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मुंबई:-बॉलीवुड एक्ट्रेस  मल्लिका शेरावत ने अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ अपनी एक सेल्फी ट्विटर पर शेयर की है जिसमें वह काफी खुश नजर आ रहे हैं।

मल्लिका ने बुधवार को ट्विटर पर लिखा, 'करिश्माई राष्ट्रपति ओबामा के साथ फिर मुलाकात करना भाग्यशाली होना है।' मल्लिका ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि उन्होंने कब और कहां ओबामा से मुलाकात की।

बता दें कि मल्लिका की किस्मत अच्छी है कि उन्होंने दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की।

इससे पहले उन्होंने लॉस एंजेलिस में 2011 में टी पार्टी में ओबामा से मुलाकात की थी।

अभिनेत्री को 'ख्वाहिश' और 'मर्डर' जैसी फिल्मों में बोल्ड दृश्यों के लिए जाना जाता है और उन्हें आखिरी बार 2015 की फिल्म 'डर्टी पॉलिटिक्स' में देखा गया था।

मुंबई: बॉलीवुड एक्टर परिणीति चोपड़ा एक साल बाद फिर से पर्दे पर नजर आएंगे। इस फिल्म को बड़े ही अलग अंदाज में पेश किया है।  'यशराज फिल्म्स' बैनर ने फिल्म से पहले एक वीडियो रिलीज किया है जिसमें परिणीति चोपड़ा बता रही हैं कि वे एक साल बाद वापसी कर रही हैं। इस बार वह सिर्फ एक्टिंग करती ही नजर नहीं आएंगी बल्कि वह फिल्म में गाना भी गाएंगी।

फिल्म यशराज फिल्म्स की है और इसे मनीष शर्मा प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म को अक्षय रॉय डायरेक्ट कर रहे हैं. फिल्म में आयुष्यमान खुराना उनके हीरो होंगे। फिल्म का नाम है 'मेरी प्यारी बिंदु'। 

मुंबई:-बॉलीवुड स्टार अर्जुन कपूर का कहना है कि एक्टर्स को हॉलीवुड में कदम रखने से पहले अपने करियर में मजबूती लाने की जरूरत है क्योंकि शुरुआत से शुरू करना मुश्किल है।

बता दें कि प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण फिलहाल हॉलीवुड में काम कर रही हैं। प्रियंका धारावाहिक 'क्वांटिको' में काम कर रही हैं और दीपिका विन डिजल के साथ एक्सएक्सएक्स में काम कर रही हैं।

अर्जुन ने कहा, अगर आपको वहां जाकर काम करने का मौका मिलता है तो आपको करना चाहिए क्योंकि आप अपने देश और अपनी क्षमताओं को पेश करते हैं। प्रियंका ने जो कुछ भी हासिल किया है वह अदभुत है और मुक्षे विश्वास है कि दीपिका भी बेहतर करेंगी। वह एक प्रतिभावान व्यक्तित्व वाली हैं और समय के साथ बेहतर होती जा रही हैं।

अनिल कपूर, इरफान खान, ऐश्वर्या राय बच्चन जैसे कई भारतीय अभिनेताओं ने हॉलीवुड फिल्मों में काम किया है। अर्जुन का मानना है कि पश्चिम के देश में काम करना और अपने देश का प्रतिनिधित्व करना बहुत भावुक बात है।

उन्होंने कहा, प्रियंका ने यहां काफी कुछ हासिल किया और फिर उन्होंने उधर का रूख किया। उन्होंने अपने काम में बहुत समय दिया है। यह बहुत भावुक कर देने वाली बात है कि कोई भारतीय कलाकार वहां मुख्य किरदार निभाए। इसे करने के लिए आपको बहुत ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। इसे आप बस इसलिए नहीं कर सकते कि हर कोई इसे कर रहा है। यहां तक कि मैं भी किसी दिन हॉलीवुड फिल्म में काम करना चाहता हूं।

अभिनेता आर बाल्की की अगली फिल्म 'की एंड का' में करीना कपूर खान के साथ दिखाई देंगे।

मुंबई:-बॉलीवुड अभिनेता रितिक रौशन सिल्वर स्क्रीन पर यामी गौतम के साथ रोमांस करते नजर आएंगे।

बॉलीवुड के जाने माने फिल्मकार राकेश रौशन अपने बेटे रितिक को लेकर फिल्म 'काबिल' बनाने जा रहे हैं। फिल्म में रितिक के अपोजिट यामी गौतम का चयन किया गया है। फिल्म का निर्देशन संजय गुप्ता करेंगे।

रितिक  ने ट्विटर पर लिखा 'मैं इस नए सफर का इंतजार कर रहा हूं। 'काबिल'- हम अपनी उम्मीद से परे कुछ करने के काबिल हैं। यामी गौतम हम धूम मचाने वाले हैं। '

यामी-रितिक  के साथ काम करने को लेकर बेहद खुश है । यामी ने ट्विटर पर लिखा 'इस सफर पर जाने के लिए इंतजार नहीं कर सकती रितिक। आपके साथ काम करने के लिए काफी उत्सुक हूं।'

होश वालों को खबर क्या। बेखुदी क्या चीज है। इश्क कीजिए फिर समझिए जिंदगी क्या चीज है। जैसी लाइनें लिखने वाले मशहूर शायर निदा फाजली नहीं रहे। निदा फाजली ने तमाम ऐसी पंक्तियां लिखीं जो लोगों के जेहन में हमेशा कौंधती रहेंगी। आइए डालते हैं एक नजर उनकी रचनाओं पर--

फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी...

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी,

फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी,

सुबह से शाम तक बोझ ढ़ोता हुआ,

 अपनी लाश का खुद मज़ार आदमी,

 हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते,

 हर तरफ आदमी का शिकार आदमी,

 रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ,

 हर नए दिन नया इंतज़ार आदमी,

 जिन्दगी का मुक्कदर सफ़र दर सफ़र,

 आखिरी सांस तक बेकरार आदमी

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 मस्जिदों-मंदिरों की दुनिया में...

मस्जिदों-मन्दिरों की दुनिया में

मुझको पहचानते कहां हैं लोग

रोज़ मैं चांद बन के आता हूं

दिन में सूरज सा जगमगाता हूं

खनखनाता हूं मां के गहनों में

हंसता रहता हूं छुप के बहनों में

मैं ही मज़दूर के पसीने में

मैं ही बरसात के महीने में

मेरी तस्वीर आंख का आंसू

मेरी तहरीर जिस्म का जादू

मस्जिदों-मन्दिरों की दुनिया में

मुझको पहचानते नहीं जब लोग

मैं ज़मीनों को बे-ज़िया करके

आसमानों में लौट जाता हूं

मैं ख़ुदा बन के क़हर ढाता हूं

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अजनबी शहर है ये दोस्त बनाते रहिए...

बात कम कीजे ज़ेहानत को छुपाए रहिए

अजनबी शहर है ये, दोस्त बनाए रहिए

दुश्मनी लाख सही, ख़त्म न कीजे रिश्ता

दिल मिले या न मिले हाथ मिलाए रहिए

ये तो चेहरे की शबाहत हुई तक़दीर नहीं

इस पे कुछ रंग अभी और चढ़ाए रहिए

ग़म है आवारा अकेले में भटक जाता है

जिस जगह रहिए वहाँ मिलते मिलाते रहिए

कोई आवाज़ तो जंगल में दिखाए रस्ता

अपने घर के दर-ओ-दीवार सजाए रहिए

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मैं रोया परदेस में...

मैं रोया परदेस में भींगा मां का प्यार

दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार।

सातों दिन अल्लाह के क्या मंगल क्या पीर।

क्या मंगल क्या पीर

जिसदिन सोये देर तक भूखा रहे फकीर।।

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नयी-नयी आंखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है

कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन, अब घर अच्छा लगता है ।

मिलने-जुलनेवालों में तो सारे अपने जैसे हैं

जिससे अब तक मिले नहीं वो अक्सर अच्छा लगता है ।

मेरे आंगन में आये या तेरे सर पर चोट लगे

सन्नाटों में बोलने वाला पत्थर अच्छा लगता है ।

चाहत हो या पूजा सबके अपने-अपने सांचे हैं

जो मूरत में ढल जाये वो पैकर अच्छा लगता है।

हमने भी सोकर देखा है नये-पुराने शहरों में

जैसा भी है अपने घर का बिस्तर अच्छा लगता है ।

निदा फाजली ने ग्वालियर कॉलेज से स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की और अपने सपनों को एक नया रूप देने के लिए वह वर्ष 1964 में मुंबई आ गए। यहां उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस बीच उन्होंने धर्मयुग और ब्लिटज जैसी पत्रिकाओं मे लिखना शुरू कर दिया।

अपने लेखन की अनूठी शैली से निदा फाजली कुछ ही समय में लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब हो गए। उसी दौरान उर्दू साहित्य के कुछ प्रगतिशील लेखकों और कवियों की नजर उन पर पड़ी जो उनकी प्रतिभा से काफी प्रभावित हुए थे। निदा फाजली के अंदर उन्हें एक उभरता हुआ कवि दिखाई दिया और उन्होंने निदा फाजली को प्रोत्साहित करने एवं हर संभव सहायता देने की पेशकश की और उन्हें मुशायरों में आने का न्योता दिया।

उन दिनों उर्दू साहित्य के लेखन की एक सीमा निर्धारित थी। निदा फाजली, मीर और गालिब की रचनाओं से काफी प्रभावित थे। धीरे-धीरे उन्होंने उर्दू साहित्य की बंधी-बंधायी सीमाओं को तोड़ दिया और अपने लेखन का अलग अंदाज बनाया। इस बीच निदा फाजली मुशायरों में भी हिस्सा लेते रहे जिससे उन्हें पूरे देश भर में शोहरत हासिल हुई।

सत्तर के दशक में मुंबई मे अपने बढ़ते खर्चे को देखकर उन्होंने फिल्मों के लिए भी गीत लिखना शुरू कर दिया लेकिन फिल्मों की असफलता के बाद उन्हें अपना फिल्मी करियर डूबता नजर आया। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपना संघर्ष जारी रखा। धीरे-धीरे मुंबई में उनकी पहचान बनती गयी।

लगभग दस वर्ष तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1980 में प्रदर्शित फिल्म 'आप तो ऐसे न थे' में पार्श्व गायक मनहर उधास की आवाज में अपने गीत 'तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है' की सफलता के बाद निदा फाजली कुछ हद तक गीतकार के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए।

इस फिल्म की सफलता के बाद निदा फाजली को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए। इन फिल्मों में 'बीबी ओ बीबी', 'आहिस्ता-आहिस्ता' और 'नजराना प्यार का' जैसी फिल्में शामिल हैं।

इस बीच उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा और कई छोटे बजट की फिल्में भी की जिनसे उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ। अचानक ही उनकी मुलाकात संगीतकार खय्याम से हुई जिनके संगीत निर्देशन में उन्होंने फिल्म 'आहिस्ता-आहिस्ता' के लिए ‘कभी किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता’ गीत लिखा। आशा भोंसले और भूपिंदर सिंह की आवाज में उनका यह गीत श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।

वर्ष 1983 निदा फाजली के सिने करियर का अहम पड़ाव साबित हुआ। फिल्म 'रजिया सुल्तान' के निर्माण के दौरान गीतकार जां निसार अख्तर की आकस्मिक मृत्यु के बाद निर्माता कमाल अमरोही ने निदा फाजली से फिल्म के बाकी गीत को लिखने की पेशकश की। इस फिल्म के बाद वह गीतकार के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गए। गजल सम्राट जगजीत सिंह ने निदा फाजली के लिए कई गीत गाए जिनमें 1999 में प्रदर्शित फिल्म 'सरफरोश' का यह गीत 'होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है' भी शामिल है। पदमश्री निदा फाजली आज भी पूरे जोशो खरोश के साथ साहित्य और फिल्म जगत को आलोकित कर रहे हैं।

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