बंबई उच्च न्यायालय ने वृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) से 31 वर्षीय एक महिला की उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें वह चाहती है कि नगर निगम के अधिकारी उसे जन्म प्रमाण पत्र पर अपनी बेटी के जैविक पिता का नाम दर्ज करने के लिए बाध्य नहीं करें।याचिकाकर्ता नालासोपारा की एक अविवाहित मां है जिसने अगस्त 2016 में टेस्ट ट्यूब विधि से लड़की को जन्म दिया है।बच्ची के जन्म के बाद महिला ने बीएसमसी जन्म पंजीकरण विभाग से बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में पिता का स्थान खाली रखने की अनुमति देने का आग्रह किया। बीएमसी ने जब इससे इंकार कर दिया तो वह उच्च न्यायालय पहुंच गयी।उच्च न्यायालय ने पिछले साल दिसंबर में बीएमसी को नोटिस जारी किया था जिसका जवाब निगम ने अभी तक नहीं दिया है।
याचिकाकर्ता ने दिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला:-याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय के 2015 के उस महत्वपूर्ण फैसला का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि अकेली मां को जन्म प्रमाण पत्र में अपने बच्चे के जैविक पिता का नाम का खुलासा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति ए एस ओका और पीएन देशमुख की खंडपीठ ने अब बीएमसी को दो सप्ताह के भीतर इस पर जवाब दायर करने का निर्देश दिया है।इस बीच, 22 वर्षीय एक अविवाहित मां की याचिका पर सुनवाई करते हुये खंडपीठ ने इस महीने के आखिर में होने वाली अगली सुनवाई में बच्चे के जैवित पिता को अदालत में बुलाया है।नवंबर 2013 में बच्चे को जन्म देने वाली अविवाहित मां ने इस याचिका में बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र से बच्चे के जैविक पता का नाम हटाने की उसे अनुमति देने की मांग की है।हालांकि, बीएमसी ने उसे अनुमति देने से इंकार किया और कहा कि राज्य के नियम के मुताबिक नगर निगम एक जन्म या मृत्यू प्रमाणपत्र में तभी संशोधन कर सकता है जब इसमें कोई गलती हो।निगम ने इस मामले में उच्च न्यायालय को सूचित किया कि बच्चे के जन्म के समय याचिकाकर्ता ने स्वेच्छा से ही उसके जैविक पिता के नाम और पेशे की जानकारी दी थी। अब सिर्फ विचार बदलने की वजह से प्रविष्ठि मे बदलाव का मतलब बच्चों के जन्म रिकार्ड में गलत प्रविष्ठि करना होगा और याचिकाकर्ता को इसे हटाने या संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें