-डॉ मोनिका ओझा


भारत की अर्थव्यवस्था एक बार फिर परवान पर है। अब मोदी सरकार की आर्थिक योजनाओं और सुधारों को इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड ने भी हरी झंडी दिखादी है। अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित अनेक विपक्षी नेताओं के लगातार हमले को झेलना पड़ रहा है ऐसे में आईएमएफ ने भारत की अर्थव्यस्था को लेकर बड़ी बात कही है जो मोदी सरकार को सुकून देने वाली है। इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड ने कहा है कि भारत दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित होने की राह पर है, क्योंकि सुधारों का फायदा अब दिखने लगा है।
आईएमएफ के भारतीय मिशन चीफ रानिल सालगादो ने 2.6 ट्रिल्यन डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था को ऐसा हाथी बताया जिसने दौड़ना शुरू कर दिया है। आईएमएफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत मार्च 2019 तक 7.3 फीसदी और उसके बाद 7.5 फीसदी की रफ्तार से विकास करेगा। ग्लोबल ग्रोथ में भारत की हिस्सेदारी 15 फीसदी होगी। एक वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हुए सालगादो ने कहा कि परचेजिंग पावर पैरिटी के मामले में कुल वैश्विक ग्रोथ का 15 फीसदी हिस्सा भारत का होगा। हालांकि ट्रेडिंग चीन के स्तर का नहीं होगा।उन्होंने कहा कि आईएमएफ भारत को लंबे समय तक ग्लोबल ग्रोथ के सोर्स के रूप में देखता है। उन्होंने आगे कहा, भारतीय कार्यबल जनसंख्या में गिरावट आने में अभी तक तीन दशक का समय है। यह एक लंबा समय है। यह एशिया में भारत के लिए अवसर की खिड़की है। कुछ ही एशियाई देशों के पास ऐसा अवसर है। अगले तीन दशक या इससे लंबे समय के लिए भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के ग्रोथ का सोर्स रहेगा। तीन दशक में भारत वहीं होगा जहां कुछ समय पहले तक चीन था।
मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के चार सालों में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और जनोन्मुखी बनाने के लिए अहम् फैसले लिए जिसके फलस्वरूप आर्थिक मोर्चे पर हमारी रफ्तार कम नहीं हुई। सरकार के अहम् फैसलों से दुनियां में हमारी साख बढ़ी और कई झटकों को सहन करते हुए हम आगे बढे। यहां मिसाल के तौर पर आधार और जीएसटी(सेवा एवं वस्तु कर) का नाम लिया जा सकता है जबकि नोटबंदी तथा दिवालिया एवं शोधन अक्षमता संहिता जैसे फैसले नये विचारों का नीतिगत रूप हैं। प्रधानमंत्री पद पर बैठने के तीन माह के अंदर नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत की जो देशवासी बैंक में खाता नहीं खोल सके हैं, उन्हें जनधन योजना ने बैंक अकाउंट खोलने का मौका दिया. ऐसे लोगों को डेबिट कार्ड मिला तथा बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने का मौका भी। जनधन योजना के लाभार्थियों की संख्या तकरीबन 31 करोड़ हो चुकी थी. इसमें 60 फीसद लाभार्थी ग्रामीण इलाकों के हैं और योजना के तहत कुल जमाराशि है 73,690 करोड़ रुपये. हिसाब लगायें तो जनधन योजना के तहत खुले हर खाते पर औसतन 2377 रुपये की जमा राशि आती है, हालांकि न्यूनतम जमाराशि की कोई शर्त नहीं रखी गई है।
यूपीए सरकार ने साल 2009 की जनवरी में लोगों के पहचान के सत्यापन की एक युक्ति के रूप में ‘आधार’ की शुरुआत की थी. मोदी सरकार ने अपने शासन के 23 वें महीने में 26 मार्च 2016 को आधार को मजबूत बनाने के प्रयास किए और उसे संस्थागत रूप दिया. लोगों के सामाजिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए बात उनके बीच पेंशन बांटने की हो या फिर मजदूरी का भुगतान करने की, बहुत जरूरी है कि जो राशि जिसके हिस्से और अधिकार की है वह उसी को मिले. लोगों को ऐसी बुनियादी सुविधाएं फराहम करने के वादे से भी चुनाव जीते जाते है। मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में सालाना औसत विकास दर सात प्रतिशत से अधिक रही तथा मुद्रास्फीति भी काबू में रही। आम लोगों को आसमान छूती महंगाई से राहत मिली। खाने पीने की चीजों के भाव भी उपभोक्ताओं की पकड़ में रहे। शुरू के दो सालों विशेषकर नोटबंदी के बाद आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं के भाव आम नागरिक की पहुँच से बाहर हो गए थे वे अब जाकर काबू में आये है जिससे जन साधारण को राहत मिली है। साथ ही राजकोषीय अनुशासन बरतते हुए राजकोषीय घाटे को भी नीचे लाने का काम किया गया। कांग्रेस ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि नोटबंदी करने और वस्तु एवं सेवाकर को गलत ढंग से लागू करने के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था तबाही के कगार पर पहुंच गयी है और आम जनता का जीवन दुश्वार हो गया है।

(वाणिज्य एवं अर्थशास्त्र की व्याख्याता)
134 गुरु नानक पुरा, राजा पार्क
जयपुर - 302004 राजस्थान
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