नई दिल्ली - आरबीआई ने इस साल की अपनी आखिरी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में ब्याज दरों को यथावत (पहले की ही दर पर बरकरार) रखने का फैसला किया है। आरबीआई ने रेपो रेट को 6 फीसद पर बरकरार रखा है। इससे पहले अक्टूबर में हुई बैठक में भी आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। ऐसे में अब आपको सस्ते कर्ज के लिए एमपीसी की अगली बैठक का इंतजार करना होगा। गौरतलब है कि एमपीसी के सभी सदस्यों (6) में से सिर्फ एक ने इस फैसले का विरोध किया। एमपीसी सदस्य रवींद्र ढोलकिया रेपो रेट में 0.25 फीसद कटौती के पक्ष में थे।
आरबीआई ने रेपो रेट को 6 फीसद पर और रिवर्स रेपो रेट को 5.75 फीसद पर बरकरार रखने का फैसला किया है। वहीं जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 6.75 फीसद पर बरकरार रखा गया है। वहीं चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई के 4.2 से 4.6 फीसद रहने का अनुमान लगाया गया है। आरबीआई के इस फैसले के सामने आने के बाद बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली है।
आरबीआई का कहना है कि ग्लोबल बाजारों से अच्छे संकेत मिले हैं और 5 तिमाहियों बाद पहली बार जीवीए में सुधार दिखा है। आरबीआई ने कहा कि दूसरी तिमाही में औद्योगिक उत्पादन सुधरने से जीवीए में सुधार हुआ है। एमपीसी से सदस्यों ने बढ़ती महंगाई पर चिंता जताई है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि लिक्विडिटी में सुधार हो रहा है।
आरबीआई ने क्यों नहीं घटाई ब्याज दरें:
इस फैसले के पीछे आरबीआइ ने महंगाई को असली वजह बताई है। आरबीआइ गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल का कहना है कि आने वाले दिनों में महंगाई की दर के बढऩे के आसार है। अक्टूबर, 2017 में थोक और खुदरा महंगाई की दर के बढऩे के बाद से ही उम्मीद थी कि केंद्रीय बैैंक ब्याज दरों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा। सनद रहे कि महंगाई को थामने के लिए आरबीआइ ब्याज दरों का सहारा लेता है। ब्याज दरों को घटाने से लोग ज्यादा कर्ज लेते हैैं और इससे बाजार में मांग बढ़ती है जिसका असर महंगाई पर पड़ता है। दूसरे शब्दों में ब्याज सस्ता होने पर महंगाई बढ़ती है। यही वजह है कि जब महंगाई बढऩे के आसार होते हैैं तो आरबीआइ ब्याज दरों को या तो बढ़ाता है या फिर उन्हें उसी स्तर पर बनाये रखता है। आरबीआइ ने यह भी कहा है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में खुदरा महंगाई की दर उनके अनुमान से ज्यादा रहेगी। पहले महंगाई की दर के 4.3 फीसद रहने का अनुमान लगाया गया था जिसे बढ़ा कर 4.7 फीसद कर दिया गया है।
महंगाई के साथ ही आरबीआइ वैश्विक स्तर पर चल रही अस्थिरता और सरकार की राजकोषीय स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। जाहिर है कि आरबीआइ के इस फैसले से आम जनता के साथ ही उद्योग जगत और सरकार को भी निराशा हाथ लगेगी। आम जनता को निराशा इसलिए होगी कि होम लोन या आटो लोन के सस्ता होने की उम्मीद खत्म हो गई। सरकार यह सोच रही थी कि ब्याज दरों में कमी होने के बाद मांग बढ़ेगी जिससे देश की आर्थिक विकास दर बढ़ाने में मदद मिलेगी। उद्योग जगत भी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहा था कि क्योंकि इससे मांग बढ़ाना संभव होता।

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें