नई दिल्ली - उत्तर प्रदेश के लिए आज बड़ा दिन है। पौने दो लाख शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त करने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में बड़ा फैसला आ सकता है। बुधवार को हुई सुनवाई में इसपर फैसला सुरक्षित रख दिया गया था। शिक्षामित्रों के साथ-साथ यूपी सरकार भी इस फैसले के इंतजार में है। लखनऊ, सीतापुर, अमेठी, हरदोई, फैजाबाद, रायबरेली समेत कई जिलों में शिक्षामित्रों को लेकर पेंच फंसा है और दिल्ली में इन लोगों ने काफी समय तक विरोध भी प्रदर्शन किया।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व जस्टिस यूयू ललित की पीठ में बुधवार को सुनवाई पूरे दो घंटे चली। कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले पर और पक्षों को भी सुना जाना बाकी है। इसलिए सुनवाई आज फिर से दो बजे से होगी।
टैट पास शिक्षामित्रों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता संजय त्यागी ने कहा कि यूपीटेट पास शिक्षामित्रों को छूट दी जाए। उन्होंने कोर्ट में कहा कि ये लोग पूरी तरह से योग्य हैं और इन्होंने टेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। 72826 भर्ती में भी इनका सिलेक्शन हो गया था लेकिन सरकार ने पहले से ही इनका समायोजन कर लिया था इसलिए इनको सहायक अध्यापक के पद से नहीं हटाया जाना चाहिए। इस पर जज साहब ने कहा कि आप टैट है। हम इसको नोट कर लेते हैं।
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश पर स्टे लगा दिया था।
क्या है मामला
ये मामला पौने दो लाख शिक्षा मित्रों की सहायक शिक्षक बनाने का है। दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इनकी नियुक्ति को असंवैधानिक करार देकर इसे निरस्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ ही शिक्षा मित्र और यूपी सरकार एससी पहुंचे।
रामजेठमलानी की बहस
पिछली सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता शांतिभूषण और राम जेठमलानी ने शिक्षामित्रों की ओर से बहस की। उन्होंने कहा कि सरकार को 18 वर्ष से काम कर रहे शिक्षामित्रों को एक पूल की तरह से देखने का अधिकार है। यह पूल एक भर्ती स्रोत है जिसे सहायक शिक्षकों को भर्ती करने के लिए इस्तेमाल करने में कोई कानूनी दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पूरी तरह से योग्य और शैक्षणिक योग्यता में पूर्ण है। हाईकोर्ट ने उन्हें अयोग्य ठहराकर कर गलत किया है।

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