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नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की तरफ से करीब 80 से अधिक सामानों की कीमत कम किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) से होने वाली आय में बढ़ोतरी के बाद ही सीमेंट, एसी और टीवी जैसी वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स में कटौती की जाएगी फिलहाल यह सभी वस्तुएं 28 फीसद वाले स्लैब में शामिल हैं।जेटली ने कहा कि जीएसटी आय बढ़ने के बाद केवल लग्जरी और सिन गुड्स (सिगरेट, शराब, तंबाकू आदि) ही 28 फीसद वाले स्लैब में रह जाएंगे।शुक्रवार को फेसबुक पर लिखे गए पोस्ट में जेटली ने जीएसटी के पूर्व की कर व्यवस्था को ''कांग्रेस लीगेसी टैक्स'' करार दिया, जहां अधिकांश घरेलू वस्तुओं पर लोगों को 31 फीसद का टैक्स देना पड़ता था। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल के दौरान 384 वस्तुओं की कीमतों पर लगने वाले टैक्स में कमी आई है।जेटली ने कहा कि जीएसटी के पहले लोगों को सेंट्रल एक्साइज, वैट और सीएसटी मिलाकर कुल (12 फीसद, 14 फीसद और 2 फीसद) का भुगतान करना पड़ता था। अगर इसमें टैक्स के ऊपर लगने टैक्स को शामिल कर दिया जाए तो यह करीब 31 फीसद बनता था। पानी, साबुन से लेकर कंस्ट्रक्शन के सामानों पर लोगों को 31 फीसद का ही भुगतान करना होता था।उन्होंने कहा कि इस कैटेगरी में कुल 235 सामान आते थे और कांग्रेस ने देश यही टैक्स सिस्टम तोहफा में दिया। जेटली ने कहा कि जब देश में जीएसटी लागू किया गया तो इनमें से कई सामानों को 18 फीसद वाले स्लैब में शामिल किया गया।गौरतलब है कि पिछले साल एक जुलाई को देश में जीएसटी को लागू किया गया था, जिसने कुल 17 अप्रत्यक्ष करों की जगह ली है।उन्होंने कहा, 'अब 28 फीसद वाले स्लैब को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है।

नई दिल्ली। सरकार भले ही उद्योग जगत की सुविधा के लिए जीएसटी को सरल बनाने की लगातार कोशिश कर रही हो लेकिन बहुत से कारोबारी समय पर जीएसटी रिटर्न भरने से जी चुरा रहे हैं। एक तिहाई से अधिक व्यापारी ऐसे हैं जो समय पर अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं। खास बात यह है कि निर्धारित तिथि तक रिटर्न दाखिल न करने वाले व्यापारियों का अनुपात बीते छह महीनों में लगातार बढ़ता जा रहा है।सूत्रों के मुताबिक जीएसटी काउंसिल ने जुलाई 2017 से मई 2018 तक 11 महीनों के दौरान जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के पैटर्न का विश्लेषण किया है जिसमें ये चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। काउंसिल की 21 जुलाई को हुई बैठक में इस तथ्य पर चर्चा भी हुई थी।सूत्रों के अनुसार जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती 11 महीनों में औसतन 58 प्रतिशत करदाताओं ने ही निर्धारित तिथि तक जीएसटी रिटर्न भरे। चिंताजनक बात यह है कि दिसंबर 2017 के बाद से निर्धारित तिथि तक जीएसटी रिटर्न भरने वाले व्यापारियों का अनुपात लगातार कम होता जा रहा है।दिसंबर 2017 में 67 प्रतिशत व्यापारियों ने निर्धारित तिथि तक जीएसटी रिटर्न फाइल किया था लेकिन इस साल मई में यह अनुपात घटकर 61 प्रतिशत रह गया। दरअसल दिसंबर 2017 में 81.22 लाख व्यापारियों को जीएसटी का रिटर्न भरना था लेकिन रिटर्न भरने के लिए निर्धारित तारीख तक मात्र 54.26 लाख व्यापारियों ने ही रिटर्न भरा। इस तरह लगभग 33 प्रतिशत व्यापारियों ने समय पर रिटर्न दाखिल नहीं किया। इस साल मई में ऐसे व्यापारियों का आंकड़ा बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गया है। इस साल मई में 91.22 लाख व्यापारियों को रिटर्न फाइल करना था लेकिन महज 56.18 लाख ने ही निर्धारित तिथि तक जीएसटी का रिटर्न भरा।
लगातार घट रहा है समय पर रिटर्न भरने वाले व्यापारियों का अनुपात:-कर अधिकारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उद्योग-व्यापार संगठनों और लघु व मझोले उद्योगों से संपर्क करके जीएसटी को लेकर उनकी दिक्कतें समङोंगे और इनके बारे में एक रिपोर्ट जीएसटी काउंसिल की चार अगस्त को होने वाली बैठक में प्रस्तुत करेंगे।
नए रिटर्न फार्मो का मसौदा अगले हफ्ते:-जीएसटी रिटर्न के नए फार्म का मसौदा अगले सप्ताह कारोबारियों और संबंधित पक्षों के सुझाव के लिए सार्वजनिक कर दिया जाएगा। जीएसटी एक अधिकारी के अनुसार अगले साल सितंबर तक नए जीएसटी रिटर्न फार्म में करदाताओं को बदलाव करने का विकल्प भी मिलेगा। नए फार्मो के मसौदे सोमवार को सार्वजनिक किए जा सकते हैं।
व्यापारियों की जीएसटी संबंधी दिक्कतें काउंसिल में रखी जाएंगी:-टीवी, फ्रिज पर आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार होगा1सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज (सीबीआइसी) घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने के लिए कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे टीवी, फ्रिज, एसी वगैरह पर आयात शुल्क बढ़ाने के सुझाव पर विचार करेगा। दरअसल इन वस्तुओं पर जीएसटी घटने के साथ ही आयातित वस्तुओं पर लगने वाले आइजीएसटी में भी कमी आएगी। इसलिए उद्योगों ने आयात शुल्क में बढ़ोतरी का सुझाव दिया है। आयातित वस्तुओं पर आयात शुल्क के साथ आइजीएसटी भी लगता है।

नई दिल्ली। दूरसंचार विभाग (DoT) ने वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर के प्रस्तावित मर्जर प्लान को अंतिम मंजूरी दे दी है। यह जानकारी सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। विभाग ने इस संबंध में दोनों ही कंपनियों को पत्र भी लिखा है। इस फैसले से वोडाफोन आइडिया लिमिटेड नाम की बड़ी कंपनी का गठन होगा। यह सब्सक्राइबर्स और रेवेन्यू मार्केट शेयर के हिसाब से सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी होगी।''रोक गए स्पेक्ट्रम भुगतान के लिए बैंक गारंटी का भुगतान वोडाफोन को दूरसंचार विभाग को करना है और यह संबंधित बैंक तय करेगा। इसके बाद स्पेक्ट्रम को आइडिया सेल्युलर को दे दिया जाएगा क्योंकि इसी कंपनी के पास वोडाफोन का लाइसेंस हस्तांतरित होना है।''गौरतलब है कि हाल ही में स्पेक्ट्रम चार्जेज के एवज में दूरसंचार विभाग की ओर से की गई मांग के रुप में इन दोनों कंपनियों ने 72 बिलियन रुपये का नकद में और बैंक गारंटी का भुगतान कर दिया था, इसके बाद से ही यह संभावना तेज हो गई थी कि इस मर्जर को जल्द मंजूरी मिल जाएगी।
कितनी बड़ी होगी कंपनी: वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर के मर्जर से बनने वाली कंपनी की कुल वैल्यू 23 बिलियन अमेरिकी डॉलर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये होगी, जिसकी बाजार हिस्सेदारी 35 फीसद और सब्सक्राइबर बेस करीब 43 करोड़ का होगा

नई दिल्ली। उद्योग में बिजली की उच्च लागत कम करने के लिए नई औद्योगिक नीति एक अहम सुझाव दे सकती है। माना जा रहा है कि नई औद्योगिक नीति किसानों और गरीब परिवारों को सब्सिडी वाली बिजली उपलब्ध कराने के लिए आधार के उपयोग का सुझाव दे सकती है। साथ ही वितरण कंपनियों के संचालन में पारदर्शिता लाने के लिए उनकी लिस्टिंग का सुझाव भी दिया जा सकता है। यह जानकारी सूत्रों के जरिए सामने आई है।भारत में बिजली की कीमत 8 रुपये यूनिट है जो कि अन्य विकसित राष्ट्रों एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी ज्यादा है और मेक इन इंडिया के प्रोत्साहन के मद्देनजर इसे नीचे लाया जाना काफी जरूरी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, जो कि 1991 की नीति को बदलने के लिए एक नई औद्योगिक नीति पर काम कर रहा है विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यवसाय को और आसान करने के लिए बिजली लागत को कम करने के लिए उत्सुक है।प्रस्तावित नीति का उद्देश्य उभरते क्षेत्रों को बढ़ावा देना और मौजूदा उद्योगों का आधुनिकीकरण करना है। यह विनियामक बाधाओं को दूर करने और रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उच्च प्रौद्योगिकियों को अपनाने को भी प्रोत्साहित करेगा।सूत्रों का कहना है, “ये पहल उद्योगों के लिए बिजली की लागत को तर्कसंगत बनाने में मदद करेंगी।” गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने अगले दो दशकों तक नौकरियां पैदा करने के उद्देश्य से औद्योगिक नीति का मसौदा तैयार किया था।

नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने ऐसी मनी ट्रांसफर सर्विस पेश की है जिसमें ग्राहक को पैसे भेजने के लिए बेनिफिशयरी को जोड़ने की जरूरत नहीं होगी। इस सेवा का नाम ''क्विक ट्रांसफर'' है। हालांकि इसमें ग्राहकों को 25,000 रुपया तक भेजने की ही सुविधा होगी, जिसमें प्रति ट्रांजैक्शंस 10,000 रुपये की लिमिट तय की गई है।इसके जरिए ग्राहक रेमिटेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, इस सेवा का लाभ केवल वही ग्राहक उठा सकते हैं जिन्होंने एसबीआई की इंटरनेट बैंकिंग फैसिलिटी के लिए सब्सक्राइब किया हुआ है।
कौन कर सकता है एसबीआई क्विक ट्रांसफर का इस्तेमाल-इस सेवा का इस्तेमाल केवल वहीं लोग कर सकते हैं जो एसबीआई की इंटरनेट बैंकिंग सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह सेवा बैंक के इंटरनेट पोर्टल ऑनलाइनएसबीआई डॉट इन के क्विकएसबीआई पर उपलब्ध है।यदि बेनिफिशयरी का अकाउंट एसबीआई में है तो भेजी जाने वाली राशि खाते में तुरंत क्रेडिट हो जाएगी। वहीं अगर बेनिफिशयरी का खाता किसी और बैंक में है तो पैसा इमिडिएट पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) या नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) में से किसी भी ऑप्शन से ट्रांसफर किया जा सकता है।
एसबीआई ने सुरक्षित मनी ट्रांसफर के लिए बताया क्या करें और क्या न करें-
क्या कर सकते हैं-
-बैंक ने बताया कि कोशिश करें कि पैसे हमेशा किसी जान पहचान के बेनिफिशयरी को ही ट्रांसफर करें।
-यूपीआई के जरिए भुगतान करने पर पेमेंट कलेक्ट रिक्वेस्ट को जरूर चेक करें।
क्या न करें-
-बैंक ने बताया है कि पब्लिक डिवाइसेज के जरिए ट्रांजैक्शन न करें।
-ओपन और फ्री नेटवर्क से ट्रांजेक्शन न करें।

नई दिल्ली। फॉर्च्यून की ओर से बिजनेस में 40 वर्ष की कम आयु में सबसे प्रभावशाली और प्रेरक लोगों की सूची जारी की गई है। इसमें भारतीय मूल के चार लोग शामिल हैं जिनमें तीन महिलाएं भी हैं।फोटो और वीडियो शेयरिंग एप इंस्टाग्राम के सह संस्थापक और सीईओ केविन सिस्ट्रोम और फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग फॉर्च्यून ’40 अंडर 40’ में पहले स्थान पर हैं।अमेरिका की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी जनरल मोटर्स के चीफ फाइनेंस ऑफिसर दिव्या सूर्यदेवरा चौथे स्थान पर हैं। वीमियो की सीईओ अंजलि सुद 14वें, रॉबिनहुड बायजू भट्ट 24वें और फीमेल फाउंडर्स फंड की फाउंडिंग पार्टनर अनु दुग्गल 32वें स्थान पर रही हैं।इस लिस्ट में रिप्पल के 39 वर्षीय सीनियर वाइस प्रेसिडेंट आशीष बिड़ला, डिजिटल करंसी वॉलेट और प्लेटफॉर्म कॉइनबेस के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर बालाजी श्रीनिवासन, एमआईटी डिजिटल करंसी इनिशिएटिव की डायरेक्टर नेहा नरुला और कॉनबेस के ऑपरेशन्स की वाइस प्रेसिडेंट टीना भटनागर भी शामिल हैं।फॉर्च्यून ने कहा, “दिव्या सूर्यदेवरा ने उस समय इतिहास रच दिया था जब इस बात की घोषणा की गई थी कि वह इस साल जनरल मोटर्स की पहली महिला सीएफओ बनेंगी। इससे यह कंपनी फॉर्च्यून 500 की उन दो कंपनियों में शामिल हो गई है जिनकी महिला सीएफओ हैं। अन्य दूसरी कंपनी जिसकी महिला सीएफओ है उसका नाम हर्षे है।

 

 

नई दिल्ली। भारत अगले वर्ष के आम चुनाव से पहले सरकारी खर्च में वृद्धि के आधार पर इस साल सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें सबसे ज्यादा नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकती हैं। यह बात रॉयटर्स के सर्वेक्षण से सामने आई है।2 ट्रिलियन से ज्यादा की अर्थव्यवस्था वाला भारत जो कि फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है…
नई दिल्ली। फ्लिपकार्ट, एमेजॉन समेत अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) लागू होने के बाद मुनाफाखोरी रोकने के लिए बनाई गई एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी ने फ्लिपकार्ट, एमेजॉन और स्नैपडील जैसी दिग्गज कंपनियों की टैक्स ऑडिटिंग का आदेश दिया है।नैशनल एंटी प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी ने यह जानने के लिए ऑडिटिंग का आदेश दिया है कि क्या इन कंपनियों ने उपभोक्ताओं से वसूले गए ज्यादा…
नई दिल्ली। ''सांठ-गांठ'' मामले में सीमेंट कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। नैशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने सीमेंट कंपनियों पर लगाए गए 6,300 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने इन कंपनियों पर आपसी ''सांठ-गांठ'' की मदद से कीमत को बढ़ाए जाने के मामले में दोषी करार देते हुए जुर्माना लगाया था। जस्टिस एस जे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय एनसीएलएटी…
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख को अब सिर्फ कुछ दिन ही बचे हैं। 31 मार्च को खत्म हुए वित्त वर्ष 2018 के लिए आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2018 है। काफी सारे करदाता आखिरी दिनों में आईटीआर फाइल करने की भूल करते हैं, जबकि उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए। आमतौर पर लोग आईटीआर फाइलिंग के दौरान कुछ सामान्य…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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