नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले का शिकार बना पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) मौजूदा फाइनैंशियल ईयर की पहली तिमाही में भी नुकसान से उबरने में विफल रहा है। हालांकि पिछली तिमाही के मुकाबले बैंक के घाटे में भारी कमी आई है।2018-19 की पहली तिमाही में देश के दूसरे बड़े सरकारी बैंक को शुद्ध रूप से 940 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। बैंक की तरफ से जारी बयान में बताया गया है कि इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक को 343 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।गौरतलब है कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की धोखाधड़ी की वजह से बैंक को करीब 14,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। दोनों ही आरोपी फिलहाल देश से बाहर हैं, जिन्हें वापस लाने की तैयारी चल रही है।घोटाले के सामने आने के बाद बैंक को पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में रिकॉर्ड 13,417 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में बैंक के फंसे हुए कुल कर्ज (एनपीए) में 18.38 फीसद की बढ़ोतरी हुई, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 की समान तिमाही में फंसे हुए कर्जों में 12.53 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी।पही तिमाही में बैंक का एनपीए पिछले साल की समान तिमाही के 13.66 फीसद से बढ़कर 18.26 फीसद हो गया वहीं बैंक ने इस दौरान 4,981 करोड़ रुपये की प्रॉविजनिंग की। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह रकम 2,559 करोड़ रुपये थी जबकि पिछली तिमाही में यह रकम रिकॉर्ड 16,202 करोड़ रुपये रही थी।
नुकसान के भरपाई की तैयारी:-घोटाले की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिए बैंक ने अपनी सहायक कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के साथ ही गैर प्रमुख कारोबार से हटने की रणनीति बनाई थी। इसी रणनीति के तहत पीएनबी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए में अपनी पूरी हिस्सेदारी 108.60 करोड़ रुपये में बेच चुका है।इसके साथ ही बैंक ने पीएनबी हाउसिं फाइनैंस, क्रिसिल और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। हाउसिंग फाइनैंस की इस कंपनी में पीएनबी की कुल 32.79 फीसद हिस्सेदारी है, जिसकी बिक्री से उसे करीब 6,500 करोड़ रुपये की रकम मिलेगी।पीएनबी हाउसिंग अक्टूबर 2016 में बाजार में लिस्ट हुई थी और कंपनी 775 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर बाजार से 3,000 करोड़ रुपये जुटाने में सफल रही थी।
सरकारी बेल आउट:-पीएनबी के साथ अन्य बैंकों के बैलेंट शीट पर एनपीए के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल अक्टूबर महीने में रिकैपिटलाइजेशन प्रोग्राम की घोषणा की थी, जिसके तहत सरकारी बैंकों को कुल 2.11 लाख करोड़ रुपये दिए जाने थे।सरकार की कोशिश सरकारी बैंकों को नियामकीय पूंजी उपलब्ध कराने की है। इसी रणनीति के तहत बैंकों को हाल ही में 11,336 करोड़ रुपये की पूंजी दी गई है जिसमें सबसे ज्यादा 2,816 करोड़ रुपये की रकम पीएनबी को मिली। बाकी की 53,664 करोड़ रुपये की पूंजी वित्त वर्ष के आने वाले महीनों में बैंकों को दी जाएगी।गौरतलब है कि प्रस्तावित पुनर्पूंजीकरण की व्यवस्था को तीन हिस्सों में बांटा गया है। कुल राशि में 18,000 करोड़ रुपये बजट से दिए जाएंगे, 58,000 करोड़ रुपये बाजार से इक्विटी के रूप में जुटाए जाएंगे और 1.35 लाख करोड़ रुपये सरकार द्वारा पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे।

 

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