उत्तर प्रदेश में कृषि कर्ज की माफी के एक पखवाड़े बीतने और अन्य राज्यों में ऐसा किये जाने की मांग के बीच एक विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने वर्ष 2019 के चुनाव तक ऐसे लोक लुभावने उपायों के कारण वित्तीय बोझ सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दो प्रतिशत के स्तर को छू जाने का अनुमान व्यक्त किया है। जिसके चलते ऐसे कदमों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरी तरह पड़ सकता है।बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के एक विश्लेषक ने आज यहां एक परिपत्र में कहा, वर्ष 2019 के चुनाव से पहले किसानों की कर्ज माफी राजकोषीय और ब्याज दर का जोखिम खड़ा करने वाली है और इससे कर्ज व्यवसाय की संस्कति प्रभावित होती है। कंपनी का अनुमान है कि यह माफी जीडीपी के करीब दो प्रतिशत के बराबर बैठेगी।उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार की कर्ज माफी पांच अरब डॉलर अथवा प्रदेश के जीडीपी के 0.4 प्रतिशत के बराबर बैठती है जो अन्य राज्यों को भी ऐसे लोकप्रिय उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।उल्लेखनीय है कि ऐसे ही मांग महाराष्ट्र, हरियाणा और तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों में की जा रही है। वास्तव में मद्रास उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह पूरे के पूरे कृषि कर्ज को माफ करे जिससे राज्य के राजकोष पर 4,000 करोड़ रुपये का बोझ आयेगा।

 

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें