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जबलपुर। पिछले हफ्ते दुनियाभर में फ्रेंडशिप डे बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने अपने दोस्तों को खास उपहार भी दिए। लेकिन मध्य प्रदेश में एक 10वीं के छात्र ने जो किया उस सुन कर सब हैरान रह गए। जबलपुर जिले में फ्रेंडशिप डे के दिन एक छात्र ने अपने पिता के 46 लाख रुपये चुराकर स्कूल के दोस्तों में बांट दिए। छात्र ने दिहाड़ी मजदूरी करने वाले दोस्त को सबसे ज्यादा 15 लाख रुपये दिए। वहीं होमवर्क करने वाले एक क्लासमेट को तीन लाख रुपये दिए। इतना ही नहीं छात्र ने स्कूल और कोचिंग में अपने साथ पढ़ने वाले 35 साथियों को स्मार्टफोन्स दिलाए तो, कईयों को चांदी की चेन गिफ्ट की। कहा जा रहा है कि छात्र के एक दोस्त ने हाल ही में एक नई कार खरीदी है।छात्र के पिता पेशे से बिल्डर हैं। बिल्डर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि उसकी अलमारी से 60 लाख रुपये गायब हो गए हैं। उसने हाल ही में हुए एक सेल से मिले 60 लाख रुपये अलमारी में रखे थे। पैसे गायब होने का पता चलते ही वह पुलिस के पास पहुंचा। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच के लिए पहुंची पुलिस को चोरी जैसा कुछ भी मामला नहीं लगा।इसके बाद जांच में पता चला कि बिल्डर के बेटे ने कैश निकालकर अपने दोस्तों और जरुरतमंद लोगों में बांट दिए। इसके बाद छात्र के पिता ने पुलिस को एक लिस्ट दी जिसके आधार पर पुलिस सभी छात्रों से संपर्क करने की कोशिश में लगी है। अभी तक पुलिस ने 15 लाख रुपये रिकवर कर लिए हैं। वहीं, दिहाड़ी मजदूर का बेटा पैसो मिलने के बाद से गायब है। ज्यादा रकम पाने वाले पांच स्टूडेंट्स के पैरंट्स को बुलाकर पांच दिन में पैसे वापस करने को कहा गया है।एसआई बीएस तोमर ने कहा कि हमने अब तक 15 लाख रुपये रिकवर किए हैं और बाकी के लिए कोशिश जारी है। 15 लाख पाकर एक दिन में अमीर हुए स्टूडेंट पर उन्होंने कहा, 'हम उसकी तलाश कर रहे हैं और उसने अभिभावकों से पैसे वापस करने को कहा गया है।' सभी छात्रों के नाबालिग होने के चलते कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

 

नई दिल्ली। किडनी की बीमारी के इलाज में आयुर्वेद का लोहा अब अमेरिका भी मानने लगा है। अमेरिकी जर्नल में हाल ही प्रकाशित लेख के अनुसार पौष्टिक भोजन और आयुर्वेदिक दवाओं के इस्तेमाल से किडनी की बीमारी न सिर्फ बढ़ने से रोका जा सकता है, बल्कि इससे किडनी की खराब हो चुकी कोशिकाओं को स्वस्थ्य भी किया जा सकता है। ध्यान देने की बात है कि ऐलोपैथी चिकित्सा में किडनी बदलने या डायलिसिस के अलावा बीमारी का कोई ठोस इलाज नहीं है।
घरेलू नुस्खे और आयुर्वेद किडनी के इलाज में कारगर:-जर्नल ऑफ दि एकेडमी ऑफ न्यूट्रीशियन एंड डाइटिक्स में प्रकाशित शोध के अनुसार किडनी की बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए घरेलू नुक्से के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं भी कारगर होती हैं। इसके अनुसार अदरक, प्याज, लहसुन के सेवन को किडनी के लिए फायदेमंद पाया गया है। किडनी पर नए शोध के बाद अमेरिका में आयुर्वेदिक दवाओं का नया बाजार खुल सकता है।भारत में निर्मित नीरी केएफटी नाम की दवा किडनी के इलाज में काफी सफल साबित हो रही है। नीरी केएफटी को लंबे शोध के बाद तैयार किया गया है। इसमें पुनर्नवा का इस्तेमाल किया गया है, जो किडनी की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को फिर से पुनर्जीवित करती है। अमेरिकन जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च ने नीरी केएफटी पर अलग से शोध प्रकाशित किया है। जिसके अनुसार नीरी केएफटी के सेवन सीरम क्ति्रएटिनिन, यूरिक एसिड तथा इलेक्ट्रोलेट्स के स्तर में काफी सुधार पाया गया।
पौष्टिक आहार भी किडनी की बीमारी को बढ़ने से रोकने में होती है सफल:-नए शोध में आयुर्वेद दवाओं के साथ-साथ खान-पान को भी किडनी के इलाज के लिए अहम बताया गया है। इसके अनुसार पौष्टिक आहार से किडनी की बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। शोध में किडनी की बीमारी से ग्रसित रोगियों को आहार विशेषज्ञ से भी सलाह लेना जरूरी बताया गया है।शोध से जुड़े लोयोला यूनिवर्सिटी, शिकागो के डा. होली क्रमेर के अनुसार ज्यादातर मरीजों को पता नहीं होता कि बीमारी को बढ़ने से रोकने में भोजन की क्या भूमिका है। इसीलिए नेशनल किडनी फाउंडेशन एंड दि एकेडमी ऑफ न्यूट्रीशियन डाइटिक्स ने ऐसे मरीजों के लिए मेडिकल न्यूट्रीशियन थैरैपी की सिफारिश की है।

नई दिल्ली। ट्रेन में सफर के दौरान आपको मिलने वाली मुफ्त यात्री बीमा की सुविधा एक सितंबर से बंद हो जाएगी। अब अगर आपको इस सुविधा का लाभ उठाना है तो टिकट बुक करते समय इसका विकल्प चुनना होगा। यह जानकारी इंडियन रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कॉरपोरेशन (आइआरसीटीसी) से जुड़े के एक अधिकारी ने दी।आइआरसीटीसी के अधिकारी ने बताया कि अब वेबसाइट से टिकट बुक करने के दौरान यात्री को इसका विकल्प चुनना होगा कि वह यह सुविधा चाहता है या नहीं। हालांकि अभी यह नहीं पता चल सका है कि सुविधा लेने की स्थिति में यात्री को कितने रुपये अतिरिक्त देने पड़ेंगे। डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिसंबर 2017 से आइआरसीटीसी यात्रियों को मुफ्त यात्रा बीमा सुविधा उपलब्ध करा रही है। इस तरह के बीमा में यात्रा के दौरान मौत होने पर परिजनों को 10 लाख रुपये मिलने का प्रावधान है, जबकि दुर्घटना की स्थिति में यात्री के अक्षम होने पर 7.5 लाख रुपये बतौर मुआवजा मिलता था। घायल को 2 लाख रुपये देने का प्रावधान था। जबकि मृत व्यक्ति को ले जाने के दौरान लगने वाले परिवहन खर्च के तौर पर 10,000 रुपये दिए जाते थे। बता दें कि इससे पहले रेलवे ने डेबिट कार्ड से टिकट बुकिंग पर लगने वाले शुल्क को भी माफ कर दिया था।

नई दिल्ली। बारिश से बाधित लॉर्ड्स टेस्ट मैच की पहली पारी जेम्स एंडरसन के लिए कमाल का रहा। भारत के खिलाफ एंडरसन ने कमाल की गेंदबाजी की और मेहमान टीम के बल्लेबाजों के पास उनकी गेंदबाजी का कोई जबाव नहीं था। एंडरसन ने लॉर्ड्स पर अब तक टेस्ट क्रिकेट में 99 विकेट लिए हैं और वो क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में ग्लेन मैक्ग्रा (563 विकेट) की विकेट के मामले में बराबरी करने से 14 विकेट दूर हैं। इस टेस्ट सीरीज में अब तक एंडरसन के बारे में सबसे अच्छी बात ये रही है कि उन्होंने काफी ओवर्स गेंदबाजी की है। 36 वर्ष की उम्र में हर सेशन में अपनी पूरी ताकत से लगभग एक घंटे गेंदबाजी करना आसान नहीं है लेकिन एंडरसन ऐसा कर रहे हैं। एंडरसन का कहना है कि वो अपनी उम्र के बारे में ज्यादा नहीं सोचते। मैं अपनी उम्र के बारे में ज्यादा नहीं सोचता। इस वक्त मेरा शरीर मेरा साथ दे रहा है और ये सबसे अच्छी बात है। एजबेस्टन में मैंने जितनी ओवर गेंदबाजी की उससे मैं काफी खुश हूं। इस उम्र में भी मेरा शरीर पूरी तरह से फिट है इसका मतलब है कि मैं मैदान के बाहर सही चीजें कर रहा हूं। एंडरसन ने कहा कि वो तब तक खेलते रहेंगे जब तक संभव है। मुझे लगता है कि मैं विकेट लेता रहूंगा और अपनी टीम की जीत में सहयोग करता रहूंगा। अब तक इस टेस्ट सीरीज में तेज गेंदबाजों के लिए सबकुछ काफी अच्छा रहा है लेकिन विराट और एंडरसन के बीच के मुकाबले पर सबका ध्यान सबसे ज्यादा है। एंडरसन ने इस सीरीज में अब तक काफी अच्छी गेंदबाजी की है लेकिन वो विराट का विकेट एक बार भी नहीं ले पाए। इस सीरीज में विराट ने अब तक उनका बखूबी सामना किया और एक दो मौके पर वो आउट भी हो सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। एंडरसन ने कहा कि वो दूसरे बल्लेबाजों की तरह क्यों नहीं आउट हो पाए मैं उसके विषय में सोच रहा हूं लेकिन सच ये है कि मैं हम दोनों के बीच की प्रतिस्पर्धा का लुत्फ उठा रहा हूं।विराट के बारे में एंडरसन ने कहा कि विराट दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज क्यों है ये मेरी समझ में आ गया है। मैं दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों के खिलाफ खेलना पसंद करता हूं लेकिन दुर्भाग्यवश मैं उन्हें इस सीरीज में आउट नहीं कर पाया हूं। मैं सीरीज के बाकी के मैचों में उन्हें आउट करने की कोशिश करता रहूंगा।

नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरे टेस्ट की दूसरे तीसरे दिन मेजबान टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज जॉनी बेयरस्टो ने 93 रन बनाकर ना केवल अपनी टीम को मुश्किल से निकाला बल्कि विराट कोहली को भी पीछे छोड़ दिया।इस बल्लेबाज ने क्रिस वोक्स के साथ मिलकर 189 रन की साझेदारी की और भारत को हार के मुंह धकेल दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपने टेस्ट करियर का 19वां अर्धशतक लगाते हुए इस साल सभी फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बना लिए हैं। इस सीजन में बेयरस्टो क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में 1482 रन बना चुके हैं। पहले इस लिस्ट में विराट कोहली नंबर वन थे जिन्होंने 1404 रन बनाए हैं। इस मैच से पहले बेयरस्टो के नाम 1389 रन थे और 93 रन की पारी के बाद वह कोहली से आगे हो गए, हालांकि विराट इसी मैच या सीरीज में दोबारा टॉप पर पहुंच सकते हैं। विराट ने साल 2018 में 21 मैचों में 66.85 की जबरदस्त की औसत से 1404 रन बनाए हैं। वहीं बेयरस्टो ने 30 मैचों में 43.58 की औसत से 1482 रन बनाए हैं। खास बात ये हैं कि दोनों ही खिलाड़ियों ने सभी फॉर्मेट को मिलाकर इस साल 5-5 शतक लगाए हैं।इस सूची में इंग्लैंड की कप्तान जो रूट है। रूट ने 50 से ज्यादा की औसत से 1357 रन बनाए हैं। इस साल रूट ने 3 शतक और 10 अर्धशतक लगाए हैं। वहीं पाकिस्तान के नए स्टार ओपनर फखर जमां चौथे स्थान पर मौजूद है। फखर ने 65.61 की औसत से 1181 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 2 शतक और 8 अर्धशतक लगाए हैं।

नई दिल्ली। इंग्लैंड के ऑलराउंडर क्रिस वोक्स ने भारत के खिलाफ लॉर्डस टेस्ट मैच की पहली में नाबाद 137 रन की पारी खेली। वोक्स की इस दमदार पारी की बदौलत इंग्लैंड को पहली पारी में भारत पर 289 रन की बड़ी बढ़त हासिल हुई। वोक्स ने लॉर्ड्स पर लगाए अपने शतक के बारे में कहा कि ये उनके बचपन का सपना था कि वो इस मैदान पर शतक लगाएं और अपना बल्ला उठाएं।क्रिस वोक्स को लॉर्ड्स टेस्ट में टीम के ऑल राउंडर बेन स्टोक्स की जगह टीम में शामिल किया गया था। वोक्स ने स्टोक्स की कमी महसूस नहीं होने दी और उन्होंने पहली पारी में विराट कोहली का विकेट लिया और फिर नाबाद शतकीय पारी खेली। वोक्स ने कहा कि ये मेरे बचपन का सपना था कि मैं लॉर्ड्स में शतक लगाऊं और दर्शक खड़े होकर मेरा अभिवादन करें।वोक्स हाल ही में पिता बने थे और उनके साथी खिलाड़ियों ने उन्हें पार्टी देने की बात कही थी। इस पर उन्होंने कहा कि मुझे मेरे साथी खिलाड़ियों ने पार्टी देने की बात कही थी। मेरे पास सचमुच कोई आइडिया नहीं था कि मैं किस तरह से इसे सेलिब्रेट करूं लेकिन मैं अब काफी खुश हूं। शतक लगाने के बाद 30 सेकेंड तक अपने बल्ले से दर्शकों का अभिवादन करना किसी सेलिब्रेशन से कम नहीं था। वोक्स ने कहा कि वो अपना शतक पूरा करने से पहले काफी नर्वस थे लेकिन जॉनी बेयरस्टो ने मेरा हौसला बढ़ाया। वोक्स ने कहा कि 90 का स्कोर पार करने के बाद में काफी नर्वस था। इसके बाद मैं अपने शतक के बारे में सोच रहा था और ऑफ स्टंप से बाहर जाती गेंदों का साथ छेड़छाड़ कर रहा था

नई दिल्‍ली। अमेरिका के स्‍थानीय समयानुसार रात करीब 3:31 बजे नासा का पार्कर सोलर प्रोब इतिहास बनाने की राह पर निकल गया। उस वक्‍त अमेरिका के लोग गहरी नींद में थे जब नासा का यह ऐतिहासिक यान अपने सफर पर निकला। नासा के लिए यह काफी अहम मिशन है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्‍पेस सेंटर से एलियांस डेल्‍टा-4 रॉकेट के जरिये इसे इस ऐतिहासिक सफर भेजा गया है। यह यान नासा के सबसे भारी यान में से एक है। स्‍थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:30 बजे इसमें लगे सोलर पैनल खोल दिए गए थे। यह सूरज की रोशनी से ऊर्जा लेकर इसको आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। पार्कर सोलर प्रोब की यान की ताकत का अंदाजा इस बात से भी आंका जा सकता है कि मार्स मिशन की ओर निकले यान की तुलना में यह पचास गुणा अधिक एनर्जी जनरेट करता है। इसका वजन कर करीब 15 पाउंड है और आकार की बात करें तो यह एक कार की बराबर है।
आठ वर्षों की मेहनत का नतीजा है ये मिशन:-ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई भी यान सूरज के इतने करीब पहुंचने के मिशन पर निकला है। इसे यान के सबसे ऊपरी हिस्‍से पर लगाया है, जो करीब 62.7 फीट लंबा है। इस प्रोजेक्‍ट के मिशन साइंटिस्‍ट एडम सजाबो के मुताबिक इस मिशन के लिए सैकड़ों इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने आठ साल तक काम किया है। यह यान करीब 430,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरेगा। इस स्‍पीड से यदि फिलाडेलफिया से वाशिंगटन डीसी जाया जाए तो महज एक सैकेंड का समय लगेगा। यह यान नासा के इतिहास का सबसे तेज गति से चलने वाला यान है।
मिशन की खासियत:-इस मिशन की एक बड़ी खासियत ये भी है कि सूरज के नजदीक जाते हुए पार्कर सोलर प्रोब नजदीकी ग्रह वीनस की ग्रेविटी का इस्‍तेमाल करेगा। पूरे मिशन के दौरान यह यान करीब सात बार वीनस से होकर गुजरेगा। मिशन से जुड़े वैज्ञानिक सजाबो का कहना है कि इस यान और इसमें लगी मशीनों को सूर्य की तपन से बचाने के लिए फिलहाल कोई तकनीक नहीं है। इसके बावजूद यान पर इससे बचाव के उपाय के तहत शील्‍ड लगाई गई है। यह शील्‍ड यान के ऊपरी हिस्‍से पर लगाई गई है। इसकी वजह से यान के अंदर की मशीन काफी हद तक ठंडी रह सकेगी।
यान पर लगी शील्‍ड:-यह शील्‍ड करीब 4.5 इंच मोटी है और यह कार्बन कंपोजिट फोम से बनी है। इस शील्‍ड पर करीब 2500 डिग्री फारेनहाइट का तापमान होगा जबकि यान के अंदर यह तापमान करीब 85 डिग्री फारेनहाइट होगा। नासा ने इस मिशन का नाम डॉक्‍टर यूगेन पार्कर के नाम पर रखा है। वह पहले ऐसे सोलर फिजीसिस्‍ट थे जिन्‍होंने 1958 में सूर्य पर चलती तेज और गर्म हवाओं के बारे में बात की थी। सूर्य के कोरोना से गुजरते हुए पार्कर को भी इसका सामना करना पड़ेगा। कोरोना का अपना ही तापमान लाखों डिग्री है।
सबसे करीब पहला मिशन;-नासा का यह पहला ऐसा मिशन है जिसे सूर्य के इतना करीब भेजा गया है। यहां का तापमान और रेडियेशन हमारी सोच से कहीं अधिक है। अकसर पूर्ण सूर्यगहण के दौरान जिस तरह की रोशनी चांद के चारों तरफ दिखाई देती है वही दरअसल कोरोना है। नासा को इस मिशन से काफी उम्‍मीदें हैं। इस मिशन की सफलता कई तरह के सवालों का जवाब दे सकेगी। इसके अलावा सूर्य को करीब से समझने मे भी मदद मिलेगी।

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी और व्हाइट हाउस की सलाहकार इवांका ट्रंप ने श्वेत वर्चस्व, नस्लवाद और नव-नाजीवाद की निंदा की। इवांका ने वर्जिनिया में श्वेत राष्ट्रवादियों की रैली व विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हुए हमले की सालगिरह पर ट्वीट किया। रविवार को व्हाइट हाउस के बाहर उसी तरह की एक रैली आयोजित की गई है। इवांका ने ट्विटर पर लिखा कि एक साल पहले चार्लोट्सविले में हमने नफरत, नस्लवाद, कट्टरता और हिंसा का बदसूरत रूप देखा था।उन्होंने आगे लिखा की हम ऐसे देश में रहते है जहां हमें आजादी, बोलने की स्वतंत्रता और राय की विविधता जैसे अधिकार मिलते हैं। हमारे महान देश में श्वेत वर्चस्व, नस्लवाद और नव-नाजीवाद के लिए कोई जगह नहीं है। इवांका ने कहा कि घृणा, नस्लवाद और हिंसा के साथ एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने के बजाय, हमें एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। हम अपने समुदायों को मजबूत कर सकते हैं और हर अमेरिकी को अपनी पूरी क्षमता प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।बता दें कि एक साल पहले अमेरिका के वर्जीनिया में श्वेत राष्ट्रवादियों की रैली व विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच एक शख्स तेज रफ्तार में अपनी कार लेकर घुस गया था। इससे मौके पर ही 32 वर्षीय महिला ने दम तोड़ दिया था जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। चालक ने कार को फुटपाथ पर चढ़ा दिया था। लोगों पर कार चढ़ाने के बाद चालक ने पूरी रफ्तार में ही अपनी गाड़ी पीछे भी की थी।

नई दिल्‍ली। अमेरिका अब अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकन आर्म्‍ड फोर्स की छठी ब्रांच बनाने की तैयारी कर रहा है। यह ब्रांच जमीन के लिए नहीं बल्कि स्‍पेस के लिए तैयार की जाएगी। यही वजह है कि इस ब्रांच को स्‍पेस फोर्स का नाम दिया गया है। 2020 तक औपचारिक रूप से यह सेना का अंग बनेगी। अंतरिक्ष में अगले विश्व युद्ध होने की आशंका के मद्देनजर अमेरिका की तैयारियां जोरों पर हैं। दुनिया में अब तक सिर्फ रूस के पास स्पेस फोर्स थी जो 1992-97 और 2001-11 में सक्रिय रही।
रूस और चीन से डर गया अमेरिका:-नई सेना की तैनाती के पीछे रूस और चीन से डर बड़ी वजह है। अमेरिकी राष्ट्रपति और उनके समर्थकों को लगता है कि दोनों देश बड़ी संख्या में अंतरिक्ष में उपग्रह लांच कर रहे हैं। उन्हें डर है कि अमेरिका संचार, नेवीगेशन और गुप्त सूचनाओं के लिए उपग्रहों पर अत्यधिक निर्भर हो गया है। ऐसे में अगर अमेरिकी उपग्रहों पर हमला होता है तो अमेरिका की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसीलिए वह पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे अपने उपग्रहों की सुरक्षा पुख्ता करने के लक्ष्य से इस नई सेना की तैनाती करना चाहते हैं। कुछ साल पहले चीन ने अपने एक निष्क्रिय हो चुके सेटेलाइट को धरती से मिसाइल दागकर नष्ट किया था। उसकी यह उपलब्धि भी अमेरिका की चिंता बढ़ाने वाली रही।
अभी तक थी पांच शाखाएं अब बनेगी छठी शाखा:-फिलहाल अमेरिकी सेना की पांच शाखाएं हैं- वायु सेना, थल सेना, कोस्ट गार्ड, मरीन और नौसेना। स्पेस फोर्स छठी शाखा बनेगी। इसके लिए सबसे पहले इस साल के अंत तक अमेरिकी स्पेस कमांड बनाया जाएगा। इसके बाद ट्रंप प्रशासन इसके लिए फंडिंग जुटाएगा और कानूनी अनुमतियां लेने के बाद अगले वर्ष तक इसे स्वतंत्र विभाग के तौर पर सेना में शामिल करेगा। इसके लिए अमेरिका स्‍पेस वैपंस भी तैयार करेगा। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इसका पूरा मसौदा तैयारा कर इसकी घोषणा भी कर दी है। ट्रंप के इस फैसले ने न सिर्फ अमेरिकियों को चौंकाने का काम किया है बल्कि पूरी दुनिया उनके इस फैसले से हैरत में है।
क्या है स्पेस फोर्स:-यह सैन्य विभाग की ऐसी शाखा होती है जो अंतरिक्ष में युद्ध करने में सक्षम होती है। डोनाल्ड ट्रंप ने नए और स्वतंत्र सैन्य विभाग के लिए यही नाम सोचा है। फिलहाल अमेरिका में अंतरिक्ष के सभी मामले वायु सेना के अंतर्गत आते हैं। ट्रंप काफी समय से ऐसी सेना तैयार करने के विचार में थे, जिसका कद बिकुल वायु या थल सेना जितना हो।
यूएस के लिए रूस और चीन बड़ी रुकावट:-अमेरिका के इस प्रोजेक्‍ट पर जानकार मानते हैं कि चीन और रूस जैसे बड़े देश कभी नहीं चाहेंगे कि अमेरिका इस क्षेत्र में उनसे आगे निकल जाए। यहां पर आपको ये बताना भी जरूरी होगा कि चीन भी अपने स्‍पेस मिलिट्री प्रोग्राम पर पिछले दो वर्षों से काम कर रहा है। यहां ये भी काफी दिलचस्‍प है कि एक ओर जहां अमेरिका स्‍पेस फोर्स बनाने की राह में आगे बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर भारत आउटर स्‍पेस में हथियारों की रेस के सख्‍त खिलाफ है। यूं भी मौजूदा समय में रूस और चीन का अमेरिका के साथ कई मुद्दों पर 36 का आंकड़ा है।
युद्ध क्षेत्र नहीं है स्‍पेस;-ट्रंप की इस योजना में सबसे बड़ी बाधा भी स्‍पेस ही बनने वाली है। इसकी वजह ये है कि स्‍पेस को किसी भी मिलिट्री ऑपरेशन के लिए इस्‍तेमाल नहीं किया जा सकता है। लिहाजा यहां का फिजीकल एनवायरमेंट ट्रंप की योजना के मुताबिक सटीक नहीं बैठता है। आपको बता दें कि धरती पर कुछ ऐसी जगह हैं जहां पर युद्ध की गतिविधियों को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। इसमें अंटार्कटिका, नोर्वे आदि शामिल हैं। यहां आपको ये भी बता दें कि अंटार्कटिका को विश्‍व बिरादरी ने रिसर्च के मकसद से युद्धक क्षेत्रों से अलग किया है। वहीं नोर्वे में दुनिया का सबसे बड़ा बीज बैंक है, जो बर्फ की सतह से कई मीटर नीचे स्थित है। यहां पर धरती पर मौजूद लगभग हर वनस्‍पति के बीज मौजूद हैं। लिहाजा एक समझौते के तहत इसको भी इसी श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह से स्‍पेस भी बि‍ल्‍कुल अलग है।
मैटिस का वो पत्र:-ट्रंप इस बात को जरूर मान रहे हैं कि अमेरिका स्‍पेस में बढ़त बनाने की जुगत में लगा है। वहीं दूसरी और ट्रंप प्रशासन के कुछ सदस्‍य ट्रंप की इस योजना पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं। आपको बता दें कि इस नई आर्म्‍ड फोर्स की शुरुआत पहले से ही हो रही थी। इसका खुलासा अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्‍स मैटिस ने पिछले वर्ष अक्‍टूबर में सदन को लिखे एक पत्र में किया था। उस वक्‍त उन्‍होंने इसको अमेरिका के लिए बड़ा चैलेंज है। इससे जुड़ा एक बड़ा तथ्‍य ये भी है कि यह अमेरिकी बजट में बड़ा इजाफा भी करने वाला है। वहीं एक तथ्‍य यह भी है कि इस फोर्स का मकसद संयुक्‍त युद्धनी‍ति में अमेरिकी की मौजूदगी और उसकी बढ़त है।

नई दिल्ली। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली बीसीसीआइ के नए बॉस बन सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक गांगुली बीसीसीआइ के अगले अध्यक्ष बन सकते हैं और उनके बीसीसीआइ प्रसिडेंट बनने का रास्ता भी साफ हो गया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की कुछ सिफारिशों को अलग करके और कुछ बदलावों के साथ नए संविधान को मंजूरी दी थी, उस वजह से गांगुली के अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया है।सौरव गांगुली मौजूदा समय में बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (कैब) के अध्यक्ष हैं और अगर वो वहां पर अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं तो बीसीसीआइ के अध्यक्ष पद के लिए योग्य हो जाएंगे। बीसीसीआइ के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि सौरव गांगुली इस पद के लिए एकदम योग्य हैं और वो सभी पैमानों पर खरे उतरते हैं।हालांकि सौरव गांगुली अगर बीसीसीआइ अध्यक्ष के पद पर विराजमान होते हैं, तो उन्हें दो साल के बाद ही इस पद को छोड़ना होगा। क्योंकि नए नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति बीसीसीआइ में लगातार छह साल तक ही किसी प्रशासनिक पद पर रह सकता है। वहीं सूत्रों के अनुसार ये खबर भी है कि गांगुली तभी अध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे जब उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा होगा।इससे पहले इस साल की शुरुआत में सौरव गांगुली ने एक इंटरव्यू में कहा था कि एक खिलाड़ी बेहतरीन प्रशासक साबित हो सकता है लेकिन ये निर्भर करता है कि वो कितना समय दे पाता है। इसके अलावा एक प्रशासक के तौर पर आप क्या करने वाले हैं ये भी काफी अहम हो जाता है।

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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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