दुनिया के सबसे बड़े निवेशक और शीर्ष धनकुबेरों में शामिल वारेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे इंक की कमान एक भारतीय संभाल सकता है। भारतीय मूल के अजित जैन बफे के उत्तराधिकारी की दौड़ में सबसे आगे हैं। हालांकि, बफे ने इसकी अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन जैन का ओहदा बढ़ाए जाने के बाद वह दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं।
आईआईटी खड़गपुर से की पढ़ाई:-66 वर्षीय जैन को बुधवार को बर्कशायर हैथवे इंक इंश्योरेंस ऑपरेशंस का वाइस चेयरमैन बनाकर बोर्ड में जगह दी गई।न्यूयॉर्क में रहने वाले अजित जैन का जन्म वर्ष 1951 में ओडिशा में हुआ था। 1972 में उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से मेकनिकल इंजिनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। वर्ष 1978 में अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की।
सेल्समैन भी रहे जैन:-आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद जैन वर्ष 1973 से 76 के बीच आईबीएम में सेल्समैन रहे। 1976 में आईबीएम ने भारत में अपना कारोबार बंद कर दिया और जैन की नौकरी चली गई। वर्ष 1978 में वह अमेरिका चले गए और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए डिग्री लेकर मैकिंजी एंड कंपनी में नौकरी की। वर्ष 1986 में उन्होंने मैंकिंजी को छोड़कर वॉरने बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे ज्वाइन कर लिया।
12,000 करोड़ रुपये के हैं मालिक:-सेल्समैन के रूप में करियर की शुरुआत करने और फिर कंपनी बंद होने के बाद बेरोजगार होने वाले जैन आज की तारीख में करीब 12,000 करोड़ रुपये से अधिक ( दो अरब डॉलर) की संपत्ति के मालिक हैं।
जैन ने बफे को किया मालामाल:-दुनिया के सबसे बड़े निवेशक और शीर्ष धनकुबेरों में शामिल बफे कई बार यह बात दोहरा चुके हैं कि जैन की वजह से उन्होंने अरबों डॉलर की कमाई की। वर्ष 2015 में निवेशकों के नाम पत्र में भी बफे ने जैन की जमकर तारीफ की थी।
एबल से होगा मुकाबला:-बर्कशियर हैथवे एनर्जी के चीफ एग्जिक्युटिव 55 वर्षीय एबल को नॉन-इंश्योरेंस बिजनेस ऑपरेशंस के लिए बर्कशायर का वाइस चेयरमैन बनाया गया है। उन्हें भी जैन के साथ बोर्ड में जगह दी गई है। विश्लेषकों का मानना है कि बफे के उत्तारीधिकारी की दौड़ में जैन को एबल से कड़ी टक्कर मिलेगी। हालांकि, खुद बफे ऐसा नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि जैन और एबल अपने-अपने कारोबार के माहिर खिलाड़ी हैं और और दोनों एक-दूसरे को बखूबी जानते हैं।
बफे और बर्कशायर हैथवे :-बर्कशायर हैथवे के 90 से ज्यादा ऑपरेटिंग यूनिट्स हैं। इनमें बीएनएसएफ रेलरोड, जीको ऑटो इंश्योरेंस, डेयरी क्वीन आइस क्रीम, फ्रूट ऑफ द लूम अंडरवेयर, सीज कैंडीज के साथ-साथ कई तरह के इंडस्ट्रियल और कमेकिल ऑपरेशन शामिल हैं। वर्ष 2016 में समूह का राजस्व 223 अरब डॉलर का रहा जो टाटा समूह के बाजार पूंजीकरण से करीब दोगुना अधिक है

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