नई दिल्ली - रिजर्व बैंक ने बैंकों से 2011 तक की सभी बैंक गारंटी (एलओयू) का ब्यौरा देने को कहा है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 12,700 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है। पीएनबी में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से एलओयू के जरिये इस घोटाले को अंजाम दिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले हफ्ते बैंकों को लिखे पत्र में रिजर्व बैंक ने सभी एलओयू और बकाया राशि की जानकारी मांगी है। कोई भी खामी पाए जाने पर पूरी व्यवस्था को जांचा जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि बकाया राशि को बही खाते में सही तरह से दर्ज किया गया है या नहीं।
निवेशक स्थानीय बैंकों से एलओयू लेकर विदेशी शाखाओं से सस्ता कर्ज हासिल करते हैं। इस तरह के लेनदेन के लिए स्विफ्ट प्रणाली का इस्तेमाल होता है। पीएनबी में घोटाला सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने 30 अप्रैल स्विफ्ट प्रणाली को कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) से अनिवार्य रूप से जोड़ने का निर्देश भी बैंकों को दिया है। बैंक का कहना है कि कुछ अधिकारियों ने स्विफ्ट प्रणाली से भेजे गए संदेशों को सीबीएस में दर्ज करने की अनिवार्यता नहीं होने का गलत लाभ उठाया। उन्होंने फर्जी तरीके से एलओयू जारी किए और सीबीएस में दर्ज नहीं करते हुए उस धांधली को पकड़ में नहीं आने दिया।
आइसीएआइ को पीएनबी से जानकारी का इंतजार: चार्टर्ड अकाउंटेट्स की सर्वोच्च संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) को पीएनबी में हुए घोटाले के संदर्भ में बैंक से जानकारी मिलने का इंतजार है। इस घोटाले में ऑडिटरों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आइसीएआइ ने पीएनबी से जानकारी मांगी है, ताकि इस मामले में व्यवस्थागत खामियों को समझा जा सके। संस्थान ने भरोसा दिलाया है कि यदि जांच में किसी ऑडिटर की भूमिका संदिग्ध पाई गई, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

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