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मंडला - पीएम मोदी ने मंडला में कहा कि केंद्र सरकार ने बच्चियों से दुष्कर्म करने वाले राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों को अब फांसी पर लटकाने का कानून बनाया है। पीएम ने कहा कि हमारी सरकार ने जनता की आवाज पर ऐसा कड़ा कानून बनाया है। उन्होंने ये भी कहा कि बेटियों को सशक्त बनाने के लिए तो सरकारें काम कर रहीं हैं लेकिन जरूरत इस बात की है कि अभिभावक अपने बेटों को जिम्मेदार बनाएं ताकि वे भी बेटियों को सम्मान की नजरों से देखें।
बेटियों को निशाना बनाने वालों को फांसी
बेटियों से दुष्कर्म करने वाले राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों को फांसी पर लटकाया जाएगा। केंद्र सरकार ने ये कड़ा कानून बनाया है। ये बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंडला में कही। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कार्यक्रम में शिरकत करते हुए पीएम मोदी ने पहली बार इस मुद्दे पर बात की। गौरतलब है कि 22 अप्रैल को ही राष्ट्रपति ने इस कानून पर हस्ताक्षर किए हैं। पीएम ने कहा कि राक्षसी प्रवृत्ति के लोग बेटियों को निशाना बना रहे हैं ऐसे में उन्हें कड़ी सजा देने के लिए ही ये सख्त कानून बनाया गया है।
बेटों को भी सिखायें जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि जनता की आवाज पर हमने दुष्कर्म को लेकर कड़ी सजा का कानून बनाया। उन्होंने ये भी कहा कि बेटियों को सशक्त बनाने के लिए तो सरकारें काम कर रहीं हैं लेकिन जरूरत इस बात की है कि अभिभावक अपने बेटों को जिम्मेदार बनाएं ताकि वे भी बेटियों को सम्मान की नजरों से देखें। बेटों पर जिम्मेदारी बढ़ेगी तो वे भी दूसरों का सम्मान करना सीखेंगे।


जयपुर - जोधपुर जेल में बंद आसाराम के फैसले की घड़ी करीब आ गई है ऐसे में उन्‍हें अब भगवान से ही उम्‍मीद है। दरअसल, जोधपुर के कलेक्टर ने जब आसाराम से पूछा, ‘फैसले के बारे में क्या सोच रहे हो बापू, तो आसाराम ने कहा 'होई है वहीं जो राम रचि राखा।' आसाराम पर चल रहे नाबालिग से दुष्कर्म मामले में बुधवार 25 अप्रैल को जोधपुर कोर्ट की ओर से जोधपुर सेंट्रल जेल में ही फैसला सुनाया जाएगा। इसके लिए जेल में ही कोर्ट रूम बनाया गया है।
लागू है धारा 144, जेल में ही लगेगी कोर्ट
आसाराम के समर्थक भले ही फैसले के दिन शांति बनाए रखने का दावा कर रहे हों लेकिन राजस्थान पुलिस को आशंका है कि फैसले के दिन कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है, इसलिए अभी से जोधपुर में धारा 144 लगा दी गई है और फैसले के दिन कोर्ट भी जेल में ही लगेगी और जेल के अंदर ही फैसला सुनाया जाएगा।
होई है वही जो राम रचि राखा
जोधपुर के जिला कलेक्टर रविकुमार सुरपुर व पुलिस उपायुक्त अमनदीप सिंह सेंट्रल जेल में व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान कलेक्टर ने पूछा कि फैसले को लेकर क्या सोच रहे हो तो इस पर आसाराम ने कहा ‘होई है वही जो राम रचि राखा।'
अहिंसा में यकीन
आसाराम ने कहा, ‘कोर्ट का जो भी फैसला होगा वो उन्हें मंजूर होगा।‘ उन्होंने कहा कि वो और उनके समर्थक गांधीवादी विचारधारा के हैं और अहिंसा में यकीन रखते हैं। वहीं जेल प्रशासन की मानें तो आसाराम के चेहरे पर फैसले को लेकर कोई शिकन नहीं है। हां, उत्सुकता जरूर है।
जोधपुर के चप्‍पे–चप्‍पे पर पुलिस तैनात
इस बीच फैसले के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस मुख्यालय से पुलिस बल की छह कंपनियां भेजी गई हैं। जोधपुर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। होटलों और धर्मशालाओं की सघन जांच की जा रही है। आसाराम के आश्रम को खाली करा लिया गया है और पूरी जांच के बाद ही निजी वाहनों और बसों को जोधपुर में प्रवेश दिया जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर भी कड़ी जांच की जा रही है।
दिल्ली से राजस्थान तक अलर्ट
दिल्ली से राजस्थान तक फैसले के बाद कोई अव्यवस्था नहीं फैले इसके लिए दोनों राज्यों की सरकारों ने पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं। दिल्ली पुलिस के अधिकारी यूपी और हरियाणा पुलिस से भी संपर्क बनाए हुए हैं। पुलिस लोकल इंटेलिजेंस के जरिए आसाराम के आश्रमों और उनके समर्थकों की गतिविधियों पर नजर रखने का दावा कर रही है।
पीड़िता के घर की सुरक्षा बढ़ी
आसाराम के समर्थकों व पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुई हैं। आसाराम अगर दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें अधिकतम 10 साल कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है। वहीं, यूपी में भी पीड़िता के घर के आसपास सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने बताया कि पीड़िता के परिजनों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारी परिवार वालों के संपर्क में हैं। पीड़िता के पिता ने कहा कि उनकी न्यायपालिका में पूरी आस्था है और उन्हें इस बात का यकीन है कि न्याय जरूर मिलेगा। इस महीने की शुरुआत में जोधपुर की विशेष अदालत में न्यायमूर्ति मधुसूदन शर्मा ने अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों की अंतिम बहस सुनी और आदेश 25 अप्रैल के लिए सुरक्षित कर दिया था।
यौन उत्‍पीड़न का है आरोप
यूपी के शाहजहांपुर की एक नाबालिग लड़की द्वारा कथित तौर पर आसाराम पर जोधपुर स्थित अपने आश्रम में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए गए थे। आश्रम में जिस समय पीड़िता रह रही थी तब वह 16 साल की थी। दिल्ली के कमला मार्केट थाने में यह मामला दर्ज कराया गया था और उसके बाद जोधपुर स्थानांतरित कर दिया गया। उन पर पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट के तहत कानून की धाराएं लगाई गई हैं। आसाराम को जोधपुर पुलिस ने 31 अगस्त 2013 को गिरफ्तार किया था और तब से वह जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।


नई दिल्‍ली - कोरियोग्राफर सरोज खान के इंडस्‍ट्री में कास्टिंग काउच पर दिए बयान पर बवाल खड़ा हो गया है। वहीं कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने सरोज खान के बयान का यह कहकर समर्थन किया है कि कास्टिंग काउच सिर्फ फिल्‍म इंडस्‍ट्री तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा लगभग हर क्षेत्र में होता है जो एक कड़वा सच है।
रेणुका चौधरी ने एक बयान में कहा, 'देखिए, कास्टिंग काउच सिर्फ फिल्‍म इंडस्‍ट्री में ही नहीं होता है। महिलाओं के साथ ऐसा हर क्षेत्र में हो रहा है। ये हमारे समाज का एक कड़वा सच है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। अगर आप यह सोचते हैं कि देश की संसद या कोई और काम की जगह इससे बची है, तो ऐसा बिल्‍कुल नहीं है। हर क्षेत्र में महिलाओं के साथ शोषण होता है। अब समय आ गया है लोग सामने अाएं और बताएं कि उनके साथ कब और कहां ऐसा हुआ।'
कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी के बयान से जाहिर होता है कि राजनीति में भी कास्टिंग काउच का गंदा खेल खेला जाता है। उनकी ये टिप्‍पणी कोरियोग्राफर सरोज खान के बयान के बाद आई, जिसमें उन्‍होंने कहा है कि फिल्‍म इंडस्‍ट्री में अगर कास्टिंग काउच होता है, तो पीडि़ता को रोटी भी मिलती है। इंडस्‍ट्री में जिसके साथ गलत होता है, उसे यूं ही छोड़ नहीं दिया जाता, उसे काम दिया जाता है। इससे उसका घर चलता है।
दरअसल, सरोज खान ने इंडस्‍ट्री में कास्टिंग काउच को गलत नहीं ठहराया। उन्‍होंने कहा कि ये काफी समय से होता चला आ रहा है। लेकिन सिर्फ फिल्‍म इंडस्‍ट्री में ही महिलाओं के साथ कास्टिंग काउच होता है। ये गलत है, अन्‍य क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। इसलिए सिर्फ फिल्‍म इंडस्‍ट्री पर उंगुली नहीं उठानी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि ये महिला की मर्जी पर निर्भर करता है। हालांकि सरोज खान ने दुष्‍कर्म जैसी घटनाओं को गलत ठहराया है। उन्‍होंने कहा कि वह किसी भी महिला के साथ दुष्‍कर्म को सही नहीं ठहराती हैं।
हालांकि विवाद को बढ़ता देख सरोज खान बैकफुट पर आ गई हैं। उन्‍होंने अपने विवादित बयान के लिए माफी मांग ली है और साथ में यह भी कहा है कि उन्होंने जिस सवाल के जवाब में ऐसा कहा, उसकी चर्चा नहीं की जा रही। उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।


तेनुघाट बोकारो - नर्रा के मॉब लिंचिंग में अदालत ने दस लोगों को उम्रकैद और 14-14 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी है। एक साल पूर्व धनबाद के शम्सुद्दीन को भीड़ ने बच्चा चोर बता पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था। बाद में उपचार के दौरान उसकी रिम्स में मौत हो गई थी।
बेरमो व्यवहार न्यायालय तेनुघाट के अपर सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) गुलाम हैदर की अदालत ने मंगलवार को बोकारो के नर्रा (चन्द्रपुरा) के चर्चित मो शम्सुद्दीन हत्याकांड में फैसला सुनाया। जुर्माना की राशि में से एक लाख बीस हजार रुपये पीड़ित परिवार को दिए जाएंगे। इसमें से साठ हजार रुपए मृतक की विधवा को मिलेंगे। कोर्ट ने मुआवजा की राशि को कम माना और सीआरपीसी की धारा 357अ के तहत मृतक की विधवा को पर्याप्त राशि देने के लिए डालसा बोकारो को लिखा है।
अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बहस की। अभियुक्तों के अधिवक्ता समीर कुमार सामंता, अरुण कुमार सिन्हा, वेंकट हरि विश्वनाथन ने बताया कि अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
इन्हें मिली सजा: नर्रा कांड में किशोर दसौंधी, सूरज वर्णवाल, चंदन दसौंधी, जीतन रजक, सागर तुरी, मनोज तुरी, सोनू तुरी, जितेंद्र ठाकुर, राज कुमार कोइरी और छुटिया कोइरी को आजीवन कारावास दिया गया है।
क्या है नर्रा कांड : चार अप्रैल 2017 को सूचिका ने चंद्रपुरा थाना में बयान दर्ज कराया था कि तीन अप्रैल को उसके ननदोसी शम्सुद्दीन अंसारी घर पर मेहमानी के लिए आए थे। उन्होंने अपनी बाइक घर के पीछे कुआं के पास खड़ी की थी। कुछ देर बाद हम लोग बाइक देखने गए तो गायब थी। ऐसे में स्थानीय रति पंडित को फोन किया तो उसने कहा कि घबराओ नहीं बाइक कल सुबह मिल जाएगी। चार अप्रैल को सभी दस अभियुक्त 100-150 लोगों के साथ लाठी, डंडा, रॉड, गंडासा, भाला लेकर आए और घर का दरवाजा तोड़ दिया। इसके बाद ननदोसी शम्सुद्दीन अंसारी को बच्चा चोर कहते हुए बाहर निकाला। हमलोगों ने बहुत सफाई दी मगर नहीं माने और मारते हुए तुरी टोला की ओर ले गए। इस घटनाक्रम की एफआईआर चन्द्रपुरा थाने में दर्ज कराई गई थी।
लोगों की जुबानी-तब पुलिस हो गई थी बेबस
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के दिन सुबह साढ़े छह बजे पुलिस गांव पहुंच गई थी। बचाने की पूरी कोशिश की पर भीड़ के सामने पुलिस बेबस रही। विधायक भी पहुंचे मगर उनकी नहीं चली। भीड़ लगातार बढ़ रही थी। करीब आठ बजे भारी फोर्स पहुंचने के बाद बल प्रयोग किया गया और लहूलुहान शम्सद्दीन को पीसीआर वैन में डाला गया। फिर महिलाओं की भीड़ वाहन के आगे लेट गई। भीड़ ने वाहन से घायल को उतार लिया और पीसीआर वैन को पलट दिया। किसी तरह शम्सुद्दीन को पुलिस डीवीसी अस्पताल ले गई। वहां से रांची भेजा गया।


नई दिल्‍ली - कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद अपने 'मुसलमानों के खून के धब्‍बे' वाले बयान पर अलग-थलग पड़ते नजर आ रहा हैं। कांग्रेस पार्टी ने भी अब सलमान खुर्शीद के बयान से किनारा कर लिया है। पीएल पुनिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सलमान खुर्शीद के बयान से सहमत नहीं है। ये उनका निजी बयान है। इधर सलमान खुर्शीद भी अपने बयान पर सफाई देते नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता पीएल पुनिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सलमान खुर्शीद के बयान को उनका निजी बयान बताते हुए कहा, 'सलमान खुर्शीद के बयान से कांग्रेस पार्टी असहमत है। ये बात सभी को मालूम होनी चाहिए कि देश के आजाद होने से पहले और बाद में भी कांग्रेस ही सिर्फ ऐसी पार्टी रही है, जिसने एक समानतावादी समाज बनाने के लिए काफी काम किया है। कांग्रेस पार्टी समाज के सभी वर्गों और लोगों को साथ लेकर चलती आई है।'
दरअसल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डॉ. बीआर आंबेडकर हॉल में रविवार को आयोजित वार्षिकोत्सव में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता सलमान खुर्शीद ने छात्रों से सीधे संवाद किया। इस दौरान एक छात्र आमिर मिंटोई ने सलमान खुर्शीद से पूछा कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के जो धब्बे हैं, इन धब्बों को आप किन अल्फाजों से धोना चाहेंगे। इस प्रश्न पर काफी देर चुप रहे सलमान खुर्शीद ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कह दिया कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग लगे हैं। मैं कांग्रेस का नेता हूं। इस नाते मुसलमानों के खून के यह धब्बे मेरे अपने दामन पर भी हैं।
छात्र आमिर मिंटोई ने खुर्शीद से दंगों और बाबरी मस्जिद पर सवाल किया तो आयोजकों ने छात्र को रोकने की कोशिश की, लेकिन सलमान खुर्शीद ने कहा कि इन्हें सवाल करने दीजिए। हालांकि राजनीतिक प्रश्न है। इसके बाद छात्र ने सवाल किया कि 1948 में एएमयू एक्ट में पहला संशोधन हुआ। उसके बाद 1950 में प्रेसिडेंशल ऑर्डर जिसमें मुस्लिम दलितों से एसटी/एससी आरक्षण का हक छीना गया।
सलमान खुर्शीद के बयान को लेकर कांग्रेस की काफी फजीहत हो रही है। ऐसे में कांग्रेस प्रवक्‍ता पीएल पुनिया को यह सफाई देनी पड़ी कि 'मुसलमानों के खून के धब्‍बे' वाले बयान से पार्टी इत्‍तेफाक नहीं रखती।


नई दिल्ली - राज्यसभा के उपसभापति ने संसद के उच्च सदन में कर्मचारियों की हाजिरी के लिए बायोमेट्रिक मशीनें लगाने का आदेश दिया है। दरअसल, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मंगलवार को संसद मार्ग स्थित राज्यसभा सचिवालय में कई दफ्तरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान, कई कर्मचारी दफ्तर नहीं पहुंचे थे। इस लापरवाही को देखते हुए नायडू ने राज्यसभा सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक मार्किंग सिस्टम लगवाने का आदेश दिया।
ऊपरी सदन ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि नायडू छुट्टियों और शिफ्ट के बाद भी सचिवालय में होने वाले स्टाफ के काम से परिचित हैं। विशेष रूप से, सत्रों और जैव-मीट्रिक उपस्थिति के दौरान उत्तरदायित्व और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा 'एक सक्षम कार्य का वातावरण उत्पादकता को बढ़ाने में महान प्रेरक है।' नायडू ने कहा 'भागीदारी वर्क कल्चर को बढ़ावा देने के लिए कर्मचारियों की भावनाओं को महसूस करना होगा।'
अपने औचक निरीक्षण के दौरान नायडू ने सचिवालय में स्वच्छता का मुद्दा भी उठाया और दफ्तरों में सफाई का विश्ष ध्यान रखने का आदेश दिया।

 


चेन्‍नई - पूर्व केंद्रीय वित्‍त मंत्री पी चिदंबरम की पत्‍नी नलिनी चिदंबरम को सारदा चिटफंड घोटाला मामले में मद्रास हाइकोर्ट से राहत नहीं मिली है। मद्रास हाइकोर्ट ने सारदा चिटफंड घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में बतौर गवाह पेशी के लिए प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) से मिले समन को चुनौती देने वाली नलिनी चिदंबरम की याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया। यानी नलिनी चिदंबरम को अब बतौर गवाह पेश होना होगा।
दरअसल, नलिनी चिदंबरम ने अपनी याचिका में कहा था कि जांच के लिए महिलाओं को सीआरपीसी की धारा 160 के तहत उसके निवास स्थान से बाहर नहीं बुलाया जा सकता है। लेकिन न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम ने उनकी यह दलील अस्वीकार कर दी है। अदालत ने कहा कि ऐसी छूट अनिवार्य नहीं है। ये धारा किसी भी मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, लेकिन इस मामले में ये छूट नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम ने नलिनी की याचिका पर 145 पन्नों के अपने फैसले में कहा, 'कोर्ट का मानना है कि लिंग के आधार पर नियमित तरीके से छूट नहीं मांगी जा सकती है। अदालत ने पहले लगाई गयी रोक हटाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के आवेदन पर यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम ने प्रवर्तन निदेशालय को जांच के लिए नई तारीख निर्धारित करते हुए नया समन जारी करने और कानून के अनुसार कार्यवाही करने का निर्देश दिया।
ज्ञात हो कि 7 सितंबर, 2016 को समन जारी कर वरिष्ठ वकील नलिनी चिदंबरम को सारदा चिटफंड घोटाले के सिलसिले में अपने कोलकाता कार्यालय में पेश होने के लिये कहा था।


नई दिल्‍ली - 1998 कोयंबटूर विस्‍फोट मामले में दोषी मोहम्‍मद रफीक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्‍या की साजिश रचने के आरोप में पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद रफीक को 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। बता दें कि 1998 कोयंबटूर ब्लास्ट केस में रफीक ने अपनी सजा भी पूरी कर ली है।
पीएम मोदी को मारने की साजिश
कुन्‍नीयमुथुर निवासी रफीक और सलेम निवासी ट्रक कंट्रैक्‍टर प्रकाश नाम के शख्स के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत सोशल मीडिया साइटों पर वायरल हो रही है। 8 मिनट लंबे टेलीफोनिक वार्ता में रफीक को यह बोलते हुए सुना जा सकता है, ‘हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने का फैसला कर लिया है। हमने ही भाजपा नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी के कोयंबटूर दौरे के दौरान बम लगाया था।‘ रफीक पर प्रधानमंत्री मोदी को मारने की साजिश रचने का आरोप है।
स्‍पेशल टीम कर रही मामले की जांच
तमिलनाडु के लगभग सभी जेल में रहने का दावा करते हुए रफीक ने फोन पर कहा कि गुंडा (Goondas) एक्‍ट, टाडा, नेशनल सिक्‍योरिटी एक्‍ट के तहत मामलों में वह सजा काट चुका है। सिटी पुलिस कमिश्‍नर के पेरिएयाह ने कहा, ‘इस ऑडियो के बारे में जानकारी मिलते ही स्‍पेशल टीम गठित की गयी। मामले की जांच की जा रही है।‘ पुलिस ने रफीक के खिलाफ धारा 153 (A) और 560 के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, टेलीफोन पर की गयी वार्ता गाड़ियों के लिए पैसों से संबधित था। लेकिन इस दौरान विस्‍फोट मामले में दोषी रफीक को यह कहते सुना जा सकता है कि 'हमने पीएम मोदी को खत्म करने की योजना बना ली है। जब 1998 में लालकृष्ण आडवाणी कोयंबटूर शहर की यात्रा पर थे, तब हमने ही बम लगाया था। बता दें कि 1998 में कोयंबटूर में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे, जिसमें करीब 58 लोगों की मौत हुई थी और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

 


जम्मू - जम्मू संभाग के कठुआ जिले के रसाना गांव में आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में आरोपित सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता व स्पेशल पुलिस आफिसर (एसपीओ) दीपक खजूरिया ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की है। एडवोकेट वीनू गुप्ता के माध्यम से दायर याचिका में दोनों ने क्राइम ब्रांच पर फर्जी सुबूत पेश करने का आरोप लगाया है। इस मामले में आनंद दत्ता को निलंबित व दीपक खजूरिया को बर्खास्त किया जा चुका है।
याचिका में दावा किया गया है कि क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच हाथ में लेते ही इसके साथ छेड़छाड़ की है। आरोपियों का कहना है कि बच्ची के मिट्टी में सने कपड़े व उसका शरीर भी क्राइम ब्रांच की कहानी पर सवाल खड़े करता है, जिसमें दावा किया गया है कि बच्ची को देवस्थान पर बंधक बनाकर रखा गया है, जबकि देव स्थान पक्का है, जहां मिट्टी नहीं है। दोनों आरोपितों ने देव स्थान से बच्ची के बाल मिलने के क्राइम ब्रांच के दावे को भी कहानी बताया है।
आरोपितों का कहना है कि देव स्थान को दिन में तीन बार धोया जाता है और ऐसे में वहां से महीने बाद बच्ची के बाल मिलना संभव नहीं है। बाल बच्ची के किसी रिश्तेदार के भी हो सकते हैं, क्योंकि खून के रिश्ते में डीएनए एक जैसा मिलता है। याचिका में आरोपितों ने पूरी जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जम्मू के लोगों की देश-विदेश में छवि खराब करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि इस मामले का उद्देश्य खानाबदोश समुदाय की ओर से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को संरक्षण देना है, क्योंकि इस समुदाय के कुछ लोग सरकारी भूमि पर कब्जा जमाने वाले माफिया के साथ काम करते हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि क्राइम ब्रांच की जांच कश्मीर में अलगाववादियों को जम्मू के लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांटने का मौका भी दे रही है, जो पिछले सात दशकों में नहीं हो सका था। याचिका में कहा गया कि इस मामले में दोनों याचिकाकर्ताओं को झूठा फंसाया गया है।


नई दिल्ली - जम्‍मू-कश्‍मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्‍तान की ओर से हो रहे लगातार संघर्ष विराम उल्लंघन का भारतीय सेना भी करारा जवाब दिया है। सेना की फायरिंग में पाकिस्तान के 5 सैनिक मारे गए हैं। साथ ही जवानों ने पाकिस्तान की एक चौकी को भी तबाह कर दिया है। हालांकि इस दौरान दोनों ही ओर से भारी गोलाबारी हुई।
बीएसएफ के एक प्रवक्ता ने बताया कि जवानों ने दो पाकिस्तानी मोर्टार की पोजिशंस का पता लगाया, उन्हें निशाना बनाया और नष्ट कर दिया।
आपको बता दें कि राजौरी और पुंछ इलाके में पिछले करीब 24 घंटे से लगातार गोलीबारी जारी थी। इस बीच भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, जिसमें उनके जवान ढेर हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो देवा गांव के आस-पास पाक सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान की कई पोस्ट भी तबाह की गई हैं।
वहीं पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ चल रही है। त्राल के लाम गांव में हुई इस मुठभेड़ में सेना के एक जवान घायल हो गया।
गौरतलब है कि नियंत्रण रेखा के पर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। बॉर्डर के जरिए आतंकियों की घुसपैठ कराने को लेकर पाकिस्तान लगातार गोलीबारी करता रहता है। भारत भी पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे रहा है।
हाल ही में भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर में सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की परेशानी कम करने के लिए 14,460 बंकरों के निर्माण की मंजूरी दी है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के लिए दो नए बॉर्डर बटालियन बनाने पर भी सरकार ने मंजूरी दे दी है।
इन 14,460 बंकरों का निर्माण सांबा, जम्मू, कठुआ, पुंछ और राजौरी में किया जाएगा. इससे पहले 2016-17 के दौरान 3 करोड़ रुपये की लागत से 60 बंकरों के निर्माण के लिए पायलट परियोजना को मंजूरी दी गई थी, जो अब पूरी हो चुकी है।

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