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टीवी की दुनिया में ‘नागिन’ सीरियल से दर्शकों का प्यार पा कर फेमस हुई करिश्मा तन्ना इन दिनों अपने करियर के बेहतरीन मुकाम पर हैं। जहां टीवी में वो अच्छा खासा नाम कमा चुकी हैं तो वहीं बॉलीवुड से भी उन्हें ऑफर्स मिलने लगे हैं। करिश्मा तन्ना ने अभी रणबीर कपूर के साथ संजय दत्त की बायोपिक ‘संजू’ में काम किया था। इस फिल्म में भले ही करिश्मा तन्ना का छोटा किरदार था लेकिन इस किरदार में भी वो अपनी अलग छाप छोड़ गईं थी। इसके बाद रणबीर कपूर के साथ उनके महज कुछ सेकण्ड्स के रोमांटिक सीन ने सिल्वर स्क्रीन पर आग लगा दी थी।अब इसके बाद करिश्मा एक और सुपरस्टार के साथ काम करने जा रही है। ये सुपरस्टार हैं बॉलीवुड के ‘सिम्बा’ यानि रणवीर सिंह। लेकिन रुकिए, इससे पहले आप अपनी सोच के घोड़े दौड़ाने लगें, बता दें कि ये जोड़ी किसी फिल्म के लिए नहीं बल्कि एक कर्मशियल ऐड के लिए बन रही है।करिश्मा और रणवीर जल्द ही ‘चिंग्स चाइनीज’ के नए ऐड में देखने को मिलेंगे। बता दें कि रणवीर सिंह इस कंपनी के ब्रांड एंबेसडर हैं और इन्हें पहले भी आप कई ऐड में देख चुके है। लेकिन इस बार आप इन्हें टीवी की सुपर टैलेंटेड एक्ट्रेस करिश्मा तन्ना के साथ देखने वाले हैं। इसकी जानकारी खुद करिश्मा ने एक फोटो शेयर करके दी है। हालांकि बाद में उन्होंने इसे अपने पेज से हटा लिया।इस फोटो में करिश्मा और रणवीर एक साथ दिखाई दे रहे हैं। फोटो को कैप्शन देते हुए करिश्मा ने लिखा है, ‘चिंग्ससीक्रेट के लिए। जल्द आने वाला है। आपके साथ काम करना हमेशा बेहद मजेदार रहता है।’ इस ऐड को ‘टाइगर जिंदा है’ फेम डायरेक्टर अली अब्बास जफर डायरेक्ट कर रहे हैं।रणवीर सिंह ने इससे पहले मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर के साथ भी एक ऐड शूट किया था। ये ऐड ‘क्लब फैक्ट्री’ ब्रांड के लिए किया गया था जो कि खासा फेमस हुआ था।करिश्मा तन्ना इन दिनों अपने सीरियल ‘नागिन 3’ और ‘कयामत की रात’ से खूब चर्चाएं बटोर रही हैं। वहीं, बॉलीवुड स्टार अपनी फिल्म ‘सिम्बा’ की शूटिंग में बिजी है।

‘सूरमा’ के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद दिलजीत दोसांझ एक और उपलब्धि हासिल करने जा रहे हैं। दिलजीत दोसांझ अब मैडम तुसाद में एंट्री करने वाले हैं। इसके लिए मैडम तुसाद ने तैयारियां भी शुरू कर दी है। दिलजीत ने खुद इस बात की जानकारी अपने ट्वीटर हैंडल से दी है। इस पोस्ट में दिलजीत ने एक पगड़ी पहले हुए और सन ग्लासेस लगाए हुए एक कैरीकेचर को पोस्ट किया है।दिलजीत का ये पुतला दिल्ली स्थित मैडम तुसाद म्यूजियम में लगाया जाना है। दिलजीत के इस ट्वीट के बाद उन्हें ढेरों बधाइयां और तारीफें मिल रही हैं। ‘सूरमा’ की कामयाबी के बाद दिलजीत के लिए ये दूसरी अच्छी खबर है। इस म्यूजियम में दिलजीत से पहले बॉलीवुड के कई स्टार्स मौजूद है। इस म्यूजियम में रणबीर कपूर, विराट कोहली, सलमान खान और शाहरुख खान का भी स्टैच्यू लगाया जा चुका है।इस स्टैच्यू के लिए दिलजीत के मैसरमेंट के लिए मैडम तुसाद की टीम पहुंच भी गई है और उनकी फोटो भी सामने आ गई है। बता दें कि दिलजीत दोसांझ की हालिया रिलीज फिल्म ‘सूरमा’ बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है और रिलीज के दो दिन में ये फिल्म 8 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। इस फिल्म में दिलजीत ने हॉकी प्लेयर और लेजेंड संदीप सिंह का किरदार निभाया है। ये एक बेहद मोटिवेशनल स्टोरी है। संदीप सिंह दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रैग-फिल्कर के तौर पर जाने जाते है। लेकिन एक हादसे के बाद वो व्हीलचेयर पर पहुंच गए थे और जब उनकी नेशनल हॉकी टीम में उनकी वापसी की सभी संभावनाएं खत्म हो गई थी तब कड़ी मेहनत और दृढ निश्चय के चलते वो न सिर्फ वापस अपने पैरो पर खड़े हो सके थे बल्कि उन्होंने वापस राष्ट्रीय हॉकी टीम में दमदार एंट्री की थी।

8 साल तक एक-दूसरे के साथ शादी जैसे बंधन में रहने के बाद अलग होना आसान नहीं होता है लेकिन किस्मत में जो लिखा है, वो कोई मिटा नहीं सकता है। टीवी की जानी-मानी जोड़ी जूही परमार और सचिन श्रॉफ ने सालों लम्बा सफर एक साथ तय किया लेकिन कुछ कारणों के चलते हाल में अलग होने का फैसला लिया। दोनों ने दिसम्बर 2017 को तलाक की अर्जी कोर्ट में डाली थी और 6 जुलाई 2018 को दोनों अलग हो गए।हालांकि इनके तलाक की खास बात यह रही कि इन्होंने तलाक लेते समय एक-दूसरे पर आरोप नहीं लगाए। दोनों शांतिपूर्वक एक-दूसरे से अलग हुए। तलाक के बाद जूही परमार ने मीडिया से बात की और बताया कि वो जिंदगी में कभी भी सचिन से प्यार नहीं कर पायीं।जूही के अनुसार, ‘शादी करने से पहले ही हम दोनों एक-दूसरे को जानते थे। सचिन ने एक दिन मुझे अपनी फीलिंग्स के बारे में बताया, इसके बाद हम दोनों ने शादी करने का फैसला ले लिया। मैं उस समय इस शादी को लेकर पूरी आश्वस्त नहीं थी लेकिन मुझे लगा कि समय के साथ मुझे सचिन से प्यार हो ही जायेगा। हालांकि ऐसा कभी भी हो नहीं सका और शादी के कुछ समय के बाद मुझे लगा कि हम दोनों का रिश्ता स्पेशल नहीं है। यह मानना बहुत मुश्किल था लेकिन मैंने इसे स्वीकार किया। आखिरकार मैंने वो फैसला लिया, जो हम दोनों के लिए सबसे सही था।’जूही के बाद अब सचिन श्रॉफ ने इस तलाक पर अपनी जुबान खोली है और टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बताया है, ‘यह तलाक हम दोनों की सहमती से हुआ है। यह बात जूही ने खुद स्वीकार की है कि वो मुझसे कभी भी प्यार नहीं कर पायीं और एक-तरफा प्यार बहुत लम्बा सफर तय नहीं कर सकता है। प्यार रहित शादी से अच्छा, अलग हो जाना ही था इसीलिए हमने यह फैसला लिया।’जब सचिन से पूछा गया कि क्या वो दोबारा शादी करने के बारे में सोच रहे हैं तो उन्होंने बताया, ‘मैं अब बहुत ज्यादा रिएलिस्टिक पर्सन हो गया हूं। मुझे यह समझ आ गया है कि प्यार दोनों तरफ से हो तो ही ज्यादा बढ़िया रहता है। जहां तक दोबारा किसी रिश्ते को शुरू करने की बात है तो उसके बारे में कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगा। मैं अभी भी अपने पुराने रिश्ते से पूरी तरह से बाहर नहीं आ पाया हूं। मैं अभी अपने-आप को वक्त दे रहा हूं।’

संजय दत्त के बड़ी बेटी त्रिशाला भले ही बॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा न हों लेकिन वो खबरों में वो लगातार बनी रहती हैं। कभी संजय दत्त के साथ उनके रिश्ते को लेकर खबरें आती हैं तो कभी उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स की बातें होती हैं। हाल में भी कुछ ऐसा हुआ है कि त्रिशाला दत्त मीडिया की खबरों का हिस्सा बन गई हैं।असल में त्रिशाला दत्त ने हाल में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ‘आस्क मी एनी क्वीश्चन’ फीचर के माध्यम से फैन्स से बात की। इसी चर्चा के दौरान जब त्रिशाला से एक फैन ने पूछा कि आपको संजय दत्त की बेटी होने पर कैसा लगता है ? इस पर त्रिशाला ने चौंकाने वाला बयान दिया है।त्रिशाला ने लिखा, ‘अगर मैं ईमानदारी से बोलूं तो यह बहुत ही सामान्य है। वो दुनिया के हर पिता जैसे ही हैं। जब मैं उनके साथ होती हूं तो मुझे लगता है कि मैं अपने पिता के साथ हूं। जैसे आपको अपने पिता के साथ लगता है, मेरी फीलिंग भी वैसी ही होती है।’इसी चर्चा के दौरीन जब त्रिशाला से पूछा गया कि आप अपने पिता की तरह हैं या फिर अपनी मम्मी की तरह, तो त्रिशाला ने बताया ‘मेरा एटीट्यूड और मेरा टैंपर मेरे पिता जैसा है लेकिन मेरे अंदर दरियादिली मम्मी से आई है। मेरा स्टाइल मेरे माता-पिता दोनों से मुझे मिला है।’जब त्रिशाला से एक फैन ने पूछा कि आपको अपने माता-पिता के बिना रहने पर कैसा लगता है ? तो त्रिशाला ने जवाब दिया, ‘मेरे मुताबिक यह बहुत ज्यादा कठिन नहीं है। मैं उनके साथ कभी भी नहीं रही हूं तो मुझे सच में नहीं पता है कि मैं इस सवाल का जवाब कैसे दूं।’बता दें हाल में खबरें आई थीं कि त्रिशाला अपने पिता की बायोपिक फिल्म से खुश नहीं हैं। क्योंकि डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने ‘संजू’ में त्रिशाला और उनकी स्वर्गवासी मां को जगह नहीं दी है, जो त्रिशाला को पसंद नहीं आया है।

अगर आप चॉकलेट से दूरी इसलिए बनाए रखती हैं, क्योंकि आपको लगता है कि चॉकलेट तो बच्चों के खाने की चीज होती है तो आपकी सोच गलत है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं। यह कहना है स्वीडिश वैज्ञानिकों का। वैज्ञानिकों का कहना है कि चॉकलेट खाने से न केवल तुरंत एनर्जी मिलती है, बल्कि यह सौंदर्य में भी निखार लाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारी सेहत और सौंदर्य के लिए डार्क चॉकलेट अधिक लाभकारी होती है। हालांकि बहुत से लोगों का मानना है कि चॉकलेट का सेवन शरीर के लिए नुकसानदेह होता है। खामियां तलाशने वाले लोगों का तर्क होता है कि चॉकलेट में कैफीन और सैचुरैटेड फैट पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो सेहत के लिए नुकसानदेह है। वस्तुत: चॉकलेट के बारे में लोगों के मध्य कई गलत धारणाएं व्याप्त हैं। आइए जानते हैं इनकी हकीकत।
मिथ: चॉकलेट में सैचुरेटेड फैट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
हकीकत: हेल्थ एक्सपट्र्स का कहना है कि चॉकलेट में स्टीरिक एसिड नामक जो प्रमुख सैचुरेटेड फैट पाया जाता है, वह सेहत के लिए नुकसानदेह तो होता है, लेकिन शोध-अध्ययनों से यह पता चला है कि स्टीरिक एसिड केसेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नहीं बढ़ता, जबकि अन्य वसायुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है। शोधों से यह भी पता चला है कि डार्क चॉकलेट की स्माल बार खाने से शरीर में एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है, जो दिल की सेहत के लिए लाभप्रद होता है।
मिथ: चॉकलेट में पोषक तत्वों की कमी होती है।
हकीकत: हेल्थ एक्सपट्र्स का कहना है कि चॉकलेट में मैग्नीशियम, कॉपर, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें पॉलीफेनॉल नामक एक सशक्त एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। पॉलीफेनॉल के सेवन से हृदय रोगों के होने का खतरा कम हो जाता है। यही नहीं, डार्क चॉकलेट के सेवन से हाई ब्लडप्रेशर को कम करने में भी मदद मिलती है।
मिथ: चॉकलेट में कैफीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
हकीकत: यह धारणा गलत है। चॉकलेट की चालीस ग्राम की एक बार में मात्र छह मिलीग्राम कैफीन ही पाया जाता है। यह वही मात्रा है, जो एक कप डीकैफीनेटेड कॉफी में पाई जाती है।
मिथ: चॉकलेट के सेवन से दांतों में कैविटी बढ़ती है और दांतों में कीड़ा लगने और अन्य समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती है।
हकीकत: यह धारणा पूरी तरह से गलत है। दांतों में कीड़ा तब लगता है, जब मुंह के अंदर स्थित खाद्य पदार्थों में शुगर और स्टार्च मौजूद होता है। चॉकलेट में पाए जाने वाले पोषक तत्व जैसे कैल्शियम और फॉस्फेट दांतों के इनेमेल की सुरक्षा करने में सहायक होते हैं। दांतों में कीड़ा लगने की स्थिति को ओरल हाइजीन जैसे खाने के बाद अच्छी तरह ब्रश करने आदि से रोका जा सकता है। साथ ही रात में सोने से पहले ब्रश करने से कीड़ा लगने की संभावनाएं क्षीण हो जाती हैं।
मिथ: चॉकलेट खाने से वजन बढ़ता है।
हकीकत: अधिकता किसी भी वस्तु की नुकसानदेह होती है। दिन में एक छोटी पीस चॉकलेट खाने से वजन नहीं बढ़ता है। वजन तब बढ़ता है, जब आप आहार से प्राप्त कैलोरी को उचित रूप से व्यायाम या शारीरिक परिश्रम द्वारा बर्न नहीं करतीं या उस कैलोरी की खपत नहीं करतीं।

आजमगढ़। तमसा नदी के तट पर बसे आजमगढ़ जिले को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नायाब तोहफा दिया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास के बाद उन्होंने मंदुरी हवाई पट्टी प्रांगण में जनसभा को भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और गठबंधन गांठने की कोशिश में जुटे राजनीतिक दलों पर जमकर हमला बोला। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सरकार के चार वर्ष के साथ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल की पिछली सरकारों के काम के तुलना भी करने में चूक नहीं की। पीएम मोदी ने जितना पहले कभी नहीं हुआ हुआ उतना विकास चार साल में हुआ' से लेकर तीन तलाक पर कानून में रोड़ा तक का हवाला देते हुए घेरा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से सवाल किया, तंज कसा-क्या कांग्रेस सिर्फ मुस्लिम पुरुषों की पार्टी है। देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में सबसे पहले विकास की बातें कीं फिर सियासी मुद्दों को केंद्र बिंदु बनाया। उन्होंने कहा कि जो एक-दूसरे को देखना नहीं चाहते थे, अब एक साथ हैं। सभी परिवार तथा पार्टियां मिलकर जनता के विकास को रोकने पर आमादा हैं। अगर गरीब, किसान व पिछड़े सशक्त हो गए तो ऐसी पार्टियों की दुकानें बंद हो जाएंगी। परिवारवाद पर चोट करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मोदी हो या योगी अब तो आप ही लोग हमारा परिवार हैं। आपके सपने हमारे सपने हैं।

योगी सरकार की प्रशंसा:-प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जो काम किया गया है, वह अभूतपर्व है। बड़े-बड़े अपराधियों की स्थिति क्या है, यह सबको भलीभांति पता है। भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश में विकास का उत्तम वातावरण बनाने का प्रयास किया है। अपराध और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाकर योगी आदित्यनाथ ने बड़े से बड़ा निवेश लाने और छोटे से छोटे उद्यमी के लिए व्यापार को सुलभ बनाने का काम किया है। किसान हों या नौजवान हो, महिलाएं हो या पीडि़त, शोषित-वंचित वर्ग हो, सभी के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार प्रयासरत है। पहले के दस वर्षों में जिस तरह की पहचान बन गई थी, वह बदलने लगी है। जनता का पैसा जनता के लिए खर्च होने लगा है। नई कार्य संस्कृति उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाई ले जाएगी।
भोजपुरी में संबोधन की शुरुआत;-आज हमरे खातिन बहुत गौरवशाली दिन बा कि तमसा के पावन तट पर स्थित आजमगढ़ जिला में अइले के सौभाग्य मिलल। ई जिला तमाम ऋषि-मुनियों, चिंतकों, विद्वानों और स्वतंत्रता सेनानियों की जन्मस्थली है। हम ई धरती के साष्टांग प्रणाम करत हईं। आप सभी लोगन के पांव लागत हईं।
गोरखपुर व बुंदेलखंड को भी एक्सप्रेस-वे :-पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में गोरखपुर को भी एक्सप्रेस-वे जोड़ा जाएगा। बुंदेलखंड में भी ऐसे ही एक्सप्रेस-वे बनाने का फैसला भाजपा की सरकार ने किया है। 21 वी सदी में विकास की बुनियादी कनेक्टिविटी होती है। गरीब, किसान के जीवन स्तर को ऊपर उठाने का प्रयास चल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हाईवे ही नहीं, मोटर-वे और एयर-वे पर भी काम तेजी से चल रहा है। हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में उड़ सके, इसके लिए सरकार उड़ान योजना को तेजी से बढ़ा रही है। इसी योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 12 एयर पोर्ट विकसित किया जा रहा है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे शिलान्यास कार्यक्रम में उपस्थित होकर पूर्वांचल के लोगों को उपकृत किया है। यह तो वही उत्तर प्रदेश प्रदेश है, जिसमें अब गुंडाराज, भ्रषटाचार पीछे चला गया है। पहले तो यहां पर इन सभी का चरम राज था। समाजवाद के नाम पर गुंडाराज ने प्रदेश के विकास को पीछे धकेल दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के नाम पर कमीशनखोरी का प्रयास हुआ था। बिना एनओसी के एक्सप्रेस-वे की बिड डाली गई।अब 1514 करोड़ कम लागत में एक्सप्रेस-वे का निर्माण होने जा रहा है।पहली बार गांव, गरीब किसान और महिलाओं का विकास करने का ईमानदार प्रयास चार सालों में हुआ है। आजादी के बाद प्रधानमंत्री मोदी का नाम मानक बना है। चार साल के दौरान किसी मंत्री पर कोई दाग नहीं लगा है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों (14 और 15 जुलाई) के लिए को पूर्वांचल दौरे पर हैं। पीएम मोदी की यह यात्रा पूर्वांचल की जनता के विकास में एक अहम योगदान निभाएगी। बताया जा रहा है कि यहां की धरती पर पीएम मोदी का आगमन पहली बार होने जा रहा है। यहां आजमगढ़ में वे लोगों को विकास की नई सौगात देने वाले हैं। जानते हैं क्या है पूर्वांचल एक्सप्रेस की खास विशेषताएं और इससे वहां के लोगों को किस तरह फायदा पहुंचने वाला है-
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की विशेषताएं-पीएम मोदी आज जिस पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने जा रहे हैं वह एक्सप्रेस-वे छह लेन चौड़ा बनने वाला है। साथ ही बताया जा राह है कि इसके आठ लेन तक विस्तारीकरण का प्लान भी है। इस एक्सप्रेस-वे के राइट आफ वे (आरओ डब्लू) की चौड़ाई 120 मीटर की होगी। एक्सप्रेस वे की कुल लंबाई 340.824 किमी बताई जा रही है। इसके निर्माण में लगने वाली कुल अनुमानित लागत 23349 करोड़ आंकी गई है। सिविल निर्माण कार्य की लागत 11836 करोड़ (जीएसटी रहित) रुपये अनुमानित बताई जा रही है।
यूपी की जनता को किस प्रकार मिला फायदा:-बताया जा रहा है कि यह भारत का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे होगा। इसको क्रास करने वाले मार्गों पर 10 किमी दूरी तक स्थित गांवों को एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी देने के लिए इसे मुख्य मार्ग से जोड़ा जाएगा। यह परियोजना लखनऊ-सुल्तानपुर रोड (एनएच-731) पर स्थित ग्राम चांदसराय, जनपद लखनऊ से प्रारंभ होगी। यूपी-बिहार सीमा से 18 किमी दूरी पर स्थित ग्राम हैदरिया, जनपद गाजीपुर के पास एनएच 31 से जुड़ेगी। यह अंतिम स्थल होगा। 340.824 किलोमीटर लंबी एक्सप्रेस-वे लखनऊ से होते हुए बाराबंकी, अमेठी, फैजाबाद सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ होते हुए गाजीपुर तक जाएगी।
एक्सप्रेस-वे की निर्माण विशेषताएं
-एक्सप्रेस वे (मेन कैरिजवे) पर कुल सात रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा।
-सात दीर्घ सेतु जबकि 112 लघु सेतु का निर्माण किया जाएगा।
-इसके अलावा 11 इंटरचेंज, सात टोल प्लाजा का भी निर्माण होगा।
-साथ ही रैंप प्लाजा, 220 अंडरपास व 496 पुलियों का निर्माण किया जाएगा।
-लखनऊ से प्रारंभ होने वाली 340.824 किमी लंबी एक्सप्रेस-वे नौ जनपदों से गुजरेगी।
-एक्सप्रेसवे पर आपातकालीन स्थिति में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के लैंडिंग व टेक ऑफ के लिए सुल्तानपुर जनपद में 3.2 किमी लंबी हवाईपट्टी का निर्माण भी प्रस्तावित है।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के जरिए मोदी का विरोधियों को करारा जवाब:-शासनादेश के मुताबिक भारत के सबसे लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य 36 महीने यानि वर्ष 2021 तक पूरा हो जाएगा। एक्सप्रेसवे का निर्माण इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) पद्धति से किया जाएगा।न्यूनतम वित्तीय निविदा के आधार पर एक्सप्रेसवे की कुल निर्माण लागत (जीएसटी रहित) 11216.1 करोड़ रुपये आंकी गई है।परियोजना में टोल प्लाजा का निर्माण, टोल प्लाजा के लिए कंप्यूटर, सर्वर, वीडियो कैमरा जैसे उपकरण लगाना, ऑटोमैटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत इमर्जेंसी कॉल बॉक्स, वीडियो कैमरा, वाहनगति मापक यंत्र, सुसज्जित कंट्रोल रूम की स्थापना और एंटीग्लेयर स्क्रीन लगाने जैसे कार्य भी कराए जाएंगे।बता दें कि उत्तर प्रदेश की मोदी की यह यात्रा विकास और संवाद की बड़ी लकीर खींचने जा रही है। प्रधानमंत्री भारतीय राजनीति में पूर्वांचल का महत्व समझते हुए 2019 के चुनावी महायज्ञ में हर युक्ति का उपयोग करना चाहते हैं। जीत को सिर्फ सुनिश्चित ही नहीं बल्कि जीत के अंतर को बढ़ाने की कोशिश है। वह विरोधियों को भी करारा जवाब देंगे।इस दौरे में प्रधानमंत्री बनारस में 'मेरी काशी पुस्तिका का विमोचन करेंगे। यह बतौर सांसद उनके संसदीय क्षेत्र में हुए विकास का रिपोर्ट कार्ड सरीखा दस्तावेज है।

रायपुर। .....और छत्‍तीसगढ़ विधानसभा का अंतिम सत्र समाप्‍त हो गया। माननीयों के पांच साल बीत गए। अब चुनावी वैतरणी पार करके ही अगले माननीय सदन दर्शन कर सकेंगे। किसके भाग्‍य बहुरेंगे और कौन गर्त में जाएगा, यह तो विधि के लेखे में है लेकिन गुणा-भाग में सभी लग गए हैं। टिकटों से लेकर गठबंधन तक के लिए जोड़-तोड़ व आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर जारी है, साथ ही बाबाओं की भी पौं-बारह हो चली है। पिछले दिनों पर अगर निगाह डालेंगे तो आपको सूबे का सियासी माहौल कुछ ऐसा ही नजर आएगा।
बेहद हंगामेदार रहा अंतिम सत्र:-रमन सिंह के तीसरे कार्यकाल का अंतिम सत्र बेहद हंगामेदार रहा। पांच दिन के इस मानसून सत्र की पटकथा भी बेहद रोचक थी और उस पर अमल भी। इसमें हर वह मुद्दे उठे, जो चुनावी हो सकते थे। सरकार ने जहां शिक्षाकर्मियों के संविलियन से बढ़े बोझ से निपटने व नक्‍सल प्रभावित जिलों के उत्‍थान आदि के लिए 4800 करोड़ का अनुपूरक बजट पारित किया। वहीं कांग्रेस ने 15 बिंदुओं पर अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाकर शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, कृषि, सिचाई आदि मुद्दों पर सरकार को घेरा। आक्रामक विपक्ष ने च‍र्चित रिंकू खनूजा आत्‍महत्‍या मामले को पहले दिन ही उठाकर माहौल गरम कर दिया था लेकिन सत्‍तापक्ष ने जोगी के साथ गए कांग्रेसी सदस्‍यों की सदस्‍यता जैसे मसले उठाकर उसे उलझा दिया। सदन में संख्‍याबल न होने के बावजूद अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाकर कांग्रेस ने वह सारे मुद्दे उठाए, जिसे लेकर वह चुनावी वैतरणी पार करने का मन बना रही है। रमन के इस कार्यकाल में यह तीसरा अविश्‍वास प्रस्‍ताव था। जोकि चर्चा के बाद बिना वोटिंग कराए ही समाप्‍त हो गया।
सवालों के घेरे में बाबाओं की मौजूदगी:-इस दौरान विधानसभा परिसर में एक बाबा की मौजूदगी पूरे देश में चर्चा में रही। बाबा का नाम रामलाल कश्‍यप है। खोजबीन में पता चला कि यह भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंडल अध्‍यक्ष हैं। बाबा ने दावा किया कि उसने विधानसभा को बांध दिया है, रमन फिर लौटेंगे। कांग्रेस ने पलटवार किया कि भाजपा को अब चाउर वाले बाबा (रमन सिंह) पर भरोसा नहीं है, इसलिए इन पर दांव लगाया है। इस पर भाजपा को खूब सफाई देनी पड़ी। लेकिन इसके बाद लोरमी में हुई भाजपा की एक बैठक में कंबल वाले बाबा शरीक हुए। जिनकी भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष धरमलाल कौशिक के साथ फोटो खूब वायरल हुई। प्रदेश के गृहमंत्री रामसेवक पैकरा अपनी शुगर का इलाज कंबल वाले बाबा से कराने के कारण खूब चर्चा में रहे थे। उन्‍होंने यह बयान देकर और हवा गरम कर दी कि कर्म के अलावा जीवन में तंत्र-मंत्र भी बहुत जरूरी है।
जोगी और मायावती की मुलाकात:-इधर सदन में गर्माहट चल रही थी और उधर पूर्व मुख्‍यमंत्री अजीत जोगी कर्नाटक का फार्मूला छत्‍तीसगढ़ में निकालने के लिए मायावती से मिलने दिल्‍ली पहुंच गए। चर्चा का बाजार गरम हो गया कि जोगी और बहन जी की जुगलबंदी भाजपा और कांग्रेस दोनाें को झटका दे सकती है। हालांकि इस मुलाकात का कोई हल फिलहाल न निकलने वाला था और न ही निकला। गठबंधन की बात दोनों तरफ से खारिज हो गई और मुलाकात औपचारिक करार दे दी गई। लेकिन इस मुलाकात ने कांग्रेसी खेमे में हलचल जरूर मचा दी क्‍योंकि लोकसभा चुनाव से पहले छत्‍तीसगढ़ में सत्‍ता हासिल करने के लिए कांग्रेस आलाकमान भी बहन जी का साथ मुफीद मान रहा है। अंदरखाने के अनुसार बातचीत जारी भी है, केवल सीटों को लेकर पेंच फंसा है। बसपा जहां अपने जनाधार वाली 15 सीटों से कम पर समझाैता करने को तैयार नहीं है वही कांग्रेस 5-6 से ज्‍यादा देने को राजी नहीं क्‍योंकि आगे छोटे-छोटे जनाधार वाले दो-एक दलों को अपने कुनबे में शामिल करने के लिए उसे कुछ और सीटें देनी पड़ सकती हैं।
भाजपा के लिए चुनौती:-इनमें भू-राजस्‍व संहिता, पत्‍थलगड़ी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार से नाराज आदिवासियों के हितों का हवाला देकर चुनाव में ताल ठोंकने के लिए खड़े हुए सर्व आदिवासी समाज को तो वह बिलकुल नजरअंदाज नहीं कर सकती। क्‍योंक‍ि आदिवासी जिलों में कांग्रेस का ही पलड़ा भारी है और उसमें सेंध कांग्रेस के सत्‍ता के सपने को तोड़ सकती है। सदन से लेकर सड़क तक विपक्ष के आक्रामक तेवर व अपेक्षाओं की पोटली थामे तमाम संगठनों के बगावती सुर तो भाजपा के लिए चुनौती बने ही हुए हैं वहीं उसके अपनों ने भी मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। इधर दस दिनों के भीतर गृहमंत्री रामसेवक पैकरा का भतीजा दुष्‍कर्म में फंस गया, मंत्री पुन्‍नूलाल मोहले के रिश्‍तेदारों ने पुलिसवालों को पीट दिया और एक सांसद के पुत्र ने बुजुर्ग को धुन दिया। विपक्ष भला कहां शांत रहने वाला था, खूब शोर मचा और भाजपा बैकफुट पर चली गई। अंदरूनी बैठकों में इसे गंभीरता से लिया जा रहा है कि वैसे ही चौथी बार लगातार सत्‍ता हासिल करना बड़ी चुनौती है, उस पर जिम्‍मेदारों के रिश्‍तेदारों का यह हाल कहीं जमीन पर न पटक दे।
अब केवल चुनावी जंग;-भले ही चुनावी रण के कारण एक-दूसरे के कपड़े उतारने में सभी लगे हों लेकिन अविश्‍वास प्रस्‍ताव के बाद सदन का दृश्‍य बेहद भावुक था। अंतिम सत्र के अंतिम दिन मुख्‍यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव को गले लगाया और उन्‍ाकी जमकर तारीफ की। पीडब्‍ल्‍यूडी मंत्री राजेश मूणत्‍ा ने पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। विधानसभा अध्‍यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के तो बोलते-बोलते आंसू तक बह निकले। सभी सदस्‍य एक-दूसरे के गले लगे। सभी को यह अंदेशा था कि पता नहीं इनमें से कौन अगली बार यहां होगा या नहीं। इन सबसे इतर इस सत्र में सबसे हमलावर रहे कांग्रेस अध्‍यक्ष भूपेश बघेल ही केवल चुपचाप निकल लिए। इस स्‍वस्‍थ परंपरा के निर्वहन के बाद अब आगे केवल चुनावी जंग है। जिसमें केवल कटाक्ष और कटाक्ष ही होने हैं।

मुंबई। महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या की समस्या थमी नहीं है। इस साल मार्च से मई के बीच फसल बर्बाद होने, कर्ज, बैंक ऋण की वापसी न कर पाने के कारण 639 किसानों ने खुदकुशी की। राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने यह जानकारी नागपुर में विधान परिषद को दी है। विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी गई।मंत्री ने बताया कि एक मार्च से 31 मई, 2018 के बीच कुल 639 किसानों ने आत्महत्या की। इनमें से 188 के परिजनों को सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता स्वीकृत की जा चुकी है। इनमें से 174 मृतक किसानों के परिजनों ने यह सहायता हासिल भी कर ली है। इनमें से 122 मामले ऐसे हैं जिनमें परिजन सहायता पाने के हकदार नहीं हैं जबकि 329 मामलों में सहायता के लिए जांच की जा रही है। विपक्ष के सदस्य जानना चाहते थे कि इतनी बड़ी संख्या में किसान क्यों आत्महत्या कर रहे हैं और सरकार मृतकों के परिजनों की सहायता के लिए क्या कदम उठा रही है।विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने कहा कि कर्ज माफी, फसल नुकसान का मुआवजा, फसल ऋण और उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी फड़नवीस सरकार की योजनाएं असफल साबित हुई हैं। इसी के चलते आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले चार के भाजपा शासनकाल में प्रदेश में 13,000 किसानों ने आत्महत्या की है। इनमें से 1,500 किसानों ने बीते एक साल में आत्महत्या की है।

पुणे। भाजपा पर हमला बोलते हुए शिवसेना के अध्‍यक्ष उद्धव ठाकरे ने शनिवार को कहा कि नोटबंदी का फैसला जल्‍दबाजी में लिया गया, लेकिन राम मंदिर का निर्माण क्‍यों लटका हुआ है। उन्‍होंने भाजपा पर व्‍यंग करते हुए कहा कि उनका (भाजपा) कहना है कि यह निर्णय चुनाव से पहले ले लिया जाएगा लेकिन किस चुनाव से पहले 2019 या 2050 से पहले।चुनाव पूर्व तैयारियों के मद्देनजर इस दौरे के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्‍होंने कहा कि भाजपा के लिए पहले यूनिफार्म सिविल कोड या कश्‍मीर से धारा 370 हटाने की स्थिति समान थी, लेकिन कई महत्‍वपूर्ण मामलों में कोई बातचीत नहीं की जा रही है, ये इसे भूल चुके हैं। उन्‍होंने पूछा कि आप के पास बहुमत है। आप इन मामलों में निर्णय ले सकते हैं, लेकिन इन पर क्‍या हुआ।अभी हाल के विवाद जिसमें मुबंई के सौ कॉलेजों में हिन्‍दुओं की धार्मिक पुस्‍तक भगवत गीता का वितरण किया गया के बारे में ठाकरे ने कहा कि यह सब मुबंर्इ् यूनिवर्सिटी की गड़बड़ी को छिपाने के लिए किया जा रहा है। छात्रों को आधुनिक समय में प्रासंगिेक शिक्षा दी जानी चाहिए। मुबंई यूनिवर्सिटी अव्‍यवस्‍था से ग्रस्‍त है। वहां पेपर लीक, परीक्षा रिजल्‍ट में देरी जैसी कई समस्‍याएं हैं। पहले इन समस्‍याओं का समाधान किया जाना चाहिए, जबकि शिक्षा विभाग द्वारा भगवत गीता का वितरण करवाया जा रहा है।ठाकरे ने नैनार रत्‍नागिरि में एकीकृत पेट्रोकेमिकल कॉम्‍प्‍लेक्‍स के निर्माण और सउदी अराम के प्रस्‍तावित 3 ट्रिलियन तेल रिफाइनरी पर निशाना साधा। उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडनविस के प्रसिद्ध प्रोजक्‍ट पर पार्टी के विरोध को दोहराया। उन्‍होंने कहा कि सीएम आश्‍वासन दें कि अगर स्‍थानीय लोग विरोध करेंगे तो इसे नहीं थोपा जाएगा। इसे यहां आने का अनुमति नहीं देंगे।इस दौरान उन्‍होंने पुणे के पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उन्‍होंने स्‍वीकार किया पुणे और पश्चिमी महाराष्‍ट्र को नजरअंदाज किया जा रहा है लेकिन आगे से ऐसा नहीं होने देंगे। उन्‍होंने पार्टी के नेताओं से पुणे पर विशेष ध्‍यान देने का निर्देश दिया। सभी नए जोश के साथ काम करेंगे। उन्‍होंने विश्‍वास दिलाया कि यहां प्र‍गति की निगरानी के लिए नियमित तौर पर आता रहूंगा।

 

 

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