नई दिल्ली - गुजरात, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश की ओर से पेट्रोल-डीजल पर वैट की दर कम किए जाने के बाद अब अन्य राज्यों जैसे कि कर्नाटक पर भी दबाव बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर 2 फीसद की एक्साइज ड्यूटी कम किए जाने के बाद राज्यों ने वैट की दर को कम करने की शुरूआत की है।
कर्नाटक को वस्तु एवं सेवा कर लागू किए जाने के बाद ऑटो फ्यूल पर एंट्री टैक्स खत्म करना पड़ा था। कर्नाटक का कहना था कि उसे इससे हर साल 2,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। अगर गुजरात की बात करें तो वहां पर पेट्रोल और डीजल दोनों पर 28.96 फीसद की दर से वैट लगता था, जिसमें 4 फीसद की कमी की गई है। हालांकि इससे राज्य को हर साल राजस्व में 2,316 करोड़ रुपए का घाटा होगा।
महाराष्ट्र, गुजरात और हिमाचल प्रदेश ने दी बड़ी राहत:
देश के इन तीनों राज्यों ने हाल ही में वैट में कटौती की घोषणा की है, जिसके बाद पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में गिरावट देखने को मिली है। महाराष्ट्र सरकार ने पेट्रोल पर वैट में दो रुपये और डीजल पर एक रुपये प्रति लीटर की कटौती का एलान किया है। साथ ही गुजरात ने 4 फीसद और हिमाचल ने 1 फीसट वैट कम किया है।
देश में अभी 18 राज्यों में राजग की सरकारें हैं, इनमें से अभी मात्र दो ने वैट घटाया है। आपको बता दें कि केंद्र ने सभी राज्यों से कर घटाने का आग्रह किया था। उधर, मध्य प्रदेश की सरकार ने भी संकेत दिये हैं कि वह पेट्रोल व डीजल वैट पांच फीसद तक कम कर सकती है। इससे वहां पेट्रोल-डीजल 2.40 से 2.75 प्रति लीटर तक सस्ते हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमत में बढ़ोतरी होने के कारण पेट्रोल व डीजल की कीमत काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में ग्राहकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों उत्पाद शुल्क कम करके राज्यों से वैट में कटौती करने को कहा था ताकि उपभोक्ताओं को और राहत मिल सके। लंबे समय से हो रहे विरोध और पेट्रोलियम उत्पादों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाए जाने की मांग की जा रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की वकालत कर चुके हैं।

 

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