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नई दिल्ली। वर्ष 2004 में अटल बिहारी को यकीन था कि एक बार फिर वह एनडीए की केंद्र में सरकार बनाने में सफल होंगे, लेकिन परिणाम इतर आने पर उन्हें 7 रेसकोर्स छोड़ना पड़ा था। उस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने 2004 में शहरी विकास मंत्रालय से आग्रह किया था कि उन्हें आवंटित होने वाले अपने बंगले का पता 8, कृष्ण मेनन मार्ग के स्थान पर 7ए रखना चाहते थे, लेकिन जब ये बताया गया कि लुटियंस दिल्ली जोन के बंगलों के नंबर सड़क के एक तरफ विषम हैं और दूसरी तरफ सम तो वाजपेयी ने 8 कृष्ण मेनन मार्ग वाले बंगले के लिए 6-ए का पता स्वीकार कर लिया था।
अटल स्मृतियों में रहेगा बंगला नंबर 6ए कृष्ण मेनन मार्ग:-बंगला नंबर 6ए कृष्ण मेनन मार्ग। गत 14 वर्षों से एक ही व्यक्ति में समाहित राजनेता, जननायक, साहित्यकार, कवि, पत्रकार के जीवन को जी रहे इस बंगले में अब अटल स्मृतियां हमेशा जीवंत रहेंगी। अब भले ही यहां उनकी धड़कन की आवाज नहीं सुनाई दे, लेकिन उनके गीतों की गूंज आज पूरे जग में सुनाई दे रही है और आगे भी सुनाई देती रहेगी। 11 जून 2018 को जब उनकी सांसें लड़खड़ाने लगीं और उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया तो ऐसा आभास नहीं था कि अब वह तिरंगे में लिपट कर बंगले में वापस लौटेंगे।मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित शिन्दे की छावनी में 25 दिसम्बर 1924 को ब्रह्ममुहूर्त में जन्में अटल बिहारी वाजपेयी का नाता उत्तर प्रदेश के आगरा, लखनऊ व कानपुर से रहा, लेकिन उनका सफर 6ए कृष्ण मेनन पर आकर समाप्त हुआ। अब बस यहां उनकी अटल स्मृतियां ही शेष रह गई हैं।वर्ष 2004 में उम्मीदों के विपरीत लोकसभा चुनाव के परिणाम आने पर 7 रेसकोर्स छोड़कर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 6ए कृष्ण मेनन मार्ग में रहने आ गए थे। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद अटल बिहारी सक्रिय राजनीति से दूर रहे, लेकिन भाजपा का मार्गदर्शन करते रहे।वर्ष 2009 में अचानक दौरा पड़ने के कारण वह बोलने में अक्षम हो गए थे। इसके बाद से 6ए कृष्ण मेनन मार्ग में अटल बिहारी वाजपेयी के ठहाकों की गूंज बंद हो गई थी, लेकिन उनकी मौजूदगी का अहसास बरकरार था। संघर्ष के दौर के साथी वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी समेत कुछ उनके करीबियों को ही उनसे मिलने की इजाजत थी।वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा भारत रत्न सम्मान की घोषणा होने पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने वर्ष 2014 में 6ए कृष्ण मेनन मार्ग पर जाकर अटल बिहारी को भारत रत्न से सम्मानित किया था और तभी आखिरी बार उनकी तस्वीर देशवासियों के सामने आई थी। अटल बिहारी ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर से प्राथमिक व स्नातक की पढ़ाई पूरी की और उत्तर प्रदेश के कानपुर से डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में प्रथम श्रेणी में परास्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। कानपुर में ही एलएलबी की पढ़ाई शुरू की, लेकिन बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गए।
कृष्ण मेनन मार्ग का नाम अटल स्मृति रखने की मांग;-भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कृष्ण मेनन मार्ग को अटल स्मृति बनाया जाए। यह मांग विभिन्न संगठनों ने उठाई है। संगठनों का कहना है कि अटल जी ने अपने लिए कुछ नहीं किया, सब कुछ देश के लिए किया है। उनसे हम सब को प्रेरणा मिलती है। उनके लिए श्रद्धांजलि होगी कि हम उनकी स्मृतियों को एक जगह देख सकें।यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जयभगवान गोयल ने कहा है कि प्रधानमंत्री रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने जो कार्य किए हैं, वे सराहनीय हैं। उन्होंने अमेरिका की परवाह नहीं करते हुए परमाणु परीक्षण कराया। विदेश मंत्री रहते हुए जिनेवा में पाकिस्तान को उसकी भाषा में समझाया। उसकी कलई खोली और पाकिस्तान की सच्चाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बताया।उन्होंने कहा है कि वह अटल जी के निवास स्थान को अटल स्मृति के रूप में स्थापित किए जाने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। इसी तरह मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अफजाल अहमद ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का देश और समाज को दिया योगदान अभूतपूर्व है। उन्होंने देश के लिए बहुत कुछ किया है जिसके चलते वह लंबे समय तक याद किए जाएंगे। इसलिए अटल जी के बंगले को अटल स्मृति बनाया जाना अति आवश्यक है।सामाजिक साहित्यिक संस्था उद्भव ने कहा कि अटल जी ने सफल प्रधानमंत्री ही नहीं, एक कवि के तौर पर भी करोड़ों दिलों को छुआ है। महासचिव विवेक गौतम ने कहा है कि हम सब के मन में अटल जी के प्रति अपार स्नेह है। हम चाहते हैं कि उनके निवास स्थान को अटल स्मृति बना दिया जाए। इस बारे में शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखेंगे।नेशनल चिल्ड्रन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष वी के जैन ने कहा है कि अटल जी ने कई किरदार के रूप में हम सब पर अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि जिस तरह राजघाट पर उनका स्मारक बनाए जाने की बात सामने आई है उसी तरह उनकी स्मृति में उनके निवास स्थान को उनका स्मृति स्थल घोषित किया जाए।

नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एयर इंडिया के चीफ प्रदीप सिंह खारोला को अगले सप्ताह बुलाया है। मंत्रालय ने उन्हें एयर होस्टेस यौन प्रताड़ना मामले की जांच पूरी करने में देरी का कारण बताने के लिए तलब किया है।केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने एयर इंडिया की आंतरिक शिकायत समिति के प्रमुख को जून में ही जांच पूरी करने का निर्देश दिया था। एयर इंडिया की एयर होस्टेस ने राष्ट्रीय विमानन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ यौन प्रताड़ना की शिकायत की थी। जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है और मंत्रालय ने खारोला को 23 अगस्त को जांच में देरी का कारण बताने के लिए बुलाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, मेनका गांधी ने यह मामला नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभू के सामने भी उठाया है।
क्या है एयर होस्टेस की शिकायत:-एयर होस्टेस ने अपनी शिकायत में कहा है कि वरिष्ठ अधिकारी द्वारा पिछले छह वर्षो से प्रताडि़त किया जा रहा था। एयर होस्टेस ने अधिकारी को राक्षस करार देते हुए उनकी तुलना हार्वे वेन्स्टेन से की है। हॉलीवुड के फिल्म निर्माता हार्वे पर भी एक प्रमुख अभिनेत्री ने यौन दु‌र्व्यवहार का आरोप लगाया था। एयर होस्टेस ने 25 मई को लिखे अपने पत्र में अधिकारी द्वारा किए जा रहे दु‌र्व्यवहार का जिक्र किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि पिछले वर्ष सितंबर में ही एयर इंडिया से शिकायत की थी और तत्कालीन सीएमडी को लिखित में दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रभू के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र में एयर होस्टेस ने निष्पक्ष जांच समिति बनाने की मांग की थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के सीएमडी से तत्काल कदम उठाने को कहा था।

जयपुर। गुलाबी नगरी के नाम से देशभर में प्रसिद्ध जयपुर शहर को हमेशा से ही गंगा-जमुनी संस्कृति का शहर माना जाता है। रियासतकाल से लेकर अब तक यहां हिंदू और मुस्लिम समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द हमेशा देखने को मिलता रहा है। कई ऐसे मुस्लिम परिवार है जो पीढ़ियों से जयपुर के अराध्यदेव गोविंद देवजी मंदिर को सजाने-संवारने का काम करते आ रहे है।इसी तरह जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पिछले दो दशक से पांच मुस्लिम कारीगर हर साल चांदी की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने और साफ-सफाई का काम करते आ रहे हैं। ये पांच मुस्लिम कारीगर गणेश चतुर्थी से करीब दो माह पहले से ही चांदी की वर्क की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने अथवा साफ-सफाई के काम में जुट जाते हैं। इस साल भी 13 सितम्बर को गणेश चतुर्थी है।इस कारण मंदिर प्रशासन की ओर से चांदी की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने के लिए जुलाई माह से काम शुरू करवाया गया है। यह काम शहर के रामगंज बाजार में रहने वाले पांच मुस्लिम कारीगर कर रहे हैं। इन्ही कारीगरों ने एक दशक पूर्व सोने की परत चढ़ाई थी। इसके बाद हर साल ये साफ-सफाई करते आ रहे हैं, इस काम में भी एक से डेढ़ माह का समय लग जाता है।
दीवार पर चांदी का काम हिंदू और सोने का काम मुस्लिम कारीगर करते हैं:-गणेश मंदिर में दीवारों पर चांदी के परत चढ़ाने का काम महेश नामक हिंदू कारीगर अपनी टीम के साथ करते हैं,वहीं सोने की परत चढ़ाने अथवा साफ-सफाई का काम पांच मुस्लिम कारीगर इरफान,शहजाद,समीर और मोहम्मद तोहा करते हैं। शहजाद और इरफान का कहना है कि जब गणेश जी के मंदिर में लोग "जय गणेश "अथवा "गजानन्द महाराज की जय 'बोलते हैं तो कई बार हमारे मुंह से भी जय गणेश और गजानन्द महाराज की जय निकल जाता है । दोनों का कहना है कि काम पर आते ही सबसे पहले मंदिर का घंटा बजाते है और फिर काम शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि मूर्ति गृह के अंदर तो हिंदू कारीगर ही काम करते हैं,लेकिन बाहरी हिस्से का पूरा काम हम करते हैं ।
गणेश मंदिर के महंत ने कहा,सालों से मुस्लिम परिवार कर रहे काम:-गणेश मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि मंदिर प्रशासन की ओर से डेढ़ किलो सोना दिया गया है । ये लोग उसे चाइनीज प्लेटों के जरिए परत में ढालते हैं और फिर केमिकल की मदद से दीवारों पर लगाते हैं । उन्होंने बताया कि कई सालों से मुस्लिम परिवार मंदिर की साज-सज्जा से जुड़े विभिन्न कार्यों में लगे हैं । यहां कभी भेदभाव नहीं किया जाता,भगवान सबके लिए है।

तिरुवनंतपुरम। केरल में बाढ़ से हालात बदतर होते जा रहे हैं। बाढ़ से आई इस तबाही में अब तक 324 लोगों की मौत हो गई है। इस बीच बेहद चुनौतीपूर्ण स्थितियों में शुक्रवार को कैप्टन पी राजकुमार (शौर्य चक्र) ने सी किंग 42B हेलीकॉप्टर की मदद से केरल में बाढ़ में फंसे 26 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। कैप्टन ने शुक्रवार को 26 लोगों को एयरलिफ्ट कर नया जीवन दिया। इन लोगों को बचाना इतना आसान नहीं था, ये लोग जिस जगह फंसे हुए थे, वहां किसी इंसान का जाना बेहद मुश्किल था। लेकिन कैप्टन कुमार ने हार नहीं मानी और घने पेड़ों के बीच सी किंग 42B चॉपर घर की छत पर ले जाकर इन लोगों को बचाया।कैप्टन कुमार ने इस ऑपरेशन में 32 लोगों की जान बचाई। अपनी बहादुरी और विषम परिस्थितियों में भी लोगों की जान बचाने के दृढ़ निश्चय को पूरा करते हुए उन्होंने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सेना किसी भी हद तक जाकर राज्य में लोगों की जान बचा रही है। भारतीय नौसेना ने अपने बयान में कहा कि बेहद ही चुनौतीपूर्ण स्थितियों में कैप्टन पी राजकुमार (शौर्य चक्र) ने सी किंग 42B हेलीकॉप्टर की मदद से केरल में बाढ़ में फंसे 26 लोगों को बाहर निकाला। भारतीय सेना नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), इंडियन कोस्ट गार्ड और रैपिड ऐक्शन फोर्स के साथ मिलकर राज्य को आपदा से राहत दिलाने में जुटी है।
केरल को 500 करोड़ रुपये की अंतरिम राहत की घोषणा:-केरल की भयंकर बारिश और बाढ़ ने अबतक 324 लोगों की जान ले ली है। अकेले गुरुवार को 106 लोगों की मौत हो गई। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। साथ ही, मुख्यमंत्री विजयन के साथ हालातों पर बैठक में चर्चा भी की। उधर, कांग्रेस पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि केरल बाढ़ को बिना देरी किए राष्‍ट्रीय आपदा घोषित किया जाना चाहिए। वहीं, केंद्र ने केरल के लिए तुरंत राहत के तौर पर 500 करोड़ रुपये जारी किए हैं। हालांकि केरल सरकार ने केंद्र से 2000 करोड़ रुपये मांगे थे।
NDRF का बचाव अभियान तेज:-इस बीच राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के साथ ही सैनिकों ने फंसे लोगों को बचाने के लिए शुक्रवार सुबह से बचाव अभियान तेज कर दिया। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण सड़क जाम हो रहे हैं। कई गांव टापू में तब्दील हो गए हैं।
बचाव व राहत के लिए सेना का हेलीकॉप्टर:-महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गो को सेना के हेलीकॉप्टरों से निकाला जा रहा है। अलुवा, कालाडी, पेरुंबवूर, मुवाट्टुपुझा एवं चालाकुडी में फंसे लोगों को निकालने में स्थानीय मछुआरे भी अपनी-अपनी नौकाओं के साथ शामिल हुए।
राज्यों से मिली मदद;-बाढ़ प्रभावित केरल के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा घोषित 5 करोड़ रुपये की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से और अन्य 5 करोड़ रुपये भोजन और जरूरी सामानों के रूप में भेजा जाएगा। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से बात कर केरल के हालत की जानकारी ली। केजरीवाल ने केरल को 10 करोड़ देने को कहा है। इसके साथ ही लोगों से अपील की है कि अधिक से अधिक राशि सहयोग करें। वहीं बाढ़ से प्रभावित केरल को सहायता के रूप में तेलंगाना 25 करोड़ रुपए देगा।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पिता तुल्य पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत बिगड़ने से लेकर उनके देहांत और अंतिम यात्रा तक कई बार एक भावुक पुत्र की तरह नजर आए। अंतिम यात्र के समय तो तमाम खतरों को दरकिनार करते हुए प्रोटोकॉल तोड़कर वह करीब पांच किलोमीटर तक पैदल चले। उनके चेहरे पर भी अटल के छोड़कर चले जाने की पीड़ा साफ साफ दिख रही थी।डीडीयू मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय से भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा दोपहर करीब दो बजे शुरू हुई। सेना के जिस वाहन पर अटल जी का पार्थिव शरीर रखा गया था, उस वाहन के पीछे-पीछे पीएम मोदी चल पड़े। उनके साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से लेकर तमाम नेता और कार्यकर्ता भी चल पड़े। वह भी पूरी यात्रा में उमस भरी गर्मी में लगभग पांच किलोमीटर पैदल चलकर राष्ट्रीय स्मृति स्थल तक पहुंचे। उमस भरी गर्मी में कई बार उन्हें रूमाल से पसीना पोछते देखा गया। रास्ते में भीड़ प्रधानमंत्री मोदी को उनके काफिले में शामिल कारों में ढूंढ़ रही थी।लोग एक-दूसरे से पूछते भी दिखे कि मोदी जी कहां हैं? लोगों को यह कहते भी सुना गया कि प्रधानमंत्री मोदी औरों से कुछ अलग हैं। प्रधानमंत्री मोदी का भीड़ में पांच किलोमीटर तक पैदल चलकर जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भारी मुश्किल भरा था। अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ उस वाहन के पास पहुंचने का बार-बार प्रयास करती दिखी, जिस पर अटल जी का पार्थिव शरीर रखा था। इससे पहले 15 और 16 अगस्त को बिना पूर्व सूचना के वह पूर्व प्रधानमंत्री का हालचाल लेने के लिए दो बार एम्स पहुंचे थे।बता दें कि देशभर में संवेदनाओं के ज्वार के बीच शुक्रवार शाम को भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को राजकीय सम्मान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अंतिम विदाई दी गई। गुरुवार शाम को उनके निधन की सूचना के बाद से ही पूरा देश शोकाकुल है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाले श्याम राव सिर्के के इनोवेशन ने उन्हें अचानक चर्चा में ला दिया था। दस अगस्त 2017 को बायोफ्यूल डे के मौक पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान नाले की गैस से चाय बनाने वाले एक शख्स का किस्सा सुनाया था। इस उदाहरण के बाद कई लोगों ने पीएम मोदी का मजाक उड़ाया। यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कर्नाटक में एक रैली के दौरान मोदी के किस्से पर तंज कसा।दरअसल श्याम राव ने ऐसा यंत्र तैयार किया था, जिसमें नाली में बनने वाली मीथेन गैस का इस्तेमाल बायोफ्यूल के रूप में किया जाता था और इससे वे अपना चाय का व्यवसाय चलाते थे। साल 2016 में श्याम राव ने यह उपकरण तैयार किया था, लेकिन अब उनका यह शानदार इनोवेशन कबाड़ में पड़ा है।
कबाड़ में बदला आविष्कार:-दरअसल उनके इनोवेशन की चर्चा होने के बाद उस पर राजनीति शुरू हो गई। श्याम राव का मानना है कि राजनीति के चलते उनके आविष्कार की यह हालत हो गई कि अब यदि उनसे इस बारे में कोई बात भी करता है तो वे घबरा जाते हैं।
पीएम की तारीफ के बाद मिली आर्थिक सहायता:-पीएम मोदी द्वारा उनके आविष्कार की सराहना किए जाने के बाद स्थानीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने भी उनकी मदद की। उपकरण को और बेहतर बनाने के लिए उन्हें 40 हजार रुपयों की आर्थिक सहायता भी दी गई। इसके बाद राजनीति शुरू हो गई।
कमजोर पड़ा मनोबल:-पीएम मोदी के विरोधियों ने सीधे श्याम राव पर ही हमले शुरू कर दिए। नगर निगम के कर्मचारियों ने उपकरण को तोड़कर कचरे में डाल दिया। श्याम राव इस प्रोजेक्ट का ग्लोबल पेटेंट भी करवा चुके हैं, लेकिन उपकरण को दोबारा इन्स्टॉल करने से घबरा रहे हैं। इस इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के पीछे प्रधानमंत्री मोदी की मंशा यही थी कि इस तरह देश में बायोफ्यूल के उपयोग को बढ़ावा मिले, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। अब श्याम राव का मनोबल भी कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
ऐसे एकत्र की गैस:-श्याम राव ने बताया कि साल 2016 में मैंने नालियों से पानी इकट्ठा किया। पानी के बुलबुले इकट्ठा करने के लिए मिनी 'कंडक्टर' बनाया। गैस होल्डर के लिए मैंने एक ड्रम का इस्तेमाल किया। मैंने जब इसका परीक्षण किया तो यह काम करने लगा। इसे मैंने गैस स्टोव से जोड़ा और फिर चाय बनाने लगा। फिर मैंने इसे अपने घर पर भी लगाया, जहां इसकी मदद से खाना बनाया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अमित दुबे ने बताया कि श्याम राव सिर्के का बनाया इक्यूपमेंट काफी कारगर था। इसे वृहद स्तर तक पहुंचाने के लिए हमारे संस्थान ने उन्हें 40 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी थी। इसके बाद उसे तैयार कर उपयोग किया जाने लगा। कुछ समय बाद जब उन्होंने बताया कि निगम के सफाईकर्मियों ने उनके इक्यूपमेंट को फेंक दिया तो हमने एफआरआई करवाने के लिए भी कहा था।

नई दिल्ली। इस बार 11वां विश्व हिंदी सम्मलेन 18 से 20 अगस्त, 2018 को मॉरिशस में आयोजित किया जा रहा है। मॉरिशस में विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर मॉरिशस के पीएम प्रविन्द कुमार और भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद रहीं।विश्व हिंदी सम्मेलन की मुख्य विषय वस्तु 'वैश्विक हिंदी और भारतीय संस्कृति' है। मुख्य विषय के अतिरिक्त 12 अन्य उपविषयों पर आधारित समानांतर सत्र होंगे। इस अवसर पर पुस्तक प्रदर्शनियां और साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण किया जाएगा। इस बार देश विदेश के विभिन्न भागों से, जहां हिंदी पढाई जाती है, लगभग 1500 पंजीकृत प्रतिभागियों और हिंदी सेवियों के सम्मलेन में भाग लेने की संभावना जताई गई है।इस कार्यक्रम को लेकर मॉरीशस की शिक्षा मंत्री ने विश्व हिंदी सम्मेलन के 11वें संस्करण का लोगो और वेबसाइट लॉन्च किया था। इस मौके पर मॉरीशस की शिक्षा मंत्री लीला देवी दोखुन ने कहा था कि आज हिंदी की हालत पानी में जूझते जहाज की तरह हो गई है। मुझे 'लोगो' के लिए प्रतिभागियों द्वारा भेजी इंट्री देखने का मौका मिला। मैंने महसूस किया कि सभी डिजाइन एक-दूसरे से मिलते-जुलते ही थे। वेबसाइट पर जानकारियों को अपडेट करने के लिए एक सब-कमेटी का भी गठन किया गया है।सम्मेलन के विषय में जानकारी देने के लिए मॉरीशस से एक प्रतिनिधि दल भारत आया था। उनसे मुलाकात के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि भाषा और संस्कृति साथ-साथ चलते हैं। एक के खत्म होने पर दूसरा अपने आप ही विलीन हो जाता है। ऐसे में भारत के बाहर भी हिंदी को जीवित रखने में इस सम्मेलन की बड़ी भूमिका है।10 अप्रैल, 2018 को जवाहर लाल नेहरू भवन, विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली में माननीय श्रीमती सुषमा स्वराज, विदेश मंत्री, भारत सरकार और माननीय श्रीमती लीला देवी दुखन लछुमन, शिक्षा एवं मानव संसाधन, तृतीयक शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री, मॉरिशस सरकार द्वारा संयुक्त रूप से विश्व हिंदी सम्मलेन -2018 वेबसाइट का लोकार्पण किया था |
जानिए विश्‍व हिंदी दिवस के बारे में
1- पहला विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित किया गया था। इसलिए इस दिन को विश्‍व हिन्‍दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। 2006 के बाद से हर साल 10 जनवरी को विश्वभर में विश्व हिन्‍दी दिवस मनाया जाता है।
2- पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्‍टर मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को हर साल विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाए जाने की घोषणा की थी।
3- विदेशों में भारतीय दूतावास विश्व हिंदी दिवस के मौके पर विशेष कार्यक्रमाें का आयोजन करते हैं। सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिंदी में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
4- नॉर्वे में पहला विश्व हिंदी दिवस भारतीय दूतावास ने मनाया था। इसके बाद दूसरा और तीसरा विश्व हिंदी दिवस भारतीय नॉर्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम के तत्वाधान में लेखक सुरेशचन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में बहुत धूमधाम से मनाया गया था।
5- विश्व हिंदी दिवस के अलावा हर साल 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' मनाया जाता है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था तभी से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।
6- अभी विश्‍व के सैंकड़ों व‍िश्‍वविद्यालयों में हिंदी पाठ्यक्रम शामिल है। विश्‍व में करोड़ों लोग हिंदी बोलते हैं। यही नहीं हिंदी दुनिया भर में सबसे ज्‍यादा बोली जाने वाली पांच भाषाओं में से एक है।

 

 

 

चंदौली। एग्रीकल्चर प्रोटेक्शन सिस्टम (एपीएस) डिवाइस खेतों की निगहबानी करेगी। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि अब किसान के मोबाइल में उसका पूरा खेत होगा। खेत को किस उर्वरक की जरूरत है, फसल पर कीट पतंगों का हमला, आवारा पशुओं के खेत में आने पर एलर्ट करना, मिट्टी की आद्रता, पीएच वेल्यू और तापमान का पता बताने के साथ सिंचाई पूरी होने तक की जानकारी यह डिवाइस मोबाइल के जरिए किसान तक पहुंचाएगी।यह डिवाइस चंदौली के बबुरी गांव निवासी मेरठ के आइआइएमटी विवि से इलेक्ट्रॉनिक एवं कम्यूनिकेशन में रिसर्च कर रहे संदीप वर्मा पुत्र संतोष कुमार ने प्रो-वीसी डॉ. दीपा शर्मा के निर्देशन और वीसी प्रो. योगेश मोहन गुप्ता के संरक्षण में तैयार की है। दो साल में कई बार परीक्षण कर इसमें सुधार करने के बाद जुलाई 18 में यह डिवाइस तैयार हुई। सूक्ष्म एवं लघु उद्योग भारत सरकार ने इसके लिए पांच लाख की फंडिंग भी की।
क्या है एपीएस डिवाइस:-डिवाइस माइक्रो प्रोससर चिप बेस्ड है। इसमें ह्यूमेंडिटी सेंसर, रेन सेंसर, फायर सेंसर, टेंप्रेचर सेंसर, इरीगेशन सेंसर और मोशन सेंसर लगा है। यह सौर ऊर्जा और बिजली से संचालित है। ये सभी सेंसर खेत की हर हलचल पर नजर रखेंगे। एक एकड़ में यह काम करेगी। इससे ज्यादा क्षेत्रफल पर अतिरिक्त डिवाइस खेत में लगानी होगी।
इस तरह काम करेगी यह डिवाइस:-सेंसर लगी डिवाइस खेत में होगी। जबकि कंट्रोलर नलकूप में। डिवाइस किसान के मोबाइल से कनेक्ट रहेगी। खेत में ट्यूबवेल चल रहा है और बारिश हो जाती है तो रेन सेंसर काम करते हुए ट्यूबवेल को बंद कर देगा। यदि बारिश नहीं हुई और मिट्टी सूखने लगी तो सेंसर मोटर को चालू कर देगा। इसमें वाटर लेबल तय करने का विकल्प रहेगा। खेत में कितने इंच पानी चाहिए इसे सेट करने पर जैसे ही खेत में पानी का तल उस पर पहुंचेगा मोटर बंद हो जाएगी। डिवाइस यह भी बताएगी कि खेत में कब और किस खाद की जरूरत है। खेत में रात्रि या दिन के समय जंगली जानवर आ गए तो मोशन सेंसर मोबाइल पर एलर्ट करेगा। खेत में यदि तार बिछाए गए हैं तो किसान उसमें करेंट एक्टिवेट कर सकेंगे।
क्या कहते हैं शोधार्थी संदीप वर्मा:-उन्होंने अपने बारे में बताया, ‘गरीब घर में पैदा हुआ। करीब से खेती किसानी देखी है। बचपन से ही यह लक्ष्य रखा था कि खेती किसानी के लिए कुछ नया करूंगा। अपना विजन प्रो-वीसी डॉ. दीपा शर्मा को बताया। कुछ काम करके भी दिखाया। उन्होंने कई बदलाव किए। पहली डिवाइस 2016 में तैयार हुई, लेकिन वह कारगर नहीं थी, 2017 में दो प्रयोग किए लेकिन जो चाहता था वैसा तैयार नहीं हुआ। जून 2018 में डिवाइस पूरी तरह से तैयार हो गई। इसका जुलाई में प्रयोग किया जो सफल रहा।

नई दिल्‍ली। शोधकर्ताओं का कहना है कि रोजाना मशरूम खाने से आंत में लाभदायक बैक्टीरिया में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इससे लिवर में ग्लूकोज का बेहतर नियंत्रण किया जा सकता है। इस शोध से डायबिटीज के लिए नए इलाज की राह खुल सकती है।अमेरिका की पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मार्गरीटा टी कैंटोर्न के अनुसार, यह निष्कर्ष चूहों पर किए गए अध्ययन के आधार पर निकाला गया है। चूहों को ह्वाइट बटन मशरूम खाने को दिया गया। इससे उनके गट (आंत) माइक्रोब्स के संयोजन में बदलाव देखने को मिला। इससे शॉर्ट चेन फैटी एसिड और खासतौर पर सुचिनेट एसिड की ज्यादा उत्पत्ति हुई। यह जाहिर हो चुका है कि सुचिनेट और प्रोपियोनेट ग्लूकोज उत्पत्ति को नियंत्रित करने वाले जीन में बदलाव कर सकते हैं।

कैंसर के लिए मशरूम:-मशरूम का सेवन करने से प्रोस्‍टेट और ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव होता है। क्योंकि इसमें बीटा ग्‍लूकन और कंजुगेट लानोलिक एसिड होता है जो कि एक एंटी कासिजेनिक प्रभाव छोड़ते हैं। कई शोध भी इस बात का समर्थन करती हैं कि मशरूम में मौजूद तत्व कैंसर के प्रभाव को कम करते हैं।
मशरूम है मधुमेह रोगियों के लिए उत्तम आहार:-मधुमेह रोगियों के लिए मशरूम उत्तम आहार माना जाता है। मशरूम में शर्करा (0.5 प्रतिशत) और स्टार्च की मात्रा बहुत कम होते हैं। इनमें वो सब कुछ होता है जो किसी मधुमेह रोगी को चाहिये। मशरूम में विटामिन, मिनरल और फाइबर होते हैं। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन के निर्माण में भी मदद करता है।वैज्ञानिकों के मुताबिक मशरूम में वसा भी नहीं होती, इसलिए मोटापे से बचाने के लिए भी इसका सेवन लाभप्रद होता है। इसके साथ मोटापे से ग्रस्‍त लोगों के लिए भी यह उपयोगी आहार है। मशरूम की सभी किस्में कैंसर, एचआईवी तथा अन्य खतरनाक बीमारियों में भी फायदेमंद पाई गई हैं।
हृदय रोगों से बचाव:-मशरूम में हाइ न्‍यूट्रियंट्स पाये जाते हैं, इसलिये ये दिल के लिये भी अच्‍छे होते हैं। साथ ही मशरूम में कुछ प्रकार के एंजाइम और रेशे पाए जाते हैं जो हमारे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करते हैं।
मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत:-मशरूम में विटामिन 'बी' होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी-2 और बी-3 भी मैटाबॉलिज्‍म को दुरुस्त रखते हैं। इसलिए मशरूम खाने से मैटाबॉलिज्‍म बेहतर बना रहता है।
पेट के विकार करे दूर:-ताजे मशरूम में पर्याप्त मात्रा में रेशे (लगभग 1 प्रतिशत) व कार्बोहाइड्रेट तन्तु होते हैं, इसका सेवन करने से कब्ज, अपचन, अति अम्लीयता सहित पेट के विभिन्न विकारों से बचाव होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल एवं शर्करा का अवशोषण भी कम होता है।
हीमोग्लोबिन रखे ठीक:-मशरूम का सेवन रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाये रखता है। इसके अलावा इसमें बहुमूल्य फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है जो केवल मांसाहारी खाध पदार्थो में होता है। अत: लौह तत्व एवं फोलिक एसिड के कारण यह रक्त की कमी की शिकार अधिकांश शाकाहारी ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के लिये ये सर्वोत्तम आहार है।
कुपोषण से बचाएं:-मशरूम गर्भवस्था, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था तक सभी चरणों में उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, विटामिन, खनिज, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट बाल्यावस्था से युवावस्था तक कुपोषण से बचाते हैं। इसलिए डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं।
विटामिन से भरपूर है मशरूम:-मशरूम की सब्‍जी हर किसी को पसंद होती है और भला हो भी क्यों ना, यह स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त है, यह आसानी से पाचक भी है और बीमारियों को दूर करने में भी मददगार है। इसमें एमीनो एसिड, मिनरल, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। छतरी के आकार के मशरूम को चीन में महा औषधि तो रोम के लोग इसे र्इश्वर का आहार मानते हैं। पौष्टिकता की दृष्टि से मशरूम शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों के भोजन में अहम स्थान रखता है।

नई दिल्ली। मोबाइल फोन आज हर किसी की दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सुबह उठते ही हम सबसे पहले अपना फोन देखते हैं और रात को सोते समय भी हाथ में आखिरी चीज हमारा फोन ही होता है। कई बार हम फोन का इस्तेमाल खाते समय भी करते हैं। उसी हाथ से हम खा रहे होते हैं और फिर उसी हाथ से बार-बार मोबाइल को स्पर्श कर रहे होते हैं। लेकिन अगर आपसे ये कहा जाए कि आपका फोन एक टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गंदा हो सकता है तो...!एक रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन पर टॉयलेट सीट से तीन गुना ज्यादा कीटाणु पाए जाते हैं। इंग्लैंड में स्थित एक गैजेट बीमा कंपनी 2Go द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, एक तिहाई से अधिक यूजर्स अपना फोन किसी तरल पदार्थ के साथ साफ नहीं करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि टॉयलेट सीट की तुलना में औसत स्मार्टफोन की स्क्रीन पर तीन गुना अधिक गंदगी पाई जाती है। स्काई डॉट कॉम ने अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि 20 स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं में से सिर्फ एक यूजर अपने मोबाइल को 6 महीने में एक बार साफ करता है, जो कि बहुत खतरनाक है। मोबाइल की सतह पर पाए जाने वाले बैक्टीरिया आपको बीमार कर सकते हैं।
टॉयलेट सीट से तीन गुना ज्यादा बैक्टीरिया:-स्मार्टफोन पर टॉयलेट सीट से ज्यादा बैक्टीरिया पाए जाते हैं। जहां टॉयलेट सीट में बैक्टीरिया की 3 प्रजातियां पाई जाती हैं। वहीं, मोबाइल पर इनकी प्रजाति की संख्या 10 से 12 होती है। मोबाइल की स्क्रीन पर ई-कोलाइ और फीकल जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए जाते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अमेरिका में लोग एक दिन में न्यूनतम 47 बार फोन चेक करते हैं। इससे उनके हाथों के कीटाणु मोबाइल पर चले जाते हैं।
मोबाइल पर होते हैं 12 तरह के बैक्टीरिया:-यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के प्रोफेसर डॉक्टर विलियम डीपाउलो ने इससे संबंधित एक स्टडी की है। इसमें उनकी टीम ने एक कंपनी के कर्मचारियों के मोबाइल फोन्स की स्क्रीन पर मौजूद बैक्टीरिया के सैंपल जमा किए। इसमें पाया गया कि औसत तौर पर मोबाइल पर 10 से 12 प्रकार के बैक्टीरिया होते हैं। जबकि टॉयलेट सीट पर बैक्टीरिया की 3 प्रजातियां पाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप खाना खाते समय कभी भी फोन का इस्तेमाल न करें।
पसीने और मैल से पनपते हैं बैक्टीरिया:-मोबाइल फोन रसोई से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक लगभग हर तरह के वातावरण में ले जाए जाते हैं, ऐसे में फोन पर आए पसीने और मैल में ये सूक्ष्मजीव अच्छी तरह पनप जाते हैं। पुणे में योगेश और एनसीसीएस में उनके समूह ने 27 मोबाइल फोनों की स्क्रीनों से नमूने इकट्ठा किए। इस काम से जुड़े सह-परीक्षणकर्ता प्रवीण राही ने कहा कि ये सूक्ष्मजीव इंसानों के जरिए मोबाइल की सतह पर आते हैं और आम तौर पर हमारे शरीर पर पनपते हैं।
बचने के उपाय:-मोबाइल फोन को स्वच्छ रखने का सबसे आसान तरीका है कि इन्हें टॉयलेट में न ले जाया जाए और समय-समय पर साबुन के पानी में एक कपड़े को हल्का सा भिगोकर इसे साफ कर लिया जाए। इस्तेमाल करने के पहले हैंडसेट को पूरी तरह सुखा लिया जाए। ऐसा कहा जाता है कि मोबाइल की सफाई के लिए व्यवसायिक द्रव्यों और सेनीटाइजरों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और मोबाइल साफ करने से पहले उसे ऑफ कर देना चाहिए।

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