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नई दिल्ली - बीते वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में देश की प्रमुख टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल के कंसोलिडेटिट नेट प्रॉफिट में साल दर साल के आधार पर 77.79 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। यह मुनाफा 83 करोड़ रुपए के स्तर पर रहा है। बीते वर्ष की समान अवधि में कंपनी ने 373.40 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया। वहीं पिछली दिसंबर 2017 की तिमाही में कंपनी को 305 करोड़ रुपये का प्रोफिट हुआ था।
कंपनी के अगर साल दर साल के आदार पर कंसोलिडेटिड रेवेन्यू की बात करें तो 10.48 फीसद की कमजोरी के साथ यह 19,634.30 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया है। वहीं बीते वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 21934.60 करोड़ के स्तर पर रहा है।
कंपनी के स्टैंडअलोन नेट लॉस की बात करें तो यह 760.20 करोड़ रुपये रहा है जोकि वित्त वर्ष 2017 की चौथी मिताही में 12,176.20 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी का एआरपीयू साल दर साल के आधार पर 26.60 फीसद घटकर 116 रुपये के स्तर पर आ गया है। वहीं बीते वर्ष की समान अवधि में यह 158 रुपये के सत्र पर रहा था।
भारती एयरटेल क्या रहा बंद स्तर
बीएसई पर भारती एयरटेल 0.61 फीसद की बढ़त के साछ 406.10 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है। इसका दिन का उच्चतम 408.50 और निम्नतम 396 का स्तर रहा है। वहीं 52 हफ्तों का उच्चतम 565 और निम्नतम 336.95 का स्तर रहा है।


नई दिल्ली - करीब 1800 से ज्यादा एंटिटीज ने बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की ओर से लगाए गये जुर्माने का भुगतान नहीं कर पाईं। नियमों के उल्लंघन के चलते पिछले महीने सेबी ने इनपर जुर्माना लगाया था। इसके डिफॉल्टर की सूची में इंडिविजुअल और कंपनियां दोनों शामिल हैं जो सिक्योरिटीज मार्केट से संबंधित कई अपराधों के चलते जुर्माने का भुगतान करने में विफल रहीं। इनमें से कुछ मामले तो करीब दो दशक पुराने हैं।
ये उल्लंघन अनरजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवाओं से संबंधित थी। यह निवेशकों की शिकायतों का निवारण करने में विफल, निवेशकों से अनाधिकृत तरीके से पैसे लेने जैसे मामलों शामिल हैं। हालांकि कुछ बकाया महज 15000 रुपये ही है, वहीं, कुछ कि बकाया राशि तो लाख और करोड़ तक है। कुछ बकाया तो वर्ष 1998 से लंबित हैं और अधिकांश कोर्ट और अन्य फोरम में हैं।
31 मार्च, 2017 तक सेबी ओर से लगाए गये जुर्माने का भुगतान करने में विफल रहे कुल डिफॉल्टर्स की संख्या 1847 के स्तर पर रही है। यह सेबी की ओर से जारी किये गये डेटा के अनुसार है।
इन डिफॉल्टर्स में अनिरूद्ध सेठी, पीएसीएल और उसके दो निदेशकों, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, एचबीएन डेयरीज एंड एलायड, प्लेथिको फार्मास्युटिकल्स, आईएचआई डेवलपर्स इंडिया, आईएफसीआई, रोज वैली रीयल एस्टेट और कंस्ट्रक्शंस और बीटल लाइवस्टाक्स एंड फार्म शामिल हैं। सेबी बकाये की रिकवरी के लिए बैंक के साथ-साथ डिमैट एकाउंट को अटैच करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है।


नई दिल्ली - साइबर सुरक्षा को बढ़ाने के उदेश्य से बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने नए दिशानिर्देश जारी कर दिये हैं। इसके तहत मोबाइल एप से ट्रेडिंग करने के लिए फिंगर प्रिंट या आई स्कैन की जरूरत होगी।
इस संबंध में बाजार नियामक सेबी ने ब्रोकर्स, ट्रेडर्स और स्टॉक एक्सचेंज से राय मांगी है। नियामकीय सूत्रों के अनुसार अंतिम नियमन सभी शेयरधारकों की राय को ध्यान में रखते हुए बनाए जाएंगे। सेबी के प्रस्ताव के अनुसार स्मार्टफोन और टैबलेट्स पर इंस्टॉल्ड एप की स्थिति में ट्रेडर्स और रिटेल निवेशकों को शेयर्स की खरीद और बिक्री के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की जरूरत हो सकती है।
साथ ही, इसका भी प्रस्ताव रखा गया है कि कुछ गलत लॉग इन के बाद निवेशक का एकाउंट लॉक किया जा सकता है जो कि नये तरीके से ऑथेंटिकेशन करने पर खुलेगा। नये सिरे से ऑथेंटिकेशन के लिए ई-मेल या वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) निवेशकों को भेजा जाएगा।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे ब्रोकर्स, जो कम मार्जिन पर काम करते हैं, को प्रस्तावित दिशानिर्देशों का पालन करने में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
सेबी की ओर से यह प्रस्ताव ऐसे समय पर आया है जब दुनियाभर से जिनमें भारत भी शामिल है, सिस्टम्स पर साइबर अटैक की घटनाएं सामने आ रही हैं। साथ ही, सेबी आईटी टीम में एक्सपर्ट्स को भी शामिल कर रहा है ताकि इस तरह के अटैक से मजबूत फायरवॉल और तेज सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित किये जा सकें।


नयी दिल्ली - राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने गूगल की एक अंतरिम याचिका पर आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
एनसीएलएटी के चेयरमैन न्यायाधीश एस. जे. मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने आयोग के आदेश को चुनौती देने वाली गूगल की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
गूगल ने यह याचिका भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा लगाए गए 136 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती देते हुए दायर की थी। इस साल फरवरी में आयोग ने गूगल पर भारतीय बाजार में ऑनलाइन सर्च में अनुचित कारोबारी प्रक्रियाओं को अपनाने के चलते 136 कराड़ रुपये के जुर्माने का आदेश दिया था।
आयोग ने गूगल के खिलाफ 135.86 करोड़ रुपये का यह जुर्माना 2012 में उसके विरुद्ध दायर की गई ' अविश्वासी आचरण की शिकायतों के आधार पर लगाया था। यह कंपनी के भारतीय परिचालन से विभिन्न कारोबारों से 2013, 2014 और 2015 में हुई कुल औसत आय के पांच प्रतिशत के बराबर है। इस संबंध में गूगल के खिलाफ मैट्रिमोनी डॉट कॉम और कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी ने शिकायत दायर की थी।

 


नई दिल्ली - निजी क्षेत्र के अग्रणी कर्जदाता एचडीएफसी बैंक ने मार्च में खत्म हुए पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 4,799.3 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 20.3 फीसद ज्यादा है। बैंक ने कहा कि टैक्स के मद में 2,495.3 करोड़ रुपये का प्रावधान करने के बाद चौथी तिमाही में उसका शुद्ध मुनाफा 4,799.3 करोड़ रुपये रहा।
एक बयान में बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन अवधि में उसकी स्टैंडअलोन आय बढ़कर 25,549.7 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो उससे पिछले वित्त वर्ष (2016-17) की समान अवधि में 21,560.7 करोड़ रुपये थी। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को दी जानकारी में बैंक ने बताया कि उसके निदेशक बोर्ड अगले एक वर्ष में डेट इंस्ट्रूमेंट्स के प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिये 50,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी प्रदान कर दी है।
जहां तक पूरे वित्त वर्ष का सवाल है, तो पिछले वित्त वर्ष (2017-18) के दौरान बैंक का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 21.4 फीसद बढ़कर 18,510 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। समीक्षाधीन अवधि में बैंक का कंसोलिडेटेड एडवांस 19.6 फीसद बढ़कर 7,00,034 करोड़ रुपये पर जा पहुंचा। उससे पिछले वित्त वर्ष के दौरान यह आंकड़ा 5,85,481 करोड़ रुपये था।
बैंक ने बीएसई को बताया कि वित्त वर्ष के आखिर में उसका सकल फंसा कर्ज (एनपीए) उसके ग्रॉस एडवांस का 1.30 फीसद रहा, जो उससे पिछले वित्त वर्ष की समाप्ति पर 1.29 फीसद था। वहीं, नेट एनपीए पिछले वित्त वर्ष की समाप्ति पर नेट एडवांस का 0.4 फीसद रहा।
वित्तीय नतीजों के अनुमोदन के अलावा बैंक के बोर्ड ने दो रुपये मूल्य वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर के बदले 13 रुपये का लाभांश देने की घोषणा की है। वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान बैंक ने समान इक्विटी शेयर के लिए 11 रुपये लाभांश दिया था।


नई दिल्ली - नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई में भी कुछ बड़े बदलाव लागू हो चुके हैं। ये बदलाव आम आदमी से सरोकार रखने वाले हैं और इससे सीधे तौर पर 25 करोड़ बैंक खाताधारक प्रभावित होंगे। अगर आपको इन बदलावों के बारे में जानकारी नहीं है तो हमारी यह खबर आपके काम ही है। हम अपनी इस खबर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में हुए तीन बदलावों के बारे में जानकारी देने रहे हैं।
एसबीआई के मिनिमम बैलेंस वाले नियम में हुआ बदलाव:
हाल ही में एसबीआई ने खाते में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले चार्जेज में 75 फीसद की कटौती की थी। इस नियम को 1 अप्रैल से लागू होना था। जैसा कि 1 अप्रैल को बैंक की क्लोजिंग थी लिहाजा ये नियम आम जनता के लिए 2 अप्रैल से प्रभावी हो चुके हैं। फैसले के बाद अब मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में खाते में मंथली एवरेज बैलेंस (एएमबी) न रखने पर 50 के बजाए 15 रुपए प्रतिमाह का चार्ज देना होगा। उसी तरह अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में यह चार्ज 40 से घटाकर 12 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। वहीं 10 रुपए का जीएसटी भी एक निश्चित स्थिति में लागू होगा। आपको बता दें कि खाते में एवरेज बैलेंस (एएमबी) न रखने पर शुल्क लगाए जाने के एसबीआई के फैसले का तीखा विरोध हुआ था।
अमान्य हो गए एसबीआई की सहयोगी शाखाओं के चेकबुक:
जैसा कि आपको मालूम है कि एसबीआई में उसके तमाम सहयोगी बैंकों का विलय हो चुका है, लिहाजा इन पुराने बैंको की चेक बुक को एसबीआई की शाखा में 31 मार्च तक बदला जाना था। यानी से सभी चेक बुक जो कि बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद , स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और भारतीय महिला बैंक की थीं अब अमान्य हो चुकी हैं। अब आप इनका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
एसबीआई में शुरू होगी इलेक्टोरल बॉण्ड की बिक्री:
चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2017-18 के आम बजट में चुनावी बॉण्ड की स्कीम लाने की घोषणा की थी। इसके मुताबिक केवल वही पंजीकृत राजनीतिक दल इन बॉण्डों के जरिए चंदा ले पाएंगे जिन्हें पिछले लोकसभा अथवा विधानसभा चुनाव में एक फीसद से अधिक मत प्राप्त होंगे। राजनीतिक पार्टियां इन बॉण्डों को केवल अधिकृत बैंक खातों के जरिए ही भुना पाएंगी। लोग राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए इन्हें व्यक्तिगत अथवा समूह के तौर पर भी खरीद सकेंगे। एसबीआई ने इनकी बिक्री 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी है।

 

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती चावल को भी ज्यॉग्रफीकल इंडीकेटर (जीआइ) पेटेंट दिए जाने के विरोध में उद्योग संगठन उतर आए हैं। संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार को बासमती चावल की ग्लोबल प्रतिष्ठा को बचाना चाहिए और मध्य प्रदेश समेत दूसरे राज्यों को इसमें शामिल नहीं किया जाना चाहिए। अगर ऐसा किया गया तो उद्योग और बासमती की पैदावार वाले पारंपरिक राज्यों के किसानों…
नई दिल्ली। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने वायु टरबाइन बनाने वाली अग्रणी कंपनी सुजलॉन पर एक करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है। लिस्टिंग के नियमों का उल्लंघन किए जाने के कारण यह कार्रवाई की गई है।कंपनी को लिस्टिंग के नियमों के तहत शेयर मूल्य के लिहाज से संवेदनशील सूचनाओं की घोषणा करनी होती है। वह एक से ज्यादा बार इसमें विफल रही है। इस वजह से उस पर 1.1 करोड़ रुपये जुर्माना…
नई दिल्ली। बीएनपी (बैंक नोट प्रेस) को 500 समेत अन्य नोट ज्यादा से ज्यादा छापने का आदेश मिलने के बाद व्यवस्थाओं में ताबड़तोड़ बदलाव किए जा रहे हैं। तीन शिफ्ट, स्टेयरिंग लंच व्यवस्था लागू होने के साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी काम पर बुलाया जा रहा है। लेकिन, इस बार स्थायी कर्मचारियों ने स्पष्ट कह दिया है कि कोई भी सेवानिवृत्त कर्मचारी उनसे ऊपर की पोस्ट पर नहीं आएगा।केवल…
नई दिल्ली। आईपीएल 2018, पूर्व के सीजन्स के मुकाबले ज्यादा चर्चित हो रहा है। हाल ही में सामने आई व्यूअरशिप की रिपोर्ट इसकी पुष्टि भी करती है। अभी तक आईपीएल के कुल 10 सीजन पूरे हो चुके हैं, यह आईपीएल का 11वां सीजन है। हर बार के आईपीएल में कुछ न कुछ अलग होता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही है। आप इस बार आईपीएल की लाइव स्ट्रीमिंग को…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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