नई दिल्ली - केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि घरेलू बाजार में चीनी के दाम घटने के मद्देनजर सरकार इस पर लगा निर्यात शुल्क हटाने पर विचार कर रही है। शुल्क हटने से चीनी का निर्यात बढ़ सकेगा और घरेलू बाजार में कीमतें संभल सकेंगी। इस समय चीनी पर 20 फीसद निर्यात शुल्क लगता है।
पासवान ने संवाददाताओं को बताया कि मौजूदा मार्केटिंग वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान 249 लाख टन चीनी का उत्पादन होने की संभावना है। उद्योग ने तो 260 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया है। जबकि घरेलू मांग 240-250 लाख टन के बीच रहती है। देश में चीनी का उत्पादन ज्यादा होने के कारण सरकार इसके आयात पर शुल्क दोगुना यानी 100 फीसद कर चुकी है। जिससे सस्ती विदेशी खासकर पाकिस्तान की चीनी की सप्लाई पर अंकुश लग सके।
पासवान के अनुसार सरकार ने दो महीनों के लिए मिलों पर घरेलू बाजार में बिक्री के लिए मात्रात्मक प्रतिबंध भी लगा दिए हैं। मिलें तय कोटे से ज्यादा चीनी बाजार में नहीं बेच सकेंगी। उद्योग ने निर्यात शुल्क हटाने की मांग की है। सरकार इस पर विचार कर रही है।
जीएसटी के बाद 1600 करोड़ की बचत
पासवान ने कहा है कि जीएसटी लागू होने के कारण सरकार को भी टैक्स में बचत हो रही है। खाद्यान्न की सरकारी खरीद पर अब जीएसटी के अलावा कोई टैक्स नहीं लग रहा है। इससे करीब 1600 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। अब राज्यों का कोई टैक्स नहीं लग रहा है। अनुमान है कि इससे टैक्स 18 फीसद कम हो गए हैं। बजट के प्रावधान के अनुसार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) को पूंजी देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगले साल में सरकार पूंजी बढ़ाएगी। इससे एफसीआइ का ब्याज का बोझ कम होगा। एफसीआइ दीर्घकालिक बांड भी जारी करेगा। एफसीआइ सरकार की ओर से देश में खाद्यान्न के नोडल एजेंसी है।

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