नई दिल्ली: एनडीए सरकार के दो मंत्रियों रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने न्यायपालिका में आरक्षण की वकालत कर मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. दोनों मंत्रियों ने हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में आरक्षण की मांग की है. मंत्रियों का कहना है अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का न्यायालयों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, इसलिए इन्हें मौक़ा मिलना चाहिए. वहीं राम विलास पासवान तो न्यायपालिका में आरक्षण हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू करने की भी बात कर रहे हैं.

केंद्रीय मंत्री और राजग के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख राम विलास पासवान ने कहा, 'उनकी मांग पर जोर देने के लिए आंदोलन शुरू करने का सही समय है. उन्होंने पटना में भीमराव अंबेडकर की जयंती पर दलित सेना के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा, ''मैं लोजपा प्रमुख की हैसियत से बोल रहा हूं कि हमें न्यायापालिका में आरक्षण हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू करना चाहिए.'' पासवान ने बिहार में निचली और उच्च न्यायिक सेवाओं में आरक्षण लाने के लिए नीतीश कुमार सरकार की तारीफ भी की.
वीडियो : न्यायपालिका में आरक्षण की मांग

वहीं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में आजादी के बाद अपवाद ही रहा होगा कि एक आधे जज एससी/एसटी या ओबीसी जज बने हों. उन्होंने कहा कि इसका कारण है जजों की नियुक्ति की जो प्रक्रिया है उसमें एससी/एसटी या ओबीसी छोड़ दीजिए गरीब सवर्ण नौजवान भी चाहे की अपनी मैरिट के दम पर सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट जज बन जाए तो बहुत मुश्किल है. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा ' आजादी के बाद जितने भी लोग अब तक जज हुए हैं उनके परिवार में कोई जज रहा होगा, जमींदार रहा होगा या फिर राजनीतिक पृष्ठभूमि रही होगी.'

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