नई दिल्ली - बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों से परेशान भारतीय रिजर्व बैंक ( आरबीआई) ने सरकारी बैंकों के विशेष ऑडिट की प्रक्रिया शुरु की है। इस ऑडिट में मुख्य ध्यान व्यापारिक गतिविधियों के वित्तपोषणऔ रबैंकों द्वारा जारी किए जाने वाले गारंटी पत्रों( एलओयू) पर दिया जाएगा।
बकाया राशि और मार्जिन की जानकारी मांगी
सूत्रों ने बताया कि आरबीआई ने सभी बैंकों से उनके द्वारा जारी किए गए एलओयू की जानकारी मांगी है। इसमें बकाया राशि की जानकारी भी मांगी गई है। आरबीआई यह भी देखेगा कि बैंकों के पास ऋण सीमा की पहले से अनुमति थी या नहीं और गारंटी पत्र जारी करने से पहले उनके पास पर्याप्त नकद मार्जिन उपलब्ध था या नहीं।
क्या है मार्जिन
बैंकिंग उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक किसी भी प्रकार का कर्ज देने के पहले संबंधित कारोबार, फ्लैट, या उससे जुड़े खर्च का आकलन करते हैं। उस पूरे खर्च में एक तय हिस्सा कर्ज लेने वाला खुद चुकाता और बाकी हिस्सा बैंक देते हैं। कर्ज लेने वाले की ओर से दी जानी वाली रकम ही मार्जिन कहलाती है। बैंक एजुकेशन लोन देते समय यह कहते हैं कि पांच लाख रुपये के लोन पर पांच फीसदी मार्जिन मनी है तो इसका मतलब है कि कर्ज की पूरी राशि में से 25 हजार रुपये कर्जदार को अपनी ओर से देना होगा।
व्यापार वित्तपोषण के मामले ज्यादा
सूत्रों ने कहा कि हाल में उजागर पंजाब नेशनल बैंक-नीरव मोदी धोखाधड़ी मामले समेत अधिकतर बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी मामले व्यापार वित्तपोषण से जुड़े हैं। इसके अलावा जानबूझ कर ऋण नहीं चुकाने के भी कई मामले व्यापार वित्त पोषण से जुड़े रहे हैं। हाल में पीएनबी के साथ किए गए 12,646 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में भी एलओयू का इस्तेमाल किया गया। इसे ध्यान में रखते हुए आरबीआई इस ऑडिट में इनसे जुड़े मामलों की भी जांच करेगा। उल्लेखनीय है कि नीरव मोदी का मामला सामने आने के तुरंत बाद सीबीआई ने दिल्ली के हीरा निर्यातक द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल के खिलाफ भी ओरिंएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में 389.85 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल ने 2007-12 के बीच ओबीसी से विभिन्न प्रकार की ऋण सुविधाएं ली थीं। इसी प्रकार 2015 के बैंक बाफ बड़ौदा धोखाधड़ी मामले में भी दिल्ली के दो व्यावसायियों ने बैंकों को व्यापार वित्तपोषण प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए 6,000 करोड़ रुपये का चूना लगाया था।

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