कारोबार

कारोबार (2762)

नयी दिल्ली: केंद्रीय श्रमिक संगठन सीटू ने ठेका श्रमिक नियमों के मसौदे की आलोचना की है जिसमें अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिये न्यूनतम वेतन 10,000 रुपये करने समेत अन्य प्रस्ताव किये गये हैं। ट्रेड यूनियन ने सभी के लिये न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये किये जाने की मांग की है। मसौदा नियम में ठेका श्रमिक (नियमन एवं उन्मूलन) केंद्रीय नियम 1971 के कुछ प्रावधानों में संशोधन की बात कही गयी है। श्रम मंत्रालय ने इस पर संबद्ध पक्षों की राय लेने के लिये 30 मार्च को इसे जारी किया।सीटू ने एक बयान में कहा, ‘इस मौके पर मंत्रालय का कदम बिल्कुल भी स्वागतयोग्य नहीं है क्योंकि इसमें भ्रम पैदा करने के साथ ठेका श्रमिकों से जुड़े बड़े मुद्दों को छोड़ दिया गया है। उन मुद्दों को केंद्रीय श्रमिक संगठन संयुक्त रूप से उठा रहे हैं। बयान के अनुसार ठेका कर्मचारियों के लिये न्यूनतम वेतन 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव कहीं से भी न्यायोचित नहीं है। ट्रेड यूनियन ने सभी के लिये न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये किये जाने की मांग की है।

नई दिल्ली : जमीन जायदाद से जुड़ी कंपनी आम्रपाली ने सोमवार को कहा कि धन की कमी और संपत्ति बाजार में मंदी के चलते उसकी परियोजनाओं में देरी हुई लेकिन कंपनी ने अब अपनी सभी परियोजनाओं पर काम में तेजी लाई है। उल्लेखनीय है कि कंपनी की हाउसिंग सोसायटी के नागरिकों ने अपनी शिकायतों को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करते हुए आम्रपाली की आलोचना की थी। इस मुद्दे पर कंपनी की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हुई है।आम्रपाली के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा ने कहा कि कंपनी अपने ग्राहकों की अपेक्षाओं पर हमेशा ही खरी उतरी है और वह भविष्य में सारी प्रतिबद्धताएं पूरी करेगी। नोएडा में आम्रपाली की स्फायर परियोजना के निवासियों की कंपनी के खिलाफ शिकायतें हाल ही में ट्वीटर पर वायरल हो गई थीं। नागरिकों ने अपने ट्वीट में कंपनी के ब्रैंड एंबैसडर और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को टैग करते हुए कहा कि या तो वे कंपनी से नाता तोड़ें या कंपनी को बकाया काम पूरा करने के लिए बाध्य करें।धोनी ने रविवार को कहा था कि वे कंपनियों की परियोजनाओं में देरी का मुद्दा कंपनी प्रबंधन के समक्ष उठाएंगे। शर्मा ने एक बयान में कहा है, 'यह वास्तव में खेदजनक है कि बाजार में मंदी, धन की कमी और कई अन्य कारणों के चलते बीते 3-4 साल में नोएडा क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठित डेवलपरों का निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। हम पर भी असर हुआ और हमारी परियोजनाओं में भी देरी हुई। हालांकि अब हालात सुधर रहे हैं। आम्रपाली ने अपनी सभी परियोजनाओं के निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए प्रयास किए हैं।’ आम्रपाली स्फायर परियोजना के बारे में शर्मा ने कहा है, 'केवल 4-5 फीसदी काम बाकी है जिसे अगले 2-3 साल में पूरा कर लिया जाएगा।

नई दिल्ली:-अगर आप फेसबुक पर फैले माई फर्स्ट  वीडियो नाम के वायरस से प्रभावित हो गए हैं तो घबराइए मत। फेसबुक और गूगल क्रोम की सेटिंग में मामूली बदलाव कर इस वायरस से पीछा छुड़ाना मुमकिन है। माई फर्स्ट  वीडियो दोस्तों को मैसेज भेजकर वायरस से लैस एक वीडियो पर क्लिक करने के लिए कहता है। यह पहली बार नहीं है, जब फेसबुक किसी वायरस के चपेट में आया है। इससे पहले ओसामा बिन लादेन की मौत का वीडियो दिखाने के नाम पर ऐसे ही एक वायरस ने हजारों फेसबुक यूजर के अकाउंट में सेंध लगाई थी

इसलिए खतरनाक है यह वायरस:-यह वायरस यूजर की जानकारी के बगैर ही उसके फेसबुक अकाउंट से दूसरे यूजर के इनबॉक्स में मैसेज भेज देता है। इस मैजेस के साथ यूजर के फेसबुक अकाउंट पर लगी फोटो नजर आती है और नीचे लिखा होता है My First Video । सामने वाला यूजर वीडियो को देखने के लिए जैसे ही मैसेज पर क्लिक करता है, वायरस उसके अकाउंट में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद वह यूजर उस कंप्यूटर पर अपने फेसबुक अकाउंट से लॉग-आउट नहीं कर पाता है। यही नहीं, उसके अकाउंट से माई फस्र्ट वीडियो का मैसेज दोस्तों के इन-बॉक्स और टाइमलाइन पर भी जाने लगता है। कई मामलों में इस मैसेज के साथ आपत्तिजनक सामग्री भी पोस्ट होने की शिकायतें सामने आई हैं। 

पासवर्ड भी नहीं बदलने देता:-माई फस्र्ट वीडियो यूजर के फेसबुक अकाउंट पर इस तरह कब्जा कर लेता है कि वे न तो लॉग-आउट कर पाते हैं और न ही अपना पासवर्ड बदल पाते हैं। यह वायरस यूजर के निजी फेसबुक अकाउंट के साथ-साथ उस कंप्यूटर को भी प्रभावित करता है, जिस पर साइट का इस्तेमाल किया जा रहा है। यही वजह है कि लोग उस कंप्यूटर से अपने फेसबुक अकाउंट का पासवर्ड नहीं बदल पाते हैं। 

वीडियो नहीं, क्रोम एक्सटेंशन खुलता है:-फेसबुक पर ‘माई फर्स्ट वीडियो’ एक खतरनाक क्रोम एक्सटेंशन के तौर पर काम करता है। ‘क्रोम एक्सटेंशन’ स्मार्टफोन एप की तरह होते हैं, जिनका इस्तेमाल कंप्यूटर पर किया जाता है। साइट पर दोस्तों के अकाउंट से आने वाले ‘माई फस्र्ट वीडियो’ पोस्ट पर जो भी व्यक्ति क्लिक करता है, उसके सामने एक नया वेब पेज खुलता है। इस वेब पेज पर वीडियो की जगह एक खतरनाक क्रोम एक्सटेंशन मौजूद होता है। हैकर ऐसे एक्सटेंशन बनाकर चुपके से क्रोम वेबस्टोर पर अपलोड कर देते हैं। इन पर क्लिक करते ही ये बिना अनुमति के क्रोम ब्राउजर का इस्तेमाल करने वाले यूजर के कंप्यूटर में इंस्टॉल हो जाते हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस से लैस क्रोम एक्सटेंशन न सिर्फ यूजर के कंप्यूटर, बल्कि उसकी ओर से खंगाली जाने वाली वेबसाइट के डाटा से  भी छेड़खानी करने की अनुमति हासिल कर लेते हैं। फेसबुक पर तेजी से फैला ‘My First Video भी ऐसे एक्सटेंशन में शामिल है।

ऐसे पहचानें खतरे वाले एक्सटेंशन:-कंप्यूटर पर खतरनाक क्रोम एक्सटेंशन की पहचान मुश्किल नहीं है। इसके लिए सबसे पहले गूगल क्रोम की सेटिंग्स में जाएं। यहां स्क्रीन पर बाईं ओर ऊपर की तरफ हिस्ट्री के नीचे एक्सटेंशन का विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक करने पर कंप्यूटर में मौजूद सभी एक्सटेंशन की सूची आ जाएगी। अगर कोई ऐसा एक्सटेंशन नजर आ रहा है, जो आपने इंस्टॉल नहीं किया है तो उसके नीचे दिए गए डिटेल्स के विकल्प पर जाएं। इससे पता चलेगा कि संबंधित एक्स्टेंशन को कंप्यूटर से जुड़ी कितनी चीजों तक पहुंच हासिल है।

कंप्यूटर से हटाना बेहद आसान:-कोई भी क्रोम एक्सटेंशन गैरजरूरी है या फिर निजी  डाटा में ताकझांक कर रहा है तो उसे आसानी से हटाया जा सकता है। इसके लिए उस एक्सटेंशन के सामने दिए गए डिलीट बटन पर क्लिक करें। संदिग्ध क्रोम एक्सटेंशन को हटाने के बाद अपने फेसबुक अकाउंट का पासवर्ड बदलना न भूलें। इससे अकाउंट सुरक्षित  हो जाता है।

वाटर एटीएम बुझाएगा आपकी प्यास

नई दिल्ली:-देशभर में पेयजल संकट के बीच सार्वजनिक स्थलों पर अब जनजल वाटर एटीएम आपकी प्यास बुझाएगा। सुप्रीमअस समूह की तरफ से की जा रही इस पहल का उद्देश्य अन्तर्गत रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, अस्पताल, स्कूल, धार्मिक स्थल, ग्राम पंचायत, कस्बों, शहरों, महानगरों और अन्य सार्वजनिक स्थानों में पेयजल की सुविधा प्रदान करना है।जनजल के संस्थापक पराग अग्रवाल के मुताबिक बहुत जल्द जनजल एटीएम रेलवे स्टेशनों पर भी देखने को मिलेंगे जहां यात्री मुफ्त में पेयजल प्राप्त कर सकेंगे। हालांकि पानी का एटीएम जनजल अन्य स्थानों पर मामूली लागत पर 24 घंटे पीने का पानी उपलब्ध कराएगा।इसकी लागत में मुख्य रूप से फिल्टरेशन, सिस्टम मेंटेनेंस और जुड़ी प्रणाली को समय-समय पर अपग्रेड करने से जुड़ा खर्च शामिल होगा। प्रत्येक जनजल एटीएम की क्षमता प्रतिदिन 20,000 लीटर सुरक्षित पेयजल प्रदान करने की है। इसके जरिये कई लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा जिन्हें इससे संबंधित प्रणालियों के परिचालन के लिए प्रशिक्षित भी किया जाएगा। इस एटीएम की प्रणाली बिना बिजली के परिचालित होती है

टैक्स हेवेन देशों में शामिल पनामा की एक कंपनी मोसेक फोंसेका के एक करोड़ से ज्यादा टैक्स दस्तावेज लीक हो गए हैं। इन दस्तावेजों के आंकड़े लीक होने से कालेधन पर अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। पनामा तो महज ट्रेलर भर है। दुनिया में कई ऐसे देश हैं जिन्हें टैक्स हेवेन करार दिया जाता है और जहां दुनियाभर से कालाधन ऑफशोर अकाउंटों में जमा किया जाता है।टैक्स हेवेन देशों को अगर कालेधन का कारोबार करने वाला देश कहें तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। कालेधन का कारोबार करने वाले ये देश लोगों का कालाधन छुपाने के लिए मोटी रकम अपने ग्राहकों से वसूलते हैं। टैक्स हेवेन देशों में होने वाले कालेधन के पूरे कारोबार पर पेश हैप्राइवेसी यानी निजता के लिए काफी पैसे चुकाने पड़ते हैं। बेहद अमीर लोगों को इसके लिए काफी अधिक पैसे चुकाने पड़ते क्योंकि उनपर सबकी नजर होती है। कुछ ऐसा ही कारोबार है कालेधन का। टैक्स हेवेन देशों के ऑफशोर अकाउंटों में अमीर अपना पैसा दुनिया और कर विभाग की नजरों से छुपा कर रख सकते हैं। ऐसे अकाउंट कानूनी और गैर कानूनी दोनों तरह के होते हैं। पनामा की कंपनी से लीक हुए कागजात इस ओर इशारा करते हैं कि कैसे अमीर और शक्तिशाली लोग उन देशों के ढीले कर नियमों का फायदा उठाकर अपने कालेधन को छुपाते हैं।

क्या है ऑफशोर अकाउंट:-ऑफशोर अकाउंट विदेशी कंपनियों में स्थापित वैसे बैंक अकाउंट होते हैं जो उस देश के लचर बैंकिंग और कॉरपोरेट नियमों का फायदा उठाकर अकाउंट में मौजूद संपत्ति और उसके मालिक का नाम छुपा लेते हैं। ऐसी कंपनियां अमूमन कागजों पर चलती है और इन्हें शेल कंपनी कहा जाता है। इनका न तो कोई ऑफिस होता है न ही कामकाज करने का कोई खास तरीका। कई देशों में ऐसे नियम हैं जहां बिना मालिक के नाम बताए भी कंपनी बनाई जा सकती है। इस अकाउंट के जरिए अकूत संपत्ति के मालिक कंपनी के माध्यम से अपने पैसों का इस्तेमाल करते हैं और टैक्स अथॉरिटी की नजरों में आने से बच जाते हैं। हालांकि, शेल कंपनियां और ऑफशोर अकाउंट गैर कानूनी नहीं होते लेकिन ये टैक्स से बचने, धोखाधड़ी करने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसे गैर कानूनी कार्यों में सहायक होते हैं।

स्विट्जरलैंड है कालेधन का स्वर्ग:-टैक्स हेवेन देशों की सूची में स्विट्जरलैंड शीर्ष पर है। स्विट्जरलैंड अपने ग्राहकों की संपत्ति संबंधित जानकारी को गुप्त रखने के लिए बेहद उच्चस्तरीय निजता के नियमों का पालन करता है। स्विट्जरलैंड में करीब 500 ऑफशोर बैंक हैं जहां से लोग अपने अकाउंट ऑपरेट करते हैं। यहां व्यक्तिगत बैंक के अनुसार कर में अपूर्ण या पूर्ण छूट के नियम होते हैं। इस वजह से स्विट्जरलैंड में पैसे छुपाना बेहद आसान हो जाता है।

केमैन आईलैंड:-करेबियन सागर के पश्चिम में स्थित केमैन आईलैंड तीन आईलैंड का एक समूह है। इन्हें ग्रैंड केमैन, केमैन बार्क और लिटिल केमैन कहा जाता है। ये आईलैंड जमेका के उत्तर पश्चिम में और क्यूबा के दक्षिण में स्थित हैं। यहां की ऑफशोर कंपनियों में कालाधन छुपाने वाले लोगों को किसी भी तरह का टैक्स भरने की जरूरत नहीं पड़ती। ये कंपनियां पर्सनल इनकम टैक्स, कैपिटल गेन, कॉरपोरेट टैक्स और पेरोल टैक्स भी नहीं लेती। खास बात तो ये हैं कि यहां से ऑपरेट करने वाली ऑफशोर कंपनियां अपने विदेशी उपभोक्ताओं से किसी भी तरह का कर नहीं वसूलती। एक अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार केमैन आईलैंड में मौजूद ऑफशोर कंपनियों ने करीब 130 मिलियन डॉलर की टैक्सेबल संपत्ति छुपाई है।

हांगकांग:-दक्षिण चीन सागर और पर्ल नदी के किनारे बसे हांगकांग में भी कालेधन का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होने के साथ-साथ हांगकांग कर चोरी करने वालों के लिए भी आकर्षण का मुख्य केंद्र है। हांगकांग की ऑफशोर कंपनियों में पैसे छुपाने का मुख्य कारण है कि यहां उपभोक्ताओं को अपना अकाउंट संचालित करने के लिए किसी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ता। यहां उन्हें सेल्स टैक्स, कैपिटल गेन और पेरोल टैक्स की कोई चिंता नहीं करनी पड़ती। इसके साथ ही उनके जमा धन से किसी तरह का पर्सनल टैक्स भी नहीं काटा जाता।

लक्जमबर्ग:-यूरोपीय यूनियन, ओईसीडी और नाटो जैसे संस्थानों का सदस्य होने के बावजूद लक्जगबर्ग कालेधन के लिए स्वर्ग है। इस देश की राजनीतिक पृष्ठभूमि आर्थिक, सैन्य और राजनीति के एकीकरण पर टिकी है। टैक्स जस्टिस इंडेस्क वैल्यू के अनुसार इस देश की आर्थिक सीक्रेसी इंडेक्स वैल्यू 1612.2 है और इसका सीक्रेसी स्कोर 55 है। लक्जमबर्ग धन छुपाने के मामले में तीसरे स्थान पर है। पनामा पेपर लीक में भी लक्जमबर्ग के चार बैंकों का नाम सामने आया है जिन्होंने अपने उपभोक्ताओं का कालाधन छुपाने की कोशिश की है।

अमेरिका:-अमेरिका में कर चोरी और कर से संबंधित मुश्किलों को बढ़ाने में नेवाडा और वयोमिंग राज्यों का सबसे बड़ा हाथ है। नेवाडा में कैपिटल गेन, गिफ्ट टैक्स, पर्सनल इनकम टैक्स और इंहेरीटेंस टैक्स नहीं भरना पड़ता। वहीं, वयोमिंग में कोई कॉरपोरेट टैक्स, इंवेंटरी टैक्स, यूनिटरी टैक्स, गिफ्ट टैक्स, एस्टेट टैक्स, पर्सनल इनकम टैक्स, फ्रेंचाइजी टैक्स और इंहेरीटेंस टैक्स नहीं देना पड़ता। टैक्स के मामले में इतने ढीले नियम होने के कारण विदेशों से इन अमेरिकी राज्यों भारी मात्रा में कालाधन आता है।

सिंगापुर:-दक्षिण पूर्व में स्थित द्वीपों के शहर सिंगापुर को भी कालाधन जमा करने का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। यहां की ऑफशोर कंपनियों में कोई भी बिना किसी परेशानी या जटिल प्रक्रियाओं के बैंक अकाउंट खोल सकता है। यही सबसे बड़ी वजह है कि टैक्स जस्टिस नेटवर्क में सिंगापुर की आर्थिक सीक्रेसी इंडेस्क वैल्यू 1118 है और सीक्रेसी स्कोर 69 है।

जर्सी:-ब्रिटेन के अंतर्गत आने वाले राज्य जर्सी में ऑफशोर कंपनियों की भरमार हैं। ये कंपनियां विदेशी उपभोक्ताओं को आसानी से बैंक अकाउंट उपलब्ध कराती हैं। यहां मौजूद ऑफशोर बैंक अकाउंट के बदले लिए गए करों से ही यहां की आर्थिक स्थिति संभली हुई है। टैक्स जस्टिस नेटवर्क रिपोर्ट के अनुसार जर्सी की आर्थिक सीक्रेसी इंडेक्स वैल्यू 750.1 है और सीक्रेसी स्कोर 65 है।

जापान:-जापान में मौजूद ऑफशोर बैंक भी अपने उपभोक्ताओं से इंटरेस्ट रेट नहीं वसूलते। ऐसे में लोगों के लिए यहां बैंक अकाउंट खोलना आसान हो जाता है। हालांकि, देश का कानून प्रवत्तर्न प्राधिकार इस बैंकों में होने वाली आर्थिक लेनदारियों पर नजर और नियंत्रण रखता है।

जर्मनी:-जर्मनी के कानून यहां के ऑफशोर बैंकों में अकाउंट खोलने की प्रक्रिया को बेहद सरल बना देते हैं। हालांकि, इसकी वजह से अब बड़ी संख्या में लोग टैक्स बचाने के लिए ऐसे अकाउंट खोल रहे हैं। इस समस्या से निजात पाने के लिए अब जर्मनी ने ज्यादा कड़े कानून और नियम बनाने का फैसला किया है। टैक्स जस्टिस नेटवर्क रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी की आर्थिक सीक्रेसी इंडेक्स वैल्यू 669 है और सीक्रेसी स्कोर 56 है।

बहरीन:-बहरीन में कई आर्थिक संस्थान दुनियाभर में उपभोक्ताओं को ऑफशोर बैंकिंग अकाउंट की सुविधाएं प्रदान करते हैं। हालांकि, आर्थिक निजता के मामले में इसके नियम थोड़े कमजोर हैं। इसलिए शीर्ष टैक्स हेवेन देशों की सूची में इसे 10वां स्थान प्राप्त है। बहरीन की आर्थिक सीक्रेसी वैल्यू 660 है जबकि इसका सीक्रेसी स्कोर 74 है।

छोटे-छोटे देशों में छुपाते हैं धन:-शीर्ष दस टैक्स हेवेन के अलावा बरमुडा, आइसेल ऑफ मैन ऑफ ब्रिटेन, मकाउ, कुक आईलैंड और मोनैको जैसे छोटे देशों या द्वीपसमूहों में भी लोग अपना धन छुपाते हैं। छोटी जगहें होने के कारण किसी का इनपर ध्यान भी नहीं जाता और वे भी इन अकाउंटों के माध्यम से अच्छी कमाई कर लेते हैं।

निजता को तोड़ने की हो रही कोशिश:-ऑफशोर अकाउंटों की निजता को तोड़कर पारदर्शी सिस्टम बनाने की कोशिश की जा रही है। 2010 में अमेरिकी कांग्रेस ने फॉरेन अकाउंट टैक्स कॉम्प्लायेंस एक्ट को पास किया जिसके तहत टैक्स देने वाले लोग विदेशी ऑफशोर अकाउंटों में कालेधन को छुपा नहीं सकेंगे। जी-20 ने भी कालेधन के संबंध में अपने सदस्य देशों से कड़े नियम बनाने का अनुरोध किया है। जी-20 के अंतर्गत दुनिया की 80 फीसदी अर्थव्यवस्था आती है।

इन देशों में जमा है भारत का 11 लाख करोड़ कालाधन:-बैंक ऑफ इटली की रिपोर्ट में कहा गया है कि रियल एस्टेट और गोल्ड के अलावा दूसरी तरह से जो कालेधन में निवेश कर रहे हैं, उसके बारे में जानकारी नहीं है। बीओआई की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टैक्स हैवन देशों में दुनिया की छह से सात लाख ट्रिलियन डॉलर की ब्लैक मनी मौजूद है जिसमें भारतीयों का शेयर करीब 152-181 लाख डॉलर यानी 9 से 11 लाख करोड़ रुपए है। बीओआई ने दावा किया है कि ये ब्लैक मनी शेयर्स, कर्ज या फिर बैंक डिपॉजिट्स के तौर जमा की गई है। टैक्स हेवेन कहे जाने वाले स्विट्जरलैंड और मॉरीशस जैसे देशों के बैंक अपने यहां भारतीयों को कालाधन जमा करने के लिए अकाउंट खोलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार के अवैध संपत्ति पर लगाम लगाने के मजबूत इरादे के मद्देनजर ये बैंक ऐसा कर रहे हैं।

ऑफशोर अकाउंटों का उपयोग कर रहे आतंकवादी:-टैक्स हेवेन देशों में मौजूद शेल और ऑफशोर कंपनियां आतंकवादी समूहों और अंतरराष्ट्रीय अपराधियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही हैं। इन अकाउंटों के गुप्त रखे जाने के कारण आतंकवादी समूह और अंतरराष्ट्रीय अपराधी बिना किसी डर के पैसे इधर से उधर पहुंचाते रहते हैं। अमेरिका की लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी की समीक्षा में यह पाया गया है कि कई ऐसे आतंकवादी समूह इस तरह की गुप्त आर्थिक सेवाओं का उपयोग कर अपने आतंक का नेटवर्क फैला रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि इन गुप्त सेवाओं से आतंकवादी समूहों को फायदा मिल रहा है और इससे आतंकवाद के खिलाफ चलाई जा रही लड़ाई मजबूत नहीं हो पा रही है।

आगरा:-एक्सप्रेस-वे, हाईवे, सिक्स लेन। रफ्तार बढ़ाने की होड़ लगी है। इनसे गाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी, जबकि सूचनाओं की गति बढ़ाने को ब्राडबैंड हाईवे बनाए जा रहे हैं। देशभर में फाइबर ऑप्टिकल केबिल बिछाई जाएंगी। इनसे हाईस्पीड ब्राडबैंड मुहैया कराया जाएगा। केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क कार्यक्रम शुरू किया गया है। एक लाख करोड़ सालाना की इस योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर तक ब्राडबैंड हाईवे का जाल बिछाना है। हिन्दुस्तान कॉलेज में डिजिटल इंडिया पर हुई कार्यशाला में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) के सचिव सुधीर गुप्ता ने योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनसंख्या के हिसाब से देश में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले अभी भी कम हैं। इनकी संख्या करीब 30 करोड़ है। लैंडलाइन की हालत और खराब है। देहात में तीन करोड़ यूजर हैं, जबकि शहरों में यह अनुपात 2.7 करोड़ ही रह गया है। शहरों की अपेक्षा ग्रामीण आबादी अधिक है। लिहाजा गांवों पर ही फोकस रखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य तीन साल में 3000 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल को बिछाना है। ग्राम पंचायत स्तर तक ओएफसी बिछाई जाएगी। 2019 तक 2.50 लाख पंचायतों को हाईस्पीड ब्रांडबैंड सुविधा से लैस करना है। इसके लिए संबंधित कंपनियों को काम सौंप दिया गया है। 2020 तक 60 करोड़ लोगों तक यह सुविधा पहुंच जाएगी।

दुनिया में 42 करोड़ लोगों को डायबिटीज है जिनमें से 10 करोड़ लोग भारत में रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डायबिटीज पर पहली ग्लोबल रिपोर्ट में ये ताजा आंकड़े जारी किए हैं। भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों में मधुमेह एक घातक बीमारी का रूप धारण करता जा रहा है। आने वाले दिनों में देश के लिए डायबिटीज एक चुनौती के रूप में सामने आने वाली है। जागरूकता के…
नई दिल्ली:-डाटाविंड इंक ने 5,999 रुपए (लगभग 90 डॉलर) में नया टैबलेट पीसी आई3जी7 पेश किया है। कंपनी ने यह जानकारी शुक्रवार को एक बयान में दी। ये टैब डिकाउंट के बाद 4,444 रुपए का मिलेगा।डाटाविंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनीत सिंह तुली ने कहा, ‘‘नए उत्पाद में ग्राहकों को बेहतर प्रौद्योगिकी और बेजोड़ स्टाइल का अनोखा मेल दे रहे हैं। कम कीमत के हमारे इंटरनेट-इनैबल्ड उत्पाद अधिकाधिक लोगों को…
नई दिल्ली:-तकनीक आपकी हर मदद कर रहा है। यूथ के लिए नौकरी सर्च करना हो या कॉम्पीटिशन की तैयारी हर काम में तकनीक मदद कर रहा है। ढेरों से एप्लिकेशन मौजूद हैं, जो पढ़ाई और तैयारी में छात्रों की मदद कर सकते हैं।बोर्ड परीक्षा के बाद अब सभी छात्र तरह-तरह की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारियों में लगे हुए हैं। तमाम ऐसी कई वेबसाइट और एप हैं जिनकी मदद से छात्रों…
नई दिल्ली:-90 करोड़ यूजर बेस वाले जीमेल पर कई लोगों के एक से अधिक अकाउंट होते हैं। हालांकि इन्हें एक समय में एक ही ब्राउजर में चलाना मुश्किल होता है। मगर यूजर चाहें तो ब्राउजर या टैब बदले बगैर एक से दूसरे जीमेल अकाउंट में जा सकते हैं। इसके लिए सिर्फ यूआरएल में 0 की जगह 1 नंबर टाइप करना होगा। आइए जानते हैं जीमेल के कुछ एेसे ही फीचरों…

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें