Editor

Editor

दावोस - स्विट्जरलैंड के दावोस में आ‍योजित 48वां वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फोरम वैश्विक स्‍तर पर भारत की मजबूत छवि की मिसाल पेश करने वाला है। इस सालाना सम्‍मेलन के लिए दुनियाभर के कई ताकतवर नेताओं का जमावड़ा जुटा है। मगर इसके सत्र की शुरुआत भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण से हुई। इस मौके पर उन्‍होंने 'न्‍यू इंडिया' की तस्‍वीर पेश करते हुए दुनिया भर के कारोबारियों को भारत में निवेश करने का न्‍योता दिया। पीएम मोदी ने कहा कि अगर वेल्‍थ के साथ वेलनेस चाहते हैं तो भारत आएं।
पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि पिछली बार 1997 में भारतीय पीएम एचडी देवगौड़ा दावोस आए थे। उस वक्‍त हमारा जीडीपी 400 बिलियन डॉलर से थोड़ा ज्‍यादा था। अब यह इससे छह गुना से भी ज्‍यादा है। वहीं पीएम मोदी ने कहा, 1997 में चिड़िया ट्वीट करती थी, अब मनुष्‍य करते हैं। तब अगर आप अमेजन इंटरनेट पे डालते तो नदियां और जंगल की तस्‍वीर आती।
पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा कि तकनीक ने दुनिया को बदला है। उन्‍होंने कहा, 'अाज डाटा सबसे बड़ी संपदा है। डाटा के वैश्विक संचार से सबसे बड़े अवसर बन रहे हैं और सबसे बड़ी चुनौतियां भी।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। उन्‍होंने कहा कि वो कौन सी शक्तियां हैं, जो दुनिया में सामंजस्य की जगह अलगाव चाहतीं है? पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा कि भारत हमेशा से वसुधैव कुटुम्बकम के मंत्र में विश्‍वास करता है, जिसका मतलब होता है कि पूरी दुनिया एक परिवार है और दूरियों को दूर करने के लिए यह अब भी प्रासंगिक है।
पीएम मोदी ने कहा कि मानवता के लिए तीन महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। इनमें जलवायु परिवर्तन एक बहुत बड़ी चुनौती है। जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। मानव धरती की संतान है, फिर धरती के साथ ही ऐसा बर्ताव क्यों? संसाधनों को जरूरत के हिसाब से उपयोग करना चाहिए। लालच की पूर्ति के लिए संसाधनों का उपभोग सही नहीं है। महात्‍मा गांधी भी इसके विरोध में थे। हम प्राकृतिक संसाधनों का शोषण कर रहे हैं। हमें अपने आप से यह सवाल पूछने की जरूरत है कि क्‍या हम विकास की तरफ बढ़ रहे हैं या पीछे जा रहे हैं।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी पीएम मोदी बोले। उन्‍होंने कहा कि यह एक बड़ा खतरा है और उस वक्‍त और भी ज्‍यादा जब कोई आपको अच्‍छे आतंकवाद और बुरे आतंकवाद की परिभाषा देता है।
पीएम मोदी ने एक बार फिर भारत को जोरदार तरीके से दुनिया के सामने रखा। उन्‍होंने कहा, भारत में हम हमारे लोकतंत्र और विविधता पर गर्व करते हैं। विविध धर्मों, संस्‍कृति, भाषाओं, वेशभूषा और खानपान वाले एक समाज के लिए लोकतंत्र सिर्फ एक राजनीतिक प्रणाली नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।
2014 के ऐतिहासिक आम चुनाव का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में पहली बार जनता ने 30 साल बाद 2014 में किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत दिया। हमने सभी के विकास के लिए संकल्‍प लिया ना कि एक विशेष वर्ग के लिए। हमारा मकसद 'सबका साथ सबका विकास' है। जीएसटी जैसा बड़ा सुधार हमारी सरकार ने किया, हमारे काम की दुनियाभर मे सराहना हो रही है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि विश्व शांति के लिए भारत हमेशा खड़ा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में भारत का अहम योगदन रहा है। वह हमेशा दुनिया में शांति के लिए काम करता रहेगा। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे साझा भविष्य के लिए विश्व की बड़ी ताकतों के बीच सहयोग बेहद जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि हम मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाएं, जहां सामंजस्य एवं सहयोग के लिए काम हो।
इससे पहले स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति ऐलेन बर्सिट और प्रफेसर क्लॉस श्वाब के साथ पीएम मोदी की यह तस्‍वीर सामने आई थी।
इस बार यह सम्‍मेलन कई मामलों में भारत के लिए भी बेहद खास होने वाला है। पीएम मोदी ने दावोस से एक बार फिर पूरी दुनिया को संदेश देते हुए कहा है कि भारत का मतलब बिजनेस है और सभी के लिए इसके दरवाजे खुले हुए हैं।
पीएम मोदी मंगलवार शाम दावोस पहुंचे और रात्रि भोज पर दुनियाभर के कारोबारियों और मुख्‍य कार्यकारी अधिकारियों को भारत में कारोबार के सुनहरे अवसराें से अवगत कराया।
पीएम मोदी दावोस की बर्फीली वादियों में मौसम का लुत्‍फ उठाते भी नजर आए। उन्‍होंने दावोस से अपनी एक तस्वीर सोशल मीडीया पर शेयर की, जिसमें वह बर्फबारी का आनंद उठाते हुए दिखे। पीएम मोदी ने तस्‍वीर के साथ लिखा, 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने के लिए स्विटजरलैंड में हूं, जहां मैं विश्व के नेताओं, कारोबार के क्षेत्र के विशेषज्ञों से मुलाकात करूंगा। मैं भारत में विभिन्न आर्थिक संभावनाओं के बारे में चर्चा करूंगा।'
दावोस पर भी भारतीय रंग चढ़ गया है। इस समय शहर की ऊंची-ऊंची इमारतों के ऊपर और चलती-फिरती बस पर हर तरफ सिर्फ भारत और भारतीय कंपनियों के विज्ञापन ही दिख रहे हैं। यहां चाय और पकौड़े की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है, वहीं बड़ापाव और डोसा भी लोगों के बीच विशेष पसंद किया जा रहा है।
गौरतलब है कि मोदी 20 साल बाद भारत के पीएम के रूप में दावोस सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने पहुंचे हैं। इससे पहले 1997 में एच डी देवगौड़ा शामिल हुए थे।
आपको बता दें कि वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फोरम स्विट्जरलैंड की गैर लाभकारी संस्था है। इसका मकसद बिजनेस, राजनीति, शैक्षिकव अन्य क्षेत्रों के वैश्विक नेताओं व अग्रणी लोगों को एक साथ लाकर वैश्विक, क्षेत्रीय और औद्योगिक दिशा तय करना है। इसका गठन 1971 में हुआ था।

लखनऊ - भारतीय जनता पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 से भी अच्छा प्रदर्शन दोहराने के प्रयास में है। इसको लेकर पार्टी काफी गहन मंथन पर रही है और उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में सूबे की 80 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
भारतीय जनता पार्टी के इस अभियान को लेकर सबसे बड़ी चुनौती अपने ही सांसद बन गए हैं। क्षेत्र में उनकी छवि ठीक नहीं है और कार्यकर्ताओं का असंतोष चरम पर है। पार्टी की कसौटी पर दो दर्जन से ज्यादा सांसद खरे नहीं उतर रहे हैं। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में इनका टिकट कट सकता है।
सीतापुर के महोली में तहसील परिसर में हाल में कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान धौरहरा की सांसद रेखा वर्मा एवं महोली के विधायक शशांक त्रिवेदी के बीच हुए बवाल ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी। यह केवल एक घटना ही नहीं बल्कि अनुशासित पार्टी के लिए बड़ी चुनौती भी है। दरअसल, क्षेत्र में सांसदों की छवि को लेकर नेतृत्व तक ठीक इनपुट नहीं पहुंच रहे हैं। नेतृत्व की चिंता इस बात से भी बढ़ गई है कि सांसदों को जो भी कार्यक्रम और लक्ष्य सौंपे गये उसमें कई सांसदों ने पूरी तरह निष्क्रियता दिखाई। 
विधानसभा चुनाव में बेहतर रिजल्ट आने की वजह से सांसदों की कमी छिप गई, लेकिन निकाय चुनाव और अन्य कार्यक्रमों ने उनकी भूमिका उजागर की है। निकाय चुनाव में खराब परिणाम वाले कई क्षेत्रों के ऐसे सांसद भी चिह्नित किये जा रहे हैं जिनका कार्य और व्यवहार दोनों ठीक नहीं है। भाजपा अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय और संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने कार्यकर्ताओं से मिली शिकायत के आधार पर दो दर्जन से ज्यादा ऐसे सांसदों की सूची तैयार की है जिनकी जनता के बीच नकारात्मक छवि बनी हुई है। पश्चिम से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक ऐसे सांसदों के बारे में अमित शाह से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी तक अवगत हो चुके हैं।
मंत्री व विधायकों को मौका देने की तैयारी 
भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लिए उप्र की 80 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए वह जनता के बीच लोकप्रिय और प्रभावी लोगों को मौका देने की तैयारी कर रही है। भाजपा अपने कई विधायकों को इसके लिए संकेत दे चुकी है कि वह क्षेत्र में मेहनत करें। पार्टी में इस बात का भी मंथन चल रहा है कि जिस बिरादरी के सांसद का टिकट कटेगा, उसी बिरादरी को मौका दिया जाएगा। अगर संबंधित जाति की बात पक्की नहीं हो सकी तो अगड़ों की जगह अगड़ा और पिछड़ों में पिछड़ी जाति को ही मौका देंगे। प्रदेश सरकार के कुछ मंत्री भी लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाये जा सकते हैं। 
पीएम मोदी पहले ही जता चुके नाराजगी
पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश के भाजपा सांसदों की बैठक में मोदी और अमित शाह नाराजगी जता चुके हैं। सांसदों को केंद्र और प्रदेश की योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए जो जिम्मेदारी दी गई वह उसे पूरा नहीं कर सके। मोदी ने भाजपा के सभी सांसदों को निर्देश दिया था कि जनता के बीच सरकार के कामकाज को ठीक से प्रस्तुत करें।

नई दिल्ली - भारतीय राजनीति और परिवारवाद में गहरा संबंध है। राजनेता अक्सर दलील देते हैं कि अगर डॉक्टर का बेटा डाक्टर, इंजीनियर का बेटा इंजीनियर हो सकता है तो नेताओं के बेटों को लेकर लोगों को परेशान नहीं होना चाहिए। बेशक राजनेताओं के बातों में दम है। लेकिन सवाल है कि राजनेता एक दूसरे पर परिवारवाद और वंशवाद को लेकर तीखे तंज क्यों करते हैं। इसमें ऐसे नेता हैं जो आदर्शवाद की दुहाई दिया करते थे लेकिन हकीकत में वो लोग भी उसी अंधी रेस के हिस्सा बन गए। 90 के दशक तक कांग्रेस की पहचान वंशवाद के लिए होती रही। विपक्षी दल एकसुर में कांग्रेस पर निशाना साधते थे। ये बात अलग है कि वो दल और राजनेता जो कांग्रेस को किसी न किसी रूप में कटघरे में खड़ा करते थे उस दल के नक्शेकदम पर आगे बढ़ने का फैसला किया। भारत की राजनीति में शिवसेना,राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी कांग्रेस पार्टी, डीएमके, शिरोमणि अकाली दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी ये ऐसे दल हैं जिनमें वंशवाद की झलक साफ तौर पर देखने को मिलती है। लेकिन इससे पहले आप को बताते हैं कि वंशवाद, 15वीं और 16वीं लोकसभा में आपस में क्या संबंध है। 
परिवारवाद पर कुछ आंकड़े राजनीतिक दलों को नसीहत देने के लिए काफी हैं। इसके मुताबिक 15वीं यानी 2009 के लोकसभा में 545 में से 156 सांसद वंशवाद के उदाहरण थे और वर्तमान लोकसभा में भी लगभग इतने ही किसी पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं। मौजूदा लोकसभा में कांग्रेस के 47 फीसद, भाजपा के 40 फीसद, बीजू जनता दल के 40 फीसद, जबकि एनसीपी के 33 फीसद सांसद वंशवाद के दरवाजे से लोकसभा में प्रवेश हुए हैं। 
शिवसेना
1960 के दशक में महाराष्ट्र की धरती पर एक शख्स बाल ठाकरे ने मराठी अस्मिता के नाम पर राजनीति को एक दिशा देने की कोशिश शुरू की। उनका विरोध इस बात को लेकर था कि महाराष्ट्र की संपदा का गैरमराठी इस्तेमाल करते हैं,जिसका वो पुरजोर विरोध करते हैं। राजनीति के टीकाकारों ने इसे भारतीय एकता और अखंडता के लिए खतरा बताया। लेकिन उनकी अगुवाई में शिवसेना शहर से लेकर गांवों तक अपनी पकड़ मजबूत कर रही थी। बाला साहेब ठाकरे ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। लेकिन वो शिवसेना को पहचान दिलाने में कामयाब रहे। राज्य की राजनीति से लेकर केंद्र की राजनीति में उनकी पार्टी का दबदबा रहा। लेकिन उनके कमजोर पड़ने के साथ ही परिवार में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई। बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे को उनका स्वभाविक उत्तराधिकारी माना जाता था। लेकिन उन्होंने अपने बेटे उद्धव ठाकरे को पार्टी की कमान सौंपी। आज उनकी जयंती पर शिवसेना ने कुछ अहम फैसले किये जिसमें पार्टी ने 2019 का लोकसभा और विधानसभा चुनाव को अकेले लड़ने का फैसला किया है। 
कांग्रेस 
ऐतिहासिक पार्टी, बलिदानी पार्टी और न जाने कितने उपनाम। लेकिन एक सच ये भी है कि इसे नेहरू-गांधी परिवार की पार्टी ही माना जाता है। दरअसल अगर कांग्रेस को ऐसा कहा जाता है तो उसमें सच्चाई भी है। देश की आजादी के बाद कांग्रेस के शीर्ष पद पर पहुंचने में कुछ लोग ही कामयाब हुये। कांग्रेस का मतलब इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी का चेहरा है। ये बात अलग है कि कांग्रेस के अंदर अगर कोई आवाज उठी तो वो आवाज नेपथ्य में चली गई। राहुल गांधी की ताजपोशी से पहले विरोध के कई स्वर सुनने को मिले। लेकिन ये भी सच है कि जब राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद के लिए अपना पर्चा भरा तो उनके खिलाफ कोई चेहरा सामने नहीं आया। 
समाजवादी पार्टी
90 के दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह एक बड़े चेहरे के तौर पर उभर कर सामने आए। समाजवाद की राजनीति का उन्हें फायदा मिला और देश के सबसे बड़े सूबे के वो मुखिया बने। अपने राजनीतिक जीवन में वो बार बार कहा करते थे कि कांग्रेस का अर्थ नेहरू-गांधी परिवार है। इस परिवार ने देश को तरक्की की राह से बेपटरी कर दिया था। उनके जमाने में समाजवादी पार्टी में बड़े बड़े राजनेता थे जो लोगों की नब्ज पहचानते थे। लेकिन उन्हें लगता थी कि उनके परिवार से बेहतर जनता की समस्या को समझने वाला दूसरा और कोई शख्स नहीं है। उन्होंने पार्टी की कमान या तो अपने भाई शिवपाल सिंह को दी या उन्हें अपने बेटे अखिलेश यादव में काबिलियत दिखी। मौजूदा समय में जहां शिवपाल यादव हासिए पर हैं वहीं अखिलेश यादव अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। 
राष्ट्रीय जनता दल
राष्ट्रीय जनता दल और लालू प्रसाद किसी परिचय के मोहताज नहीं है। जब देश में आपातकाल लागू था उस वक्त लालू प्रसाद चीख चीख पर कांग्रेस की नीतियों का विरोध करते थे। कांग्रेस विरोध की राजनीति की बुनियाद पर उन्हें बिहार में जबरदस्त कामयाबी मिली और वो बिहार के सीएम बनने में कामयाब हुए। लेकिन पशुपालन घोटाले की आंच जब उन तक पहुंची तो उनके लिए कुर्सी पर बने रहना मुश्किल हो गया। ये एक ऐसा समय था जब ये माना गया कि उनकी पार्टी परिवारवाद की सच्चाई को तोड़ेगी। लेकिन राबड़ी देवी के सीएम बनने के साथ ही ये साफ हो गया कि उनका विरोध सिर्फ बयानों की एक ऐसी माला थी जो सिर्फ जनता के गले में पहनाने के लिए बनी थी। राज्य की राजनीति से करीब एक दशक तक बाहर रहने के बाद जब उनकी पार्टी एक बार फिर सत्ता में आई तो कयास लगाए जाने लगा कि इस दफा कुछ बदलाव दिखाई देगा। लेकिन तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को कमान दे कर ये साफ कर दिया कि राजनीति की जमीन पर बयान सिर्फ बयान होते हैं। 
डीएमके
तमिलनाडु की राजनीति में ब्राहम्ण प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए एम करुणानिध ने इस दल का गठन 60 के दशक में किया। तमिलनाडु की द्विदलीय राजनीति में डीएमके ने अपने आपको मजबूती के साथ स्थापित किया। लेकिन पार्टी में वंशवाद की नींव पड़ चुकी थी। करुणानिधि के दो बेटों एम अलागिरी और एम स्टालिन राज्य की राजनीति में उभर कर सामने आए। पार्टी में दूसरे नेताओं की मौजूदगी के बाद भी करुणानिधि अपने बेटों को तरजीह दी। ये बात अलग है कि पार्टी पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए उनके दोनों बेटे एक दूसरे के आमने सामने दिखे। लेकिन बाजी आखिर एम स्टालिन के हाथ लगी। 
शिरोमणि अकाली दल
पंजाब का राजनीति का जिक्र होता है तो शिरोमणि अकाली दल की भूमिका प्रासंगिक हो जाती है। कांग्रेस की नीतियों के विरोध में इस पार्टी का गठन प्रकाश सिंह बादल ने किया था। पंजाब के लोगों ने कांग्रेसके विकल्प के रूप में शिरोमणि अकाली दल को हाथों हाथ लिया। लेकिन इसके साथ ही साथ पार्टी में बादल परिवार का दबदबा बढ़ने लगा। प्रकाश सिंह बादल के बेटे सुखबीर सिंह बादल उनके उत्तराधिकारी के तौर पर उभरे। पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई में प्रकाश सिंह बादल के बेटे और भतीजे मनप्रीत सिंह बादल एक दूसरे के विरोधी के तौर पर सामने आए। ये बात अलग है कि सुखबीर सिंह बादल पर प्रकाश सिंह बादल ने भरोसा जताया।
पीडीपी
जम्मू कश्मीर की राजनीति में दूसरा नाम पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का है। मौजूदा समय में महबूबा मुफ्ती की अगुवाई में भाजपा के साथ पीडीपी सरकार में है। पीडीपी का गठन मुफ्ती मोहम्मद सईद ने की थी। मुफ्ती साहब ने केंद्र की सरकार में अहम भूमिका निभाई थी। पार्टी के गठन के समय मुफ्ती सईद ने कहा था कि उनकी पार्टी वंशवाद और परिवारवाद में भरोसा नहीं करती है। लेकिन समय के साथ साथ महबूबा मुफ्ती ने राजनीति में आने का फैसला किया। और एक तरह से पार्टी के ऊपर अपने प्रभुत्व को स्थापित करने में कामयाब रहीं। 
नेशनल कॉन्फ्रेंस
नेशनल कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर का एक प्रमुख राजनीतिक दल है। इसका इतिहास शेख अब्दुल्ला से शुरू होता है। शेख अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन रियासत के महाराजा हरि सिंह के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। जम्मू-कश्मीर का जब भारत में विलय हुआ तो रियासत की कमान शेख अब्दुल्ला के हाथों में आई। गुजरते हुए समय के साथ शेख अब्दुल्ला के बेटे फारुख अब्दुल्ला की एंट्री हुई।
राज्य और केंद्र की राजनीति में दखल देने वाले फारुख ने अपने बेटे को राजनीति का ककहरा सिखाना शुरू किया। ऐसी बात नहीं कि उनके दल में दूसरे कद्दावर नेता नहीं थे। लेकिन अपने वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें अपने बेटे से बेहतर दूसरा विकल्प नहीं दिखा

जयपुर - संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म 'पद्मावत' के खिलाफ देश व्यापी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही श्रीराजपूत करणी सेना का छह सदस्यीय दल फिल्म के रिलीज होने से पहले उसे देखेगा। निर्देशक भंसाली ने इन्हें रिलीज से पहले अपनी फिल्म देखने का न्योता दिया है।
हालांकि, श्रीराजपूत करणी सेना के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने बताया कि वह फिल्म नहीं देखेंगे। लेकिन फिल्म देखने के लिये इतिहासकारों, राजघरानों के सदस्यों का एक पैनल का गठन किया गया है।
कालवी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ''मैं स्वयं फिल्म नहीं देखूंगा, लेकिन हमने :संगठन: फिल्म देखने के लिये छह सदस्यीय एक पैनल बनाया है।
उन्होंने बताया कि इतिहासकार आर. एस. खंगारोत, बी. एल. गुप्ता, कपिल कुमार, रोशन शर्मा, मेवाड़ राज परिवार के सदस्य विश्वराज सिंह और बांसवाड़ा राज परिवार के सदस्य जगमाल सिंह को पैनल में शामिल किया गया है।
कालवी ने बताया कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म की पूर्व स्क्रीनिंग के लिये इन सभी को चुना था। प्रोफेसर कपिल कुमार सहित तीन लोगों ने फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग देखी।
उन्होंने कहा कि फिल्म देख चुके इतिहासकार कपिल कुमार उसका विरोध कर रहें है। भंसाली प्रोडक्शन ने 20 जनवरी को फिल्म की पूर्व स्क्रीनिंग के लिये एक पत्र लिखा था, जिसके जवाब में उन्हें छह सदस्यों के बारे बता दिया गया है।
फिल्म निर्माताओं को चेतावनी देते हुए कालवी ने कहा कि भंसाली ने उन्हें आमंत्रित किया है ऐसे में वह हमारे विशेषज्ञों का अपमान ना करें और उनकी राय को दरकिनार नहीं किया जाये।

नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को केरल में लव जिहाद मामले पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक अहम फैसला देते हुए शादी की जांच से साफ इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर लड़का-लड़की कहते है कि उन्होंने शादी की है तो यह किसी जांच का विषय नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई जांच एजेंसी किसी के मैरिटल स्टेटस की जांच नहीं कर सकती। अगर लड़का-लड़की कहते हैं कि उनकी शादी हुई है तो इस पर जांच नहीं हो सकती। 
जांच पर कुछ नहीं बोला सुप्रीम कोर्ट ने 
सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी तरफ लव जिहाद के मामलों पर एनआईए की जांच का आदेश वापस लेने पर कुछ नहीं कहा। यानी एनआईए जांच जारी रखेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हदिया उर्फ अखिला को भी मामले में पार्टी बना लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई अब 22 फरवरी को होगी। आपको बता दें कि कोर्ट ने धर्म परिवर्तन कर निकाह करने वाली हदिया उर्फ अखिला को पिछले वर्ष पढ़ाई पूरी करने के लिए कॉलेज वापस भेज दिया था। एनआईए ने इस शादी को जिहादी तत्वों की बड़ी साजिश का एक हिस्सा बताया है। कोर्ट के आदेश पर एनआईए इस शादी के अलावा केरल में पिछले कुछ सालों में हुई इस तरह की शादियों की जांच कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
केरल के वाइकोम की रहने वाली अखिला तमिलनाडू के सलेम में होम्योपैथी की पढ़ाई कर रही थी। अखिला के पिता के एम अशोकन का आरोप है कि हॉस्टल में उसके साथ रहने वाली दो मुस्लिम लड़कियों ने उसे धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया। अखिला ने इस्लाम कबूल कर अपना नाम हदिया रख लिया। जनवरी 2016 में वो अपने परिवार से अलग हो गई। हदिया के पिता ने दिसंबर 2016 में केरल हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने दावा किया कि उनकी बेटी गलत हाथों में पड़ गई है। उसे आईएसआईएस का सदस्य बना कर सीरिया भेजा जा सकता है। उन्होंने बेटी को अपने पास वापस भेजने की मांग की। बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।

नई दिल्ली - सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बी. एच. लोया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ी सभी याचिकाओं की सुनवाई अब सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इससे संबंधित बॉम्बे हाई कोर्ट की दो याचिकाओं को अपने पास स्थानांतरित कर लिया है। 
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षकारों से कहा कि वह लोया मामले में ऐसे दस्तावेज जुटाएं जिन्हें अभी तक जमा नहीं किया गया है और उन्हें कोर्ट को सौंपें। 
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से कहा कि वे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर आरोप नहीं लगायें, क्योंकि वह इस मामले में पक्षकार नहीं हैं। आज की स्थिति के अनुसार यह स्वाभाविक मौत है, आरोप नहीं लगायें, हम दो फरवरी को दस्तावेजों का परीक्षण करेंगे। कोर्ट ने याचिकाओं में उठाये गये मुद्दों को 'गंभीर बताते हुये कहा, ''हमें सभी दस्तावेज बहुत ही गंभीरता से देखने होंगे।
एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता के यह कहने पर कि हाई कोर्ट मीडिया की आवाज दबा रहा है, प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने नाराजगी जताते हुए उनसे बयान वापस लेने और माफी मांगने के लिये कहा। सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया की मौत के मामले में किसी भी याचिका पर सुनवायी करने से सभी हाई कोर्ट को रोक दिया। 
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई के दिवंगत जज बी. एच. लोया की मौत की जांच को लेकर मीडिया में काफी चर्चा रही। पहले जज लोया की मौत को संदिग्ध बताया गया। फिर उनके बेटे अनुज लोया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उनके पिता की मौत में साजिश की आशंका नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जज लोया की मौत की जांच को लेकर सवाल उठाए थे।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच में जस्टिस डी. वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस ए एम खानविलकर शामिल हैं। भारतीय लोकतंत्र के 70 साल के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यायपालिका में गड़बड़ियों और जज लोया की मौत से संबंधित केस की सुनवाई कर रहे बेंच को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद ही चीफ जस्टिस ने जज लोया के केस की बेंच को बदल दिया।

औरंगाबाद - ऑल इंडिया मजिलस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि तीन तलाक विधेयक मुस्लिमों के खिलाफ एक साजिश है और समुदाय के पुरूषों को दंडित करने की एक चाल है।
हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 'पद्मावत फिल्म से जुड़े विवाद के मामले पर संसद की एक समिति ने विचार किया था लेकिन तीन तलाक के मुद्दे को लेकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने कल रात एक जनसभा में कहा, ''तीन तलाक विधेयक मुस्लिम समुदाय के खिलाफ एक साजिश है। यह समुदाय की महिलाओं को सड़कों पर लाने और पुरूषों को जेल भेजने की एक चाल है।
ओवैसी ने हालांकि कहा कि मुस्लिम समुदाय को उनलोगों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए जो तलाक के लिए तीन तलाक का सहारा लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए कुछ नहीं कर रहे लेकिन दूसरों द्वारा किए जाने वाले अच्छे काम का श्रेय लेने में हमेशा आगे रहते हैं।
सांसद ने कहा, ''भाजपा मुस्लिम मुक्त भारत चाहती है और ऐसा होगा नहीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वी डी सावरकर की विचारधारा थोपने की कोशिश कर रही है। ओवैसी ने कहा, ''एम एस गोवलकर, के बी हेडगेवार और सावरकर हिंदुत्व विचारधारा के थे और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

नई दिल्ली - चुनाव आयोग द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट के शरण में हैं। आप ने पार्टी के विधायकों को अयोग्य ठहराने के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की है। आप की इस याचिका पर हाईकोर्ट कल सुनवाई करेगा। याचिका में चुनाव आयोग के आप विधायकों को अयोग्य ठहराने के फैसले को निरस्त करने की गुहार लगाई गई है।
इससे पहले आप विधायकों ने खुद को अयोग्य ठहराने की चुनाव आयोग की सिफारिश पर रोक लगाने के खिलाफ दायर याचिका वापस ले ली थी। आप के विधायकों की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि उनकी याचिका अर्थहीन हो गई है, क्योंकि राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की सिफारिश स्वीकार कर ली है। साथ ही उन्हें अयोग्य करार देने की अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
आप विधायकों के वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा था कि वह लाभ के पद मामले में 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने वाले राष्ट्रपति के आदेश का परीक्षण करने के बाद अपील दायर करेंगे।
आप ने पार्टी के 20 विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द किये जाने का ठीकरा केन्द्र सरकार पर फोड़ते हुए दिल्ली की 20 सीटों पर उपचुनाव को ही अब एकमात्र विकल्प बताया था।
इन विधायकों की सदस्यता रद्द:
1.नरेश यादव (महरौली)
2.सोमदत्त(सदर बाजार)
3.प्रवीन कुमार (जंगपुरा)
4.नितिन त्यागी (लक्ष्मीनगर)
5.आदर्श शास्त्री (द्वारका)
6.संजीव झा (बुरारी)
7.जरनैल सिंह (तिलकनगर)
8.सुखवीर सिंह (मुंडका)
9.मदन लाल (कस्तूरबानगर)
10.सारिका सिंह (रोहतासनगर)
11.अल्का लांबा (चांदनीचौक)
12.राजेश ऋषि (जनकपुरी)
13.अनिल कुमार बाजपेई (गांधीनगर)
14.मनोज कुमार (कोंडली)
15.कैलाश गहलौत (नजफगढ़)
16.अवतार सिंह (कालकाजी)
17.विजेंदर सिंह (राजिंदर नगर)
18.राजेश गुप्ता (वजीरपुर)
19.शरद कुमार (नरेला)
20.शिवचरन गोयल (मोती नगर)
ये है पूरा मामला
आम आदमी पार्टी ने 13 मार्च 2015 को अपने 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। इसके बाद 19 जून को एडवोकेट प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास इन सचिवों की सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन किया। राष्ट्रपति की ओर से 22 जून को यह शिकायत चुनाव आयोग में भेज दी गई। शिकायत में कहा गया था कि यह 'लाभ का पद' है इसलिए आप विधायकों की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए।
इससे पहले मई 2015 में चुनाव आयोग के पास एक जनहित याचिका भी डाली गई थी। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि विधायकों को संसदीय सचिव बनकर कोई 'आर्थिक लाभ' नहीं मिल रहा। इस मामले को रद्द करने के लिए आप विधायकों ने चुनाव आयोग में याचिका लगाई थी।
वहीं राष्ट्रपति ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के संसदीय सचिव विधेयक को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। इस विधेयक में संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान था।

जम्मू - सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से बिना उकसावे के किये जा रहे संघर्षविराम का मुंहतोड़ जवाब दिया है। पाकिस्तान के खिलाफ 'सटीक जवाबी कार्रवाई' करते हुए पिछले चार दिनों में बीएसएफ ने मोर्टार के 9000 ये ज्यादा गोले दागे। इस दौरान कई जगहों पर दुश्मन की चौकियों और पाकिस्तानी रेंजर्स के तेल डिपो को तबाह किया गया। बीएसएफ और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि जम्मू से लगी 190 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा का इलाका ''बेहद तनावपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान रविवार शाम से ही इस समूचे इलाके में भारी फायरिंग कर रहा है।'
उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने 19 जनवरी से अब तक मोर्टार के करीब 9000 गोले दागे हैं। पाकिस्तान द्वारा इलाके की शांति भंग करते हुए बीएसएफ की चौकियों और नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया था। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा किये जा रहे बार-बार संघर्षविराम उल्लंघन के जवाब में उसने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई जगह उसकी चौकियों पर भारी गोलीबारी कर तबाह कर दिया।
बीएसएफ के एक प्रवक्ता ने कहा, ''पाकिस्तान द्वारा जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना उकसावे के की जा रही फायरिंग का बीएसएफ उपयुक्त और सटीक जवाब दे रही है। सीमा सुरक्षा बल द्वारा की जा रही सटीक फायरिंग में कई स्थानों पर दुश्मन के गोलीबारी के ठिकानों, गोलाबारूद और तेल डिपो को तबाह कर दिया गया।
प्रवक्ता ने दो छोटी वीडियो क्लिप्स भी जारी कीं जिनमें कथित तौर पर तेल डिपो को तबाह होते दिखाया गया है। 
जम्मू में सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से गुरुवार से की जा रही गोलीबारी में पांच सुरक्षाकर्मियों समेत 12 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 60 से ज्यादा लोग घायल हुये हैं।
बीएसएफ जवान की पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि
जम्मू कश्मीर में सीमा पार से हुई गोलीबारी में शहीद हुए बीएसएफ जवान लांस नायक सैम अब्राहम की मावेलिक्कारा (केरल) में उनके पैतृक नगर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। अब्राहम का पार्थिव शरीर बीती रात केरल लाया गया था और सोमवार को सुबह यहां लाया गया।
उनके पार्थिव शरीर को पहले स्कूल में रखा गया जहां उन्होंने पढ़ाई की थी और बाद में उनके घर ले जाया गया जहां उनके माता पिता, दो साल की बेटी और गर्भवती पत्नी ने उन्हें अंतिम विदाई दी। स्कूली बच्चों सहित काफी संख्या में लोगों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी। उनकी अंत्येष्टि सोमवार दोपहर सेंट ग्रेगोरियस आर्थोडोक्स चर्च कब्रिस्तान में की गई। छठी मद्रास रेजीमेंट के सदस्य एवं 34 वर्षीय अब्राहम शुक्रवार को पाकिस्तानी सैनिकों की गोलीबारी में नियंत्रण रेखा पर सुंदेतबनी सेक्टर में शहीद हो गए थे।

नई दिल्ली - आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग को खाप करार दिया और नए चुनाव आयुक्त ओपी रावत और भारतीय जनता पार्टी के संबंधों पर सवाल उठाया। आप के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि नए चुनाव आयुक्त ओपी रावत रावत ने आप के 20 विधायकों की सदस्यता के मामले की सुनवाई से अपने आपको दूर रखा था क्योंकि ऐसा आरोप था कि वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा नेताओं के करीबी है। 
चड्ढा ने कहा कि छह महीने के बाद रावत बिना पार्टी या विधायकों को सूचित किए हुए वह अचानक से इस केस का हिस्सा हो गए। आप प्रवक्ता ने कहा- “भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब एक जज जिसने केस की सुनवाई से मना किया हो वह पीछे के दरवाजे से फिर उस केस की सुनवाई करने आ जाए।”
गौरतलब है कि शुक्रवार को चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करने की राष्ट्रपति से सिफारिश की थी।

Page 1 of 2166

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें