नई दिल्ली। सेबी के पास 2017-18 में जांच के लिए कुल 117 नए मामले आए। हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इसमें 52 फीसद की गिरावट दर्ज की गई। यह जानकारी हाल ही में बाजार नियामक की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है। यह सभी मामले प्रतिभूति कानून के कथित उल्लंघन से संबंधित थे जिनमें बाजार में हेरफेर और मूल्य बढ़ना शामिल था। रिपोर्ट के अनुसार, 2017-18 के दौरान, जांच के लिए 117 नए मामले सामने आए जिनमें से 145 मामले पूरे कर लिए गए। वहीं 2016-17 में 155 मामलों को पूरा किया गया था।सेबी ने कहा कि 2017-18 में जांच के लिए 34 फीसद मामले लिए गए जो बाजार में हेरफेर और कीमतों में गिरावट से संबंधित थे। इसके अलावा अंदरूनी व्यापार, अधिग्रहण उल्लंघन के कुल 15 फीसद मामले आए, जबकि 51 फीसद मामले प्रतिभूति कानूनों के अन्य उल्लंघनों से संबंधित थे।मालूम हो कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) एकीकृत निगरानी विभाग, अन्य परिचालन विभाग और बाहरी सरकारी एजेंसियों से मिली सूचना के आधार पर जांच शुरू करता है।2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच का उद्देश्य सबूत इकट्ठा करना और अनियमितताओं और उल्लंघनों के पीछे कौन व्यक्ति जिम्मेदार है ये पता करना है ताकि उचित कार्रवाई की जा सके। इस दौरान सेबी की ओर से कुल 888 मामले निपटाए गए और 594 नए मामले शुरू किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च, 2018 तक, 1,053 मामलों में फैसला आना बाकी रह गया था।

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