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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद से ही देश के भीतर डिटिजल ट्रांजैक्शन में तेजी देखने को मिली थी। बेशक अब बात कैशलेस की हो रही हो लेकिन कैश की अपनी अलग अहमियत है। ऐसे कई मौके होते हैं जब हमारा काम कैश की करा पाता है। ऐसे में जब हमारे पास कैश खत्म हो चुका हो और आपको जिसको भुगतान करना हो वो पेटीएम लेने को तैयार न हो तब आप क्या करेंगे? ऐसी स्थिति में आपको इधर-उधर एटीएम ढूंढना पड़ता है।आज के समय में एटीएम के जरिए 100 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक निकाले जा सकते हैं। हालांकि यह कई बार आपके कार्ड के टाइप पर भी निर्भर करता है। लेकिन 10,000 रुपये से ज्यादा का ट्रांजैक्शन करने के दौरान हम कुछ बातों को अक्सर भूल जाते हैं, जिसका खामियाजा हमें अतिरिक्त चार्ज देकर चुकाना पड़ता है। इस चार्ज से बचने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. अपने बैंक के एटीएम को तरजीह दें::-आपको जब भी एटीएम से 10,000 रुपये से ज्यादा की राशि निकालनी हो, तो कोशिश करें कि आप अपने बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करें, क्योंकि आमतौर पर आपके बैंक के द्वारा आपको दी गई ट्रांजैक्शन लिमिट दूसरे बैंक की तुलना में ज्यादा होती है। मान लेते हैं कि आपको एटीएम से 25,000 रुपये निकालने हैं और आपका बैंक आपको एक बार में ही 25,000 रुपये निकालने की सुविधा देता है, लेकिन हो सकता है कि दूसरे बैंक के एटीएम से आप एक बार में सिर्फ 10,000 रुपये ही निकाल पाते हैं तो ऐसे में आपको दो बार और एटीएम से ट्रांजैक्शन करना होगा। इसका आपको नुकसान यह होगा कि महीने में मिलने वाली फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट कम हो जाएगी।
2. हर बार होती है ट्रांजैक्शन की गिनती:मान लेते हैं कि आपको एटीएम से 30,000 रुपये निकालने हैं और एटीएम एक बार में आपको 10000 हजार रुपये निकालने की ही इजाजत देता है, तो ऐसे में बाकी के 20,000 रुपये निकालने के लिए आपको और दो बार अपने एटीएम का इस्तेमाल करना होगा। मतलब कि 30,000 हजार रुपये के लिए आपको 3 बार ट्रांजैक्शन करना होगा। उपभोक्ताओं को बैंक अपने एटीएम और दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालने के लिए मुफ्त ट्रांजैक्शन की लिमिट अलग-अलग देती है। जैसे कि कई बैंक अपने एटीएम से 5 से 8 बार मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा देते हैं, वहीं अगर आप दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करते हैं तो यह संख्या घटकर 3 से 4 हो जाती है। और इस लिमिट को पार करने के बाद बैंक एटीएम के जरिए आपसे अतिरिक्त चार्ज वसूलता है। इसलिए अगली बार जब आप एटीएम से ट्रांजैक्शन करें, तो अपने एटीएम कार्ड के जरिए होनेवाले फ्री ट्रांजैक्शन का ख्याल जरूर रखें।
3. एटीएम और अकाउंट कहां है, इसका भी ख्याल रखें:एटीएम ट्रांजैक्शन करते वक्त यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आपका अकाउंट किस जगह का है और आप किस स्थान पर एटीएम का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि मेट्रो सिटी, नॉन मेट्रो सिटी और गांवों के एटीएम से पैसे निकालने की लिमिट अलग-अलग है। इतना ही नहीं एटीएम से पैसे निकालने पर लगने वाला चार्ज भी इस बात पर निर्भर करता है कि वो (एटीएम) कहां है।
4. फायदेमंद होगा एक से ज्यादा कार्ड का इस्ते माल:एटीएम से आप ज्यादा भारी राशि निकाल रहे हैं, तो निश्चित तौर पर एक बार में उसे निकाला जा सकता। उसके लिए आपको बारी-बारी से एटीएम का इस्तेमाल कर रकम निकालनी होगी। इसलिए आपके लिए बेहतर यह होगा कि अगर आपके पास एक से ज्यादा कार्ड है, तो उनसे ट्रांजैक्शन करें। इससे आपको दो फायदें होगें पहला तो यह कि फ्री ट्रांजैक्शन की आपकी लिमिट बनी रहेगी और दूसरा आपके अलग-अलग अकाउंट से डेबिट होने की वजह से उन खातों में पैसा भी बना रहेगा।

नई दिल्ली। ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर शॉपिंग करते समय आपने नो कॉस्ट ईएमआई शब्द जरूर पढ़ा होगा। क्या आप असल में इसका मतलब जानते हैं? इसके साथ कंपनियां डिस्काउंट और आकर्षक ऑफर भी देती है। क्या इस तरह खरीदना समझदारी का फैसला है? जानिए नो कॉस्ट ईएमआई से जुड़ी अहम बात
क्या होता है नो कॉस्ट ईएमआई-वर्ष 2013 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को रिटेल प्रोडक्ट्स पर जीरो फीसद ईएमआई स्कीम पेश करने से बैन कर दिया था। इसलिए बैंकों ने इसका विकल्प निकाला है। सुनने में नो कॉस्ट ईएमआई का मतलब ऐसा जान पड़ता है कि आपको लोन पर कोई ब्याज नहीं देना। लेकिन असल में आपका बैंक दिये गये डिस्काउंट को ब्याज के रूप में वापस ले लेता है।
कैसे काम करती है नो कॉस्ट ईएमआई:-नो कॉस्ट ईएमआई में तीन हिस्सेदार होते हैं- रिटेलर, बैंक और कंज्यूमर। आम तौर पर चुनिंदा बैंक क्रेडिट कार्ड पर नो कॉस्ट ईएमआई का विकल्प देते हैं। अगर आपके पास उस बैंक का क्रेडिट कार्ड नहीं है तो आपको वह डील नहीं मिलेगी। इसके लिए आप नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी से ईएमआई कार्ड का विकल्प चुन सकते हैं। कुछ ईएमआई कार्ड के लिए फीस चुकानी होती है। रिटेलर्स उन प्रोडक्ट्स पर नो कॉस्ट ईएमआई का विकल्प देता जो उसे जल्दी बेचने होते हैं। नो कॉस्ट ईएमआई की स्थिति में रिटेलर्स कंज्यूमर को ब्याज जितनी राशि का डिस्काउंट दे देता है।
क्या नो कॉस्ट ईएमआई का चयन करना चाहिए?:-स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक लिमिटेड, एक्सिस बैंक लिमिटेड, आइसीआइसीआइ बैंक लिमिटेड, आरबीएल बैंक लिमिटेड, येस बैंक लिमिटेड, स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर नो कॉस्ट ईएमआई का ऑप्शन देते हैं। आमतौर पर मोबाइल फोन, फ्रिज, टेलीविजन और वाशिंग मशीन जैसे प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट दिया जाता है।अधिकांश मामलों में नकदी पर डिस्काउंट ईएमआई से ज्यादा नहीं होता है। यह एक तरह से मार्केटिंग का तरीका होता है ताकि पुराना स्टॉक खत्म किया जा सके। सलाहकारों के मुताबिक व्हाइट गुड्स (मोबाइल फोन, फ्रिज, टेलीविजन और वाशिंग मशीन, एसी) के लिए लोन नहीं लेना चाहिए।इसलिए कोशिश करें कि इस तरह की मार्केटिंग टैक्टिक्स में न फंसे जहां पर आपको जिन चीजों की जरूरत नहीं भी है आप वो खरीद रहे हैं। वो भी ऊंचे दाम पर। साथ ही ईएमआई डिफॉल्ट से बचें।

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ने 100 रुपये के नए नोट जारी करने का एलान तो कर दिया है, लेकिन एटीएम से इन नोटों के निकलने का रास्ता इतना आसान नहीं होने जा रहा। एक अनुमान के मुताबिक, नए नोटों के लिए देश के सभी एटीएम को तैयार करने में 100 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। देश में कुल 2.4 लाख एटीएम हैं, जिन्हें नए नोट के अनुरूप तैयार करना होगा।एटीएम परिचालन उद्योग संगठन सीएटीएमआइ का कहना है कि अभी देशभर के एटीएम 200 रुपये के नए नोट के अनुरूप तैयार भी नहीं हो पाए हैं, ऐसे में फिर से उन्हें 100 रुपये के नए नोट के हिसाब से तैयार करना मुश्किलें खड़ी करेगा।सीएटीएमआइ के निदेशक और एफएसएस के अध्यक्ष वी. बालासुब्रमणियन ने कहा, ‘हमें एटीएम मशीनों को 100 रुपये के नए नोटों के अनुकूल बनाना होगा। देशभर में 2.4 लाख मशीनों को इनके अनुकूल बनाना होगा।’ उन्होंने कहा कि 100 रुपये के पुराने और नए दोनों तरह के नोटों का एक साथ प्रचलन में रहना भी कई चुनौतियों को जन्म देगा। दोनों तरह के नोट एटीएम से निकलने से यह उलझन भी रहेगी कि मशीनों में बदलाव होना भी नहीं है या नहीं। हितैची पेमेंट सर्विसेज के प्रबंध निदेशक लोनी एंटनी ने कहा कि देशभर की सभी एटीएम मशीनों को 100 रुपये के नए नोट के अनुकूल बनाने में 12 महीने का वक्त लगेगा और इस पर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।उन्होंने कहा कि अभी तो मशीनें 200 रुपये के नए नोट के हिसाब से ही तैयार नहीं हुई हैं, ऐसे में समुचित तैयारी नहीं रही तो मशीनों को 100 रुपये के नए नोटों के अनुरूप बनाने में और वक्त लग सकता है। यूरोनेट सर्विसेज के प्रबंध निदेशक हिमांशु पुजारा ने कहा कि पूरी तरह स्वदेशी नोट की छपाई निसंदेह गर्व का विषय है, लेकिन इनके आकार में बदलाव से मुश्किल आएगी। इन्हें एटीएम के जरिये मुहैया कराना अभी कठिन होगा।

नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइलिंग के दौरान हर स्रोत से हुई आमदनी का उल्लेख करना होता है। जानकारी के अभाव में काफी सारे लोग कुछ ऐसी आय को छुपा लेते हैं जिन पर कर देनदारी बनती ही नहीं है। हम अपनी इस खबर के माध्यम से आपको कुछ ऐसे स्रोत से हुई आमदनी के बारे में जानकारी दे रहे हैं जो कि कर के दायरे में नहीं आती हैं।
कृषि आय (agricultural income): कृषि से होने वाली आय करमुक्त होती है। लेकिन, करयोग्य आय पर आयकर की दरें निर्धारित करने के लिए कृषि से होने वाली कुल आय, यदि वह 5000 रुपए से अधिक हो, को ध्यान में रखा जाता है।
साझेदारी फर्म की आय में साझेदार का हिस्सा (Partner's Share Income): यदि साझेदारी फर्म का कर निर्धारण अलग से हो चुका है, तो फर्म की कुल आय में से प्रत्येक साझेदार का हिस्सा करमुक्त होता है। प्रत्येक साझेदार का हिस्सा फर्म की करयोग्य आय को partnership deed में लिखी profit sharing ratio में बांटकर निकाला जाएगा।
गिफ्ट: अगर आप किसी को भेंट स्वरूप नकद रुपए देते हैं तो भी यह करमुक्त होता है। लेकिन इसमें भी एक सीमा है। मान लीजिए कि अगर आप किसी गैर परिचित व्यक्ति को 50,000 रुपए तक का गिफ्ट देते हैं तो यह आयकर की धारा 56(2)(7) के अंतर्गत करमुक्त होता है, लेकिन इससे ऊपर की आय पर आपको कर देना होगा, लेकिन अगर गिफ्ट प्राप्त करने वाला व्यक्ति आपका परिचित है तो इसमे कोई भी सीमा नहीं है।
हिंदू अविभाजित परिवार: हिंदु अविभाजित परिवार (HUF) सदस्यों को मिलने वाली रकम, जो परिवार की इनकम से दी गई हो वह टैक्स फ्री होती है। साथ ही अविभाजित संपत्ति की स्थिति में परिवार की संपत्ति में से होने वाली इनकम से दी गई रकम भी टैक्स के दायरे से बाहर होती है।
अन्य: भारतीय नागरिकों को विदेश में मिलने वाली सर्विसेज के लिए सरकार की ओर से विदेश में मिले या मिलने वाले भत्तों या अनुलाभों पर आयकर की धारा 80 (B) के अंतर्गत टैक्स से छूट मिलती है।


नई दिल्ली - ट्रक ट्रांसपोर्टरों की देशव्यापी बेमियादी हड़ताल शुक्रवार से शुरू हो गई। हड़ताल के पहले दिन मिलाजुला असर दिखाई दिया। हालांकि ट्रक ट्रांसपोर्टरों के संगठन ने कहा है कि उन्हें अपनी मांगों पर सरकार का ठोस आश्वासन जब तक नहीं मिल जाता है, उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की कोर कमेटी के चेयरमैन बाल मलकीत सिंह ने कहा कि कुल 93 लाख ट्रकों में से संगठन से जुड़े 50-60 फीसद ट्रक शुक्रवार को सड़कों पर नहीं चले। उन्होंने किसी भी माल की ढुलाई नहीं की। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में और ज्यादा ट्रक ट्रांसपोर्टर हड़ताल में शामिल हो जाएंगे।
हड़ताल का ज्यादा असर मुंबई और महाराष्ट्र में दिखाई दिया। जहां सुबह छह बजे हड़ताल शुरू होने के बाद से ट्रक सड़कों पर नहीं चले। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में हड़ताल का असर दिखाई दिया। तमिलनाडु में 4.5 लाख ट्रकों के हड़ताल पर जाने की खबर है। सिंह ने कहा कि जो ट्रक रास्ते में हैं, वे नजदीकी ढाबा, पेट्रोल पंप या यार्ड में चले गए और हड़ताल शुरू कर दी गई।
उन्होंने कहा कि कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल और वरिष्ठ अधिकारियों से हड़ताल टालने पर अंतिम दौर तक वाताएं हुईं। लेकिन सरकार से मांगों पर ठोस आश्वासन न मिलने के कारण हड़ताल पर जाने का फैसला किया गया। गोयल ने मांगों पर विचार करने के लिए कमेटी बनाने का सुझाव दिया। लेकिन उन्होंने किसी भी मांग पर सहमति नहीं जतायी। हड़ताल शुरू होने के बाद सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई।
ट्रक संचालकों और ट्रांसपोर्टरों की मुख्य मांगों में केंद्रीय व राज्यों के टैक्स घटाकर डीजल की कीमत घटाने की मांग शामिल है। ट्रांसपोर्टर टोल चार्ज का भी विरोध कर रहे हैं। उनकी शिकायत है कि इसमें पारदर्शिता नहीं है और नियम टोल लेने वाली कंपनियों के पक्ष में है। ट्रांसपोर्टरों का दावा है कि टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने से हर साल करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है। उन्हें बीमा के अत्यधिक प्रीमियम पर भी शिकायत है। उनकी मांग है कि थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम घटाया जाए और इस पर जीएसटी खत्म किया जाए। ट्रक संचालकों ने सभी बसों व ट्रकों पर डायरेक्टर टैक्स नेशनल परमिट और डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी टेंडरिंग सिस्टम को भी खत्म करने की मांग की है।


नई दिल्ली - खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने स्विगी,जोमैटो, फूडपांडा समेत दस फूड एप को उन रेस्तरांओं और होटलों से खाने के सामान का उपयोग बंद करने को कहा है, जिनके पास लाइसेंस नहीं है। उपभोक्ताओं से इस तरह की शिकायत मिल रही थी कि ई-कॉमर्स के जरिये खराब गुणवत्ता के खाद्य पदार्थों की आपूर्ति की जा रही है। उसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने उक्त निर्देश जारी किया। एफएसएसएआई ने बाक्स 8, फासोस , फूड क्लाउड , फूडमिंगो , फूडपांडा , जस फूड , लाइम ट्रे ,स्विगी, उबर ईट्स और जोमैटो को निर्देश दिया है।
एफएसएसएआई ने इस साल फरवरी में ही ई-कॉमर्स पोर्टल के जरिए खाद्य कारोबार परिचालकों (एफबीओ) के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर सूचीबद्ध एफबीओ को लाइसेंस संख्या को उल्लेखित करने की जरूरत है। साथ ही खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियम एवं नियमन के अनुपालन को लेकर समझौते को अनिवार्य किया गया है।
ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि बिना एफएसएसएआई लाइसेंस वाले रेस्तरां और होटल भी सूची में शामिल हैं और उन्हें ई फूड एप खाद्य उत्पाद बेचने की अनुमति दी गयी है। इससे ग्राहकों को खराब गुणवत्ता वाली खाने-पीने की चीजें आपूर्ति की जा रही थी।

नई दिल्ली - रिजर्व बैंक ने 100 रुपये के नए नोट जारी करने का एलान तो कर दिया है, लेकिन एटीएम से इन नोटों के निकलने का रास्ता इतना आसान नहीं होने जा रहा। एक अनुमान के मुताबिक, नए नोटों के लिए देश के सभी एटीएम को तैयार करने में 100 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। देश में कुल 2.4 लाख एटीएम हैं, जिन्हें नए नोट के अनुरूप तैयार करना…
नई दिल्ली - भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 12 नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के रजिस्ट्रेशन को रद्द कर दिया है। आरबीआई ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। आरबीआई ने कहा, 'बैंक ने आरबीआई एक्ट 1934 के सेक्शन 45 1ए (6) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इन कंपनियों के लाइसेंस को रद्द कर दिया है।'केंद्रीय बैंक ने जिन कंपनियों के लाइसेंस को…
नई दिल्ली। ब्लैक मनी पर गठित एसआईटी (विशेष जांच दल) ने केंद्र सरकार को दी गई अपनी सिफारिश में नकदी रखने की सीमा को बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किए जाने का सुझाव दिया है। इससे पहले एसआईटी ने 20 लाख रुपये तक की नगदी रखने का सुझाव दिया था। एसआईटी ने एक करोड़ रुपये से अधिक की नगदी रखने की स्थिति में उसे जब्त कर सरकारी खजाने में जमा किए…
नई दिल्ली। अब आपको हवाई यात्रा के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। केंद्र सरकार एयर टिकट पर सिक्योरिटी शुल्क को बढ़ाए जाने के बारे में विचार कर रही है। सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) ने बताया है कि एयरपोर्ट ऑपरेटर्स की ओर से बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है।सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) की तरफ से एयरपोर्ट ऑपरेटर्स से बकाया रकम के भुगतान की चेतावनी दिए…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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