नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बावजूद बीसीसीआइ के दिग्गजों को राहत नहीं मिलेगी और चुनाव के बाद नया-नवेला क्रिकेट बोर्ड दिखाई देगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य कूलिंग ऑफ पीरियड (प्रतीक्षा अवधि) नियम में रियायत देने को भले ही बीसीसीआइ को राहत के रूप में देख रहा हो लेकिन इसके बावजूद कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना, कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी और कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी जैसे दिग्गज बीसीसीआइ का अगला चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। हालांकि यह आदेश राजीव शुक्ला के लिए संजीवनी लेकर आया है क्योंकि वह पिछले तीन साल से बीसीसीआइ के पदाधिकारी नहीं है।यही नहीं चुनाव तक उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) से भी उनका कूलिंग ऑफ पीरियड तीन साल का हो जाएगा। सीके खन्ना दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए), अमिताभ झारखंड क्रिकेट संघ (जेएससीए) और अनिरुद्ध हरियाणा क्रिकेट संघ (एचसीए) के साथ बीसीसीआइ में मिलाकर छह साल से ज्यादा वर्ष काम कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के अनुसार इन सभी को तीन साल के कूलिंग ऑफ पीरियड में जाना होगा। पूर्व क्रिकेट सौरव गांगुली भी बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) अध्यक्ष के तौर पर लगभग चार साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। अगर वह बीसीसीआइ का चुनाव लड़ते हैं तो सिर्फ दो साल ही बोर्ड में दे पाएंगे। ऐसे में वह कैब छोड़कर बीसीसीआइ में नहीं जाना चाहेंगे।सुप्रीम कोर्ट के अनुसार किसी व्यक्ति को बीसीसीआइ या राज्य संघ या दोनों को मिलाकर लगातार दो कार्यकाल के बाद तीन साल की प्रतीक्षा अवधि में जाना होगा। इसके अनुसार यह प्रतीक्षा अवधि उस हालत में भी लागू होगी जब एक व्यक्ति राज्य संघ में एक पद के बाद लगातार बीसीसीआइ में दूसरे पद पर आसीन होगा या फिर बीसीसीआइ के बाद राज्य संघ में पद संभालेगा।अमिताभ बीसीसीआइ के अधिकारी बनने से पहले एक दशक से ज्यादा जेएससीए के अध्यक्ष थे। अनिरुद्ध बोर्ड के कोषाध्यक्ष का पद संभालने से पहले छह साल के लिए एचसीए के सचिव पद पर काबिज थे। यही हाल राजीव शुक्ला और सीके खन्ना का भी रहा है।पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को भी प्रतीक्षा अवधि से गुजरना होगा। ठाकुर लगातार कार्यकाल में बीसीसीआइ के संयुक्त सचिव, सचिव और फिर अध्यक्ष रह चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश न मानने के कारण उन्हें अध्यक्ष पद से उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने हटाया था। वह तीन साल से ज्यादा हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के भी शीर्ष अधिकारी रह चुके थे। इनमें से किसी भी पदाधिकारी ने कोर्ट के आदेश पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया है। आगे यह क्या कदम उठाते हैं यह देखना होगा। आदेश के बाद वर्तमान बीसीसीआइ से सभी पदाधिकारियों को हटना पड़ सकता है या तीन साल के लिए ब्रेक लेना होगा। हालांकि राहत की बात यह है अब एक कूलिंग ऑफ पीरियड पर ही 12 साल तक पदाधिकारी राज कर सकते हैं। पदाधिकारी राज्य और क्रिकेट संघ में अलग-अलग नौ-नौ साल पद पर रह सकते हैं लेकिन इसमें कूलिंग ऑफ पीरियड लागू होगा।

 

 

 

 

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