मुंबई - एक 37 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक, जो 10 साल की उम्र से भारत में अवैध रूप से रह रहा था उसे अब पड़ोसी देश पाकिस्तान भेज दिया गया है। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि सिराज खान नामक पाकिस्तानी नागरिक यहां अनटॉप हिल इलाके में रह रहा था। रफी अहमद किदवई मार्ग थाने के वरिष्ठ इंस्पेक्टर ने बताया, कुछ साल पहले उसने एक भारतीय महिला से विवाह भी कर लिया था और आज उन दोनों के तीन बच्चे हैं।
पाकिस्तान जाने से पहले पत्नी ने ली सेल्फी
पुलिस ने बताया कि चूंकि खान के खिलाफ सभी मामलों की अदालत में सुनवाई कर ली गई थी, इसलिए उसे 12 मार्च को पाकिस्तान भेज दिया गया।" पुलिस के एक दल के द्वारा खान को पंजाब के अमृतसर में अटारी सीमा पर ले जाया गया, जहां से उसे विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय में सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के पाकिस्तान भेज दिया गया। भारत सरकार ने पाकिस्तानी अधिकारियों को भी खान को पाकिस्तान भेजे जाने के बारे में सूचित कर दिया था। पुलिस ने खान की अपनी पत्नी सजीदा को भी इस बारे में सूचित कर दिया था, इसके बाद सिराज को अमृतसर ले जाने के पहले बांद्रा स्टेशन पर उसे भी बुलाया गया। यहां से सिराज को पुलिस दल के साथ 10 मार्च को अमृतसर ले जाया गया। मुंबई के बांद्रा स्टेशन से निकलने से पहले सजीदा ने रेलवे अधिकारियों और सिराज के साथ सेल्फी भी ली।
2014 में अदालत में पहुंचा था मामला
जून 2014 में, बॉम्बे हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने खान को पाकिस्तान भेजने के फैसले पर एक महीने की रोक लगा रखी थी। अदालत ने देखा था कि खान की आवेदन में भारतीय नागरिकता की मांग की गई है जो विदेश मंत्रालय में लंबित था। इसके बाद खान की पत्नी ने अपने पति को पाकिस्तान भेजने के फैसले को अधिक समय तक रोके रखने की मांग की थी। उसने यह भी मांग की थी कि खान को हिरासत से छोड़ दिया जाय क्योंकि उसके परिवार की वित्तीय स्थिति खराब हो रही थी। बताया जाता है कि खान की पत्नी सजीदा ने हाल ही में एक बार फिर से मुंबई उच्च न्यायालय से संपर्क कर उनके निर्वासन को रोकने की अपील की थी। लेकिन न्यायमूर्ति आर एम सावंत और एस वी कोतवाल की पीठ ने कहा कि चूंकि खान को विदेशी कानून के तहत दोषी ठहराया गया था, इसलिए उनका निर्वासन अनिवार्य है। अदालत 20 मार्च को याचिका की अगली सुनवाई करेगी।
पत्नी ने याचिका दायर कर की थी मांग
सजीदा की याचिका के अनुसार, पाकिस्तानी नागरिक सिराज 1996 में गलती से भारत में प्रवेश कर गया था। उस समय वह महज 10 -11 साल का था। हालांकि, 2009 में उसने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अपने गांव जाने की कोशिश की थी। लेकिन जब उसने पाकिस्तान स्थित अपने गांव में जाने के लिए पुलिस से संपर्क किया, तो उसे पाकिस्तानी नागरिक होने के सबूत के तौर पर कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। लेकिन दस्तावेज नहीं पेश करने पर बाद में क्राइम ब्रांच द्वारा उन्हें वैध अनुमति के बिना भारत में रहने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। खान को छः महीने की जेल की अवधि के बाद रिहा कर दिया गया था, लेकिन जनवरी 2014 में एक अदालत ने उन्हें विदेशी कानून अधिनियम, 1946 के तहत दोषी ठहराया और उसे पाकिस्तान भेज दिए जाने का आदेश दिया। तब से वह पुलिस हिरासत में थे।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह अब खान पर निर्भर करता है कि वह पासपोर्ट और वीजा लेकर भारत आए और कानूनी रुप से अपनी पत्नी और बच्चों को पाकिस्तान ले जाए।

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