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नई दिल्‍ली - अमेरिका के सामने उत्तर कोरिया ने जहां मुश्किलें कम करने का काम किया है वहीं ईरान अब भी उसके लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का अहम कारण दोनों देशों के बीच 2015 में हुआ परमाणु करार है, जिससे अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप पीछे हटने की बात कर चुके हैं। ट्रंप ने इस करार को न सिर्फ गलत बताया है बल्कि इसके लिए पूर्व राष्‍ट्रपति को भी आड़े हाथों लिया है। उन्‍होंने इसको दुनिया के कुछ सबसे खराब समझौतों में से एक बताया है। ट्रंप ने इसके लिए 12 मई का दिन भी नि‍धार्रित कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु एजेंसी इसके लिए अपेक्षित और अप्रत्याशित कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। रूहानी ने सरकारी टेलीविजन पर दिए भाषण में यह बात कही। हालांकि उन्होंने इस संबंध में की जाने वाली कार्रवाई का कोई ब्योरा नहीं दिया है।
अस्थिरता को रोकने की कोशिश
इस भाषण में रुहानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले महीने समझौते से अलग होने के संभावित फैसले का जिक्र किया। रूहानी ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका के समझौते से हटने के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को रोकना चाहती है। इसीलिए ईरान के केंद्रीय बैंक ने इस महीने बाजार पर नियंत्रण लगा दिया। आपको बता दें कि इसी वर्ष जनवरी में ट्रंप ने ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी से अमेरिका द्वारा समझौते में पाई गड़बड़ियों पर सहमति जताने को कहा था। इसके अलावा दो दिन पहले ही अमेरिका के निरस्त्रीकरण राजदूत रॉबर्ट वुड ने कहा था कि अमेरिका समझौते से हटने की 12 मई की समय सीमा को लेकर यूरोपीय सहयोगियों से गहन चर्चा कर रहा है, जबकि ईरान का कहना है कि जब तक अन्य पक्ष समझौते का सम्मान करेंगे, वह इससे जुड़ा रहेगा। लेकिन अमेरिका के हटने पर वह समझौते को तोड़ देगा।
उत्तर कोरिया ने किया ईरान का बचाव
कुछ दिन पहले ही उत्तर कोरिया ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का बचाव करते हुए इसको सही बताया था। तीन दिन पहले ही उत्तर कोरिया के अखबार रोडोंग सिनमुन ने लिखा था कि ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार बनाने और रखने का पूरा हक है। वह अमेरिका से हुई डील को मानने के लिए बाध्‍य नहीं है। अखबार में यह भी कहा गया कि ईरान की सरकार को इस मुद्दे पर अपनी जनता का पूरा समर्थन हासिल है। अखबार में इससे पीछे हटने के लिए ट्रंप की जमकर आलोचना भी की थी। अखबार ने अमेरिका की यह कहते हुए आलोचना की थी कि पहले वह कहते थे कि उत्तर कोरिया को ईरान से सबक लेना चाहिए और अब वही करार से पीछे हट रहे हैं। इसके साथ ही उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम का भी बचाव करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया ने इस बाबत किसी की न तो कोई बात सुनी और न ही किसी से डरा। यही वजह है कि उसने अपना परमाणु कार्यक्रम सफलता प्राप्‍त होने तक जारी रखा।
ट्रंप और मैक्रों में बातचीत
आपको यहां पर ये भी बता दें कि ईरान के साथ हुई परमाणु डील में शामिल फ्रांस भी इससे पीछे हटने की बात पर ट्रंप की आलोचना कर चुका है। यहां पर ये बताना भी जरूरी होगा कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार को तीन दिवसीय दौरे पर अमेरिका जा रहे हैं। इस दौरान उनकी और ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता में ईरान का मुद्दा भी शीर्ष पर होगा। इसके अलावा सीरिया के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं में बात होगी। सीरिया के मुद्दे पर भी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव है। वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर फ्रांस अमेरिका के साथ है। वहीं रूस ने भी कहा है कि सभी को इस डील का सम्‍मान करना चाहिए। हालांकि रूस पहले ये भी कह चुका है कि अमेरिका हमेशा से ही इस तरह की चीजें करता रहा है। वह कोई भी डील को पूरा नहीं करता और बीच में साथ छोड़ देता है।
केंद्र में होगा ईरान का मुद्दा
यहां पर एक और बात ध्‍यान रखने वाली है और वो ये है कि ट्रंप ने इस संधि से हटने के लिए 12 मई की तारीख तय की है। हालांकि अमेरिकी अधिकारी का मानना है कि ट्रंप अभी इस बारे में अंतिम फैसला लेने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन यह तय है कि मैक्रों के साथ बातचीत के केंद्र में नाभिकीय समझौता भी होगा। अधिकारी ने कहा, यह कहना कठिन है कि ट्रंप और मैक्रों के बीच इस मामले में किस स्तर की बातचीत होगी, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि दोनों नेता इस कदम के संभावित असर के बारे में गहराई से चर्चा करेंगे। ट्रंप का मानना है कि ईरान ने इस समझौते के अनुसार अपने नाभिकीय कार्यक्रम में कटौती नहीं की है।
2015 में हुआ था समझौता
गौरतलब है कि ईरान, जर्मनी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों - ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और अमेरिका के बीच जुलाई 2015 में जेसीपीओए समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत ईरान आर्थिक मदद और खुद पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की एवज में अपने परमाणु हथियार कार्यक्रमों को रोकने पर सहमत हुआ था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अक्टूबर 2017 में इस समझौते को रद करने का आह्वान किया था और ईरान पर समझौते का कई बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। ईरान ने साफ किया है कि वह समझौते में कोई परिवर्तन स्वीकार नहीं करेगा।


टोक्यो - दक्षिण जापान में दुनिया के सबसे उम्रदराज व्यक्ति का निधन हो गया। किकाइ शहर में 117 वर्षीय महिला नाबी ताजिमा ने शनिवार को अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह जनवरी से अस्पताल में भर्ती थीं।
न्यूज एजेंसी क्योदो के मुताबिक, ताजिमा का जन्म चार अगस्त 1900 को हुआ था। उनके परिवार में करीब 160 सदस्य हैं। सात महीने पहले वह दुनिया की सबसे अधिक उम्र वाली बनीं थीं। जमैका के वॉयलेट ब्राउन की 117 साल की आयु में निधन के बाद उन्हें यह स्थान मिला था।
अमेरिका के वृद्धावस्था शोध संगठन के मुताबिक, जापान की एक अन्य महिला चियो योशिदा अब दुनिया में सबसे अधिक उम्र वाली बन गई हैं। उनकी आयु 116 साल है। इस महीने की शुरुआत में गिनीज बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉ‌र्ड्स ने 112 वर्षीय जापानी मासाजो नोनाका को दुनिया के सबसे उम्रदराज पुरुष के रूप में दर्ज किया था। पिछले साल जापान में सौ साल आयु वालों की संख्या 67,824 थी। 1963 में 153 के मुकाबले इस संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।


नई दिल्‍ली - कोरियाई प्रायद्वीप के बीच होने वाली बैठक से पहले उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन ने बड़ी और अहम घोषणा की है। उन्‍होंने कहा है कि अब वह परमाणु परीक्षण नहीं करेंगे। उन्‍होंने कहा है कि अब इस तरह के परीक्षणों की जरूरत नहीं है क्‍योंकि पूर्व में किए गए मिसाइल परीक्षण अपने मुकाम को पाने में पूरी तरह से सफल हुए हैं। उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी केसीएनए के मुताबिक देश के उत्तर में स्थित न्‍यूक्लियर साइट ने अपना मिशन पूरा कर लिया है। किम की तरफ से यह घोषणा दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे से होने वाली बैठक से छह दिन पहले की गई है।
बैठक का सीधा प्रसारण
किम ने 27 अप्रैल को होने वाली इस अहम बैठक का सीधा प्रसारण करने की भी योजना बनाई है। अब दुनिया इस खास मौके पर अपने टीवी पर देख सकेगी। इसको लेकर 18 अप्रैल को दोनों देशों के बीच समझौता भी हुआ है। माना जा रहा है कि इस तरह से किम अपनी छवि को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि दोनों नेताओं के बीच 27 अप्रैल को पुनमुनजोम में होनी है। इससे पहले दोनों राष्‍ट्राध्‍यक्षों के बीच टेलीफोन हॉटलाइन स्थापित की जा चुकी है। इस बैठक पर सभी देशों की निगाहें लगी हुई हैं।
किम की मून और ट्रंप से होनी है बैठक
ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि मई में किम जोंग उन और डोनाल्‍ड ट्रंप की बैठक होनी है और मून के साथ होने वाली बैठक इसके लिए रोड़मैप तैयार करने में मददगार साबित होगी। इससे पहले हुई किम की घोषणा से सकारात्‍मक माहौल तैयार होने में जरूर मदद मिलेगी। उत्तर कोरिया की तरफ से हुई इस महत्‍वपूर्ण घोषणा के पीछे चीन को भी एक वजह माना जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले माह ही किम जोंग उन ने बीजिंग की यात्रा की थी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच मून और ट्रंप के साथ होने वाली वार्ता को लेकर भी विचार विमर्श हुआ था। माना जा रहा है कि किम की सोच में यह बदलाव चीन के राष्‍ट्रपति चिनफिंग के कहने पर ही आया है।
परीक्षणों पर रोक
किम द्वारा की गई इस घोषणा की जानकारी योनहॉप न्‍यूज एजेंसी ने दी है। इसके मुताबिक उत्तर 21 अप्रैल से परमाणु मिसाइलों और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण को रोक देगा। इस खबर के आने के बाद अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इस पहल का स्‍वागत किया है। उन्‍होंने अपने ट्वीट में लिखा है यह उत्तर कोरिया और पूरी दुनिया के लिए एक बहुत अच्छी ख़बर है। उन्‍होंने इस घोषणा को बड़ी सफलता करार दिया है। इसके साथ ही ट्रंप ने कहा है कि हम आगामी मुलाकात को लेकर आशावान हैं। आपको यहां पर बता दें कि दो दिन पहले ही उन्‍होंने कहा था कि यदि किम से उनकी बातचीत सही रास्‍ते पर जाती हुई नहीं दिखाई दी तो वह वार्ता बीच में ही छोड़ देंगे। आपको यहां पर ये भी बता दें कि परमाणु हथियार कार्यक्रम चलाने के कारण उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगा रखे हैं।
छह परीक्षण कर चुका है उत्तर कोरिया
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने पिछले वर्ष सितंबर में छठा परमाणु परीक्षण किया था। यह परीक्षण उत्तरी हामग्‍योंग प्रांत में स्थित पुंगी-री-न्‍यूक्लियर साइट पर अंडरग्राउंड किया गया था। इसकी वजह से वहां और आसपास के इलाकों में 6.3 की तीव्रता वाले भूकंप को रिकॉर्ड किया गया था। उत्तर कोरिया के इतिहस का यह सबसे बड़ा परीक्षण था।
कई देशों ने जताई खुशी
उत्तर कोरिया की तरफ से की गई इस ताजा घोषणा पर सभी देशों ने खुशी जाहिर की है। हालांकि जापान ने इस घोषणा को अपर्याप्त और असंतोषजनक बताया है। जापान की तरफ से कहा गया है कि ये देखना जरूरी होगा कि उत्तर कोरिया अपनी न्‍यूक्लियर साइट को कहे मुताबिक बंद या खत्‍म कर रहा है या नहीं। जापान ने यह भी कहा है कि उत्तर कोरिया द्वारा की गई घोषणा का ये मतलब नहीं है कि उनकी मिसाइलें जापान तक नहीं आ सकती हैं। वहीं चीन ने किम की इस घोषणा को सकारात्‍मक कदम बताते हुए उनकी तारीफ की है। चीन की तरफ से कहा गया है यह फैसला अंतरराष्‍ट्रीय बिरादरी की सोच के मुताबिक लिया गया है। इससे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्‍थापना की तरफ आगे बढ़ा जा सकेगा। चीन ने यह भी कहा है कि आखिरकार सभी पार्टियां एक समान सोच रही हैं और फैसला ले रही हैं, पूरे क्षेत्र के विकास के लिए काफी अच्‍छा है। इसके अलावा चीन ने एक बार इस बात को कहा है कि चीन इस मुद्दे पर अंत तक एक सकारात्‍मक पहल करता रहेगा और अहम भूमिका निभाता रहेगा।
चीन की ये है राय
चीन ने किम की घोषणा के बाद ये भी कहा है कि अब पूरी दुनिया को उत्तर कोरिया के प्रति नजरिया बदल लेना चाहिए। चीन ने यह भी कहा है कि दुनिया को उत्तर कोरिया की परेशानी समझनी चाहिए। वह अमेरिका और उसके समर्थकों के दबाव में दबा हुआ है। ताजा घोषणा के बाद अब पश्चिमी देशों को उत्तर कोरिया पर हमले करना बंद कर देना चाहिए। उत्तर कोरिया की इस घोषणा से यह बात जाहिर हो चुकी है कि वह विकास और शांति चाहता है। चीन की सरकारी मीडिया की तरफ से कहा गया है कि उत्तर कोरिया चीन, दक्षिण कोरिया, जापान और रूस का पड़ोसी देश है। भूगौलिक स्थिति के लिहाज से भी वह काफी अहम हो जाता है। इसके अलावा यदि वह चाहेगा तो एशियन इंडस्‍ट्रियल चेन से भी जुड़ सकेगा। चीन ने उत्तर कोरिया को कहा है कि वह चाहे तो दक्षिण कोरिया और चीन के साथ मिलकर स्‍पेशल इकनॉमिक जोन बना सकता है, जहां से उसको विकास की उड़ान भरने में आसानी होगी।
विशेषज्ञ का मानना
किम की इस घोषणा के बाद सीआईए के विशेषज्ञ सू मी टैरी का कहना है कि आगामी वार्ता में किम सीधे मुद्दों पर बात करेंगे और जो प्रतिबंध उनके ऊपर लगाए गए हैं उनको खत्‍म करवाना उनका पहला मकसद होगा। गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर में उत्तर कोरिया ने अपना आखिरी टेस्‍ट किया था। इसके तहत उसने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था जिसको सफल बताया गया था। उस वक्‍त दावा किया गया था कि यह मिसाइल अमेरिका तक मार करने में सक्षम है। हालांकि इस परीक्षण की सभी देशों ने कड़ी निंदा की थी और कहा था कि यह को‍रियाई प्रायद्वीप में तनाव को बढ़ाएगा। गौरतलब है कि डोनाल्‍ड ट्रंप और किम की वार्ता का रोड़मैप तैयार करने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी के डायरेक्‍टर माइक पोंपियो 31 मार्च को उत्तर कोरिया गए थे।

 


नई दिल्ली - रूस और चीन से बढ़ते खतरे के मद्देनजर अमेरिका ने भी हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने की कवायद शुरू कर दी है। मौजूदा दौर में अमेरिका के रूस के साथ संबंध बेहद निचले स्‍तर पर आ चुके हैं। वहीं चीन से भी लगातार दक्षिण चीन सागर को लेकर उसको धमकी दी जाती रही है। इसके मद्देनजर अमेरिकी वायुसेना इसके विकास पर करीब एक बिलियन डॉलर खर्च कर रही है। इसके लिए लॉकहिड मार्टिन को करीब 928 मिलियन डॉलर का कांट्रेक्‍ट भी दिया गया है। यह मिसाइल आवाज की गति से भी तेज चलने में सक्षम होती है। हाईपरसोनिक कंवेंशनल स्‍ट्राइक वैपन प्रोग्राम की दिशा में यह बड़ा कदम है। अमेरिका इसके अलावा टेक्टिकल बूस्‍ट ग्‍लाइड प्राग्राम भी तैयार कर रहा है। यह डापरा की मदद से तैयार किया जा रहा है। यह दोनों ही एक एडवांस प्रोटोटाइप विकसित करने में लगे हैं जिन्‍हें अमेरिकी जेट के जरिए छोड़ा जा सकेगा। आपको बता दें कि भविष्य में हाइपरसोनिक मिसाइल जंग का रुख बदलने में काफी अहम भूमिका निभाएंगी।
इसके सामने बेकार हैं मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम
अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट के अधिकारी इस बात को सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि हाइपरसोनिक हथियार यूएस के मिसाइल सिस्‍टम को नाकाम करते हुए हमला करने में सक्षम हैं। इसका सीधा अर्थ है कि हाइपरसोनिक मिसाइल के जरिये अमेरिका अपने ऊपर होने वाले किसी भी न्‍यूक्लियर अटैक को नाकाम करने की योजना पर काम कर रहा है। आपको बता दें कि आवाज की गति से भी तेज या फिर 5 मैक से तेज उड़ने वाली मिसाइल को हाइपरसोनिक मिसाइल की कैटेगिरी में शामिल किया जाता है। यह मिसाइल किसी भी मिसाइल सि‍स्‍टम को ध्‍वस्‍त कर सकती है। पेंटागन रिसर्च एंड डेवलेपमेंट के हैड माइकल ग्रिफिन मानते हैं कि इस तरह की मिसाइल बनाने की काबलियत चीन और रूस दोनों के ही पास है, इस लिहाज से अमेरिका को खतरा बढ़ गया है। उन्‍होंने हाइपरसोनिक मिसाइल के विकास को पहली प्रा‍थमिकता बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के खतरे को भांपते हुए यह भी जरूरी है कि हमारे पास ऐसी तकनीक और मिसाइलें हों जिन्‍हें हम बेहद कम समय में लड़ाकू विमानों से दाग कर हमला नाकाम कर सकें।
अमेरिकी परीक्षण नाकाम
यहां पर आपको बता दें कि अमेरिका ने इस वर्ष फरवरी में एक हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया था, लेकिन वह असफल रहा था। लॉन्‍च के करीब चार सैकेंड बाद ही इसके सिस्‍टम में गड़बड़ी के चलते इसको नष्‍ट कर दिया गया था। यह मिसाइल 3500 मील प्रति घंटे की गति से जा सकती थी और आधा घंटे में ही दुनिया के किसी भी हिस्से में अपने लक्ष्य पर निशाना लगा सकती थी। इसकी जानकारी देते हुए पेंटागन ने माना था कि इसमें तकनीकी खराबी के बाद इसका नियंत्रण कंट्रोल से बाहर जा सकता था, लिहाजा इसको नष्‍ट कर दिया गया। यह मिसाइल दो फरवरी को अलास्का के कोडिएक लॉन्च सेंटर से लॉन्‍च की गई थी। एडवांस्ड हाइपरसोनिक हथियार का निर्माण सांडिया नेशनल लेबोरेट्री और सेना ने तीन चरणों में किया था। इस परीक्षण के असफल होने से अमेरिकी कार्यक्रम को तगड़ा झटका लगा था।
क्‍या होती है हाइपरसोनिक मिसाइल
इस तरह की मिसाइलें दरअसल एक हाइपर सोनिक ग्लाइड मिसाइल होती हैं। इनकी खासियत ये होती है कि इसमें क्रूज और और बैलिस्टिक मिसाइल दोनों की ही खूबियां शामिल होती हैं। बैलिस्टिक मिसाइल धरती के वायुमंडल से बाहर जा कर एक पैराबोलिक पाथ में जाती है और फिर से धरती के वायुमंडल में प्रवेश करती है। इस तरह की मिसाइल की रेंज करीब तीन से सात हजार किमी तक होती है। इन्‍हें हाइपरसोनिक एचजीवी भी कहा जाता है। ये वायुमंडल में निचले स्तर पर उड़ती है और इस कारण इसे इंटरसेप्ट करना भी आसान नहीं होता है। चीन के रक्षा जानकार मानते हैं कि ये अमेरिका के एंटी मिसाइल थाड सिस्टम को नाकाम करते हुए अपना काम कर सकती है। इस कारण इसकी मारक क्षमता बढ़ जाती है, इसी कारण ये एंटी मिसाइल सिस्टम के लिए चुनौती पेश करती है। आपको यहां पर बता दें कि कई देशों ने बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने के लिए मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम बनाया हुआ है, लेकिन एचजीवी को इससे रोकना आसाना नहीं है। फिलहाल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही एचजीवी की क्षमता है।
रूस कर चुका है हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण
इस मिसाइल के विकास को लेकर अमेरिका में मची खलबली इस बात से भी है क्‍योंकि रूस ने पिछले माह ही अपनी नई हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। 'जिरकोन' नाम की इस हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल की रफ्तार लगभग 7400 किमी. प्रति घंटा बताई गई थी। इस मिसाइल की एक सबसे बड़ी खासियत यह थी कि एक बार लॉन्‍च करने के बाद इसको रोकपाना नामुमकिन होता है। रूस की इस मिसाइल ने अमेरिका के होश उड़ा दिए हैं। यह परीक्षण ऐसे समय में किया गया है जब अमेरिका और रूस के बीच सीरिया समेत कई मुद्दों पर तनातनी काफी बढ़ गई है।
रूसी जानकार तो यहां तक मान रहे हैं कि यह तीसरे विश्‍व युद्ध का कारण भी बन सकता है। जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच शीतयुद्ध का यह दूसरा दौर है जो बेहद घातक साबित हो सकता है। रूस की इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 400 किमी. तक है। इसे 2022 तक रूस की सेना में शामिल कर लिया जाएगा। इस मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग किया गया है, जो कि हवा में से ऑक्सीजन का प्रयोग करता है। इस मिसाइल में कोई चलन वाला हिस्सा नहीं है। जिरकोन के साथ ही लॉन्च होने वाला पहला जहाज किरोव-वर्ग परमाणु शक्ति वाले युद्ध क्रूजरों में से एक होने की संभावना है, इनमें से दो अभी भी रूसी नौसेना के साथ है।
चीन के पास भी है हाइपरसोनिक मिसाइल
चीन के पास भी हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल डीएफ-17 है। यह अमेरिका के किसी भी कोने में मार करने में सक्षम है। इसकी रेंज करीब 12,000 किलोमीटर तक है। चीन की डीएफ-17 एक घंटे में अमेरिका पहुंच सकती है।
भारत के पास भी होगी हाइपरसोनिक मिसाइल
हाइपरसोनिक मिसाइल को लेकर भारत भी काफी गंभीर है। उम्‍मीद की जा रही है कि भारत के पास भी जल्‍द ही अपनी हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल होगी। भारत में अभी दूसरी पीढ़ी के ब्रह्मोस मिसाइल को तैयार किया जाएगा। इसमें भी रूसी मिसाइल जिरकोन की तरह ही स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग किया जाएगा। भारत की ब्रह्मोस मिसाइल एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।

 


इस्लामाबाद - लाहौर हाई कोर्ट ने गृह मंत्रालय से भारत से आई उस सिख महिला के बारे में फैसला करने को कहा है जो तीर्थयात्रा के लिए पाकिस्तान आई लेकिन वहां शादी रचा बैठी। किरण बाला नाम की इस महिला ने अब पाकिस्तान की नागरिकता और अपने वीजा की अवधि बढ़ाने के लिए अर्जी दी है। लाहौर हाई कोर्ट ने गृह मंत्रालय से महिला की अर्जी पर 30 दिन के भीतर फैसला करने को कहा है। तब तक के लिए कोर्ट ने वीजा बढ़ाए जाने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने मूल रूप से भारत में पंजाब के होशियारपुर के गढ़शंकर की रहने वाली किरण बाला का वीजा छह महीने के लिए बढ़ाए जाने की संभावना पर भी विचार करने के लिए सरकार से कहा है। वह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के जत्थे में 12 अप्रैल को पाकिस्तान स्थित सिख तीर्थों की यात्रा पर आई थी। चार दिन बाद 16 को वह जत्थे से अलग हो गई। पता चला है कि उसने इस्लाम धर्म अपना लिया है और लाहौर निवासी मोहम्मद आजम से शादी कर ली है। महिला के भारत में स्थित परिवार ने आरोप लगाया है कि किरण पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के हाथों में पड़ गई है जिसने उसका धर्म परिवर्तन कराकर दोबारा शादी करा दी है। परिवार का किरण से संपर्क नहीं हो पाया है, वह उसकी सलामती को लेकर चिंतित हैं। पाकिस्तान में किरण ने जो भी अर्जी दी है, उन सभी में उसने अपना नाम अमना बीबी लिखा है जबकि उसने दस्तखत में अमीना लिखा है। उसने भारत में जान का खतरा बताते हुए पाकिस्तान में रहने के लिए वीजा बढ़ाए जाने की अपील की है।
पाकिस्तान सरकार ने किरण का वीजा 30 दिन के लिए बढ़ाया!
बैसाखी पर्व पर पाकिस्तान में गुरुधामों के दर्शनों के बाद कुल 1795 यात्रियों का जत्था लौट आया, लेकिन गायब होकर मुस्लिम से निकाह करने वाली गढ़शंकर की किरण बाला उर्फ आमना बीबी नहीं लौटी। पता चला है कि पाकिस्तान सरकार ने उसका वीजा 30 दिन के लिए बढ़ा दिया है। इस बीच पाकिस्तान गए एक और सिख तीर्थयात्री के गायब होने की सूचना है। गायब हुआ अमृतसर के गांव निरंजनपुरा निवासी अमरजीत सिंह (24) 12 अप्रैल को भारत से सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ पाक गया था। शनिवार को अटारी बार्डर के रास्ते पाक से अंतिम दिन लौटे श्रद्धालुओं के साथ वह नहीं आया। गुरुद्वारा डेरा साहिब, लाहौर (पाक) के मैनेजर अजहर अब्बास शाह ने बताया कि अमरजीत सिंह (जिसके पासपोर्ट पर जन्म तिथि 1994 है, और वह निरंजनपुर जिला अमृतसर का रहने वाला है) का पासपोर्ट अभी भी उनके पास है।
पाक खुफिया एजेंसियों ने श्रद्धालुओं से की पूछताछ
शनिवार को वाघा से अटारी रेलवे के बीच लगाई गई तीन स्पेशल रेल गाड़ियों के जरिए पाक गए श्रद्धालु भारत पहुंचे। कुछ लोगों ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जत्थे से किरण बाला के गायब होने के बाद उन्हें भी शक की नजर से देखा जाने लगा और वहां की खुफिया एजेंसियों ने तो कुछ लोगों से पूछताछ भी की। यात्रा के अंतिम तीन दिन पाक की सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने उन्हें घेरे रखा।
पाकिस्तान में निकाह करने वाली किरण के ही हैं तीनों बच्चे
पाकिस्तान में मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करने वाली किरण बाला सरासर झूठ बोल रही है। तीनों बच्चे उसी के हैं। इसका मेरे पास पुख्ता सुबूत भी है। यह बात किरण बाला के ससुर तरसेम सिंह ने कही। दरअसल, गत दिवस किरण ने पाकिस्तान में कहा था कि तीनों बच्चे उसके नहीं, बल्कि उसकी खाला के हैं। इससे तरसेम सिंह स्तब्ध हैं। किरण के बच्चे होने या फिर न होने की सच्चाई जानने के लिए हमारे सहयोगी प्रकाशन 'दैनिक जागरण' की टीम शनिवार को गढ़शंकर पहुंची। घर में मौजूद तरसेम सिंह ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि किरण उसकी बहू है और तीनों बच्चे भी उसी के हैं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे के साथ किरण की शादी वर्ष 2005 में हुई थी। तीनों बच्चों का जन्म सिविल अस्पताल गढ़शंकर में हुआ है। सब कुछ सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज है। बेटे नरिंदर सिंह की मौत के बाद किरण उनके पास रहती थी। तरसेम ने कहा कि वह यह सारा दस्तावेज भारत सरकार को सौंप रहे हैं, ताकि किरण के झूठ का पर्दाफाश हो सके।


बीजिंग - बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआइ) से जुड़े आठ देशों को चीन निर्मित करीब 50 विमान दिए गए हैं। यात्री और मालवाहक विमान के रूप में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
चीन की हरबिन एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री ग्रुप (एचएआइजी) कंपनी लिमिटेड ने बताया कि 17 अप्रैल को दो वाई-12ई विमान नेपाल को दिए गए। इनका इस्तेमाल कम दूरी की घरेलू उड़ान के लिए किया जाएगा। सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, इससे पहले नेपाल ने 2014 और 2017 में दो वाई-12ई विमान खरीदे थे। इन विमानों ने करीब 1,725 सुरक्षित उड़ान घंटे पूरे किए हैं।
नेपाल में 2015 के भूंकप के बाद सामान आपूर्ति में इस विमान ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उत्तर पूर्व चीन के हरबिन स्थित एचएआइजी बोइंग और एयरबस जैसी अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों को पुर्जों की आपूर्ति करती है। इसके अलावा वह हेलीकॉप्टर और हल्के विमान समेत कई तरह के विमान विकसित करती है। उसने अमेरिका और रूस समेत करीब 30 देशों को वाई-12 सीरीज के विमान बेचे हैं।


मुंबई - बॉलीवुड एक्टर मिलिंद सोमन ने अपनी गर्लफ्रैंड अंकिता कोंवर से शादी रचा ली हैं। इन दोनों की शादी की पहली तस्वीर सामने आई हैं। मिलिंद सोमन और अंकिता की शादी मुबंई से कुछ किलोमीटर दूर बीच के किनारे अलीबाग में हुई है। फैंस काफी समय से दोनों की शादी की तस्वीरें का इंतजार कर रहे थे।
शादी की बात करें साफ है कि ये हिंदू रीति रिवाजों से हुई है। इससे पहले सोशल मीडिया पर इन दोनों की शादी से पहले की रस्मों की तस्वीरें और वीडियोज भी काफी पसंद किए जा रहा थे। जहां महेंदी की एक खूबसूरत सी तस्वीर फैंस को काफी पसंद आ रही थींं।
वहीं हल्दी में मिलिंद और अंकिता का डांस भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ है। हल्दी की रस्म का वीडियो काफी पसंद किया गया जिसमें मिलिंद अंकिता को गोद में उठाकर डांस करते नजर आ रहे थे।
बता दें कि इस दौरान अंकिता ने साड़ी पहनी हुई थी। वहीं मिलिंद ने इसी की मैचिंग का ऑफ व्हाइट कुर्ता पहना था। इस दौरान दोनों साथ में काफी खुश नजर आ रहे थे। शादी से कुछ दिनों पहले मिलिंद और अंकिता की इंस्टाग्राम पर कुछ और तस्वीरें भी आईं थीं जिनमें फोटोग्राफर अन्जू केपी ने वेडिंग और मेहंदी को टैग किया हुआ था।


मुंबई - बाॅलीवुड एक्ट्रैस अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान ने हाल ही में एक फोटोशूट करवाया। यह फोटोशूट उन्होंने मशहूर डिजाइनर अबु जानी के लिए करवाया है। इन तस्वीरों में सारा अपनी मां अमृता और एक्ट्रैस डिंपल कपाड़िया के साथ नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया पर उनके इस फोटोशूट की तस्वीरें काफी पसंद की जा रही हैं। तस्वीराें में सारा ट्रैडिशनल लुक में नजर आ रही है। इस दौरान सारा ने गोल्डन सूट के साथ परांदी पहनी हुई हैं।
उनका का पंजाबी अवतार उनके फैंस का दिल जीतने वाला हैं। इसके साथ ही चूड़ियां और बड़े बड़े झुमके उनके इस लुक को काफी अट्रैक्टिव बना रहे हैं। सारा ट्रैडिशनल आउटफिट्स में काफी खूबसूरत लग रहीं थी। वहीं अमृता वाइट कलर के अनारकली सूट और डिम्पल सुनहरी बॉर्डर वाली साड़ी पहने नजर आईं। सारा खूबसूरती के मामले में अपनी मां को टक्कर दे रही थी।
सारा ने तस्वीरें अपने इंस्ट्राग्राम अकाउंट पर भी शेयर की हैं, जिन्हें काफी पसंद किया जा रहा है।
बता दें कि सारा अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत फिल्म 'केदारनाथ' से करेंगी। इस फिल्म में सारा सुशांत सिंह राजपूत के साथ नजर आएंगे। सारा की दूसरी अपकमिंग फिल्म 'सिंबा' है। इस फिल्म में वह रणवीर सिंह के साथ नजर आएंगी।


मुंबई - शूजित सरकार के निर्देशन में बनी वरुण धवन की हालिया फिल्म अक्टूबर भले ही बॉक्स ऑफ़िस पर करिश्मा न कर पाई हो लेकिन वरुण धवन के काम की हर जगह तारीफ़ हुई है। वरुण अब अपने बिज़ी शेड्यूल को पूरा करने में जुट गए हैं और पिता के साथ फिर काम करेंगे।
जी हां , ख़बर है कि डेविड धवन ने एक बार फिर अपने बेटे के साथ फिल्म बनाना प्लान कर लिया है। ये जुड़वा 2 के बाद दोनों की एक और रोमांटिक कॉमेडी होगी। बताते हैं कि पापा धवन ने वरुण की बिज़ी डायरी में से अगले साल जून से दिसंबर तक के बीच का वक्त मांग लिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि बताया जाता है कि उसी समय वरुण धवन फ्री हैं। वरुण ने हाल ही में करण जौहर की फिल्म कलंक की शूटिंग शुरू कर दी है। इस मल्टीस्टार फिल्म में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित की वापसी है। वरुण को इस साल नवम्बर तक अनुष्का शर्मा के साथ वाली फिल्म सुई धागा की शूटिंग पूरी करनी है। इस साल दिसंबर की शुरुआत में वरुण , कटरीना कैफ के साथ रेमो डिसूजा की डांस बेस्ड फिल्म की शूटिंग शुरू करेंगे जो अगले साल मार्च में ख़त्म होगी। अप्रैल 2019 से वो कलंक का प्रमोशन करेंगे और उसके बाद मई और जून में रेमो की फिल्म का अगला शेड्यूल करेंगे। वरुण धवन को उसके बाद अगले साल दिसंबर से शशांक खेतान के निर्देशन में बने वाली रणभूमि में काम करना है। वरुण ने पिता डेविड की फिल्म जुड़वा 2 से 130 करोड़ से अधिक का कलेक्शन हासिल किया था और धवंस फिर उसी मैजिक को दोहराना चाहते हैं।


मुंबई - बॉलीवुड अभिनेता संजय लीला भंसाली कृत 'पद्मावत' में राजा रतन सिंह का दमदार किरदार निभाने वाले एक्टर शाह‍िद कपूर को शन‍िवार को दादा साहेब फाल्के एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्‍मान‍ित क‍िया गया। इसी कार्यक्रम में मशहूर बॉलीवुड अदाकारा स‍िमी ग्रेवाल को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा श‍िल्‍पा शेट्टी को बेस्‍ट र‍िऐल‍िटी शो जज, द‍िव्‍या खोसला को आउटस्‍टैंड‍िंग शॉर्टफ‍िल्‍म 'बुलबुल' के ल‍िए और डायरेक्टर करण जौहर को मशहूर टीवी शो 'कॉफी व‍िद करण' के लिए बेस्‍ट टीवी होस्‍ट का अवॉर्ड द‍िया गया।
बता दें कि फिल्म 'पद्मावत' ने बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ रूपये का शानदार कलेक्शन किया था। खिलजी के किरदार को रणवीर ने बड़ी निपुणता से निभाया था। फिल्म को लेकर काफी बवाल भी मचा था। फिल्म का निर्देशन संजय लीला भंसाली ने किया था। इसमें दीपिका पादुकोण ने महारानी पद्मावती का रोल प्ले किया था।

 

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