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कारोबार (2338)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को रफ्तार देने के लिए देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों से बुधवार को मुलाकात कर रोडमैप तैयार करेंगे। यह बैठक सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की तरफ से आयोजित की गई है जिसमें वित्तमंत्री अरूण जेटली समेत कई मंत्री, नीति आयोग में काम करनेवाले और प्रमुख अर्थशास्त्री शामिल होंगे।इस बैठक का आयोजन ऐसे समय पर किया गया है जब देश के विकास दर के कम रहने का अनुमान सामने आया है। यह बैठक बजट पेश किये जाने से पहले हो रही है। वित्त मंत्री अरूण जेटली एक फरवरी को बजट पेश करेंगे।नीति आयोग ने प्रधानमंत्री के साथ ‘आर्थिक नीति: आगे का रास्ता’ विषय पर चर्चा के लिये अर्थशास्त्रियों और क्षेत्र के विशेषज्ञों के समूह को आमंत्रित किया है। इस चर्चा में मुख्य रूप से छह विषय, वृहत आर्थिक संतुलन, कृषि तथा ग्रामीण विकास, शहरी विकास, बुनियादी ढांचा तथा संपर्क, रोजगार, विनिर्माण और निर्यात तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर गौर किया जाएगा।बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, पोत परिवहन एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह, योजना राज्यमंत्री इंद्रजीत सिंह के साथ नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी भाग लेंगे. इसके अलावा सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में भाग लेंगे।

वित्त मंत्री अरुण जेटली इस साल एक फरवरी को देश का आम बजट पेश करेंगे। वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने के बाद यह देश का पहला बजट होगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि बजट सत्र का पहला चरण 29 जनवरी से 9 फरवरी तक होगा। दूसरा चरण 5 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगा। संसद का बजट सत्र राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण से शुरू होगा। संसद के दोनों सदनों का यह संयुक्त सत्र 30 जनवरी को होगा।31 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण के लोकसभा के पटल पर रखे जाने की उम्मीद है और उसके अगले दिन आम बजट पेश किए जाने की संभावना है। बजट को फरवरी के अंत में प्रस्तुत किए जाने की ब्रिटिशकालीन परंपरा को खत्म करते हुए पिछले साल जेटली ने पहली बार आम बजट को एक फरवरी को पेश किया था।इसका तर्क यह है कि एक अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले सभी बजट प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाए ताकि समय पर धन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इस बदलाव के साथ ही रेल बजट को अलग से पेश करने की परंपरा को भी समाप्त कर इसे आम बजट में ही मिला दिया गया था।

आयकर विभाग ने बेनामी संपत्तियों पर तेजी से कार्रवाई करते हुए 3500 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। बेनामी संपत्ति लेनदेन प्रतिबंध कानून पिछले साल एक नवंबर 2016 को लागू हुआ था। इसके बाद आयकर विभाग ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 900 मामलों में 3500 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति जब्त की है। इसमें से 2900 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति है। ये आंकड़े दिसंबर 2017 तक के हैं।वित्त मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया है कि, जब्त संपत्तियों में प्लॉट, फ्लैट, दुकानें, जेवरात, वाहन, बैंक खातों में जमा धन और सावधि जमा आदि है।आयकर विभाग की चेतावनी के एक दिन बाद वित्त मंत्रालय का बेनामी संपत्ति जब्त करने का आंकड़ा सामने आया है। विभाग ने बेनामी संपत्ति के लेनदेन से लोगों को दूर रहने की चेतावनी देते हुए कहा था कि, इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिसमें आपराधिक मुकदमा और सात वर्ष तक की कड़ी सजा हो सकती है।

केंद्र सरकार के अगले बजट में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिल सकती है। आम बजट में सरकार कर छूट सीमा बढ़ाने के साथ साथ कर स्लैब में भी बदलाव कर सकती है। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी है।सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय के समक्ष व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा को मौजूदा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये करने का प्रस्ताव है।लांकि, छूट सीमा को पांच लाख रुपये तक बढ़ाने की समय समय पर मांग उठती रही है। वर्ष 2018-19 का आम बजट मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट होगा। इस बजट में सरकार मध्यम वर्ग को, जिसमें ज्यादातर वेतनभोगी तबका आता है, बड़ी राहत देने पर सक्रियता के साथ विचार कर रही है। सरकार का इरादा है कि इस वर्ग को खुदरा मुद्रास्फीति के प्रभाव से राहत दी मिलनी चाहिए। उद्योग मंडल सीआईआई ने भी कहा है कि मुद्रास्फीति की वजह से जीवनयापन लागत में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में निम्न आय वर्ग को राहत पहुंचाने के लिये आयकर छूट सीमा बढ़ाने के साथ साथ अन्य स्लैब का फासला भी बढ़ाया जाना चाहिये।

पिछले बजट में आयकर स्लैब नहीं बदला था:-वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले बजट में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया लेकिन छोटे करदाताओं को राहत देते हुये सबसे निचले स्लैब में आयकर की दर 10 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी थी। सबसे निचले स्लैब में ढाई लाख से लेकर पांच लाख रुपये सालाना कमाई करने वाला वर्ग आता है।
मौजूदा कर स्लैब-
2.5-5 लाख : 5 %
5-10 लाख : 20 %
10 लाख से ज्यादा : 30 %
संभावित बदलाव-
5-10 लाख रुपये : 10 %
10-20 लाख रुपये : 20 %
20 लाख से ज्यादा : 30 %
कंपनी कर 25 प्रतिशत करने की मांग :-उद्योग जगत ने कंपनियों के लिये कंपनी कर की दर को भी 25 प्रतिशत करने की मांग की है। हालांकि सरकार पर राजकोषीय दबाव को देखते हुए उसके लिए इस मांग को पूरा करना मुश्किल लगता है। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार की अप्रत्यक्ष कर वसूली पर दबाव बढ़ा है। राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.2 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखना है। सरकार ने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के लिये पिछले दिनों ही बाजार से 50,000 रुपये का अतिरिक्त उधार उठाया है। आयकर विभाग ने लोगों बेनामी लेन-देन से दूर रहने को सचेत किया है। विभाग ने कहा है कि नये कानून में बेनामी सम्पत्ति रखने पर लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है और सात साल तक का कठोर कारावास भी हो सकता है।विभाग ने यह चेतावनी बुधवार को राष्ट्रीय अखबारों में सार्वजनिक विज्ञापन प्रकाशित करायी है।'बेनामी लेन-देन से रहें दूर शीर्षक वाले इस विज्ञापन में काला धन को मानवता के खिलाफ अपराध बताया गया है तथा जागरुक नागरिकों से इसे दूर करने में सरकार की मदद का अनुरोध किया गया है।विभाग ने कहा, ''बेनामीदार, लाभार्थी और बेनामी लेन-देन से जुड़े लोग मुकदमे के भागी हैं और उन्हें सजा के तौर पर सात साल तक की सश्रम कैद व बेनामी संपत्ति के बाजार मूल्य का 25 प्रतिशत तक जुर्माना हो सकता है।विभाग ने एक नवंबर 2016 से अक्तूबर 2017 के बीच 517 नोटिस जारी किये तथा कुर्की की 541 कार्रवाई तथा कुल 1,833 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गयीं।विभाग ने एक नवंबर 2016 से नये बेनामी संपत्ति (रोक) संशोधन अधिनियम 2016 के तहत कार्रवाई की शुरुआत की है।विज्ञापन में कहा गया कि गलत जानकारी देने वाले लोगों को नये कानून के तहत पांच साल की सजा व संपत्ति के बाजार मूल्य का 10 प्रतिशत तक जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा बेनामी संपत्ति को जब्त भी किया जा सकता है तथा कर चोरी के आरोप में आयकर अधिनियम 1961 के तहत मुकदमा भी चल सकता है।

दुनिया के सबसे बड़े निवेशक और शीर्ष धनकुबेरों में शामिल वारेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे इंक की कमान एक भारतीय संभाल सकता है। भारतीय मूल के अजित जैन बफे के उत्तराधिकारी की दौड़ में सबसे आगे हैं। हालांकि, बफे ने इसकी अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन जैन का ओहदा बढ़ाए जाने के बाद वह दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं।
आईआईटी खड़गपुर से की पढ़ाई:-66 वर्षीय जैन को बुधवार को बर्कशायर हैथवे इंक इंश्योरेंस ऑपरेशंस का वाइस चेयरमैन बनाकर बोर्ड में जगह दी गई।न्यूयॉर्क में रहने वाले अजित जैन का जन्म वर्ष 1951 में ओडिशा में हुआ था। 1972 में उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से मेकनिकल इंजिनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। वर्ष 1978 में अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की।
सेल्समैन भी रहे जैन:-आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद जैन वर्ष 1973 से 76 के बीच आईबीएम में सेल्समैन रहे। 1976 में आईबीएम ने भारत में अपना कारोबार बंद कर दिया और जैन की नौकरी चली गई। वर्ष 1978 में वह अमेरिका चले गए और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए डिग्री लेकर मैकिंजी एंड कंपनी में नौकरी की। वर्ष 1986 में उन्होंने मैंकिंजी को छोड़कर वॉरने बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे ज्वाइन कर लिया।
12,000 करोड़ रुपये के हैं मालिक:-सेल्समैन के रूप में करियर की शुरुआत करने और फिर कंपनी बंद होने के बाद बेरोजगार होने वाले जैन आज की तारीख में करीब 12,000 करोड़ रुपये से अधिक ( दो अरब डॉलर) की संपत्ति के मालिक हैं।
जैन ने बफे को किया मालामाल:-दुनिया के सबसे बड़े निवेशक और शीर्ष धनकुबेरों में शामिल बफे कई बार यह बात दोहरा चुके हैं कि जैन की वजह से उन्होंने अरबों डॉलर की कमाई की। वर्ष 2015 में निवेशकों के नाम पत्र में भी बफे ने जैन की जमकर तारीफ की थी।
एबल से होगा मुकाबला:-बर्कशियर हैथवे एनर्जी के चीफ एग्जिक्युटिव 55 वर्षीय एबल को नॉन-इंश्योरेंस बिजनेस ऑपरेशंस के लिए बर्कशायर का वाइस चेयरमैन बनाया गया है। उन्हें भी जैन के साथ बोर्ड में जगह दी गई है। विश्लेषकों का मानना है कि बफे के उत्तारीधिकारी की दौड़ में जैन को एबल से कड़ी टक्कर मिलेगी। हालांकि, खुद बफे ऐसा नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि जैन और एबल अपने-अपने कारोबार के माहिर खिलाड़ी हैं और और दोनों एक-दूसरे को बखूबी जानते हैं।
बफे और बर्कशायर हैथवे :-बर्कशायर हैथवे के 90 से ज्यादा ऑपरेटिंग यूनिट्स हैं। इनमें बीएनएसएफ रेलरोड, जीको ऑटो इंश्योरेंस, डेयरी क्वीन आइस क्रीम, फ्रूट ऑफ द लूम अंडरवेयर, सीज कैंडीज के साथ-साथ कई तरह के इंडस्ट्रियल और कमेकिल ऑपरेशन शामिल हैं। वर्ष 2016 में समूह का राजस्व 223 अरब डॉलर का रहा जो टाटा समूह के बाजार पूंजीकरण से करीब दोगुना अधिक है

देश की राजधानी दिल्ली में डीजल के दाम अब तक के सारे रिकॉर्ड्स को तोड़ दिया है। जबकि, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत 68 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई है, जो मई 2015 के बाद से उच्चतम स्तर पर है। केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने मंगलवार को बताया कि आम लोगों को राहत पहुंचाने की अब जिम्मेदारी राज्य सरकार के ऊपर निर्भर है।उन्होंने कहा- “सिर्फ केन्द्र सरकार ही नहीं इसके ऊपर टैक्स लगाती है। राज्य सरकारें भी पेट्रोल और डीजल पर टैक्स लगाती है। केन्द्र ने प्रति लीटर 2 रूपये एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। अब राज्य सरकार को भी अपना वैट कम कर अपनी चिंता जाहिर करनी चाहिए।”
डीजल ने तोड़ा दिल्ली में रिकॉर्ड:-कच्चे तेल में लगातार बढ़ोत्तरी के चलते कई शहरों के पेट्रोल पंपों ने अपने दाम में इजाफा किया है। दिल्ली में डीजल ने अब तक का सारा रिकॉर्ड तोड़ते हुए 60.66 के पार पहुंच गया है। पेट्रोल भी 70.53 रूपये तक पहुंच चुका है। इसकी मुख्य वजह है अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों का बढ़ना। अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 68.29 प्रति डॉलर को छूने के बाद इसका दाम 68.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यूएस बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई की कीमत भी 47 फीसदी बढ़कर 62.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है जो मई 2015 के बाद सर्वाधिक है।

 

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को रफ्तार देने के लिए देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों से बुधवार को मुलाकात कर रोडमैप तैयार करेंगे। यह बैठक सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की तरफ से आयोजित की गई है जिसमें वित्तमंत्री अरूण जेटली समेत कई मंत्री, नीति आयोग में काम करनेवाले और प्रमुख अर्थशास्त्री शामिल होंगे।इस बैठक का आयोजन ऐसे समय पर किया गया…
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सरकार ने विमानन कंपनी, रिटेल कारोबार और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में बड़ी ढील दी है। इस मंजूरी के बाद अब सिंगल ब्रांड रिटेल में ऑटोमैटिक रूट से 100 फीसद एफडीआई आ सकेगी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने एकल ब्रांड खुदरा व्यापार, निर्माण सेवा गतिविधियों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दे दी है। इसके लिये सरकारी अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।प्रधानमंत्री…
नई दिल्ली - इन दिनों तमाम एयरलाइंस कंपनियां हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कई ऑफर्स लेकर आई हैं। इंडिगो, एयरएशिया, गो एयर, विस्तारा आदि जैसी विमानन कंपनियां सस्ती दरों पर टिकट उपलब्ध करा रही हैं। इंडिगो न्यू ईयर सेल के तहत महज 899 रुपये में टिकट उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा एयरएशिया कंपनी टिकटों की कीमत 1599 रुपये से शुरू कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें…
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