कारोबार

कारोबार (2859)

चेन्नई - सरकार और बैंक प्रतिनिधियों के बीच वार्ता विफल होने से यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने 29 जुलाई को बैंकों में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है।यूएफबीयू ने बताया कि इस हड़ताल में बैंक कर्मचारियों के नौ संगठन एआईबीईए, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीईएफ, आईएनबीओसी,एनओबीडब्लू और एनओबीओ हिस्सा लेंगे। इसमें सार्वजनिक, निजी और विदेशी बैंकों की 80 हजार शाखाओं के करीब 10 लाख कर्मचारी शामिल होंगे। यह हड़ताल बैंकिंग क्षेत्र में सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों के विरोध में किया जा रहा है।एआईबीईए के महासचिव सी. एच. वेंकटचलम ने कहा कि हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में चेक क्लियरेंस, नकदी जमा और निकासी समेत अन्य सुविधाए प्रभावित होंगी। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों की आलोचना करते हुए कहा कि इसके प्रभाव प्रतिकूल होंगे। उन्होंने कहा कि बैंकों में सार्वजनिक पूंजी कम करने से निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।इसके अलावा सार्वजनिक बैंकों के विलय और निजी बैंकों के विस्तार का प्रस्ताव, बैंकों के लिए कॉरपोरेट घरानों को लाइसेंस जारी करने, सार्वजनिक बैंकों में ऋण वसूली के अप्रभावी कदम उठाने और बकायेदारों को वसूली में रियायत देने का भी यूनियनों ने विरोध किया है।

नई दिल्ली - ऑफिस में बॉस की आंखों का तारा बनना भला कौन नहीं चाहेगा। हालांकि काम के दौरान कभी डेस्कटॉप पर आने वाले एप नोटिफिकेशन यूजर का ध्यान भटकाकर उसकी उत्पादक क्षमता को प्रभावित करते हैं तो कभी फाइलों और ईमेल में स्पेलिंग या व्याकरण को लेकर की गई मामूली गलती बॉस की नजरों में उसकी छवि बिगाड़ देती है। ऐसे में कुछ क्रोम एक्सटेंशन डाउनलोड कर अपनी कार्य क्षमता और योग्यता में सुधार ला सकते हैं।

बूमरैंग कैलेंडर:-Boomerang Calendar जीमेल और गूगल कैलेंडर के साथ मिलकर काम करता है। यह यूजर के अकाउंट में मौजूद ईमेल को खंगालकर याद दिलाता है कि किस तारीख पर, किस समय, किस व्यक्ति के साथ उसकी मीटिंग निर्धारित है। यही नहीं, यूजर जब किसी नई मीटिंग की योजना बना रहे होते हैं तो एक्सटेंशन में मौजूद ‘सजेस्ट टाइम्स टू मीट’ फीचर पर क्लिक कर पता लगा सकते हैं कि किस दिन उनके पास खाली समय बचा हुआ है। जीमेल अकाउंट पर दिन भर के कामकाज का खांका खींचने और बॉस, सहकर्मियों या क्लाइंट के साथ प्रस्तावित मीटिंग का समय याद रखने में यह मुफ्त एक्सटेंशन खासा कारगर साबित हो सकता है।

स्टे फोकस्ड:-क्रोम वेबस्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध ‘स्टे फोकस्ड’ उन वेबसाइट को ब्लॉक करने की सुविधा देता है, जिनका यूजर के दफ्तरी काम से कोई लेना-देना नहीं है और जो उसकी उत्पादक क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। Stay Focused पर जाकर यूजर को बस उस वेबसाइट का यूआरएल डालना पड़ता है, जिसका इस्तेमाल वह काम के दौरान बाधित रखना चाहता है। इसके बाद जब यूजर गूगल क्रोम पर ब्लॉक किया गया यूआरएल टाइप करेगा तो संबंधित साइट खुलने के बजाय स्क्रीन पर उसे काम पर ध्यान देने की सलाह नजर आएगी। ‘स्टे फोकस्ड’ पर वेबसाइट को ब्लॉक करने की समयसीमा तय करने का विकल्प भी मौजूद है।

इंस्टेंट ट्रांसलेट:-Instant Translate क्रोम वेबस्टोर पर मुफ्त में मौजूद ऐसा एक्सटेंशन है, जो स्क्रीन पर अलग से ‘ट्रांसलेट विंडो’ उपलब्ध कराता है। यूजर को विंडो पर क्लिक करके दो भाषाएं चुननी पड़ती हैं। पहली जिसके शब्दों का वह अनुवाद करना चाहता है और दूसरी जिसमें वह शब्दों का अर्थ हासिल करना चाहता है। इसके बाद ईमेल या दस्तावेज में मौजूद किसी भी शब्द को चुनते ही विंडो में उसका अर्थ नजर आने लगता है। ‘इंस्टेंट ट्रांसलेट’ हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, गुजराती, मलयालम, मराठी, पंजाबी, सिंधी, तमिल, तेलुगु और ऊर्दू भाषा के शब्दों का अनुवाद करने की सुविधा देता है। यह उन शब्दों को भी सहेजता जाता है, जिनका यूजर ने अनुवाद किया है।

टाइप डॉट फू:-अक्सर जल्दबाजी में कोई ईमेल या मैसेज टाइप करने पर यूजर से स्पेलिंग को लेकर गलतियां हो जाती हैं। बैकस्पेस या डिलीट बटन दबाकर स्पेलिंग नए सिरे से टाइप करना तो मुमकिन है, लेकिन इसमें समय की काफी बर्बादी होती है। यूजर इस समस्या से बचने के लिए Type.fu का सहारा ले सकते हैं। ईमेल लिखते वक्त यह एक्सटेंशन शब्दों की सही स्पेलिंग सुझाता है। इतना ही नहीं, ‘टाइप डॉट फू’ स्पेलिंग का ज्ञान सुधारने के लिए तरह-तरह के टेस्ट देने की सुविधा भी प्रदान करता है। साथ ही बताता है कि यूजर ने एक शब्द टाइप करने में कितना वक्त लगाया। इसे डाउनलोड करने के लिए 342 रुपये का शुल्क अदा करना पड़ता है।

 

सैन फ्रांसिस्को - कभी इंटरनेट जगत की बादशाह रही इंटरनेट कंपनी याहू को वेरीजॉन ने करीब पांच अरब डॉलर में खरीद लिया है। याहू और वेरीजॉन का सौदा 2017 की पहली तिमाही में पूरा होने की उम्मीद है। इसके लिए याहू के अंशधारकों की मंजूरी लेनी जरूरी होगी। वेरीजॉन ने पिछले साल लड़खड़ाते मीडिया हाउस एओएल को 4.4 अरब डॉलर में खरीदा था। याहू अब वेरीजॉन के एओएल मीडिया कंपनी का हिस्सा होगी।

सीईओ मैरीसा मेयर की छुट्टी नहीं होगी

सीईओ मैरीसा मेयर ने संकेत दिए हैं कि वह एओएल के सीईओ टिम आर्मस्ट्रांग के साथ कंपनी के इंटरनेट कारोबार को आगे बढ़ाएंगी। मैरीसा गूगल में कई साल टिम के साथ काम कर चुकी हैं। इस सौदे में याहू की नकदी, अली बाबा समूह और याहू जापान में उसकी हिस्सेदारी शामिल नहीं है। इनकी कीमत आज अरबों डॉलर में है।

याहू का इंटरनेट कारोबार

 

कैलीफोर्निया के सुनिवेल स्थित याहू इंक के मूल इंटरनेट कारोबार में याहू मेल, याहू न्यूज, याहू फाइनेंस और याहू स्पोर्ट्स शामिल हैं। पिछले आठ सालों में कंपनी की कमाई लगातार गिरती चली जा रही थी। याहू आंसर, एडवरटाइजिंग, ऑनलाइन मैपिंग भी उसकी सेवाओं में शामिल है।

वेरीजॉन सबसे बड़ी वायरलेस सेवा कंपनी

वेरीजॉन अमेरिका का सबसे बड़ी वायरलेस सेवा प्रदाता कंपनी है। वह अपने करोड़ों ग्राहक सीधे याहू की न्यूज साइट का फायदा दे सकेगी। विज्ञापन के लिए उसे गूगल और फेसबुक पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एओएल के तहत हफिंगटन पोस्ट, टेकक्रंच और इंडगैजेट जैसी न्यूज साइटें हैं। 

सर्च-सोशल मीडिया की अनदेखी भारी पड़ी 

इंटरनेट कंपनियों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सर्च इंजन, मोबाइल और सोशल मीडिया की अनदेखी करना याहू को भारी पड़ा। गूगल और फेसबुक के मुकाबले वजूद कायम रखने के लिए याहू ने दो दशक में कई सीईओ और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों की सेवाएं लीं। लेकिन कोई भी कंपनी को उबार नहीं सका।

सर्च इंजन को बेहतर नहीं बनाया

 

लेकिन याहू ने मल्टीमीडिया कारोबार बनाने के प्रयास में इंटरनेट सर्च पर आगे ध्यान नहीं दिया। इसने गूगल को धाक जमाने का मौका दिया। सोशल नेटवर्किंग साइट का आगाज करने में भी याहू गूगल, फेसबुक के मुकाबले काफी देरी की और स्मार्टफोन और टैबलेट से इंटरनेट कारोबार को जोड़ने की गंभीर कोशिश नहीं की। देर से जागी कंपनी ने 2004 में 02 अरब डॉलर देकर दो सर्च टेक्नोलॉजी फर्म की मदद ली, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

चार साल में बदल गई तस्वीर

1995 में जब टिमोथी कूगल ने कमान संभाली तो याहू के छह कर्मचारी थे और कोई कमाई नहीं थी। लेकिन 1997 तक याहू सर्वाधिक देखी जाने वाली वेबसाइट बन गई। उसकी मुफ्त मेल, न्यूज और चैट सेवा के 2.5 करोड़ यूजर बन गए।

2000 में उसके पास 10 करोड़ ग्राहक, दो हजार कर्मचारी और 125 अरब डॉलर का बाजार था। आॠनलाइन विज्ञापन का ईजाद कर उसने तहलका मचाया था। लेकिन 2001 आते-आते 20 माह में 93 फीसदी शेयर गिर गए।

गूगल को खरीदने का मौका गंवाया

याहू ने वर्ष 2000 में सर्च कंटेंट, सर्च बॉक्स की ब्रांडिंग के लिए गूगल की सेवाएं ली थीं। तब के याहू सीईओ टेरी सेमेल ने तब गूगल के संस्थापक लैरी पेज को एक अरब डॉलर में कंपनी बेचने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन थोड़ी रकम को लेकर सौदा नहीं हुआ। 2002 में गूगल शीर्ष सर्च इंजन बन गया।

फेसबुक की कीमत भी पहचान नहीं सकी

 

वर्ष 2006 में याहू ने फेसबुक को भी एक अरब डॉलर में खरीदने का सौदा किया, लेकिन कीमत को लेकर यहां भी सौदा नहीं हो पाया। आज फेसबुक का बाजार मूल्य 340 अरब डाॠलर है।

माइक्रोसॉफ्ट की 45 अरब डॉलर की पेशकश ठुकराई

जनवरी 2008 में जेरी यंग खुद सीईओ बने, उस वक्त माइक्रोसॉफ्ट ने याहू को उसके बाजार से 60 फीसदी ज्यादा दाम में खरीदने के लिए 45 अरब डॉलर की आकर्षक पेशकश की थी। लेकिन याहू ने यह मौका गंवा दिया। नवंबर में यंग ने इस्तीफा दे दिया।

गूगल की दिग्गज मैरीसा भी नाकाम रहीं 

याहू ने 2012 में मैरीसा को सीईओ बनाया। उन्होंने मेल, फोटो शेयरिंग साइट फ्लिकर, ऑनलाइन वीडियो और सर्च पर ध्यान दिया। नई तकनीक पाने के लिए दो अरब डाॠलर से 50 स्टार्टअप भी खरीदे। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। गूगल, फेसबुक, ट्विटर जैसी इंटरनेट कंपनियों के मुकाबले वह वजूद कायम नहीं रख सकी।

इतिहास बनकर रह गई

22 साल पुरानी कंपनी

 

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र जेरी यंग और डेविड फिलो ने 1994 में याहू की स्थापना की। वर्ष 2015 में उसके हर माह के 70 करोड़ पाठक थे और वह सबसे चौथी सबसे पसंदीदा वेबसाइट रही।

दो दशक में छह सीईओ बदले

टिमोथी कूगल, टेरी सेमेल, जेरी यंग, कैरोल बार्ट्ज, स्काॠट थांपसन और मैरीसा मेयर क्रमश : सीईओ बने।

130 अरब डॉलर आंकी गई थी एक वक्त याहू की कीमत 

04.83 अरब डॉलर में बिक गई कंपनी वेरीजाॠन के हाथों

01 अरब से ज्यादा इंटरनेट यूजर का दावा याहू का

20 करोड़ सक्रिय यूजर याहू के, विशेषज्ञों के मुताबिक

दिग्गजों की डिजिटल कमाई 

160 अरब डॉलर का डिजिटल विज्ञापन का कारोबार

गूगल : 27 अरब डॉलर 

फेसबुक : 10 अरब डॉलर 

वेरीजॉन : 3.6 अरब डॉलर

छंटनी का खतरा

हजारों कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है याहू से

 

1900 याहू कर्मियों को पहले ही हटा चुकी हैं मैरीसा

 

नई दिल्ली - माइक्रोसॉफ्ट का स्काइप एप बहुत जल्द पुराने एंड्रॉयड और विंडोज स्मार्टफोन पर काम करना बंद कर देगा। कंपनी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि स्काइप पीयर-टू-पीयर के बजाय क्लाउड सेवा आधारित नेटवर्किंग सिस्टम में तब्दील होने जा रहा है। इससे एप पर वीडियो कॉलिंग सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। हालांकि क्लाउड नेटवर्किंग से पुराने विंडोज और एंड्रॉयड फोन में नोटिफिकेशन देरी से मिलने व डिवाइस के आपस में न जुड़ने की शिकायतें सामने आ रही थीं। लिहाजा माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज-8, विंडोज-8.1, विंडोज-आरटी के साथ-साथ एंड्रॉयड के 4.0 आइस्क्रीम-सैंडविच से पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करने वाले फोन में स्काइप का सपोर्ट बंद करने का फैसला किया है।

 

 

 

 

 

 

 

नई दिल्ली - एंड्रॉयड फोन के उपभोक्ताओं को एप क्रैश होने, बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो जाने या फिर फोन बार-बार हैंग होने जैसी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सेटिंग में मामूली बदलाव कर इनसे छुटकारा पाना मुमकिन है। 

1. एप क्रैश हो जाना

समस्या- कई फोन पर यह मैसेज आता है कि कोई एप काम नहीं कर रहा है। फोन किसी भी ब्रांड का हो, कुछ दिन पुराना होने के बाद सभी फोन में यह दिक्कत आने लगती है। 

समाधान- इस समस्या के समाधान के लिए एप के कैशे को साफ करना होगा। इसके लिए फोन की ‘सेंटिंग्स’ में जाएं। यहां ‘एप्लीकेशन मैनेजर’ का विकल्प चुनें। इसके बाद ‘ऑल टैब’ में जाएं और जिस भी एप में दिक्कत है, उस पर क्लिक करें। इसके बाद बारी-बारी से ‘फोर्स स्टॉप’, ‘ क्लियर कैशे’ और ‘क्लियर डाटा’ के विकल्प पर क्लिक कर दें। फोन को रीस्टार्ट करने पर वह एप क्रैश नहीं होगा। दरअसल, उस एप में जो जानकारी स्टोर है, वह डिलीट हो जाती है और एप नए सिरे से इंस्टॉल किए गए एप की तरह काम करता है।

2. मेमोरी कार्ड कनेक्ट न होना

समस्या- कई लोगों के सामने यह समस्या आती है कि उनके फोन में मेमोरी कार्ड का आइकन दिखाई नहीं देता या फिर फोन इसे रीड नहीं कर पाता है। 

समाधान-  मेमोरी कार्ड को फॉर्मेट कर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। अगर कार्ड में कुछ जरूरी डाटा मौजूद है तो उसे कंप्यूटर से जोड़कर सेव कर लें। इसके बाद फोन में मेमोरी कार्ड लगाएं। फिर ‘सेटिंग्स’ के विकल्प में जाएं। यहां दिए गए ‘स्टोरेज’ के विकल्प को चुनें। फिर ‘फॉर्मेट एसडी कार्ड’ पर क्लिक कर दें। इसके बाद दोबारा रीस्टार्ट करने पर फोन कार्ड को रीड कर लेगा।

3. बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होना

समस्या- फोन की बैटरी जल्द डिस्चार्ज हो जाती है। इसके लिए बैकग्राउंड में चल रहे एप्लीकेशन और कनेक्टिविटी फीचर जिम्मेदार हो सकते हैं।

समाधान- स्क्रीन सेवर या कनेक्टिविटी फीचर जैसे ब्लूटूथ, वाई-फाई और एनएफसी जरूरत न होने पर बंद कर दें। ये फीचर ऑन होंगे तो बैटरी अधिक खर्च होगी। फोन की बैटरी लाइफ बढ़ाने के लिए चार्जिंग के समय फोन का डाटा बंद रखें। इसके अलावा बैकग्राउंड में चलने वाले फीचर को हटा सकते हैं। पहले यह जान लें कि बैकग्राउंड में चलने वाले फीचर कितने समय तक सक्रिय रहते हैं। इसके लिए ‘सेटिंग्स’ के ‘अबाउट डिवाइस’ विकल्प में दिए गए ‘बिल्ड वर्जन’ के विकल्प पर तब तक टैप करें, जब तक यह मैसेज न आ जाए कि आप अब डेवलपर बन गए हैं। इसके बाद फिर ‘सेटिंग्स’ में जाएं। यहां ‘डेवलपर’ का विकल्प दिखेगा। इस पर क्लिक करने के बाद ‘प्रोसेस स्टेट्स’ के विकल्प पर जाकर यह पता कर सकते हैं कि फोन में कौन से फीचर अधिक देर तक सक्रिय रहते हैं। गैर उपयोगी फीचर को बंद कर दें।

 

 

नई दिल्ली - भारतीय रिजर्व बैंक ने निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक पर अपने ग्राहक को जानिये (केवाईसी) और मनी लांड्रिंग रोधक नियमों में खामियों के लिए 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसी के साथ बैंक ऑफ़ बड़ौदा (बीओबी) पर पिछले साल सामने आए 6,100 करोड़ रुपये के घोटाले में 5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

देश के निजी क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े एचडीएफसी बैंक ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा है कि अक्तूबर, 2015 में मीडिया में आई विभिन्न बैंकों में अग्रिम आयात रेमिटेंस में अनियमितता की खबरों के सिलसिले में केंद्रीय बैंक ने उसके द्वारा किए गए लेनदेन की जांच की है। रिजर्व बैंक ने एचडीएफसी बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है जिस पर उसने विस्तत जवाब दिया है।

एचडीएफसी बैंक ने आगे कहा कि उसने अपने आंतरिक नियंत्रण तंत्र को मजबूत करने के लिए वहद सुधारात्मक कार्रवाई योजना क्रियान्वित की है जिससे भविष्य में इस तरह का घटनाक्रम न होने पाए। रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ़ बड़ौदा पर पिछले साल सामने आए 6,100 करोड़ रुपये के घोटोले में अनियमितता के लिए 5 करोड़ रपये का जुर्माना लगाया है। बैंक आॠफ बड़ौदा ने भी शेयर बाजारों को भेजी सूचना में यह जानकारी दी है।

 

नई दिल्ली - सिटी की ट्रैफिक भरी सड़कों पर इनकी ड्राइव टेंशन फ्री होती है और हाइवे पर इन्हें चलाना मज़ेदार। यहां बात हो रही है ऑटोमैटिक कारों की। भारत में भी धीरे-धीरें ऑटोमैटिक कारों का ट्रेंड चल निकला है। हर बजट में अब छोटी ऑटोमैटिक कारें आने लगी हैं। अगर आप भी ऐसी ही एक छोटी ऑटोमैटिक कार लेना चाहते हैं तो यहां हम लाए हैं तीन लाख से…
मुंबईः विदेशों में अवैध तरीके से धन भेजने के पिछले साल अक्तूबर में प्रकाश में आए मामले में रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा पर 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। सरकारी बैंक ने आज बी.एस.ई. को बताया कि उसके आंतरिक ऑडिट तथा आर.बी.आई. और जांच एजैंसियों की पड़ताल में अक्तूबर 2015 में कुछ अनियमितताएं सामने आई थीं। आर.बी.आई. ने उनकी विस्तृत जांच की और…
वशिंगटनः इंटरनैट की दुनिया पर राज करने वाला याहू इतिहास बनने की कगार पर है। वेराइजन कम्यूनिकेशन 33,500 करोड़ रुपए में याहू के कोर बिजनैस को खरीदने जा रही है। सोमवार को खरीद समझौते पर मुहर लग सकती है। सूत्रों ने बताया कि यह ऐलान न्यूयॉर्क के मार्कीट खुलने से पहले होने की उम्मीद है। यह डील याहू के भविष्य को लेकर फरवरी से चली आ रही अनिश्चितता को खत्म…
जालंधरः रेलवे में होने वाले बदलाव के बारे में कई बार कर्मचारियों को भी टिकट के ऑटो अपग्रेडेशन सिस्टम के बारे में नहीं पता चलता। इसकी वजह से इसका फायदा लोग नहीं उठा पा रहे हैं। रेलवे रिजर्वेशन टिकटों पर ऑटो अपग्रेडेशन की सुविधा देता है। इसके तहत स्लीपर की टिकट लेने के बाद ऑटो अपग्रेडेशन कॉलम को भरें । इस कॉलम के भरने के बाद रेलवे की तरफ से…

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें