*फरहान अख्तर ने महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा खत्म करने के अभियान के लिए इस गाने को किया समर्पित
-पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने महिला दिवस पर ये अभियान गीत जारी किया

मुंबई (हम हिंदुस्तानी)-महिलाओं और लड़कियों के विरूद्ध हिंसा खत्म करने का अभियान है, बस अब बहुत हो गया. ये अभियान 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक गीएत छू ले आसमान रिलीज कर रहा है. यह अभियान फरहान अख्तर और प्रसिद्ध निर्देशक फिरोज अब्बास खान के साथ, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एक पहल है.
गीत छू ले आसमान को फरहान अख्तर और सलीम मर्चेंट ने गाया है. इसे लिखा श्रद्धा पंडित के साथ फरहान अख्तर ने है और सलीम-सुलेमान ने संगीत दिया है. यह गीत महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें समान अवसर प्रदान करता है, ताकि वे अपनी वास्तविक क्षमता का पता लगा सकें.
पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक पूनम मुत्तरेजा कहती हैं,"हम लड़कियों के खिलाफ हिंसा में एक खतरनाक वृद्धि देख रहे हैं. कई लडकियों के खिलाफ ये हिंसा तो उनके जन्म लेने से पहले ही हो रही है और वैसी महिलाओं के खिलाफ भी हिंसा हो रही है, जो अधीनता नहीं स्वीकार करती है. गाना छू ले आसमान के माध्यम से हम सभी भारतीयों से लड़कियों और महिलाओं को महत्व देने का आह्वान करते है और अपने अभियान 'बस अब बहुत हो गया का हिस्सा बन कर महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार के हिंसा को समाप्त करने के लिए हिस्सेदार बनाना चाहते हैं.”
फिरोज अब्बास खान कहते हैं, "संगीत की ताकत से, छू ले आसमान लोगों को इस अभियान में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है. लोग इस अभियान में शामिल हो और ये बोले कि 'बस अब बहुत हो गया – इनफ इज इनफ'. महिलाओं को तभी सशक्त बनाया जा सकता है जब उन्हें भेदभाव और हिंसा से मुक्त कर दिया जाए. इसके लिए यह आवश्यक है कि हमारे पुरुष और लड़के एक सक्रिय भूमिका निभाए. प्रतिगामी मानदंड को चुनौती देते हुए एक नए विश्व का निर्माण करें जहां महिलाओं और लड़कियों के लिए समानता, गरिमा और सुरक्षा हो. यही संदेश हम अंतर्राष्ट्रीय महिलाएं दिवस पर देना चाहते है.”
बस अब बहुत हो गया, महिलाओं और लड़कियों के विरूद्ध हिंसा को खत्म करने और इस बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक डिजिटल अभियान है,. इसे फिल्म और संगीत उद्योग की मशहूर हस्तियों का समर्थन हासिल है. इस अभियान में छह लघु फिल्में शामिल हैं, जिसमें विद्या बलन, सानिया मिर्जा, बरखा दत्त जैसी मशहूर हस्तियों के व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन है. साथ ही इसमें सामान्य महिलाओं, जिन्होंने असाधारण साहस का परिचय दिया है, उनका भी जिक्र है. ये अभियान पूरे भारत के युवाओं तक कॉलेज परिसरों में आयोजित पैनल डिस्कशन, फिल्म निर्माण प्रतियोगिता और नवंबर 2017 में मुंबई में आयोजित 'ललकार' नामक सेलिब्रिटी कॉन्सर्ट के माध्यम से पहुंच चुका है.

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