नई दिल्ली - सड़को पर स्पीड ब्रेकर का कॉन्सेप्ट इसलिए लाया गया था ताकि सड़क पर चल रही गाड़ियों के स्पीड पर लगाम लग सके और सड़क हादसों में कमी आए. लेकिन इसका असर उल्टा ही देखने को मिल रहा है। रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की डाटा के आधार पर एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक स्पीड ब्रेकर की वजह से हर रोज सड़क पर 30 बार क्रैस होता है जिसमें तकरीबन नौ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
इससे पहले के दो सालों का रिकॉर्ड भी कुछ ऐसा ही रहा है। साल 2014 से सरकार ने स्पीड ब्रेकर की वजह से होने वाली मौतों का रिकॉर्ड तैयार करना शुरू किया था। साल 2016 का डाटा अब तक सामने नहीं आया है लेकिन खबर के मुताबिक 2016 में भी आंकड़े कुछ कम नहीं रहे थे।
दूसरे देशों में सड़क हादसों की वजह से होने वाली मौतों की तुलना अगर की जाए तो इंडिया में सिर्फ स्पीड ब्रेकर की वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा ऑस्ट्रेलिया और यूके में सड़क हादसों में कुल मौतों के से भी ज्यादा है। एक तरफ जहां इंडिया में 2015 में 3,409 लोगों की जान सिर्फ स्पीड ब्रेकर की वजह से गई वहीं ऑस्ट्रेलिया और यूके में कुल मिलाकर साल 2015 में 2,937 मौतें हुई। इसके पीछे की वजहों में डिजाइन में कमी और खराब मटेरियल के इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, "देशभर में इस तरह का खतरा बना हुआ है। हमारी हर सड़क पर देशभर में स्पीड ब्रेकर हैं जिससे लोगों की हड्डियां और गाड़ी सब खराब हो रहे हैं।"
इसके अलावे उन्होंने ये भी कहा कि मंत्रालय सभी राज्यों को इस बारे में लिखेगा और उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा जाएगा कि स्पीडब्रेकर बनाते वक्त नियमों का पालन किया जाए।

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