत भी नहीं कर रहे। इसके अलावा दोनों अभी अपने-अपने प्रोजेक्ट्स को निपटाने में भी लगे हुए हैं, जितनी जल्दी दोनों अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट्स को फिनिश करेंगे उतनी जल्दी दोनों की रिलेशनशिप के आॅफिसियल होने की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी। दोनों प्रोफेशनल्स हैं और शायद दोनों यह भी नहीं चाहेंगे कि उनकी निजी जिंदगी का उनके काम पर असर पड़े।रविवार को रणबीर जब ट्विटर पर अपने फैंस से मुखातिब हुए थे, तब उनके एक फैन ने उनकी शादी को लेकर उनसे सवाल पूछ लिया था। इस सावल का जवाब देते हुए रणबीर ने अपने फैंस से बातचीत में कहा था कि उन्हेें उम्मीद है कि यह जल्दी होगी। रणबीर और आलिया दोनों ही अपनी रिलेशनशिप को लेकर खुले हुए हैं। बी-टाउन के बाकी सेलेब्स की तरह दोनों अपनी रिलेशनशिप को छिपा नहीं रहे हैं, बल्कि खुलकर इस मसले पर बातें कर रहे हैं। रणबीर ने हाल ही में जीक्यू को दिए अपने इंटरव्यू में कहा भी- ‘ये अभी बहुत नया है और मैं इस बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहता हूं। इस रिश्ते को सांस लेने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए।’ बहरहाल, रणबीर और आलिया की शादी की डेट कब आती है इसका तो फिलवक्त किसी को अंदाजा नहीं है, लेकिन हमने आपको दोनों की शादी किस साल में होगी इसका जवाब दे दिया है।

बेटे तैमूर के जन्म के बाद करीना कपूर खान ने लंबे समय बाद पिछले दिनों रिलीज हुई फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ के जरिए सिल्वर स्क्रीन पर धमाकेदार वापसी की है। इस फिल्म को न केवल बॉक्स आॅफिस पर सक्सेस मिली, बल्कि फिल्म को आॅडियंस ने भी खूब सराहा। करीना ने आखिरी दफा 2016 में एक अवॉर्ड शो में अपनी परफॉरमेंस दी थी और इसके बाद वह मंगलवार रात को वापस स्टेज पर लौटी हैं। मंगलवार को करीना कपूर ने फेमिना मिस इंडिया के फिनाले में परफॉर्म किया। इस दौरान फिनाले में जो भी मौजूद था वह बेबो की परफॉरमेंस को देखता ही रह गया।करीना इस इवेंट में शिरकत करने के लिए खासतौर पर दो दिनों के लिए लंदन से मुंबई पहुंची थी, जहां वह इन दिनों सैफ अली खान और अपने बेटे तैमूर के साथ छुट्टियां बिता रही हैं। फेमिना मिस इंडिया के फिनाले में करीना ने अपनी फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ के गाने ‘तारीफां’ के अलावा कार्तिक आर्यन की फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ के गाने ‘बूम डिगी’ पर भी इस दौरान परफॉर्म किया। इन गानों के अलावा भी बेबो ने कई और गानों पर इस दौरान परफॉर्म किया और कहने की जरूरत नहीं है कि उनकी परफॉरमेंस ने स्टेज पर आग लगा दी। लंबे समय बाद करीना को स्टेज पर परफॉर्म करते हुए देखना सभी के लिए दिलचस्प अनुभव था।इससे पहले मिड डे ने सूत्रों के हवाले से लिखा था कि करीना ने इस इवेंट के लिए केवल दो दिन का ही समय रिहर्सल और परफॉर्म करने के लिए दिया था और इसके बाद वह वापस सैफ और बेटे को ज्वाइन करने के लिए लंदन के लिए रवाना हो जाएंगी। इस रिपोर्ट के मुताबिक करीना ने इस इवेंट के लिए पहले दिन तकरीबन 12 घंटे रिहर्सल की और इसके बाद स्टेज पर उतरने से पहले भी 6 घंटे तक रिहर्सल की थी। बहरहाल दो साल बाद करीना को स्टेज पर देखना वाकई दिलचस्प था। करीना की इस परफॉरमेंस के कई वीडियो इंस्टाग्राम पर भी तैर रहे हैं।बहरहाल, पिछले दिनों ही करीना ने एक मीडिया हाउस से बातचीत में कहा था कि बेटे तैमूर के लिए सैफ और उन्होंने यह फैसला लिया है कि एक समय में दोनों में से एक तैमूर की देखभाल के लिए खाली रहेगा। करीना ने अभी अपने अगले प्रोजेक्ट की घोषणा नहीं की है। वह नवंबर के बाद ही किसी प्रोजेक्ट पर काम करेंगी।

अनुकृति वास तमिलनाडु की रहने वाली है और इस साल फेमिना मिस इंडिया 2018 कॉन्टेस्ट की विजेता चुनी गई है। अनुकृति वास ने इस प्रतियोगिता में शामिल 29 अन्य प्रतियोगियों को पछाड़ते हुए ये ताज अपने नाम किया है। उन्हें ये ताज मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने पहनाया है। अब अनुकृति वास साल 2018 में होने वाले मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। अब इसके बाद ये सवाल कौंधने लगा है कि आखिर अनुकृति वास कौन है जिन्होंने बाकी प्रतियोगियों के बीच सुंदरता का ये ताज अपने नाम किया है। इसीलिए इनके बारे में जो जानकारी हमें अब तक मिली है उसका परिचय हम आपसे करवा देते हैं।अनुकृति वास महज 19 साल की है और देश के राज्य तमिलनाडु से ताल्लुक रखती है।अनुकृति वास एक कॉलेज स्टूडेंट है और लोयोला कॉलेज से फ्रेंच भाषा में बीए कर रही हैं।अनुकृति मॉडलिंग और एक्टिंग का शौक रखती है। मतलब अनुकृति भविष्य में बॉलीवुड में एंट्री कर सके।अनुकृति अपनी मम्मी के बेहद करीब है और अपनी हर सफलता का श्रेय अपनी मां को देना चाहती हैं।अनुकृति एक एथलिट भी हैं और खुद को टॉम बॉय मानती है। अनुकृति राज्य स्तर पर खेल प्रतिस्पर्धाओं में भी हिस्सा ले चुकी हैं।अनुकृति बाइक भी चलाती हैं और उन्हें घूमने, ट्रेवलिंग का काफी शौक है।अनुकृति नई-नई चीजों को तलाशना, परखना और हरदम कुछ नया करने की ख्वाहिश रखती है।इससे पहले फेमिना मिस तमिलनाडु का भी खिताब हासिल कर चुकी थी और इसके बाद अब मिस इंडिया का ताज अपने नाम किया है।कल रात संपन्न हुए इस समारोह में अनुकृति के अलावा हरियाणा की मीनाक्षी चौधरी फर्स्ट रनर अप और आंध्र प्रदेश की श्रेया राव सेकेंड रनर अप रहीं। एक बेहद की शानदार समारोह के दौरान इस कॉन्टेस्ट का फिनाले हुआ जहां जज पैनल में एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा, एक्टर बॉबी देओल, कुनाल कपूर, क्रिकेटर इरफान पठान और के.एल राहुल भी शामिल थे।फिनाले में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित, करीना कपूर खान और जैकलीन फर्नांडिस ने डांस परफॉर्मेंस से समां बांध दिया। जबकि इस प्रोग्राम को होस्ट कर रही थी मशहूर फिल्ममेकर करण जौहर और एक्टर आयुष्मान खुराना की जोड़ी, जिन्होंने अपनी शानदार एंकरिंग से सभी का मनोरंजन किया।

बॉलीवुड की पहली लेडी सुपरस्टार श्रीदेवी और बोनी कपूर की लाडली बेटी जाह्नवी कपूर बॉलीवुड में डेब्यू की तैयारी में जुटी हुई है। निर्देशक शशांक खैतान की फिल्म ‘धड़क’ से जाह्नवी फिल्मी दुनिया में एंट्री मारेंगी। एक हफ्ते पहले ही इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ है और इसमें जाह्नवी जितनी बार और जितनी देर के लिए भी नजर आई है, उन्हें और भी ज्यादा देखने का मन करता है।फिल्म के हीरो ईशान खट्टर के साथ दिख रही उनकी केमेस्ट्री इस बात का सबूत है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खूब धमाल मचाएगी। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन तले बनी यह फिल्म मराठी फिल्म सैराट का हिंदी रीमेक है। धड़क के ट्रेलर को देखने के बाद फैंस ने भी इसे अच्छा रिस्पॉन्स दिया है।बता दें कि जाह्नवी तो अब अपनी पहली फिल्म के प्रमोशन में भी जुट चुकी है। दरअसल कुछ देर पहले ही जाह्नवी की कुछ तस्वीरें सामने आई है, जिसमें वह पीले रंग के फ्रिल वाली ड्रेस में नजर आ रही है। जाह्नवी ने इस ड्रेस के ऊपर मैचिंग की हुई एक जैकेट पहनी हुई है।इसी के साथ जाह्नवी ने काफी लाइट मेकअप किया है। इस खूबसूरत ड्रेस के साथ उनके इयरिंग्स कमाल के लग रहे है। जाह्नवी की इन तस्वीरों को सेलीब्रिटी स्टाइलिश तान्या घावरी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया है।
कल रिलीज होगा फिल्म का गाना:-बता दें कि फिल्म ‘धड़क’ का पहला गाना कल रिलीज किया जाएगा। जाह्नवी और ईशान ने इस बात की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी है। कल ‘धड़क’ के टाइटल ट्रैक को रिलीज किया जाएगा। इस गाने को अजय-अतुल ने कम्पोज किया है।

टीवी के चर्चित और क्यूट कपल्स में से एक रुबीना दिलाइक और अभिनव शुक्ला हमेशा-हमेशा के लिए एक होने वाले है। कल रुबीना के होम टाउन शिमला में ही शादी की सारी रस्में पूरी होंगी। बता दें कि आज से ही रुबीना और अभिनव की शादी की बाकी रस्मों की शुरुआत हो चुकी है। कुछ देर पहले ही रुबीना की मेंहदी सेरेमनी की पहली तस्वीर सामने आई है।मेंहदी सेरेमनी से सामने आई इस तस्वीर में रुबीना अपनी मां के साथ नजर आ रही है। इस तस्वीर में रुबीना फ्लोरल ड्रेस में नजर आ रही है। रुबीना के हाथों और पैर में मेंहदी की खूबसूरत डिजाइन नजर आ रही है।
शादी में पहुंचेंगे ये सितारे:-स्पॉटबॉयई के मुताबिक अभिनव कल दिन में 11:30 बजे रुबीना के घर बारात लेकर आएंगे। रुबीना और अभिनव शिमला के वूडविले पैलेस में एक दूसरे के साथ सात जन्मों तक रहने की कस्में खाएंगे। टीवी इंडस्ट्री के जाने माने कलाकार और रुबीना के खास दोस्त शरद केलकर, कीर्ति केलकर, सृष्टि रोडे, हुसैन और टीना कुवाजेरवाला इस शादी में शरीक होने के लिए शिमला पहुंचे भी चुके है।
मुंबई में होगा वेडिंग रिसेप्शन:-आज ही रुबीना और अभिनव की हल्दी और रिंग सेरेमनी की सारी रस्में पूरी की जाएगी। हाल ही में रुबीना और अभिनव के वेडिंग रिसेप्शन कार्ड की तस्वीर भी सामने आई थी और आगामी 28 जून, 2018 को रिसेप्शन पार्टी का आयोजन किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इस रिसेप्शन पार्टी में टीवी इंडस्ट्री के जाने माने कलाकार शिरकत करेंगे।
ऐसे हुई थी रुबीना और अभिनव की लव स्टोरी:-रुबीना और अभिनव की पहली मुलाकात ही काफी रोमांटिक थी। दरअसल दोनों अपने एक कॉमन फ्रेंड के जरिए मिले थे। एक दोस्त के घर पर हुए गणपति उत्सव के दौरान ही दोनों की पहली मुलाकात हुई थी। रुबीना और अभिनव काफी लम्बे समय से एक दूसरे के साथ रिश्ते में है और दिलचस्प बात यह है कि इस रिश्ते की पहल रुबीना ने की थी।

 

 

बीती रात ही मुंबई स्थित फिल्मसिटी में गोल्ड अवार्ड्स 2018 का आयोजन किया गया है। इस दौरान टीवी इंडस्ट्री के तमाम कलाकार यहां पर नजर आए। मौनी रॉय, करिश्मा तन्ना हिना खान, तेजस्वी प्रकाश और दृष्टि धामी ने इस फंक्शन के रेड कारपेट पर खूब जलवें बिखेंरे।वहीं दिव्यांका त्रिपाठी, करण टैकर और अनीता हसनंदानी समेत कई लोगों ने इस अवॉर्ड फंक्शन में अपनी मौजूदगी से चार चांद लगाए। बता दें कि 11वें गोल्ड अवॉर्ड्स को ‘इश्कबाज’ के अभिनेता नकुल मेहता और अली असगर ने होस्ट किया। इस अवॉर्ड फंक्शन में हेली शाह, करण टैकर, दृष्टि धामी, दिव्यांका त्रिपाठी और करण पटेल ने धमाकेदार परफॉर्मेंस भी दी।हम अपनी पिछली एक रिपोर्ट में आपको इस अवॉर्ड फंक्शन से जुड़ी हुई तस्वीरें और वीडियो दिखा चुके है।
बेस्ट शो
ये रिश्ता क्या कहलाता है /इश्क में मरजावा
स्टाइलिश दिवा
हिना खान
मोस्ट फिट एक्ट्रेस
सुरभि ज्योति / करिश्मा तन्ना
मोस्ट फिट एक्टर
विवेक दहिया /शोएब इब्राहिम
राइजिंग फिल्म स्टार अवॉर्ड
मौनी रॉय
बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर /एक्ट्रेस
सचिन त्यागी- ये रिश्ता क्या कहलाता है
पारुल चौहान- ये रिश्ता क्या कहलाता है
बेस्ट एक्टर /एक्ट्रेस इन कॉमिक रोल
मनिंदर सिंह- क्या हाल मिस्टर पाचांल
क्रिस्टल डिसूजा- बेलन वाली बहू
बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स)
विवियन डिसेना- शक्ति अस्तित्व के एहसास की
बेस्ट एक्ट्रेस (क्रिटिक्स)
जेनिफर विंगेट (बेपनाह)
बेस्ट एक्टर (पापलुर)
नकुल मेहता- इश्कबाज
बेस्ट जोड़ी
शिवांगी जोशी-मोहसीन खान (ये रिश्ता क्या कहलाता है)
बेस्ट रिएलिटी शो
राइजिंग स्टार 2
बेस्ट शो अवॉर्ड (क्रिटिक्स)
इश्क सुभान अल्लाह
मोस्ट स्टेलर परफॉर्मेंस ऑफ द इयर
सुरभि चंदना
वैसे देखा जाए तो स्टार प्लस के धारावाहिक ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के लिए ये शाम कई खुशियां लेकर आई। इस सीरियल को सबसे ज्यादा अवॉर्ड मिले।

टीवी के दुनिया के धमाकेदार सीरियल्स में से एक ‘कसौटी जिंदगी की’ को लोगों ने खूब पसंद किया था। इस सीरियल का हर एक किरदार काफी जबरदस्त था। इन्हीं में से एक किरदार था कोमोलिका बासु का…मस्ती भरे अंदाज में अपने बालों की लटों को सुलझाती खुराफाती कोमोलिका को कौन भूल सकता है? इस किरदार में अपनी लाजबाव अदाकारी से टीवी की दुनिया की जानी मानी अभिनेत्री उवर्शी ढोलकिया ने इस किरदार में जान भर दी थी।इस सीरियल के बाद उर्वशी कई सीरियल में नजर आई और इसी बीच उन्होंने सलमान खान के शो ‘बिग बॉस’ में हिस्सा लिया और इसी के साथ वह ‘बिग बॉस’ के छठवें सीजन की विजेता भी बनी। उर्वशी हाल ही में कलर्स चैनल के मशहूर सीरियल चन्द्रकांता में दिखी थी। फिलहाल तो उर्वशी अपने परिवार को पूरा समय देने में लगी हुई है। बता दें कि आज उर्वशी के दोनों जुड़वा बेटों क्षितिज और सागर का जन्मदिन है और उर्वशी ने इस मौके पर अपने दोनों बेटों के साथ ढ़ेर सारी तस्वीरें क्लिक करवाई है और साथ ही उन्होंने अपने घर पर एक शानदार पार्टी का आयोजन भी किया।उर्वशी द्वारा साझा की गई ये तस्वीरें बेहद ही खूबसूरत है और बेटों के साथ दिख रही उर्वशी की जबरदस्त केमेस्ट्री इस बात का सबूत है कि उनके बेटे ही उनकी दुनिया है। बता दें कि आज उर्वशी के जुड़वा बेटे 23 साल के हो चुके है।क्षितिज और सागर के साथ अपनी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा करके उर्वशी ने दोनों को जन्मदिन की बधाई दी है। उर्वशी द्वारा साझा की गई तस्वीरों में वह सफेद रंग की टीशर्ट और डेनिम में नजर आ रही है। वहीं उनके दोनों बेटों ने 23 नम्बर वाले कस्टमाइज टीशर्ट पहनी हुई है। उर्वशी द्वारा साझा की गई तस्वीरों पर आप भी डालिए नजर…बता दें कि उर्वशी सिंगल मदर है और अकेले ही उन्होंने अपने बेटों की परवरिश की है। जिस तरह से उन्होंने खुद को अपने परिवार को सहेजा है, वह काबिलेतारीफ है।

पिछला एक साल कपिल शर्मा के लिए काफी बुरा गुजरा है। ऐसी कई घटनाएं पिछले एक साल के दौरान हुई हैं, जिन्होंने कपिल शर्मा की छवि को तो धूमिल किया ही, उनके करियर पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है। इस दौरान उन्होंने अपने करीबी दोस्तों को तो खोया ही उनके शोज भी एक के बाद एक बंद हो गए। खुद कपिल शर्मा को कहना पड़ा कि वह शराबी हो गए हैं। यह सब देखकर ऐसे लगने लगा था कि कपिल का डाउनफॉल शुरू हो गया है। लोगों को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि यह वही कपिल शर्मा हैं, जो लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरने के लिए फेमस थे। हालांकि, कपिल एक बार फिर से लौट आए हैं।आप इन तस्वीरों पर नजर डालिए और आप समझ जाएंगे कि हम क्या कहने जा रहे हैं। कपिल शर्मा को बुधवार सुबह मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया है। इस दौरान कपिल मुस्कुराते हुए नजर आए। अब तो हमें ठीक से याद भी नहीं है कि हमने कपिल को आखिरी दफे कब हंसते हुए देखा था। हालांकि, इन तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि एल्कोहल के चलते कपिल का वजन काफी बढ़ गया है। अब जबकि कपिल मुंबई लौट आए हैं तो वह अपनी नई शुरुआत के लिए भी तैयार नजर आ रहे हैं। कपिल भी इस उम्मीद में तो होंगे ही कि वह एक बार फिर अपने फैंस को पहले की ही तरह गुदगुदा सकें। यहां तक कि पिछले दिनों ही खबर आई थी कि वह जल्द पर्दे पर लौट रहे हैं और उन्हें सलमान खान के साथ एक फिल्म भी मिली है। इसके अलावा खबर तो यह भी है कि वह जल्द छोटे पर्दे पर लौट सकते हैं।इस दौरान कपिल ट्विटर पर भी काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। मंगलवार को ही कपिल ने 2015 में विश्व योग दिवस की कुछ तस्वीरें साझा की थी। इसके अलावा कपिल अपने फैंस को भी ट्विटर पर रिप्लाई करने से नहीं चूक रहे हैं। एक फैन ने जब उनसे पूछा- ‘कपिल पापा पूछ रहे हैं कि डीपी कब चेंज कर रहो..’ इसके जवाब में कपिल ने मजाक करते हुए लिखा- ‘जब तक वापस सेम शेप में नहीं आता’। टेलीविजन के शानदार कॉ​मेडियंस में से एक कपिल के बुरे दौर से उनके फैंस और उनके दोस्त भी मायूस थे। कपिल ने बीते दिनों ‘फैमिली टाइम विद कपिल’ के जरिए टीवी पर वापसी भी की थी, लेकिन इस शो को दर्शकों का कोई ठीक रिस्पॉन्स नहीं मिल सका।

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