नई दिल्ली - सरकार ने लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) खाता समय से पहले बंद करने की सुविधा देने और नाबालिग के नाम पर लघु बचत खाता खोलने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि वित्त विधेयक 2018 में प्रस्तावित बदलावों का मकसद लघु बचत योजनाओं के खातों में लचीलापन लाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीपीएफ में जो लाभ मिल रहे हैं, उसे वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है। विधेयक में जमाकर्ताओं को किसी आपात स्थिति में पीपीएफ खाता पांच साल से पहले बंद करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।
फिलहाल पीपीएफ खाता पांच वित्त वर्ष पूरा होने से पहले बंद नहीं किया जा सकता है। नए बदलाव में गंभीर बीमारी के इलाज तथा उच्च शिक्षा समेत अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए लघु बचत योजनाओं को समय से पहले बंद करने का विकल्प दिया जाएगा। गौरतलब है कि लघु बचत योजनाओं पर बैंक जमा की तुलना में ब्याज अधिक मिलता है और कुछ लघु बचत योजनाओं में निवेश पर आयकर का भी लाभ मिलता है। लघु बचत योजनाओं में डाकघर बचत खाता, राष्ट्रीय बचत मासिक आय खाता, राष्ट्रीय बचत आवर्ती जमा, पीपीएफ तथा सुकन्या समृद्धि योजना शामिल हैं।
कोई लघु बचत योजना बंद नहीं होगी : केंद्र
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि लघु बचत योजनाओं के मामले में संशोधन के जरिये ब्याज दर और कर नीति में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। कुछ लघु बचत योजनाओं को बंद करने की आशंका आधारहीन है। संशोधित कानून सरकार को लघु बचत की शिकायतों के सौहार्दपूर्ण और शीघ्रता से निपटान के लिये व्यवस्था बनाने की अनुमति देगा।

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